NEET PG 2026: 2,445 छात्रों की री-एग्जाम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, जानें कोर्ट ने क्या कहा
NEET PG 2026 को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। तकनीकी दिक्कत के कारण परीक्षा नहीं दे पाने वाले 2,445 उम्मीदवारों के लिए प्रस्तावित री-एग्जाम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। बुधवार को एक वकील ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा जस्टिस वी. मोहना की पीठ के सामने मामले का उल्लेख किया।
वकील ने दलील दी कि प्रभावित छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा कराने का फैसला सुप्रीम कोर्ट के पहले दिए गए आदेश के अनुरूप नहीं है। उन्होंने मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मामले का उल्लेख होने पर पीठ ने कहा कि NEET से जुड़े सभी मामले जस्टिस पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली नामित बेंच के सामने हैं। पीठ ने वकील से कहा कि वह इसी मामले को उस बेंच के सामने मेंशन करें।
कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि नीट से जुड़े मामलों में लगातार कई घटनाक्रम हो रहे हैं और इन मामलों की सुनवाई के लिए निर्धारित पीठ के सामने ही नई याचिका रखी जानी चाहिए।
2,445 उम्मीदवारों के लिए होगी री-एग्जाम
नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने तकनीकी व्यवधान से प्रभावित उम्मीदवारों के लिए NEET PG 2026 की दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया है। यह री-एग्जाम उन 2,445 उम्मीदवारों के लिए है, जो तकनीकी समस्या के कारण निर्धारित परीक्षा पूरी तरह नहीं दे पाए थे।
30 अगस्त को हुई थी NEET PG परीक्षा
NEET PG 2026 की मूल परीक्षा 30 अगस्त को देशभर में आयोजित की गई थी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कुल 2,65,980 उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए। इनमें से 2,63,535 उम्मीदवारों की परीक्षा सफलतापूर्वक पूरी हुई थी।
तकनीकी व्यवधान से प्रभावित 2,445 उम्मीदवारों के लिए अलग से री-एग्जाम कराने का फैसला लिया गया। अब इसी फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल बुधवार को CJI की पीठ के सामने केवल मामले का उल्लेख किया गया और तत्काल सुनवाई की मांग रखी गई। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को मामले को जस्टिस पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली नामित बेंच के सामने रखने को कहा है। इसलिए अब इस मामले में आगे की सुनवाई उसी बेंच के समक्ष होने की संभावना है।
Earthquake in Tibet: तिब्बत में 5.0 तीव्रता का भूकंप, नेपाल बॉर्डर पर दहशत; बाढ़ में अब तक 1280 की मौत
Earthquake in Tibet: नेपाल-तिब्बत सीमा के पास गुरुवार को 5 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। भारत के नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, भूकंप का केंद्र तिब्बत में जमीन से महज 10 किलोमीटर की गहराई पर था। इसका केंद्र नेपाल सीमा से करीब 55 किलोमीटर और उत्तराखंड के जोशीमठ से लगभग 128 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित था। कम गहराई पर आने के कारण भूकंप के झटके सतह तक अपेक्षाकृत तेजी से पहुंच सकते हैं और ऐसे भूकंप अधिक नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, शुरुआती जानकारी के अनुसार भूकंप से फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान या लोगों के घायल होने की खबर नहीं है।
यह भूकंप ऐसे वक्त आया है, जब तिब्बत और नेपाल हाल ही में भीषण बाढ़ और भूस्खलन की त्रासदी से जूझ चुके हैं। 26 अगस्त को आई प्राकृतिक आपदा ने दोनों क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई थी। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इस आपदा में अब तक कुल 1,280 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें नेपाल में 1,259 और तिब्बत में 21 लोगों की जान गई है। ऐसे में तिब्बत में आए ताजा भूकंप ने क्षेत्र में एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है।
EQ of M: 5.0, On: 03/09/2026 13:46:38 IST, Lat: 31.479 N, Long: 80.370 E, Depth: 14 Km, Location: Tibet.
— National Center for Seismology (@NCS_Earthquake) September 3, 2026
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नेपाल में हालिया बाढ़ की तबाही के बाद आया भूंकप
यह भूकंपीय झटका ऐसे समय में आया है जब नेपाल देश पहले से ही एक भीषण प्राकृतिक त्रासदी से जूझ रहा है। कुछ ही दिन पहले नेपाल में हिमनद टूटने (Glacial Collapse) के कारण आए अचानक विनाशकारी फ्लैश फ्लड (अचानक बाढ़) ने भारी तबाही मचाई थी, जिसमें 1,200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इस त्रासदी के जख्म अभी हरे ही थे कि तिब्बत सीमा के पास आए इस नए भूकंप ने स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों की चिंता और अधिक बढ़ा दी है। पर्वतीय क्षेत्रों की संवेदनशीलता को देखते हुए सीमाई इलाकों में सुरक्षा और राहत कार्यों पर दबाव काफी बढ़ गया है।
भूकंप के दौरान क्या करें और क्या न करें?
भूकंप जैसी अचानक आने वाली आपदाओं के वक्त घबराने के बजाय सूझबूझ से काम लेना बेहद जरूरी है। सही समय पर उठाए गए कदम आपकी और आपके परिवार की जान बचा सकते हैं:
क्या करें:
- ड्रॉप, कवर और होल्ड ऑन: झटके महसूस होते ही तुरंत जमीन पर घुटनों के बल बैठ जाएं (Drop), किसी मजबूत मेज या फर्नीचर के नीचे छिप जाएं (Cover) और उसके पैरों को मजबूती से पकड़ लें (Hold)।
- घर के अंदर ही सुरक्षित रहें: जब तक कंपन पूरी तरह बंद न हो, घर या इमारत के अंदर ही सुरक्षित कोने में सिर को ढंककर बैठें। बाहर भागने की हड़बड़ी में चोट लगने का खतरा अधिक होता है।
- खुले मैदान में जाएं (यदि बाहर हैं): अगर आप पहले से खुले में हैं, तो ऊंची इमारतों, पेड़ों, बिजली के खंभों और ओवरब्रिज से दूर किसी सुरक्षित मैदान में चले जाएं।
- सीढ़ियों का प्रयोग करें: बहुमंजिला इमारत में होने पर बाहर निकलने के लिए केवल सीढ़ियों का इस्तेमाल करें, भूलकर भी लिफ्ट का उपयोग न करें।
क्या न करें:
- घबराएं नहीं: पैनिक या भगदड़ बिल्कुल न मचाएं, क्योंकि इससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है।
- बाल्कनी या शीशों के पास न खड़े हों: झटकों के दौरान कांच की खिड़कियों, भारी अलमारियों, झूमर और घर की बालकनी से दूर रहें।
- माचिस या बिजली के स्विच का इस्तेमाल न करें: भूकंप के बाद गैस लीक होने का अंदेशा रहता है, इसलिए आग न जलाएं और न ही बिजली के उपकरणों या स्विच को ऑन-ऑफ करें।
- अफवाहें न फैलाएं: सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की भ्रामक या डरावनी झूठी खबरें साझा करने से बचें।
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