क्या है निपाह वायरस और कैसे फैलती है ये घातक बीमारी? जानें इसके लक्षण, कारण और बचाव का तरीका
Nipah Virus Disease: देश में एक बार फिर निपाह वायरस को लेकर चिंता बढ़ गई है. हाल ही में पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो संदिग्ध मामले सामने आए है. गंभीर मामले को देखते हुए केंद्र सरकार हरकत में आ गई है. निपाह वायरस को दुनिया का सबसे खतरनाक जूनोटिक वायरसों मे गिना जाता है क्योंकि यह तेजी से फैल सकता है और इसकी मृत्यु दर भी काफी ज्यादा मानी जाती है. ऐसे में चलिए हम आपको इस आर्टिकल में बताते हैं निपाह वायरस क्या है इसके लक्षण और बचाव के लिए क्या करना चाहिए?
निपाह वायरस क्या है?
WHO के मुताबिक, निपाह वायरस एक ऐसी खतरनाक बीमारी है जो जानवरों से इंसानों में फैलता है. इसकी पहचान पहली बार 1999 में मलेशिया में हुई थी. आज भी यह दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में चिंता का कारण बना हुआ है. इस वायरस का मुख्य स्त्रोत फल खाने वाले चमगादड़ माने जाते हैं.
निपाह वायरस फैलने का कारण
दूषित भोजन (Contaminated Food)
चमगादड़ों द्वारा कुतरे या दूषित किए गए फल (जैसे खजूर, आम) और संक्रमित चमगादड़ या सूअरों की लार या मूत्र से दूषित ताड़ी (खजूर का रस) पीने से निपाह वायरस जल्दी फैलता है.
पशुओं से संपर्क (Contact with Animals)
संक्रमित चमगादड़ या सूअरों के शरीर के तरल पदार्थों जैसे लार, मूत्र, रक्त के सीधे संपर्क से भी निपाह वायरल फैलने का खतरा ज्यादा रहता है.
मानव से मानव (Human-to-Human)
संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थ जैसे लार, मूत्र, रक्त के साथ संपर्क में आने से भी निपाह वायरस का खतरा ज्यादा रहता है.
निपाह वायरस के लक्षण (Nipah Virus Symptoms)
- तेज बुखार और सिरदर्द
- मांसपेशियों में दर्द
- खांसी और गले में खराश
- सांस लेने में दिक्कत होना
- मानसिक भ्रम या बेहोशी
- मस्तिष्क में सूजन
निपाह वायरस से बचने का तरीका
अगर आप निपाह वायरस से बचना चाहते हैं तो सबसे पहले कटे या गिरे हुए फलों का सेवन न करें. चमगादड़ों और सूरओं के संपर्क से बचे, हाथों की साफ-सफाई पर ध्यान दें, संक्रमित मरीजों की देखभाल में PPE किट का इस्तेमाल करें. निपाह वायरस भले ही खतरनाक हो लेकिन इसका कोई इलाज नहीं है इसलिए समय पर पहचान और बचाव ही सबसे अच्छा उपाय है.
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क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन: अमेरिका की अगुवाई में हुई अहम बैठक में शामिल हुए अश्विनी वैष्णव
नई दिल्ली, 13 जनवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अहम खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) को लेकर भारत की सक्रिय भूमिका को रेखांकित किया है। उन्होंने अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के एक एक्स पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए बताया कि उन्होंने हाल ही में आयोजित क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल मीटिंग में हिस्सा लिया।
यह बैठक अमेरिका के ट्रेजरी विभाग की मेजबानी में आयोजित की गई थी, जिसकी अगुवाई ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने की। अश्विनी वैष्णव ने एक्स पोस्ट में लिखा कि महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं और तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की मजबूती के लिए बेहद जरूरी है।
बता दें कि ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने अपने एक्स पोस्ट में इस बैठक को लेकर अहम जानकारी शेयर की।
उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा कि अमेरिका के ट्रेजरी विभाग द्वारा आयोजित इस फाइनेंस मिनिस्टीरियल बैठक में सभी देशों के बीच क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन में मौजूद प्रमुख कमजोरियों को तेजी से दूर करने की साझा इच्छा स्पष्ट रूप से सामने आई।
स्कॉट बेसेंट ने यह भी कहा कि वह इस बात को लेकर आशावादी हैं कि देश डिकपलिंग (पूरी तरह अलग होने) की बजाय डि-रिस्किंग (जोखिम कम करने) की नीति अपनाएंगे।
वहीं, भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, अश्विनी वैष्णव ने अमेरिका द्वारा आयोजित महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला की मंत्री स्तरीय बैठक में हिस्सा लिया। उन्होंने आर्थिक समृद्धि, लचीली मैन्युफैक्चरिंग और विकसित भारत को साकार करने के लिए जरूरी क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन को मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए भारत की पक्की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
इस पूरी पहल को भारत और अन्य देशों के बीच बढ़ते सहयोग के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला पर वैश्विक स्तर पर समन्वय से न केवल सप्लाई चेन सुरक्षित होगी, बल्कि भविष्य की औद्योगिक और तकनीकी जरूरतों को भी मजबूती मिलेगी।
--आईएएनएस
वीकेयू/एएस
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