Tata Trusts के विरोध से Tata Chemicals और TCS शेयर टूटे, Tata Sons लिस्टिंग पर चर्चा तेज
18 सितंबर के कारोबार में टाटा समूह के कई शेयरों में शुरुआती गिरावट देखने को मिली है। इसके पीछे टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बोर्ड के बीच सामने आया विवाद अहम वजह माना जा रहा है। खबर को उपलब्ध जानकारी और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर नए तरीके से लिखा गया है।
टाटा समूह के शेयरों में शुक्रवार, 18 सितंबर को शुरुआती कारोबार के दौरान कमजोरी देखने को मिली। एक दिन पहले तेज बढ़त के बाद टाटा समूह की कई प्रमुख कंपनियों के शेयर नीचे आ गए। निवेशकों की नजर अब टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर टाटा ट्रस्ट्स और कंपनी के निदेशक मंडल के बीच बढ़ते विवाद पर है।
करीब सुबह 9 बजकर 55 मिनट पर टाटा केमिकल्स सबसे ज्यादा गिरने वाले प्रमुख शेयरों में रहा। इसमें 7.67 प्रतिशत की गिरावट के साथ भाव 719.50 रुपये के आसपास पहुंच गया। टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन में 3.43 प्रतिशत की कमजोरी आई और इसका भाव 694.65 रुपये रहा। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के शेयर भी 2.53 प्रतिशत गिरकर 2,134.60 रुपये के करीब पहुंच गए।
इसके अलावा टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स में 2.51 प्रतिशत की गिरावट रही और शेयर करीब 306.60 रुपये पर आ गया। टाटा पावर 1.10 प्रतिशत गिरकर 364.95 रुपये, टाटा मोटर्स 0.70 प्रतिशत कमजोर होकर 433.05 रुपये और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स 0.49 प्रतिशत नीचे 1,008.70 रुपये के आसपास रहा। टाटा स्टील में भी हल्की गिरावट देखी गई और शेयर 187.13 रुपये के करीब कारोबार करता नजर आया।
यह गिरावट एक दिन पहले की तेजी के उलट है। 17 सितंबर को टाटा संस के बोर्ड द्वारा एन. चंद्रशेखरन को पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए कार्यकारी चेयरमैन बनाए रखने के फैसले के बाद समूह की कई कंपनियों के शेयरों में तेजी आई थी। उस दिन टाटा केमिकल्स में 5.86 प्रतिशत, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन में 5.47 प्रतिशत, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स में 4.58 प्रतिशत, टाटा मोटर्स में 2.88 प्रतिशत और टाटा स्टील में 2.82 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी।
लेकिन इसके बाद टाटा ट्रस्ट्स ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर आपत्ति जताई। टाटा ट्रस्ट्स के अनुसार, चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को बोर्ड को बताया था कि वह 20 फरवरी 2027 को मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद दोबारा पद नहीं लेना चाहते हैं। ट्रस्ट्स का कहना है कि उन्होंने इस फैसले को स्वीकार कर लिया था और नए चेयरमैन की तलाश की प्रक्रिया शुरू करने को कहा था।
वहीं, टाटा संस के बोर्ड का कहना है कि बोर्ड के अनुरोध के बाद चंद्रशेखरन ने अपने फैसले पर दोबारा विचार करने पर सहमति जताई और फिर बोर्ड ने बहुमत से उनकी एक बार फिर से नियुक्ति को मंजूरी दी। इसके बाद टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। ट्रस्ट्स ने कंपनी के नियमों का हवाला देते हुए इस फैसले को कानूनी रूप से अमान्य बताया है।
गौरतलब है कि टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसलिए चेयरमैन की नियुक्ति को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद का असर केवल नेतृत्व के सवाल तक सीमित नहीं है। इससे कंपनी के संचालन और आगे लिए जाने वाले बड़े फैसलों पर भी ध्यान बढ़ गया है।
इस पूरे विवाद के बीच टाटा संस की शेयर बाजार में संभावित लिस्टिंग का मुद्दा भी फिर चर्चा में आ गया है। टाटा संस के बोर्ड ने भारतीय रिजर्व बैंक के लागू नियमों के पालन की दिशा में कदम उठाने और नियामक तथा अन्य संबंधित पक्षों से मार्गदर्शन लेने की बात कही है। दूसरी ओर, टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि केवल लिस्टिंग को ही एकमात्र रास्ता मानने के बजाय उपलब्ध सभी विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए।
टाटा केमिकल्स और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन जैसे शेयरों पर टाटा संस से जुड़े घटनाक्रम का असर ज्यादा दिखाई देता है, क्योंकि इन कंपनियों का टाटा संस से सीधा वित्तीय संबंध है। ऐसे में गुरुवार की तेजी के बाद शुक्रवार की गिरावट में निवेशकों की बदली हुई चिंता दिखाई दे रही है।
अब बाजार की नजर टाटा संस के चेयरमैन पद पर चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति की वैधता, कंपनी की आगामी वार्षिक आम बैठक और टाटा ट्रस्ट्स तथा टाटा संस के बोर्ड के बीच आगे होने वाली बातचीत पर बनी हुई है। आने वाले फैसले टाटा समूह की कंपनियों के शेयरों की चाल के साथ-साथ समूह के भविष्य के प्रशासनिक ढांचे के लिए भी महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।
RBI नियमों के तहत Tata Sons की लिस्टिंग से सामने आएगा 20 लाख करोड़ रुपये का संभावित वैल्यूएशन
टाटा संस के निदेशक मंडल का भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सूचीबद्धता संबंधी दिशानिर्देशों का पालन करने का फैसला भारतीय शेयर बाजार के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है। बाजार प्रतिभागियों का कहना है कि इस सूचीबद्धता से टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी में मौजूद संपत्तियों और हिस्सेदारियों का मूल्य अधिक स्पष्ट रूप से सामने आ सकता है। निदेशक मंडल ने बृहस्पतिवार को सूचीबद्धता की दिशा में आगे बढ़ने की मंशा के साथ एन. चंद्रशेखरन को कार्यकारी चेयरमैन के एक और कार्यकाल के लिए नियुक्त किया।
यह कदम टाटा संस के नेतृत्व में निरंतरता कायम रखने के इरादे से उठाया गया है। टाटा संस के पास इस्पात, सॉफ्टवेयर, वाहन, होटल, विमानन और वित्तीय सेवाओं समेत विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार करने वाली कंपनियों में हिस्सेदारी है। समूह की कई कंपनियां सूचीबद्ध हैं, जबकि कुछ कंपनियां गैर-सूचीबद्ध हैं।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, टाटा संस की सूचीबद्धता से इन हिस्सेदारियों का मूल्यांकन और कंपनी की वित्तीय स्थिति अधिक स्पष्ट रूप से सामने आ सकती है। सलाहकार फर्म इनगवर्न रिसर्च सर्विसेज ने एक रिपोर्ट में कहा कि टाटा संस के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) से समूह की कंपनियों के करीब 1.77 करोड़ गैर-विशिष्ट शेयरधारकों को लाभ हो सकता है। इन्हें समूह कंपनियों की हिस्सेदारी के जरिये टाटा संस में अप्रत्यक्ष निवेश मिलता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, संभावित आईपीओ भारत के सबसे बड़े आईपीओ में से एक हो सकता है। विभिन्न रिपोर्ट में इसका आकार कम-से-कम पांच अरब डॉलर रहने जबकि कंपनी का मूल्यांकन 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, अंतिम रूप इस पर निर्भर करेगा कि टाटा संस कितनी हिस्सेदारी बेचने की पेशकश करती है।
टाटा समूह की कुछ सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में तेजी भी देखी गई है। इसे टाटा संस की संभावित सूचीबद्धता से जुड़ी उम्मीदों और उसकी हिस्सेदारियों के मूल्य के सामने आने की संभावना से जोड़कर देखा गया। टाटा संस के ऊपरी स्तर की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के रूप में वर्गीकृत किए जाने के कारण सूचीबद्धता की अनिवार्यता पैदा हुई है।
आरबीआई ने हाल में यह दर्जा हटाने का कंपनी का अनुरोध स्वीकार नहीं किया, जिससे सूचीबद्धता अनिवार्य हो गई है। चेयरमैन के तौर पर चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब टाटा संस के नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता थी। उन्होंने अगस्त में संकेत दिया था कि फरवरी, 2027 में मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह नया कार्यकाल नहीं मांगेंगे।
हालांकि बोर्ड ने पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए उनके नाम का समर्थन कर दिया। सूचीबद्धता को लेकर टाटा ट्रस्ट और शापूरजी पालोनजी समूह की राय अलग है। टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने सार्वजनिक सूचीबद्धता के बजाय दूसरे विकल्प तलाशने की बात कही है। दूसरी ओर, करीब 18.4 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला शापूरजी पालोनजी समूह सूचीबद्धता के पक्ष में है। टाटा ट्रस्ट ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के बोर्ड के फैसले की वैधता को भी चुनौती दी है।
इससे सूचीबद्धता के मुद्दे के साथ टाटा संस के संचालन और कॉरपोरेट संचालन से जुड़ा अलग विवाद भी जुड़ गया है। तमिलनाडु इन्वेस्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विग्नेश नागप्पन ने कहा कि चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति टाटा संस की संभावित सूचीबद्धता के लिहाज से एक सकारात्मक कदम है लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। उन्होंने कहा कि टाटा संस के सूचीबद्ध होने से निवेशकों को देश के बड़े कारोबारी समूहों में से एक में सीधे हिस्सेदारी लेने का अवसर मिलेगा।
हालांकि, उन्होंने कहा कि जियो प्लेटफॉर्म्स जैसी कई बड़ी कंपनियों की संभावित सूचीबद्धता बाजार में उपलब्ध पूंजी पर असर डाल सकती है। टाटा संस की सूचीबद्धता से निवेशकों को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर, इंडियन होटल्स और एयर इंडिया जैसी कंपनियों में हिस्सेदारी रखने वाली होल्डिंग कंपनी में सीधे निवेश का अवसर मिलेगा। हालांकि, सूचीबद्धता से टाटा संस की हिस्सेदारियों की जानकारी और बाजार-आधारित मूल्यांकन अधिक स्पष्ट हो सकता है, लेकिन इसका समय, ढांचा, मूल्यांकन और मौजूदा संचालन व्यवस्था पर प्रभाव अभी तय होना बाकी है।
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