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जब अंतरिक्ष में गूंजा 'सारे जहां से अच्छा' : राकेश शर्मा की वो जादुई दास्तान, जिसने भारत को अंतरिक्ष में दिलाई पहचान

नई दिल्ली, 12 जनवरी (आईएएएनएस)। ऊपर से भारत कैसा दिखता है आपको... तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का यह सवाल जब सोवियत अंतरिक्ष स्टेशन सैल्यूट-7 पहुंचा, तो एक पल के लिए सन्नाटा छा गया। फिर एक शांत लेकिन आत्मविश्वास से भरी आवाज गूंजी, सारे जहां से अच्छा।

3 अप्रैल 1984 की वह शाम सिर्फ एक मिशन की सफलता नहीं थी, बल्कि 70 करोड़ भारतीयों के गर्व की हुंकार थी। विंग कमांडर (तब स्क्वाड्रन लीडर) राकेश शर्मा ने जब सोयूज टी-11 के जरिए अंतरिक्ष की दहलीज लांघी, तो वह सिर्फ एक पायलट नहीं, बल्कि करोड़ों सपनों के दूत बन गए थे।

13 जनवरी 1949 को पंजाब के पटियाला में जन्मे राकेश शर्मा के लिए आसमान कभी भी अजनबी नहीं रहा। हैदराबाद की गलियों में बड़े होते हुए उन्होंने जो सपने देखे, उन्हें 1966 में नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) में प्रवेश के साथ पंख मिल गए। उनकी असली परीक्षा 1971 के युद्ध में हुई, जहां एक युवा पायलट के तौर पर उन्होंने मिग-21 उड़ाते हुए 21 खतरनाक मिशनों को अंजाम दिया। यह वही फौलादी इरादे थे, जिन्होंने उन्हें बाद में 150 कद्दावर पायलटों की भीड़ में अंतरिक्ष यात्रा के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार बनाया।

अंतरिक्ष यात्री बनना सिर्फ एक रोमांचक अनुभव नहीं, बल्कि खुद को गलाने जैसी प्रक्रिया थी। जब 1982 में उनका चयन हुआ, तो उन्हें मॉस्को के पास स्टार सिटी भेजा गया। वहां का प्रशिक्षण किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था।

उन्हें मात्र दो महीने में रूसी भाषा सीखनी थी, क्योंकि अंतरिक्ष यान के सारे मैनुअल रूसी में थे। बैंगलोर में उन्हें 72 घंटों तक एक बंद कमरे में अकेला रखा गया, ताकि यह जांचा जा सके कि वे अंतरिक्ष के अकेलेपन को झेल सकते हैं या नहीं। सेंट्रीफ्यूज मशीनों में उनके शरीर पर गुरुत्वाकर्षण का इतना दबाव डाला जाता था कि सांस लेना भी दूभर हो जाता था। लेकिन राकेश शर्मा अडिग थे। उनके साथ बैकअप के तौर पर विंग कमांडर रवीश मल्होत्रा भी थे, जो अंतिम समय तक उनके साथ साए की तरह डटे रहे।

3 अप्रैल 1984 को बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से जब सोयूज-यू रॉकेट ने उड़ान भरी, तो भारत दुनिया का 14वां देश बन गया जिसने अपना मानव अंतरिक्ष में भेजा था। राकेश शर्मा ने अंतरिक्ष में 7 दिन, 21 घंटे और 40 मिनट बिताए।

राकेश शर्मा का मिशन सामरिक रूप से भी महत्वपूर्ण था। टेरा नामक सुदूर संवेदन प्रयोग के तहत उन्होंने अंतरिक्ष से भारत की ऐसी तस्वीरें लीं, जिन्होंने देश का नक्शा बदलने में मदद की। हिमालय में छिपे जल संसाधनों से लेकर वनों के घनत्व तक, उनकी ली गई तस्वीरों ने भारत के कई वर्षों के हवाई सर्वे का काम कुछ घंटों में कर दिया।

आज जब भारत अपने स्वदेशी गगनयान मिशन की तैयारी कर रहा है, तो 77 वर्षीय राकेश शर्मा उसके सबसे बड़े मार्गदर्शक हैं। हाल ही में जब ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का चयन एक्सियम-4 मिशन के लिए हुआ, तो राकेश शर्मा ने मुस्कुराते हुए कहा कि यह उनके लिए डेजा-वू (पुरानी यादों का ताजा होना) जैसा है।

--आईएएनएस

वीकेयू/एबीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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ऑस्ट्रेलियाई कप्तान एलिसा हीली का संन्यास:भारत सीरीज के बाद क्रिकेट से संन्यास लेंगी; पर्थ टेस्ट होगा आखिरी मैच

ऑस्ट्रेलिया की महिला क्रिकेट टीम की कप्तान और दिग्गज विकेटकीपर-बल्लेबाज एलिसा हीली ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान किया है। वह फरवरी-मार्च 2026 में भारत के खिलाफ होने वाली घरेलू मल्टी-फॉर्मेट सीरीज के बाद अपना करियर खत्म करेंगी। पर्थ में खेला जाने वाला डे-नाइट टेस्ट उनका आखिरी इंटरनेशनल मैच होगा। टी-20 सीरीज नहीं खेलेंगी एलिसा हीली भारत के खिलाफ प्रस्तावित टी-20 इंटरनेशनल मैचों में हिस्सा नहीं लेंगी। उन्होंने यह फैसला साल के अंत में होने वाले महिला टी-20 वर्ल्ड कप को ध्यान में रखते हुए लिया है, ताकि टीम नए खिलाड़ियों के साथ तैयारी शुरू कर सके। पर्थ टेस्ट से करेंगी करियर का अंत हीली भारत के खिलाफ वनडे मुकाबले खेलेंगी और इसके बाद 6 से 9 मार्च 2026 तक पर्थ (WACA) में होने वाले डे-नाइट टेस्ट में अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच खेलेंगी। यह उनके करियर का 11वां टेस्ट मैच होगा। मानसिक थकान और चोटें बनीं वजह ‘विलो टॉक’ पॉडकास्ट में एलिसा हीली ने कहा कि पिछले कुछ साल उनके लिए मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण रहे हैं। लगातार चोटों और बढ़ती उम्र के साथ खुद को पहले जैसी तैयारी में रखना मुश्किल हो गया था। टीम के हित में लिया फैसला हीली ने कहा कि 2026 में इंग्लैंड में होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप तक खेलने की कोशिश करना टीम के हित में नहीं होता। टीम बदलाव के दौर से गुजर रही है और नए खिलाड़ियों को मौके देने की जरूरत है। घर पर विदाई की इच्छा उन्होंने कहा कि भारत के खिलाफ घरेलू सीरीज उनके लिए भावनात्मक रूप से खास है और वह परिवार व टीम के बीच अपने करियर का अंत करना चाहती थीं। फिटनेस को लेकर भरोसा एलिसा ने बताया कि ODI वर्ल्ड कप के दौरान लगी चोट से उबरने के बाद वह फिलहाल खुद को फिट और मजबूत महसूस कर रही हैं। ___________ स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें... WPL में RCB की लगातार दूसरी जीत:यूपी वॉरियर्ज को 9 विकेट से हराया, ग्रेस हैरिस ने 40 गेंद पर 85 रन बनाए विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) के पांचवें मैच में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने यूपी वॉरियर्ज को 9 विकेट से हरा दिया। टीम ने 144 रन का टारगेट महज 12.1 ओवर में हासिल कर लिया। ओपनर ग्रेस हैरिस ने 40 गेंद पर 85 रन बनाए, वहीं स्मृति मंधाना ने 47 रन बनाए। पूरी खबर Tue, 13 Jan 2026 01:50:32

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