रणवीर ने लिया 1000 बेटियों की पढ़ाई का संकल्प:लालबागचा राजा पहुंचे थे; बोले- आशा है, इससे बप्पा प्रसन्न होंगे
एक्टर रणवीर सिंह ने मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा पंडाल में पहुंचकर गणपति बप्पा के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत 1000 बेटियों की शिक्षा में मदद करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि बप्पा का आशीर्वाद लेकर आगे के सफर के लिए उनका आशीर्वाद मांगा। रणवीर सिंह बीती रात सफेद कुर्ते-पजामे में लालबागचा राजा के दर्शन करने पहुंचे। न्यूज18 को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बप्पा के सामने लिए अपने संकल्प के बारे में बताया। रणवीर ने कहा, “बहुत अच्छा लग रहा है यहां आकर। जो पिछला साल गुजरा है, मेरे लिए और मेरे परिवार के लिए खुशियों से भरा रहा, बप्पा की कृपा से। तो यहां आए हैं उनके दर्शन करने, उनको धन्यवाद कहने और उनका आशीर्वाद लेने, आगे के सफर के लिए, जीवन के सफर के लिए।” उन्होंने आगे कहा, “हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिन के अवसर पर, मैं सेवा संकल्प अभियान से जुड़कर हजार बेटियों की पढ़ाई में मदद करने का संकल्प लेता हूं। आशा है कि इसके चलते बप्पा प्रसन्न होंगे और उनका आशीर्वाद हमेशा हम पर रहेगा। बस, धन्यवाद। जय गणेश। जय गणेश।” ‘सेवा संकल्प अभियान’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर शुरू किया गया है। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा। इसके तहत लोग अलग-अलग तरह की सेवा का संकल्प ले सकते हैं। आलिया और रणबीर भी अभियान से जुड़े हैं रणवीर के अलावा आलिया भट्ट और रणबीर कपूर भी इस अभियान से जुड़े हैं। दोनों ने 20 स्कूलों के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया है। इससे पहले रणवीर सिंह अंबानी परिवार के घर 'एंटीलिया' में आयोजित गणेशोत्सव में शामिल होने पहुंचे थे। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। इस वीडियो में शाहरुख और रणवीर एक साथ गणपति की आरती करते नजर आ रहे हैं। दोनों एक्टर्स नीता अंबानी के साथ खड़े होकर पूजा-अर्चना में शामिल हुए। पारंपरिक ड्रेस में पहुंचे दोनों एक्टर्स वीडियो में रणवीर सिंह सफेद रंग के कुर्ते-पायजामे में नजर आए। वहीं शाहरुख खान भी फेस्टिवल के हिसाब से सफेद शर्ट और ब्लैक ट्राउजर पहना। नीता अंबानी पारंपरिक परिधान में दोनों अभिनेताओं के पास खड़ी होकर प्रार्थना करती दिख रही हैं।
IIT दिल्ली के स्टार्टअप का कमाल, शहर का 4D डिजिटल ट्विन करेगा बाढ़, पॉल्यूशन और ट्रैफिक की रियल-टाइम निगरानी
IIT Delhi: अब शहरों में भारी बारिश के बाद जलभराव और बाढ़ जैसी स्थितियां सामने आने से पहले ही यह पता लगाने में मदद मिल सकेगी कि किन इलाकों में खतरा बढ़ रहा है. इतना ही नहीं, जमीन के धीरे-धीरे धंसने, यातायात के दबाव और प्रदूषण में होने वाले बदलावों की भी एक ही प्लेटफार्म के जरिए निगरानी करना सही रहेगा. इसके लिए IIT दिल्ली के FITT में इनक्यूबेटेड जियोस्पेशियल AI स्टार्टअप अर्थसेंस लैब्स ने जियोट्विन (GeoTwin) नाम का 4-डी डिजिटल ट्विन प्लेटफार्म तैयार किया गया है.
कैसे काम करेगा ये डिजिटल प्लेटफॉर्म?
यह तकनीक किसी शहर की डिजिटल प्रतिकृति को तैयार करने के साथ-साथ उसमें समय के साथ होने वाले बदलावों को भी रिकॉर्ड कर सकती है. उपलब्ध आंकड़ों और वैज्ञानिक मॉडलों के आधार पर यह प्लेटफार्म संभावित शहरी जोखिमों का आकलन करने में मदद करेगा. इसका उद्देश्य शहरी प्रशासन को अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाले आंकड़ों को एक जगह लाकर बेहतर निर्णय लेने में तैयार करना.
एक प्लेटफार्म पर कई शहरी समस्याओं की निगरानी
जियोट्विन में शहरी बाढ़ के पूर्वानुमान से लेकर भूमि धंसाव की निगरानी, भूस्खलन मानचित्रण, यातायात और प्रदूषण की निगरानी जैसी सुविधाओं को संयोजित किया गया है. इसके लिए अलग-अलग तकनीकों और स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों को एक ही डिजिटल मॉडल में शामिल किया जाएगा. इसमें ड्रोन और airborne lidar survey, सैटेलाइट इमेज्स, इनसार सैटेलाइट measurements, मौसम और बारिश का पूर्वानुमान, ट्रैफिक फीड तथा जमीन पर लगे IOT सेंसर से मिलने वाले डेटा का इस्तेमाल किया जाएगा. जब इन सभी आंकड़ों को एक साथ देखा जाएगा, तो इससे शहर की मौजूदा स्थिति और संभावित जोखिमों को समझने में ज्यादा आसानी से मदद मिल सकेगी.
बारिश से पहले मिल सकेगा बाढ़ के खतरे का संकेत
भारी बारिश के दौरान किसी इलाके में बाढ़ या जलभराव का खतरा कितना बढ़ सकता है, इसका आकलन करने के लिए geotwine मौसम और वर्षा के पूर्वानुमान को शहर की भौगोलिक और जमीनी जानकारी के साथ जोड़ता है. इससे प्रशासन को संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करने और समय रहते तैयारी करने में मदद मिल सकती है. इसी तरह इनसार आधारित माप की मदद से जमीन की सतह में होने वाले बेहद धीमे बदलावों पर भी नजर रखी जाएगी. भूमि धंसाव जैसी समस्या लंबे समय में सड़क, इमारतों और अन्य शहरी बुनियादी ढांचे को प्रभावित कर सकती है. ऐसे में इसकी लगातार निगरानी प्रशासन के लिए बेहद उपयोगी साबित होने वाली है.
ट्रैफिक और प्रदूषण में बदलाव पर भी नजर
जियोट्विन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल सिर्फ प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी करने तक सीमित नहीं है. प्लेटफार्म में यातायात से जुड़े आंकड़ों को भी शामिल करने की पूरी व्यवस्था है. इससे अलग-अलग क्षेत्रों में ट्रैफिक के दबाव और उसके समय के साथ होने वाले बदलावों को समझने में मदद मिलेगी. इसके अलावा, प्रदूषण से जुड़े डेटा को भी डिजिटल ट्विन में जोड़ा जाएगा. इस तरह शहर के पर्यावरण, परिवहन और बुनियादी ढांचों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी निगरानी की जाएगी.
नगर निकायों के नियंत्रण में रहेगा डेटा
जियोट्विन की एक प्रमुख विशेषता इसका सॉवरेन स्वरूप है. इसका मतलब यह है कि नगर निकाय और अन्य संस्थान अपने डेटा का स्वामित्व और नियंत्रण अपने पास रख सकते हैं. वे अपनी जरूरत के अनुसार, प्लेटफार्म को संबंधित संस्थान को अपने परिसर में भी संचालित करवा सकते हैं. इसके अलावा, geotwin के परिणामों को मौजूदा शहरी योजना और कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम से ओपन API के जरिए जोड़ा जा सकता है. इससे पहले से इस्तेमाल हो रहे शहरी प्रशासनिक सिस्टम के साथ इस तकनीक को जोड़ने की सुविधा मिलेगी.
नगर निगमों और शहरी संस्थानों से बातचीत
अर्थसेंस लैब्स अब नगर निगमों, शहरी विकास प्राधिकरणों और यूटिलिटी संस्थानों के साथ जियोट्विन की तैनाती को लेकर बातचीत करते रहे हैं. इस प्लेटफार्म को हाल ही में एफआइटीटी फॉरवर्ड 2026 में भी प्रदर्शित किया गया था. अर्थसेंस के को-फाउंडर एवं CEO डॉक्टर निर्देष कुमार शर्मा के अनुसार, शहरों में लगातार बदलाव हो रहे हैं और ऐसे में जियोस्पेशियल AI तथा वैज्ञानिक मॉडलिंग को शहरी प्रशासन के रोजमर्रा के निर्णयों से जोड़ना जरूरी हो गया है.
वहीं, सह-संस्थापक और IIT दिल्ली के एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. मानवेंद्र सहारिया के मुताबिक, शहरी संस्थानों को बुनियादी ढांचे, पर्यावरण और जोखिमों की एकीकृत तस्वीर की जरूरत है लेकिन साथ ही डेटा पर संस्थानों का नियंत्रण भी बना रहना जरूरी है.
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