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उन्हेल में नगर परिषद कर्मचारी को ट्राले ने रौंदा, हुई मौत, आंगनवाड़ी सहायिका गंभीर घायल

उज्जैन जिले के उन्हेल क्षेत्र में एक भीषण सड़क हादसा देखने को मिला। यहां दीपोत्सव का संदेश देने के लिए निकला नगर परिषद का कर्मचारी रास्ते में हादसे का शिकार हो गया। कर्मचारी की ट्राले के नीचे आने से मौत हो गई। उसके साथ एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी मौजूद थी, जो गंभीर रूप से घायल है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर प्रदेश भर में दीपोत्सव का आयोजन हुआ। इसी आयोजन के बारे में वार्ड में सूचना देनी थी। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को बाइक पर लेकर कर्मचारी जा रहा था। तभी बैंक ऑफ़ इंडिया के पास ये हादसा हुआ। घटना की फुटेज सामने आई है।

ट्राले ने कर्मचारी को रौंदा

जब ये दोनों वार्ड की तरफ जा रहे थे। तभी पीछे से एक तेज रफ्तार ट्राला आया और बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक नीचे गिर गई। दोनों नीचे गिर पड़े और ट्राले का पहिया नगर परिषद कर्मचारी के ऊपर से गुजर गया। पीछे बैठी आंगनवाड़ी सहायिका भी गंभीर रूप से घायल हुई है।

सहायिका इंदौर रैफर

इस हादसे में नगर परिषद के जिस कर्मचारी की मौत हुई है उनकी पहचान बाबूलाल परमार निवासी फारुख कॉलोनी को रूप में हुई है। कर्मचारी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं उनके साथ बाइक पर 45 वर्षीय सोनाली माली सवार थी। उन्हें पहले उज्जैन लाया गया, जहां से इंदौर रैफर किया गया। महिला की हालत गंभीर है।

उठी मुआवजे की मांग

इस घटना की जानकारी सामने आने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए सवाल दागे हैं। उन्होंने कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल किया। मंत्री ने मृतक के परिजनों को एक करोड रुपए का मुआवजा देने और घायल महिला के इलाज के साथ मुआवजे की मांग की है।

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मूवी रिव्यू – 'दायरा':पृथ्वीराज का गुस्सा, करीना का सवाल और चार लाशों का राज… कहानी में मसाला खूब, लेकिन यहां कमजोर है मूवी

रेटिंग: 2.5/5 अवधि: 2 घंटे 23 मिनट शैली: क्राइम थ्रिलर / इन्वेस्टिगेटिव ड्रामा निर्देशक: मेघना गुलजार मुख्य कलाकार: करीना कपूर खान, पृथ्वीराज सुकुमारन, क्षिती जोग, कनवलजीत सिंह, जितेंद्र जोशी रिलीज डेट: 18 सितंबर 2026 कुछ फिल्में आपको कुर्सी पर इसलिए बैठाए रखती हैं क्योंकि आपको जानना होता है कि आगे क्या होगा। ‘दायरा’ शुरुआत में बिल्कुल यही काम करती है। एक लड़की की निर्मम हत्या, पुलिस का तेजी से आरोपियों तक पहुंचना, फिर उनका एनकाउंटर और उसके बाद उठता बड़ा सवाल क्या यह सच में न्याय था या कानून को किनारे रखकर किया गया फैसला? मेघना गुलजार की यह फिल्म 2019 के हैदराबाद रेप-मर्डर केस और उसके बाद हुए पुलिस एनकाउंटर से प्रेरित है। फिल्म ने वास्तविक घटना को हूबहू दोहराने के बजाय काल्पनिक नामों और परिस्थितियों के साथ अपनी कहानी गढ़ी है और यहीं से फिल्म दिलचस्प हो जाती है, क्योंकि यह आपको किसी एक पक्ष की तरफ आराम से बैठने नहीं देती। लेकिन दिक्कत यह है कि जिस फिल्म की शुरुआत इतनी मजबूत हो, उससे अंत भी उतना ही दमदार चाहिए। ‘दायरा’ में शुरुआत और पहला हिस्सा जितना पकड़ता है, दूसरा हिस्सा उतना ही धीरे-धीरे हाथ से निकलता जाता है। फिल्म की कहानी कहानी शुरू होती है रागिनी (प्रगति मिश्रा) से, जो एक रात हाईवे के पास मुसीबत में फंस जाती है। इसके बाद वह गायब हो जाती है और अगले दिन उसका जला हुआ शव मिलता है। रागिनी की मां पार्वती (क्षिती जोग) और भाई कबीर (भावेश बब्बानी) पुलिस से मदद मांगते हैं, लेकिन शुरुआती स्तर पर सिस्टम जिस तरह से मामले को लेता है, वही आगे की पूरी कहानी की नींव रख देता है। मामला मीडिया में उछलता है और जांच की जिम्मेदारी डीसीपी रमन कुमार (पृथ्वीराज सुकुमारन) को मिलती है। रमन अपनी टीम के साथ चार आरोपियों को पकड़ लेता है, लेकिन अदालत तक मामला पहुंचने से पहले ही चारों एक पुलिस एनकाउंटर में मारे जाते हैं। पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने भागने और हमला करने की कोशिश की थी। जवाबी कार्रवाई में वे मारे गए। बस, यहीं से असली फिल्म शुरू होती है। एक तरफ जनता रमन को हीरो मान रही है। दूसरी तरफ सवाल उठ रहा है क्या यह एनकाउंटर सच में हुआ था या सब कुछ पहले से तय था? मामले की जांच के लिए डीसीपी अजूनी कोहली (करीना कपूर खान) के नेतृत्व में विशेष जांच टीम बनाई जाती है। अजूनी का काम सिर्फ एनकाउंटर की जांच करना नहीं है, बल्कि उस पूरी कड़ी को जोड़ना है जो रागिनी के गायब होने से शुरू हुई थी। और फिर फिल्म रमन बनाम अजूनी नहीं, बल्कि तेज न्याय बनाम सही न्याय की बहस बन जाती है। फिल्म में एक्टिंग पृथ्वीराज सुकुमारन रमन कुमार के किरदार में पृथ्वीराज फिल्म की सबसे मजबूत कड़ियों में से एक हैं। उनके किरदार में पुलिस अधिकारी का रौब है, लेकिन उसके पीछे एक ऐसा आदमी भी है जो अपने फैसलों को सही मानता है। पृथ्वीराज का अभिनय ज्यादा शोर नहीं करता। खासकर उनकी आंखों और संवाद बोलने के अंदाज में काफी वजन है। वह रमन को पूरी तरह विलेन बनने से रोकते हैं और यही फिल्म के लिए जरूरी भी था। करीना कपूर खान करीना की अजूनी चमक-दमक वाली पुलिस अफसर नहीं है। वह ज्यादा शांत, व्यवस्थित और दिमाग से काम करने वाली अधिकारी है। करीना यहां ओवर-द-टॉप अभिनय नहीं करतीं और यही उनके पक्ष में जाता है। वह सवाल पूछती हैं, लोगों को पढ़ती हैं और छोटी-छोटी विसंगतियों को पकड़ती हैं। हालांकि, किरदार में जितनी संभावनाएं थीं, फिल्म उनका पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाती। क्षिती जोग रागिनी की मां पार्वती के रूप में क्षिती जोग कई जगह पूरी फिल्म पर भारी पड़ती हैं। उनका दुख चीखने-चिल्लाने से ज्यादा उनकी खामोशी में दिखाई देता है। फिल्म के सबसे मानवीय और भावुक हिस्से उन्हीं से जुड़े हैं। बाकी कलाकार भी अपने-अपने हिस्से को संभालते हैं और फिल्म को विश्वसनीय बनाने में मदद करते हैं। फिल्म का निर्देशन मेघना गुलजार को पता है कि क्राइम स्टोरी को सिर्फ अपराध की कहानी बनाकर नहीं छोड़ना है। ‘तलवार’ की तरह यहां भी वह दर्शक को जांच की प्रक्रिया के भीतर ले जाने की कोशिश करती हैं। फिल्म का पहला हिस्सा काफी प्रभावी है। घटनाओं को धीरे-धीरे खोलने का तरीका अच्छा है और दर्शक लगातार सोचता रहता है कि आखिर सच क्या है, लेकिन इंटरवल के बाद फिल्म का टेम्पो थोड़ा गिरता है। कुछ जगहों पर कहानी जरूरत से ज्यादा समझाने लगती है और वही फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी बन जाती है। फिल्म की स्टोरीलाइन विचार बेहद मजबूत है। फिल्म का असली सवाल यह नहीं है कि रमन सही है या अजूनी। सवाल यह है कि अगर सिस्टम धीमा है तो क्या पुलिस को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार मिल जाता है? और अगर किसी अपराधी को अदालत तक पहुंचने से पहले मार दिया जाए, तो क्या वह न्याय कहलाएगा? फिल्म इन सवालों को उठाती जरूर है, लेकिन कई जगह उन पर और गहराई से उतरने की जरूरत महसूस होती है। फिल्म का स्क्रीनप्ले स्क्रीनप्ले की शुरुआत काफी चुस्त है। घटनाएं एक-दूसरे से जुड़ती हैं और रहस्य धीरे-धीरे खुलता है, लेकिन दूसरे हिस्से में कुछ चीजें खिंचती हुई लगती हैं। कई जगह कहानी की गति कम हो जाती है और दर्शक को लगता है कि फिल्म उसी बात को थोड़ा अलग तरीके से फिर समझा रही है। सबसे बड़ी समस्या क्लाइमैक्स है। इतने सवाल खड़े करने के बाद फिल्म जिस तरह खत्म होती है, वह दर्शक को संतुष्ट करने के बजाय थोड़ा अधूरा छोड़ देती है। ऐसा लगता है जैसे फिल्म ने पटाखे दिखाए बहुत, लेकिन फुलझड़ी जलाकर घर चली गई। फिल्म का तकनीकी पक्ष कैमरा वर्क फिल्म के मूड को अच्छी तरह सपोर्ट करता है। बंद फ्रेम और क्लोज-अप्स किरदारों के तनाव को बढ़ाते हैं। एडिटिंग पहले हिस्से में काफी प्रभावी है, हालांकि इंटरवल के बाद फिल्म थोड़ी और चुस्त हो सकती थी। फिल्म की कमियां सबसे बड़ी कमी है इसका कमजोर दूसरा हिस्सा। दूसरी बड़ी परेशानी है कि फिल्म जिस शानदार सवाल से शुरुआत करती है, उसका जवाब देने की कोशिश में कुछ जगह बहुत ज्यादा समझाने लगती है। और फिर आता है क्लाइमैक्स। इतनी गंभीर कहानी के बाद दर्शक एक मजबूत टकराव और भावनात्मक payoff की उम्मीद करता है, लेकिन फिल्म वहां थोड़ी फीकी पड़ जाती है। यही वजह है कि ‘दायरा’ अच्छी फिल्म बनने के बेहद करीब पहुंचकर भी पूरी तरह यादगार फिल्म नहीं बन पाती। फिल्म का म्यूजिक फिल्म का संगीत इसका सेलिंग पॉइंट नहीं है। केतन सोढ़ा का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के तनाव वाले हिस्सों को मजबूती देता है। फिल्म में एक मुख्य गीत है, लेकिन यह ऐसा नहीं है जिसे आप सिनेमाघर से निकलते ही गुनगुनाने लगें। यहां असली काम बैकग्राउंड म्यूजिक करता है। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट ‘दायरा’ ऐसी फिल्म है जिसमें सवाल बहुत अच्छे हैं, कलाकार बहुत अच्छे हैं और शुरुआत भी दमदार है, लेकिन जवाब तक पहुंचते-पहुंचते फिल्म की पकड़ ढीली पड़ जाती है। करीना कपूर और पृथ्वीराज सुकुमारन अपने किरदारों को पूरी गंभीरता से निभाते हैं और मेघना गुलजार का निर्देशन कई जगह प्रभावशाली है। लेकिन अगर आप एक ऐसी क्राइम थ्रिलर की उम्मीद लेकर जा रहे हैं जिसमें आखिरी 20 मिनट आपको सीट से चिपका दें, तो यहां थोड़ी निराशा हो सकती है।

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  Sports

BCCI AGM 2026: 95वीं सालाना बैठक में लिए गए बड़े फैसले, IPL की 20वीं सालगिरह से अंपायरों की पेमेंट तक

मुंबई। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की 95वीं सालाना आम बैठक (AGM) शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को मुंबई स्थित BCCI मुख्यालय में हुई। बैठक में IPL गवर्निंग काउंसिल, वित्तीय मामलों, अंपायरों और मैच रेफरी की पेमेंट, BCCI की नीतियों और भारतीय क्रिकेट के शताब्दी समारोह से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए।

BCCI के मानद सचिव देवाजीत सैकिया की ओर से जारी मीडिया एडवाइजरी के मुताबिक, AGM में लिए गए प्रमुख फैसले इस प्रकार हैं।

IPL गवर्निंग काउंसिल में 2 नए प्रतिनिधि चुने गए
AGM में जनरल बॉडी के दो प्रतिनिधियों को IPL गवर्निंग काउंसिल में शामिल किया गया है। इनमें शामिल हैं:

  • अरुण सिंह धूमल
  • एम खैरुल जमाल मजूमदार

दोनों को जनरल बॉडी के प्रतिनिधि के तौर पर IPL गवर्निंग काउंसिल में चुना गया।

2027 में IPL के 20वें संस्करण का होगा भव्य आयोजन
BCCI जनरल बॉडी ने 2027 में होने वाले IPL के 20वें संस्करण को भव्य तरीके से मनाने का फैसला किया है।

IPL का 20वां संस्करण भारतीय क्रिकेट की इस लोकप्रिय टी20 लीग के सफर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। AGM में इसे विशेष रूप से मनाने का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया।

2028 में BCCI की 100वीं वर्षगांठ का जश्न
BCCI ने अपने शताब्दी समारोह की तैयारियों की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। बोर्ड 2028 में अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे करेगा।

फैसले के मुताबिक, शताब्दी समारोह दिसंबर 2027 से शुरू होकर पूरे 2028 तक चलने वाले कार्यक्रमों के जरिए मनाया जाएगा। BCCI के मुताबिक, यह भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक अहम पड़ाव होगा।

अंपायरों और मैच रेफरी की पेमेंट स्ट्रक्चर में बदलाव
AGM में अंपायरों और मैच रेफरी से जुड़ा भी अहम फैसला हुआ। जनरल बॉडी ने बेहतर पेमेंट स्ट्रक्चर और ग्रेड के रीक्लासिफिकेशन को सर्वसम्मति से मंजूरी दी। इसका उद्देश्य अंपायरों और मैच रेफरी के लिए मौजूदा भुगतान व्यवस्था और ग्रेडिंग को बेहतर बनाना है।

वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिटेड अकाउंट्स को मंजूरी
BCCI जनरल बॉडी ने वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिट किए गए अकाउंट्स स्टेटमेंट को मंजूरी दे दी। इसके अलावा वित्त वर्ष 2026-27 के सालाना बजट को भी जनरल बॉडी की मंजूरी मिल गई।

2026-27 के लिए ऑडिटर नियुक्त
AGM में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ऑडिटर की नियुक्ति को भी मंजूरी दी गई। यह BCCI की नियमित वित्तीय और प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

BCCI की नई इंटरनल कमिटी बनाई गई
BCCI की Prevention of Sexual Harassment Policy के तहत नई इंटरनल कमिटी के गठन को भी मंजूरी दी गई। यह कमिटी BCCI की कार्यप्रणाली में यौन उत्पीड़न की रोकथाम से जुड़ी नीति के तहत काम करेगी।

Age Verification Policy को किया गया अपडेट
AGM में BCCI की Age Verification Policy को अपडेट करके अपनाया गया। यह नीति खिलाड़ियों की आयु से जुड़े सत्यापन की प्रक्रिया और नियमों से संबंधित है।

दिव्यांग क्रिकेटरों के लिए सुविधाओं पर चर्चा
BCCI जनरल बॉडी ने दिव्यांग क्रिकेटरों को सपोर्ट करने के उपायों पर राज्य क्रिकेट इकाइयों के साथ चर्चा की। इसमें दिव्यांग क्रिकेटरों के विकास और प्रगति के लिए जरूरी सुविधाओं और संसाधनों पर विचार किया गया।

अजीत अगरकर के भविष्य पर भी चर्चा
AGM के दौरान सीनियर सेलेक्शन कमिटी के चेयरमैन अजीत अगरकर का भविष्य भी चर्चा में रहा। हालांकि, BCCI की आधिकारिक मीडिया एडवाइजरी में अगरकर के कार्यकाल को बढ़ाने या उनके स्थान पर किसी नए व्यक्ति की नियुक्ति का फैसला घोषित नहीं किया गया है।

बैठक के बाद BCCI के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया कि पदाधिकारियों को सेलेक्शन कमिटी से जुड़े मामलों पर फैसला लेने का अधिकार दिया गया है।

अगरकर का मौजूदा कार्यकाल अगले महीने की शुरुआत में खत्म होने की बात रिपोर्टों में कही गई है। ऐसे में सेलेक्शन कमिटी के चेयरमैन के भविष्य को लेकर आगे फैसला BCCI पदाधिकारियों के स्तर पर लिया जा सकता है।

जूनियर सेलेक्शन कमिटी की पांचों सीटों पर भी नजर
सीनियर सेलेक्शन कमिटी के चेयरमैन के भविष्य के अलावा BCCI जूनियर सेलेक्शन कमिटी की सभी पांचों पोस्ट भरने पर भी विचार कर रही है।

हालांकि, AGM की आधिकारिक मीडिया एडवाइजरी में जूनियर सेलेक्शन कमिटी की नियुक्तियों को लेकर कोई अंतिम फैसला घोषित नहीं किया गया है।

मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन ने रखी अहम मांग
AGM के दौरान मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) की ओर से BCCI के सामने एक अनुरोध भी रखा गया। MCA ने बोर्ड से कहा कि भविष्य में अहम मुकाबलों की मेजबानी सौंपते समय मुंबई को भी ध्यान में रखा जाए।

BCCI AGM 2026: एक नजर में बड़े फैसले

मुद्दा     फैसला
IPL गवर्निंग काउंसिल अरुण सिंह धूमल और एम खैरुल जमाल मजूमदार चुने गए
IPL 2027 20वें संस्करण को भव्य तरीके से मनाने का फैसला
BCCI शताब्दी दिसंबर 2027 से 2028 तक सालभर कार्यक्रम
अंपायर/मैच रेफरी बेहतर पेमेंट स्ट्रक्चर और ग्रेड रीक्लासिफिकेशन मंजूर
वित्त वर्ष 2025-26 ऑडिटेड अकाउंट्स को मंजूरी
वित्त वर्ष 2026-27 सालाना बजट मंजूर
ऑडिटर  2026-27 के लिए नियुक्ति
यौन उत्पीड़न नीति नई इंटरनल कमिटी का गठन
Age Verification अपडेटेड नीति को मंजूरी
दिव्यांग क्रिकेट सुविधाओं और संसाधनों पर राज्य इकाइयों के साथ चर्चा
अजीत अगरकर  सेलेक्शन कमिटी से जुड़े फैसले का अधिकार पदाधिकारियों को
जूनियर सेलेक्शन कमिटी पांचों पद भरने पर विचार

निष्कर्ष: BCCI की 95वीं AGM में तत्काल प्रशासनिक फैसलों के साथ भारतीय क्रिकेट के अगले कई वर्षों से जुड़े कार्यक्रमों पर भी निर्णय लिए गए। 2027 के IPL के 20वें संस्करण को विशेष रूप से मनाने और दिसंबर 2027 से 2028 तक BCCI की शताब्दी का सालभर जश्न मनाने का फैसला बैठक के प्रमुख बिंदुओं में रहा। वहीं अंपायरों और मैच रेफरी की पेमेंट व्यवस्था, आयु सत्यापन नीति और दिव्यांग क्रिकेटरों के लिए सुविधाओं को लेकर भी फैसले लिए गए।

Fri, 18 Sep 2026 17:59:56 +0530

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