SEMICON India 2026 में MP के लिए निवेश की संभावनाएं तलाशेंगे सीएम मोहन यादव, स्वीडिश-जापानी प्रतिनिधिमंडलों से करेंगे वन-टू-वन चर्चा
मध्यप्रदेश में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर का निवेश लाने की कोशिशों के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज दिल्ली में SEMICON India 2026 में शामिल होंगे। यहां उनका फोकस सिर्फ मध्यप्रदेश की क्षमताएं दिखाने पर नहीं बल्कि विदेशी प्रतिनिधिमंडलों और कंपनियों से सीधे निवेश, तकनीकी सहयोग और संभावित साझेदारियों पर बातचीत करने पर रहेगा।
SEMICON India 2026 का आयोजन 17 से 19 सितंबर तक नई दिल्ली के यशोभूमि में हो रहा है। इसमें 20 से ज्यादा देशों की 500 से अधिक कंपनियों के शामिल हो रहे हैं। इस आयोजन का उद्देश्य निवेश, तकनीकी सहयोग और वैश्विक साझेदारियों को आगे बढ़ाना है।
स्वीडिश और जापानी प्रतिनिधिमंडलों से सीधी बातचीत
सीएम डॉ. मोहन यादव मध्यप्रदेश के स्टेट पवेलियन का भ्रमण करने के साथ स्वीडिश और जापानी प्रतिनिधिमंडलों से वन-टू-वन संवाद करेंगे। राज्य सरकार के मुताबिक बातचीत में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में निवेश के अवसर, टेक्नोलॉजी सहयोग और संभावित साझेदारियां प्रमुख मुद्दे होंगे।
इन बैठकों में ऑक्साइड कॉरपोरेशन, स्केल फोटोनिक्स, इम्प्यूट इंक., एक्रिटेक, कैनन, मैकडर्मिड अल्फा, हनव्हा, कैजो और जेनेसेम इंक. सहित विभिन्न कंपनियों और संगठनों के प्रतिनिधियों की भागीदारी प्रस्तावित है।
SEMICON India में स्टेट पार्टनर है मध्यप्रदेश
इस बार मध्यप्रदेश SEMICON India में स्टेट पार्टनर के रूप में शामिल हो रहा है। यशोभूमि में बूथ H3005 पर मध्य प्रदेश का पवेलियन लगाया गया है। यहां निवेशकों के सामने प्रदेश के सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम के साथ औद्योगिक क्षमताएं, उपलब्ध प्रतिभा और निवेश से जुड़ी नीतियां पेश की जा रही हैं। आयोजन में State Pavilions और State Spotlight Session भी आधिकारिक कार्यक्रम का हिस्सा हैं।
मुख्यमंत्री यहां उद्योग और अकादमिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों से भी संवाद करेंगे। प्रदेश की ओर से पारस सेमीकंडक्टर, HLBS, CastNX और Secure Meters की भागीदारी है। वहीं IIT इंदौर, IIIT ग्वालियर, IET DAVV और SGSITS इंदौर प्रदेश के अकादमिक एवं रिसर्च इकोसिस्टम का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
निवेश से लेकर रिसर्च और रोजगार तक फोकस
मध्यप्रदेश इस मंच के जरिए सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, रिसर्च और नई तकनीक से जुड़े क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं निवेशकों के सामने रखेगा। कोशिश B2G और B2B बैठकों के जरिए ऐसी संभावित साझेदारियों को आगे बढ़ाने की है, जिनसे भविष्य में निवेश, तकनीक, मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च और स्किल्ड रोजगार के अवसर बन सकें।
SEMICON India के शुक्रवार के आधिकारिक कार्यक्रम में सप्लाई चेन, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, ग्लोबल पार्टनरशिप और Policy Forum + State Spotlight Session जैसे सत्र भी रखे गए हैं।
नई दिल्ली में आयोजित सेमिकॉन इंडिया-2026 में सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में निवेश, प्रौद्योगिकी सहयोग और संभावित साझेदारियों पर स्वीडिश और जापानी प्रतिनिधिमंडलों से चर्चा होगी। pic.twitter.com/GE5dtFZ9ZF
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) September 18, 2026
Explainer: TMC के नए गुटों के क्या-क्या होंगे नाम? ममता ने EC को सौंपे 3 पसंदीदा विकल्प और चुनाव चिन्ह, ऋतब्रत बनर्जी की क्या होगी पसंद
What New Name of TMC Factions: पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद बढ़ गया है. चुनाव आयोग के फैसले के बाद अब तृणमूल कांग्रेस और फूलों वाले चुनाव चिन्ह का प्रयोग दोनों गुट नहीं कर सकते हैं. ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी को नया नाम और चुनाव चिन्ह चुनना होगा. दोनों गुटों के नए नाम क्या हो सकते हैं. आइए पिछले कुछ घटनाक्रमों से समझते हैं.
दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में शुरू हुआ अंदरूनी विवाद 3 जून 2026 को बड़े राजनीतिक संकट में बदल गया, जब 58 बागी विधायकों ने पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. बागी विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को समर्थन पत्र सौंपकर ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता और विपक्ष का नेता चुना, जिसे स्पीकर ने स्वीकार कर लिया. बागी गुट ने दावा किया कि उसके पास पार्टी के 80 में से दो-तिहाई से ज्यादा विधायकों का समर्थन है.
इस घटनाक्रम को टीएमसी के 28 साल के इतिहास में पहली बड़ी औपचारिक टूट के तौर पर देखा गया. विवाद के पीछे पार्टी नेतृत्व से असंतोष, संगठन में फैसलों के केंद्रीकरण और अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव जैसे मुद्दे बताए गए. इससे पहले ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन शाह को कथित फर्जी हस्ताक्षर विवाद के बाद पार्टी से निष्कासित किया गया था. चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश में ममता बनर्जी और दूसरे गुट, दोनों को फिलहाल टीएमसी के नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया है. आदेश मानते हुए ममता बनर्जी ने अपनी पसंद के 3 नए नाम और चुनाव चिन्ह चुनाव आयोग को सौंपे हैं.
क्या हो सकते हैं TMC के नए गुटों का नाम?
ममता ने जिन 3 नाम और चुनाव चिन्हों को चुनाव आयोग में जमा किया, उसकी जानकारी तो सामने नहीं आई है. पिछले कुछ घटनाक्रम से ममता की पार्टी के नए नाम का अंदाजा लगाया जा सकता है. अभी तक शिवसेना और एनसीपी पार्टी टूट की बड़ी घटनाएं सामने आई हैं. वहीं ऋतब्रत बनर्जी भी 3 विकल्पों को जमा करेंगे.
पिछले घटनाक्रम
महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी (राकांपा) में विभाजन के बाद चुनाव आयोग ने दोनों पार्टियों के बागी और मूल गुटों को अलग-अलग नए नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए.
1. शिवसेना में टूट के बाद आए नए नाम
एकनाथ शिंदे गुट: इस गुट को निर्वाचन आयोग ने असली शिवसेना मानते हुए ‘शिवसेना’ नाम और ‘धनुष्यबाण’ (Bow and Arrow) चुनाव चिह्न दिया. इससे पहले शुरुआती दौर में इस गुट का नाम ‘बालासाहेबंची शिवसेना’ (Balasahebanchi Shiv Sena) तय किया गया था.
उद्धव ठाकरे गुट: उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले दल को नया नाम ‘शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे)’ [शिवसेना (UBT)] मिला तथा चुनाव चिह्न के रूप में ‘मशाल’ (Flaming Torch) आवंटित की गई.
2. NCP में टूट के बाद आए नए नाम
अजीत पवार गुट: निर्वाचन आयोग ने अजीत पवार के गुट को वास्तविक राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) माना, जिससे उन्हें पार्टी का मूल नाम ‘एनसीपी’ और ‘घड़ी’ चुनाव चिह्न मिला.
शरद पवार गुट: शरद पवार के नेतृत्व वाले समूह को नया नाम ‘राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार’ (Nationalist Congress Party-Sharadchandra Pawar) [NCP-SCP] दिया गया है.
अब TMC के नए गुटों के नाम
दरअसल, कोई भी राजनीतिक पार्टी अपने नाम और चुनाव चिन्ह को सालों की मेहनत से अपनी पहचान बनाती है. पार्टी टूट के बाद नाम और चुनाव चिन्ह पार्टी फंड से भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है. दो गुटों में चुनाव आयोग किसी एक पार्टी को असली पार्टी मानता और नाम-चुनाव चिन्ह उसी को सौंप देता है. जैसा कि शिवसेना और एनसीपी के केस में हुआ. हालांकि पहले चुनाव आयोग ने दोनों केसों में पार्टी के मूल नाम और चुनाव चिन्ह सीज कर दिए थे. बाद में किसी एक को मूल पार्टी मानकर असली नाम और चुनाव चिन्ह दिया था.
चुनाव चिन्ह और पार्टी नाम सीज होने के बाद दोनों गुटों को नए नाम और चुनाव चिन्ह के विकल्प पर जाना होगा. दोनों गुट असली नाम और चुनाव चिन्ह की पसंद के साथ अन्य विकल्प भी जमा करेंगे. असली पार्टी किसे माना जाएगा. ये फैसले चुनाव आयोग पर निर्भर करेगा.
टूट के बाद दोनों गुट अपने पिछले पैटर्न को देखते हुए ममता बनर्जी की पार्टी का नया नाम तृणमूल कांग्रेस-ममता बनर्जी हो सकता है. वहीं ऋतब्रत बनर्जी गुट का नाम तृणमूल कांग्रेस-ऋतब्रत बनर्जी देखने को मिल सकता है. हालांकि अंतिम पुष्टि चुनाव आयोग की मंजूरी के बाद ही सामने आएगी.
आधी रात में ममता ने सौंपा जवाब
समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक, ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश पर गुरुवार रात अपना जवाब दाखिल कर दिया. सूत्रों के अनुसार, रात 11:36 बजे सौंपे गए जवाब में उन्होंने पार्टी के लिए तीन नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प दिए. हालांकि, ममता बनर्जी ने आयोग के आदेश पर कड़ा विरोध जताते हुए ये विकल्प सौंपे.
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