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रेयर ब्लड कैंसर का इलाज आसान: ऑस्ट्रेलियाई शोधकर्ताओं ने खोजे दो नए टारगेट

नई दिल्ली, 12 जनवरी (आईएएनएस)। ऑस्ट्रेलियाई शोधकर्ताओं की एक टीम ने मायेलोफाइब्रोसिस नामक दुर्लभ और गंभीर ब्लड कैंसर के खिलाफ टारगेटेड थेरेपी विकसित की है।

यह कैंसर स्वस्थ रक्त कोशिकाओं के बनने में बाधा उत्पन्न करता है, जिससे थकान, दर्द, बढ़ी हुई तिल्ली और जीवन की गुणवत्ता में कमी जैसी समस्याएं होती हैं।

वर्तमान उपचार केवल लक्षणों पर एक्ट करते हैं, लेकिन बीमारी का इलाज नहीं करते।

जर्नल ब्लड में प्रकाशित इस शोध में बताया गया कि कैसे इम्यूनोथेरेपी का उपयोग करके असामान्य रक्त कोशिकाओं को टारगेट किया गया। ये ब्लड सेल ही परेशानी का कारण बनते हैं। शोधकर्ताओं ने मरीजों की कोशिकाओं का उपयोग करके असामान्य कोशिकाओं पर दो टारगेट्स की पहचान की है, जो सटीक प्रतिरक्षा विज्ञान पर आधारित है।

शोधकर्ताओं में प्रोफेसर डेनियल थॉमस (साउथ ऑस्ट्रेलियन हेल्थ एंड मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट के ब्लड कैंसर प्रोग्राम के निदेशक) और एंजेल लोपेज (एसए पैथोलॉजी के ह्यूमन इम्यूनोलॉजी हेड) शामिल हैं।

थॉमस ने बताया, “माइलोफाइब्रोसिस से पीड़ित लोगों का इलाज अक्सर ऐसी थेरेपी से किया जाता है जो लक्षणों को कंट्रोल करने में मदद करती हैं, लेकिन वे बीमारी को बढ़ाने वाली असामान्य कोशिकाओं को टारगेट नहीं करतीं।”

मरीज के सेल्स का इस्तेमाल करके, टीम को दो अलग-अलग टारगेट मिले जो कैंसर के लिए जिम्मेदार सेल्स को सबसे अच्छे तरीके से हटाते हैं।

यह स्टडी सटीक इम्यूनोलॉजी की क्षमता पर रोशनी डालती है; यह एक ऐसा तरीका है जो इम्यून सिस्टम का इस्तेमाल करके बीमारी पैदा करने वाले सेल्स को पहचानता है और उन पर काम करता है, जबकि हेल्दी सेल्स पर ज्यादा असर नहीं पड़ता।

नतीजों से पता चलता है कि बीमारी के अलग-अलग बायोलॉजिकल रूपों को अलग-अलग टारगेटेड तरीकों से फायदा हो सकता है।

एसए पैथोलॉजी में ह्यूमन इम्यूनोलॉजी के हेड एंजेल लोपेज ने कहा, कैंसर के इलाज का भविष्य बीमारी को मॉलिक्यूलर और इम्यून लेवल पर समझने और फिर उस जानकारी को ऐसी थेरेपी में बदलने में है जो असरदार, लंबे समय तक चलने वाली और सटीक हों।

उन्होंने बताया कि हमारी रिसर्च से पता चलता है कि इन कोशिकाओं को अलग रखने वाली चीजों पर फोकस करके इलाज मुमकिन हो सकता है जो ज्यादा असरदार और टारगेटेड हो। यह मायलोफाइब्रोसिस और उससे जुड़ी बीमारियों के इलाज में एक बड़े बदलाव का हिस्सा है।

यह खोज मायेलोफाइब्रोसिस के उपचार में एक बड़ा बदलाव ला सकती है, लेकिन मरीजों पर परीक्षण से पहले और अधिक शोध की जरूरत है।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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जटामांसी: बालों का झड़ना रोकने और ग्रोथ बढ़ाने की आयुर्वेदिक औषधि, जानिए फायदे

नई दिल्ली, 12 जनवरी (आईएएनएस)। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव, गलत खान-पान और केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स के कारण बालों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं, ऐसे में जटामांसी एक प्राकृतिक समाधान के रूप में सामने आती है। यह बालों की जड़ों को पोषण देकर उन्हें मज़बूत बनाती है और हेयर फॉल को धीरे-धीरे कम करने में मदद करती है।

जटामांसी आयुर्वेद की एक बेहद प्रभावशाली जड़ी-बूटी है। यह हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाती है और इसकी जड़ औषधीय गुणों से भरपूर मानी जाती है। पुराने समय से ही जटामांसी का इस्तेमाल बालों के झड़ने, रूसी और कमजोर बालों की समस्याओं में किया जाता रहा है।

जटामांसी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह स्कैल्प में रक्त संचार को बेहतर बनाती है। जब सिर की त्वचा में ब्लड सर्कुलेशन ठीक रहता है तो बालों के रोमछिद्रों तक जरूरी पोषक तत्व आसानी से पहुंचते हैं, जिससे नए बाल उगने की प्रक्रिया तेज होती है। यही कारण है कि जटामांसी को हेयर ग्रोथ बढ़ाने वाली आयुर्वेदिक औषधि माना जाता है। इसके अलावा, यह वात दोष को संतुलित करती है जो आयुर्वेद के अनुसार बालों के झड़ने का एक मुख्य कारण होता है। नियमित उपयोग से बालों की जड़ें मजबूत होती हैं और टूटना कम होता है।

रूसी, खुजली और स्कैल्प की जलन से परेशान लोगों के लिए भी जटामांसी बहुत फायदेमंद है। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-फंगल गुण स्कैल्प को शांत करते हैं और रूसी की समस्या को धीरे-धीरे खत्म करने में मदद करते हैं। साथ ही इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स बालों को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाते हैं, जिससे समय से पहले बालों का सफेद होना कम हो सकता है। यह बालों के तंतुओं को मजबूती देता है, दोमुंहे बालों की समस्या घटाता है और बालों में प्राकृतिक चमक लाता है।

जटामांसी का उपयोग कई तरीकों से किया जा सकता है। इसके तेल को नारियल या तिल के तेल में मिलाकर हफ्ते में दो-तीन बार स्कैल्प पर मालिश करना बेहद लाभकारी होता है। वहीं जटामांसी पाउडर को दही या पानी में मिलाकर हेयर मास्क की तरह लगाया जा सकता है।

हालांकि इसका अत्यधिक या गलत इस्तेमाल नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए बेहतर है कि इसका उपयोग सीमित मात्रा में और किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की सलाह से किया जाए।

--आईएएनएस

पीआईएम/एएस

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