हिमाचल में 16 जनवरी से बर्फबारी:वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव होगा, शिमला के तापमान में 5.3 का उछाल, 8.8 डिग्री पहुंचा
हिमाचल प्रदेश के अधिक ऊंचे व मध्यम ऊंचाई वाले कई भागों में बीती रात तापमान में भारी उछाल आया है। रिकांगपियो का पारा 24 घंटे में 6.3 डिग्री के उछाल के साथ 6.4 डिग्री सेल्सियस हो गया। शिमला का पारा भी बीती रात में 5.3 डिग्री के उछाल के साथ 8.8 डिग्री पहुंच गया। अन्य शहरों के तापमान में भी उछाल आया है। वहीं बरठी, बिलासपुर, मंडी, ऊना, कांगड़ा और हमीरपुर के कुछ भागों में रात और सुबह के वक्त शीतलहर महसूस की गई। पांवटा साहिब और सुंदरनगर में सुबह के वक्त कोहरा भी छाया रहा। इससे मैदानी इलाकों में बीती रात ठंडी बीती। वहीं मौसम विभाग ने (IMD) ने 16 जनवरी से वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होने का पूर्वानुमान लगाया है। इसका असर अगले 96 घंटे तक देखने को मिलेगा। इसके चलते, प्रदेश के अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी होगी। 4 जिलों में बर्फबारी के आसार IMD के अनुसार- चंबा, किन्नौर, लाहौल-स्पीति और कुल्लू जिलों के अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना है। इन इलाकों में तापमान पहले से ही शून्य से नीचे चल रहा है। बर्फबारी के बाद ठंड में और इजाफा होगा। वहीं, निचले और मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम साफ रहने की संभावना है। 8 जिलों में कोहरे का अलर्ट मौसम विभाग ने शिमला, किन्नौर, कुल्लू और लाहौल स्पीति को छोड़कर अन्य सभी जिलों में अगले तीन कोहरे का यलो अलर्ट जारी किया है। इससे सुबह 10 बजे तक कुछ जगह विजिबिलिटी 100 मीटर तक गिर सकती है।
आज जारी होंगे दिसंबर रिटेल महंगाई के आंकड़े:ये बढ़कर 1.6% से 1.7% के बीच रह सकती है, नवंबर में ये 0.71% पर थी
आज यानी 12 जनवरी को दिसंबर महीने के रिटेल महंगाई (CPI) के आंकड़े जारी होंगे। एक्सपर्ट्स के अनुसार दिसंबर 2025 में खुदरा महंगाई बढ़कर 1.6% से 1.7% के बीच रहने की संभावना है। इससे पहले नवंबर में ये 0.71% पर थी। वहीं अक्टूबर में ये 0.25% पर थी, जो 14 साल में सबसे कम स्तर रहा था। अक्टूबर में 14 साल के निचले स्तर पर थी रिटेल महंगाई अक्टूबर में रिटेल महंगाई 0.25% के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई थी। इसका कारण खाने-पीने की चीजों की कीमतों में कमी थी। ये वर्तमान CPI सीरीज में अब तक की सबसे कम महंगाई थी। यानी, ये करीब 14 साल का निचला स्तर रहा था। इससे पहले सितंबर में ये 1.44% पर थी। भारत में CPI की मौजूदा सीरीज 2012 के बेस ईयर पर बेस्ड है। मतलब, 2012 की कीमतों को 100 मानकर तुलना की जाती है। पहले 2010 या 1993-94 वाली सीरीज थीं, लेकिन समय के साथ अपडेट होती रहती है ताकि आंकड़े सही रहें। हर नई CPI सीरीज में बेस ईयर चेंज होता है। CPI सीरीज यानी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स सीरीज। ये महंगाई मापने का सरकार का सिंपल तरीका है। आसान शब्दों में कहे तो, ये बताता है कि रोजमर्रा की चीजें जैसे दूध, सब्जी, पेट्रोल कितनी महंगी या सस्ती हो रही हैं। बेस ईयर से तुलना करके % में आंकड़ा आता है। बेस ईयर क्या होता है? बेस ईयर वो साल होता है जिसकी कीमतों को आधार (बेस) माना जाता है। यानी, उसी साल की चीजों की औसत कीमत को 100 का मान देते हैं। फिर, दूसरे सालों की कीमतों की तुलना इसी बेस ईयर से की जाती है। इससे पता चलता है कि महंगाई कितनी बढ़ी या घटी है। उदाहरण: मान लीजिए 2020 बेस ईयर है। उस साल एक किलो टमाटर ₹50 का था। अब 2025 में वो ₹80 का हो गया। तो महंगाई = (80 - 50) / 50 × 100 = 60% बढ़ी। यही फॉर्मूला CPI में यूज होता है, लेकिन ये पूरे बाजार की चीजों पर लागू होता है। बेस ईयर कैसे चुना जाता है और कैसे काम करता है? महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है? महंगाई का बढ़ना और घटना प्रोडक्ट की डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे। ज्यादा चीजें खरीदने से चीजों की डिमांड बढ़ेगी और डिमांड के मुताबिक सप्लाई नहीं होने पर इन चीजों की कीमत बढ़ेगी। वहीं अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा तो महंगाई कम होगी।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 



















