गोल्डन ग्लोब्स अवार्ड्स के दौरान बैकस्टेज में लगी आग, वायरल हुआ वीडियो
Golden Globe 2026: हॉलीवुड का अवॉर्ड्स सीजन 12 जनवरी IST को कैलिफोर्निया के बेवर्ली हिल्टन में 83वें गोल्डन ग्लोब्स के साथ शानदार तरीके से शुरू हुआ. इसमें टॉप स्टार्स, शानदार प्रीमियर और कुछ सरप्राइज भी देखने को मिले. ब्लॉकबस्टर फिल्मों से लेकर नेटफ्लिक्स हिट्स तक, इस सेरेमनी ने आगे होने वाली ऑस्कर रेस के लिए माहौल सेट कर दिया. लेकिन इन सबके बीच इस अवार्ड्स शो में एक बड़ा हादसा होते-होते बच गया.
क्या है पूरा मामला?
जी हां, गोल्डन ग्लोब्स अवॉर्ड इवेंट के दौरान जहां सितारे मंच पर अपने अवार्ड लेने में बिजी थे, वहीं कुछ ही दूरी पर बैकस्टेज में अफरा-तफरी मच गई. पत्रकार क्रिस गार्डनर द्वारा साझा किए गए वीडियो फुटेज के अनुसार, प्रेस रूम में अचानक आग लग गई. ऐसे में गार्डनर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि कैटरिंग टीम के एक सदस्य से गलती से जलता हुआ स्टर्नो (खाना गर्म रखने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला कैंड फ्यूल) गिर गया, जिससे कालीन में आग लग गई. उन्होंने बताया कि कुछ पलों के लिए कालीन में आग भड़क उठी थी और उसके कोनों से धुआं उठता दिखाई दे रहा था.
Crisis averted inside #GoldenGlobes backstage press room as catering knocked over a coffee holder and the sterno underneath was lit. For a brief moment, the carpet was on fire and smoke wafted up around the curtains. They put it out quickly fortunately. Yikes! pic.twitter.com/FTFixnZppT
— Chris Gardner (@chrissgardner) January 12, 2026
हालांकि राहत की बात यह रही कि आग पर तुरंत काबू पा लिया गया और इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है. यह घटना लॉस एंजिल्स, कैलिफोर्निया स्थित बेवर्ली हिल्टन होटल में आयोजित गोल्डन ग्लोब्स समारोह के दौरान सामने आई.
प्रियंका चोपड़ा रहीं स्पेशल गेस्ट
वहीं आपको बता दें कि इस बार कैलिफोर्निया के बेवर्ली हिल्स स्थित बेवर्ली हिल्टन होटल में आयोजित गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड्स में स्पेशल गेस्ट हैं प्रियंका चोपड़ा. हालांकि, इस मौके से ढेर सारे खूबसूरत वीडियोज सामने आए हैं जिनमें प्रियंका चोपड़ा निक जोनस के साथ मिलकर अवॉर्ड शो की सारी महफिल लूटती दिख रही हैं.
#PriyankaChopra and #NickJonas turn heads together on the Golden Globes Awards 2026 red carpet.
— Filmfare (@filmfare) January 12, 2026
[Video Courtesy: Arthur]#Celebs pic.twitter.com/pQ0ODSxz0m
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क्या होती है Digital Fasting? बच्चों से बुजुर्गों तक अलग-अलग उम्र में ये क्यों जरूरी, डॉक्टर से जानें इसके फायदे
Digital Fasting: आज के समय में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. सुबह आंख खुलते ही मोबाइल हाथ में आ जाता है. टीवी चलता रहता है, लेकिन नजर फोन पर ही रहती है. सोशल मीडिया, वीडियो और व्लॉग्स ने हमें स्क्रीन से बांध दिया है. बच्चे हों या बुजुर्ग, हर कोई मोबाइल में व्यस्त नजर आता है. घूमने जाना भी अब सुकून के लिए नहीं, बल्कि कंटेंट बनाने के लिए होने लगा है. धीरे-धीरे हमने अपनी एक डिजिटल दुनिया बना ली है. लेकिन हर समय फोन से जुड़े रहना सेहत और रिश्तों के लिए ठीक नहीं माना जाता. ऐसे में डिजिटल फास्टिंग एक असरदार उपाय बनकर उभरी है. चलिए डॉक्टर से डिजिटल फास्टिंग के बारे में विस्तार से जानते हैं.
डिजिटल फास्टिंग क्या होती है?
डिजिटल फास्टिंग का मतलब है टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर खुद की सीमा तय करना. इसमें दिन या हफ्ते में कुछ समय के लिए फोन, टैबलेट और लैपटॉप से दूरी बनाई जाती है. इस दौरान लोग केवल जरूरत के समय ही डिजिटल डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं. इसे डिजिटल डिटॉक्स, डोपामाइन फास्टिंग, टेक्नोलॉजी से ब्रेक या डिजिटल सब्बाथ भी कहा जाता है.
डॉक्टर से जानें डिजिटल फास्टिंग के फायदे
गुरुग्राम के न्यूरोमेट वैलनेस के न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर भुपेश कुमार मनसुखानी बताते हैं कि डिजिटल फास्टिंग अपनाने से जीवन में कई सकारात्मक बदलाव आते हैं. परिवार और दोस्तों के साथ रिश्ते बेहतर होते हैं. काम पर ध्यान बढ़ता है और उत्पादकता बढ़ती है.मानसिक तनाव कम होता है. सेहत में सुधार देखने को मिलता है. इसके अलावा खुद के लिए समय निकाल पाते हैं.
डिजिटल फास्टिंग क्यों जरूरी हो गई है?
आज स्क्रीन से जुड़ी आदत लत में बदलती जा रही है. समय के साथ स्क्रीन टाइम लगातार बढ़ा है. भारत में 2019 के मुकाबले कुछ ही सालों में मोबाइल इस्तेमाल में बड़ी बढ़ोतरी देखी गई. अब लोग रोजाना औसतन करीब 6 घंटे फोन पर बिता रहे हैं. मोबाइल स्क्रीन पर समय बिताने के मामले में भारत दुनिया के टॉप देशों में शामिल हो चुका है.
बच्चों और बुजुर्गों में बढ़ती चिंता
डिजिटल फास्टिंग से बच्चों और बुजुर्गों की स्थिति और भी गंभीर हो गई है. कई युवा रोजाना 8 घंटे तक ऑनलाइन रहते हैं. फोन और सोशल मीडिया का अधिक इस्तेमाल स्वभाव में चिड़चिड़ापन ला रहा है. मानसिक समस्याएं बढ़ रही हैं. नींद और एकाग्रता भी प्रभावित हो रही है.
डॉक्टर कब डिजिटल फास्टिंग की सलाह देते हैं?
जब फोन की लत से मानसिक और शारीरिक परेशानी बढ़ने लगती है, तब डॉक्टर डिजिटल फास्टिंग अपनाने की सलाह देते हैं. डिजिटल ब्रेक लेने से दिमाग को आराम मिलता है और जीवन में संतुलन बनता है.
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