India-China Relation: LAC पर घटी चीनी सैनिकों की संख्या; भारत के साथ रिश्तों में सुधार के संकेत
भारत और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों से जारी सीमा तनाव के बाद अब रिश्तों में स्थिरता और सुधार के सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने भारत से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर अपनी सेना की तैनाती में काफी कमी की है। लगातार जारी राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य वार्ताओं के परिणामस्वरूप उत्तरी सीमाओं पर स्थिति पहले से अधिक स्थिर और सामान्य हुई है।
एलएसी पर घटी चीनी सैनिकों की संख्या, 10 आर्म्स ब्रिगेड तक सीमित
रक्षा मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, एलएसी से सटे इलाकों और पारंपरिक ट्रेनिंग ग्राउंड्स में पीएलए की तैनाती घटकर काफी कम हो गई है। वर्तमान में वहां कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड के आकार की केवल 10 टुकड़ियां ही तैनात हैं। हालांकि, रक्षा मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि चीनी सैनिकों की वापसी के बावजूद एलएसी के सभी सेक्टरों में भारतीय सेना की स्थिति बेहद मजबूत, सतर्क और किसी भी संभावित या अचानक पैदा होने वाली चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
उच्चस्तरीय कूटनीतिक वार्ताओं और वार्ताओं के दौर का दिखा असर
सीमा पर आई इस नरमी के पीछे भारत और चीन के बीच फिर से शुरू हुए बहुस्तरीय संवाद को मुख्य कारण माना जा रहा है। वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन (WMCC) के 33वें और 34वें दौर की वार्ताएं और विशेष प्रतिनिधियों के स्तर की बैठकों ने सीमा विवाद को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई।
इसके अलावा, अगस्त 2025 में तियानजिन (एससीओ सम्मेलन) और हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बातचीत से दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा मिली है।
सौहार्दपूर्ण माहौल में जारी हैं कोर कमांडर और बॉर्डर मीटिंग्स
सैन्य स्तर पर भी दोनों देशों के बीच लगातार संवाद जारी है। 23वीं कोर कमांडर स्तर की बैठक के साथ-साथ विभिन्न सेक्टरों में पीएलए के साथ 'बॉर्डर पर्सनल मीटिंग्स' बेहद सौहार्दपूर्ण और दोस्ताना माहौल में हो रही हैं। इससे सीमा पर किसी भी संभावित गलतफहमी या गतिरोध को समय रहते सुलझाने में मदद मिल रही है।
वैश्विक परिदृश्य में भारत-चीन संबंधों का महत्व
हालिया ब्रिक्स सम्मेलन में पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने संबंधों में सुधार और सीमा पर शांति बनाए रखने पर जोर दिया। चीनी नेतृत्व ने भी माना कि दुनिया की दो सबसे बड़ी आबादी वाले देशों और ग्लोबल साउथ के प्रमुख सदस्यों के रूप में भारत और चीन की आपसी स्थिरता पूरे विश्व के लिए महत्वपूर्ण है।
ओमान के पास जहाज पर हमला: एक की मौत, 13 भारतीय नाविकों को बचाया, भारत ने जताया विरोध
मस्कट। ओमान के तट के पास एक कमर्शियल जहाज पर हुए हमले के बाद उसमें सवार 14 भारतीय नाविकों में से 13 को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि एक भारतीय नाविक मौत होने की खबर है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, एमटी एल गैया नामक कमर्शियल जहाज को ओमान के पास निशाना बनाया गया। हमले के बाद जहाज पर मौजूद भारतीय चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकालने के लिए तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। राहत एवं बचाव दल ने 13 भारतीय नाविकों को रेस्क्यू कर लिया गया है, जबकि एक सदस्य की मौत हो गई।
ओमान के साथ संपर्क में भारतीय दूतावास
विदेश मंत्रालय ने कहा कि ओमान स्थित भारतीय दूतावास पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रख रहा है और लापता भारतीय नाविक की तलाश में ओमानी अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है। समुद्री क्षेत्र में चल रहे सर्च ऑपरेशन के दौरान उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर तलाश जारी रखी जा रही है। भारत ने कमर्शियल जहाज को निशाना बनाए जाने की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव को तत्काल कम करने और शांति के लिए बातचीत तथा कूटनीति का रास्ता अपनाने की जरूरत बताई। मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों, नाविकों, आम नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जाना स्वीकार्य नहीं है।
सैन्य गतिविधियों ने बढ़ाई समुद्री सुरक्षा की चिंता
यह घटना ऐसे समय हुई है जब ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध के कारण पश्चिम एशिया का समुद्री क्षेत्र पहले से ही गंभीर तनाव में है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है और यहां किसी भी सैन्य घटना का असर तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। घटना के बीच ईरानी अधिकारियों ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में एक जहाज से जुड़ी घटना में एक व्यक्ति की मौत की भी जानकारी दी है। वहीं यमन में हाउती समूह ने सऊदी अरब के एक सैन्य ठिकाने पर हमले का दावा किया है। इस तरह क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में जारी सैन्य गतिविधियों ने समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
ट्रंप ने जताई ईरान में लंबे समय तक बने रहने की संभावना
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध को लेकर कहा है कि संघर्ष नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के तुरंत बाद समाप्त हो सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका ईरान में लंबे समय तक मौजूद रह सकता है और वहां के तेल संसाधनों से जुड़े हितों को अपने नियंत्रण में रखने का विकल्प भी खुला है। आयरलैंड यात्रा के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका केवल ऐसा समझौता करेगा जो उसके लिए ‘सही’ हो। उन्होंने दावा किया कि ईरान लगातार शांति वार्ता के लिए संपर्क कर रहा है, हालांकि तेहरान पहले ऐसे दावों को खारिज कर चुका है। ट्रंप ने ईरान में अमेरिकी मौजूदगी की तुलना वेनेजुएला से जुड़े अमेरिकी कदम से की।
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