नीमच में खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, 9 होटल-रेस्टोरेंट-रिसॉर्ट का निरीक्षण, 6 को नोटिस जारी, एक पर प्रकरण दर्ज
नीमच जिले में होटल, रेस्टोरेंट और रिसॉर्ट में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, स्वच्छता और सुरक्षित भंडारण व्यवस्था की जांच के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन का सघन निरीक्षण अभियान जारी है। नियंत्रक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, मध्यप्रदेश और जिला कलेक्टर एवं अपर कलेक्टर के निर्देशानुसार 12 से 16 सितंबर के बीच खाद्य सुरक्षा टीम ने जिले के 9 होटल, रेस्टोरेंट और रिसॉर्ट का औचक निरीक्षण किया।
इस दौरान खाद्य पदार्थों के 10 नमूने जांच के लिए कलेक्ट किए गए हैं। जबकि विभिन्न कमियां पाए जाने पर 6 संस्थानों को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 32 के तहत नोटिस जारी किए गए हैं।
अभियान के दौरान बुधवार को सीआरपीएफ चौराहा स्थित द फूड टॉक कैफे एंड रेस्टोरेंट का निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान यहां एक्सपायरी डेट के बाद भी खाद्य पदार्थों का भंडारण पाया गया। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार इन खाद्य पदार्थों का उपयोग कुकिंग में किया जा रहा था। मौके पर अग्रवाल्स 420 पापड़ के 400 ग्राम के 7 पैकेट, अमूल टोंड मिल्क के 1 लीटर के 3 पैकेट तथा डी-मार्ट जीरा का 1 किलोग्राम का 1 पैकेट एक्सपायरी डेट के बाद भी भंडारित मिला।
द फूड टॉक कैफे एंड रेस्टोरेंट पर प्रकरण दर्ज
खाद्य सुरक्षा टीम के निर्देश पर संबंधित खाद्य कारोबारकर्ता ने मौके पर ही एक्सपायरी खाद्य पदार्थों का विनष्टीकरण किया। मामले में जरूरी दस्तावेज तैयार कर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। वहीं खाद्य अनुज्ञप्ति की शर्तों का पालन नहीं पाए जाने पर धारा 32 के तहत नोटिस भी जारी किया गया है। नियमानुसार स्वीकृति के बाद प्रकरण एडीएम कोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा।
जांच के लिए भोपाल भेजे गए सैंपल
जांच अभियान के दौरान खाद्य प्रतिष्ठानों के किचन और उपकरणों की स्वच्छता, खाद्य पदार्थों के सुरक्षित भंडारण, एक्सपायरी एवं यूज्ड बाय डेट और खाद्य पदार्थों पर अंकित लेबल की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों द्वारा लिए गए 10 खाद्य नमूने जांच के लिए राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, भोपाल भेजे गए हैं। प्रयोगशाला की ओर से जांच रिपोर्ट में यदि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित खाद्य कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इन खाद्य संस्थानों को नोटिस जारी
अभियान के तहत होटल स्वास्तिक चल्दू, श्री सालासर होटल एवं रिसोर्ट बायपास रोड, वृंदावन ग्रीन कनावटी, HI-FI फैमिली रेस्टोरेंट सीआरपीएफ चौराहा और द फूड टॉक कैफे एंड रेस्टोरेंट सहित कुल 6 संस्थानों को धारा 32 के तहत नोटिस जारी किए गए हैं। संबंधित संस्थानों को निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों को दूर कर उसका पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि होटल, रेस्टोरेंट और रिसॉर्ट में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता न हो, इसके लिए निरीक्षण की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। विभाग की टीम खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के साथ-साथ साफ-सफाई, सुरक्षित भंडारण और एक्सपायरी खाद्य सामग्री के उपयोग पर विशेष निगरानी रख रही है।
नीमच से कमलेश सारडा की रिपोर्ट
नए राज्यपाल की नियुक्ति पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पद पर बने रहेंगे मंगुभाई पटेल, कोर्ट ने खारिज की राज्यपाल को हटाने की मांग वाली याचिका
मध्य प्रदेश में नए राज्यपाल की नियुक्ति में देरी को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए उसे खारिज कर दिया है। मामले में जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीजन बेंच ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 156 स्पष्ट रूप से यह व्यवस्था देता है कि नए उत्तराधिकारी के पदभार संभालने तक मौजूदा राज्यपाल अपने पद पर बने रहेंगे।
बता दें कि यह याचिका जबलपुर स्थित जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. एमए खान ने दायर की थी। वहीं याचिका में मांग की गई थी कि राज्यपाल मंगुभाई पटेल का पांच साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को राज्यपाल का प्रभार सौंपा जाए। हालांकि कोर्ट ने इस मांग को संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं माना है।
जानिए हाईकोर्ट ने क्या कहा?
दरअसल सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सबसे पहले जनहित याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाए। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट नियम 2008 के तहत जरूरी सामाजिक साख और जनहित से जुड़ी पृष्ठभूमि का पर्याप्त विवरण नहीं दिया था। कोर्ट ने इसे याचिका की शुरुआती कमी माना। इसके बाद अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 156(3) का उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल का कार्यकाल पांच साल का होता है लेकिन उसी अनुच्छेद के परंतुक में यह भी स्पष्ट है कि नया उत्तराधिकारी आने तक मौजूदा राज्यपाल पद पर बने रहेंगे। अदालत के मुताबिक इस व्यवस्था का उद्देश्य राज्य में संवैधानिक शून्य पैदा होने से रोकना है।
वहीं हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि किसी संवैधानिक पद पर कार्यकाल समाप्त होने का मतलब यह नहीं है कि वह पद तुरंत खाली हो जाए। जब तक नई नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी नहीं होती और नया राज्यपाल शपथ लेकर पदभार नहीं संभालता तब तक मौजूदा राज्यपाल का पद पर बने रहना पूरी तरह वैध और संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला
इसके साथ ही अपने फैसले को मजबूत करने के लिए हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 1969 के कृष्णा बल्लभ सहाय बनाम जांच आयोग मामले का भी हवाला दिया। अदालत ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि संवैधानिक पदों की निरंतरता बनाए रखना शासन व्यवस्था के लिए जरूरी है और राज्यपाल का पद खाली नहीं छोड़ा जा सकता। कोर्ट ने माना कि संविधान में राज्यपाल के पद की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए ही यह व्यवस्था बनाई गई है। इसलिए केवल कार्यकाल पूरा होने के आधार पर राज्यपाल को पद से हटाने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।
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