सेमीकंडक्टर फैब्स के लिए कुशल मैनपावर तैयार करना सबसे बड़ी जरूरत, 5 साल में भारत के इकोसिस्टम ने पकड़ी तेज रफ्तार: विशेषज्ञ
नई दिल्ली, 17 सितंबर (आईएएनएस)। सेमीकॉन इंडिया 2026 के दौरान गुरुवार को विशेषज्ञों ने कहा कि भारत का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विकसित हुआ है और अब सबसे बड़ा फोकस उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर होना चाहिए। गति शक्ति विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज चौधरी और फुजीफिल्म इंडिया के अभि शेखर सिंह ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में भारत की प्रगति, कौशल विकास और उद्योग में बढ़ती भागीदारी पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के दौरान, गति शक्ति विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज चौधरी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि यदि पांच वर्ष पहले की स्थिति को देखें तो भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण लगभग नगण्य था। उन्होंने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 1.0 के तहत 76,000 करोड़ रुपए के प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा के बाद 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाएं शुरू की गईं और पिछले 5 वर्षों में इन परियोजनाओं पर तेजी से काम हुआ है।
उन्होंने कहा कि यही बदलाव आज भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर मानचित्र पर एक उभरती हुई ताकत के रूप में स्थापित कर रहा है।
प्रो. चौधरी ने आगे कहा कि सेमीकंडक्टर्स केवल चिप डिजाइन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आधुनिक उद्योगों और परिवहन प्रणालियों का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों में ऑटोमैटिक डोर क्लोजर से लेकर विभिन्न सेंसर प्रणालियों तक लगभग सभी महत्वपूर्ण तकनीकें सेमीकंडक्टर्स और इलेक्ट्रॉनिक्स पर आधारित हैं। इसी जरूरत को देखते हुए विश्वविद्यालय टाटा समूह के साथ मिलकर सेमीकंडक्टर फैब कंस्ट्रक्शन मैनेजमेंट जैसे विशेष तकनीकी पाठ्यक्रम शुरू करने पर काम कर रहा है, ताकि देश में स्थापित होने वाली नई फैब इकाइयों के लिए आवश्यक कुशल मानव संसाधन तैयार किया जा सके।
प्रो. मनोज चौधरी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और छात्रों के बीच हुआ संवाद बेहद महत्वपूर्ण था। उन्होंने बताया कि भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश बन गया है जहां लगभग 400 विश्वविद्यालयों के छात्रों को चिप्स टू स्टार्टअप कार्यक्रम के तहत कैडेंस, सिनॉप्सिस और सीमेंस जैसे विश्वस्तरीय इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (ईडीए) टूल्स तक निःशुल्क पहुंच उपलब्ध कराई गई है।
उन्होंने बताया कि चिपइन सेंटर के माध्यम से छात्रों को अत्याधुनिक तकनीकों से जोड़ने की यह पहल भविष्य के सेमीकंडक्टर डिजाइनरों और इंजीनियरों को तैयार करने में अहम भूमिका निभाएगी।
फुजीफिल्म इंडिया के इलेक्ट्रॉनिक मैटेरियल्स डिवीजन के राष्ट्रीय प्रमुख (रणनीति एवं व्यवसाय विकास) अभि शेखर सिंह ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि भारत ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी यात्रा शुरू कर दी है, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
उन्होंने कहा कि सबसे सकारात्मक बात यह है कि उद्योग जगत, तकनीकी कंपनियां और विभिन्न संस्थान एक साथ आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि सेमीकॉन इंडिया का स्तर हर वर्ष लगातार बढ़ रहा है और इस वर्ष भी इसमें उल्लेखनीय विस्तार देखने को मिला है।
अभि शेखर सिंह ने आगे कहा कि उनकी कंपनी पिछले तीन वर्षों से इस आयोजन में भाग ले रही है और हर साल इसकी व्यापकता और प्रभाव बढ़ता दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी भी अपनी भागीदारी और गतिविधियों का विस्तार लगातार कर रही है।
--आईएएनएस
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
पूर्वी रेलवे की बड़ी पहल, कर्मचारियों और आश्रितों को टेलीमेडिसिन की सुविधा
कोलकाता, 17 सितंबर (आईएएनएस)। पूर्व रेलवे (ईआर) ने अपने कार्यरत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों तथा उनके आश्रितों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए अपने स्वास्थ्य केंद्रों में टेलीमेडिसिन सुविधा शुरू की है।
इस सुविधा के माध्यम से मरीजों को सियालदह स्थित प्रमुख बीआर सिंह अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श मिल सकेगा। इस श्रृंखला की नवीनतम टेलीमेडिसिन यूनिट का उद्घाटन गुरुवार को दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर स्वास्थ्य केंद्र में किया गया।
उद्घाटन समारोह में ईआर के प्रधान मुख्य चिकित्सा निदेशक नटराज बसप्पा, सियालदह मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) राजीव सक्सेना, चिकित्सा निदेशक देबासिस गुहा और बीआर सिंह अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक कल्पना मंडल मौजूद रहीं।
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि इस नई सुविधा के साथ टेलीमेडिसिन सेवाओं का विस्तार अब नैहाटी और घोलसापुर स्वास्थ्य इकाइयों तक कर दिया गया है। इससे पहले यह सुविधा रानाघाट, बारासात और बहरामपुर स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध थी।
इस विस्तार से विभिन्न क्षेत्रों के मरीज सीधे बीआर सिंह अस्पताल के विशेषज्ञों से जुड़ सकेंगे।
अधिकारियों के अनुसार, यह सुविधा विशेष रूप से उन मरीजों को ध्यान में रखकर शुरू की गई है, जिन्हें विशेषज्ञ उपचार के लिए सियालदह स्थित बीआर सिंह अस्पताल तक यात्रा करने में कठिनाई होती है।
अब सोनारपुर स्वास्थ्य केंद्र आने वाले मरीज टेलीकंसल्टेशन के जरिए सीधे विशेषज्ञ डॉक्टरों से बातचीत कर सकेंगे, अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं साझा कर सकेंगे और बिना लंबी यात्रा किए विशेषज्ञ सलाह प्राप्त कर सकेंगे।
रेलवे का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं को अधिक सुविधाजनक, सुलभ और मरीजों के अनुकूल बनाना है।
इस सुविधा से बीआर सिंह अस्पताल के आउट पेशेंट विभाग (ओपीडी) पर भी दबाव कम होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने भविष्य में टेली-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से स्वास्थ्य इकाइयों में छोटी सर्जरी (अस्पताल में भर्ती की जरूरत नहीं होती) कराने की संभावना से भी इनकार नहीं किया है।
इस अवसर पर सोनारपुर स्वास्थ्य केंद्र में एक बहु-विशेषज्ञ स्वास्थ्य जांच शिविर का भी आयोजन किया गया। इसमें कर्मचारियों और लाभार्थियों को नेत्र, दंत चिकित्सा और स्त्री रोग सहित विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों से परामर्श उपलब्ध कराया गया। लाभार्थियों का सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया।
डीआरएम राजीव सक्सेना ने कहा कि टेलीमेडिसिन सेवाओं का यह विस्तार सियालदह मंडल के उस निरंतर प्रयास का हिस्सा है, जिसके तहत कर्मचारियों और लाभार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं तथा चिकित्सा परामर्श को अधिक आसान और सुलभ बनाया जा रहा है।
--आईएएनएस
एएमटी/एबीएम
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