Varanasi में भाषण के दौरान CM Chandrababu Naidu ने हिंदी बोलकर जीता जनता का दिल
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने बृहस्पतिवार को वाराणसी में एक कार्यक्रम के दौरान बार-बार हिंदी का इस्तेमाल करके लोगों का दिल जीत लिया। हर-हर महादेव , भारत माता की जय और जय श्री राम के साथ अपना भाषण शुरू करने से लेकर अहम मौकों पर छोटे-छोटे हिंदी वाक्य बोलने तक नायडू ने भीड़ से जुड़ने के लिए इस का इस्तेमाल किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 76वां जन्मदिन मनाने और निर्वाचित प्रतिनिधि के तौर पर उनके 25 साल पूरे करने का जश्न मनाने के लिए आयोजित कार्यक्रम में नायडू ने कहा, ‘‘आज मैं काशी की पवित्र धरती पर खड़ा हूं।
यह मेरे लिए गर्व का क्षण है। काशी सबसे प्राचीन नगरी है और काशी नई सोच भी देती है।’’ उनकी इस बात पर भीड़ ने तालियां बजाईं। इस दौरान मंच पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष पंकज चौधरी मौजूद थे।
साथ ही उत्तर प्रदेश के कई मंत्री और विधायक भी शामिल थे। नायडू ने रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में लगभग 33 मिनट तक सभा को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में वाराणसी से वडनगर तक सेवा संकल्प बाइक यात्रा की शुरुआत भी की गयी।
नायडू ने अपना भाषण हिंदी में शुरू किया और फिर जल्द ही अंग्रेजी में बोलने लगे। भाषण शुरू होने के लगभग छह मिनट बाद उन्होंने रुककर दर्शकों से पूछा कि क्या वे चाहते हैं कि उनके भाषण का हिंदी में अनुवाद किया जाए। उन्होंने कहा, क्या आप चाहते हैं कि मेरे भाषण का हिंदी में अनुवाद किया जाए?
ऐसा भी किया जा सकता है। नायडू ने इसके बाद मौजूद लोगों की प्रतिक्रिया देखी और पाया कि ज्यादातर लोग कह रहे थे कि इसकी कोई जरूरत नहीं है। हालांकि, इसके तुरंत बाद उन्होंने हिंदी में बोलना शुरू किया और कहा, अन्नदाता मजबूत होगा तो देश मजबूत होगा।
इस पर दर्शकों ने जोरदार तालियां बजाईं और नारे लगाए। इसके बाद वह फिर से अंग्रेजी में बोलने लगे, लेकिन अपने बोलने के अंदाज को बदलते रहे। वह और ज्यादा जोश भरे अंदाज में बोले, खासकर तब जब उन्होंने कोविड महामारी के दौरान मोदी के नेतृत्व की तारीफ की।
एक और मौके पर उन्होंने अपने भाषण के बड़े राष्ट्रीय संदेश को बताने के लिए फिर से हिंदी का सहारा लिया। नायडू ने कहा, देश बदल रहा है, देश आगे बढ़ रहा है। उन्होंने भारत को नया भारत और आत्मनिर्भर भारत बताया।
उन्होंने सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास का भी जिक्र किया। नायडू जब अपना भाषण खत्म करके अपनी सीट की ओर बढ़े तो उनके साथ बैठे नेता खड़े हो गये। आदित्यनाथ ने नायडू से हाथ मिलाया और दर्शकों से अपनी सीट पर बैठने और शांत होने का इशारा किया।
नायडू के ठीक बाद कार्यक्रम को संबोधित करने वाले राजनाथ सिंह ने अपने भाषण की शुरुआत नायडू के भाषण की तारीफ करते हुए की। सिंह ने कहा, चंद्रबाबू नायडू जी, आपने बहुत अच्छा बोला, बहुत अच्छा।
TMC सांसद Mahua Moitra पहुंचीं UN, Amit Shah के दौरों में मुस्लिम अफसरों से भेदभाव का आरोप
तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों को लेकर संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरों के दौरान, वरिष्ठ मुस्लिम आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को उनके धर्म की वजह से आधिकारिक कार्यक्रमों से बाहर रखा गया। मोइत्रा ने कुछ दिन पहले, सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि उत्तर बंगाल में शाह के कार्यक्रमों से भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के मुस्लिम अधिकारियों को दूर रखा गया।
तृणमूल सांसद ने सिलीगुड़ी के पुलिस आयुक्त वकार रजा, पश्चिम बंगाल पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के प्रमुख जावेद शमीम और आईएएस अधिकारी खलील अहमद के नाम का उल्लेख किया था। बाद में, इस पोस्ट को लेकर डायमंड हार्बर पुलिस थाने में मोइत्रा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके बाद साइबर अपराध पुलिस ने पूछताछ के लिए उन्हें बुलाया था। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) में अल्पसंख्यक मामलों के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ निकोलस लेव्रैट को लिखे पत्र में मोइत्रा ने आरोप लगाया कि जुलाई और अगस्त में शाह के दौरों के दौरान तीन मौकों पर तीन वरिष्ठ अधिकारियों को या तो कार्यक्रम स्थल से जाने के लिए कहा गया या उन्हें आधिकारिक कार्यक्रमों के दौरान उपस्थित नहीं रहने को कहा गया।
अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ होते हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद द्वारा नियुक्त किया जाता है। उनका काम वैश्विक स्तर पर जागरूकता बढ़ाना, बाधाओं की पहचान करना तथा राष्ट्रीय, जातीय, धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करना है। मोइत्रा ने आरोप लगाया कि इन (आईएएस और आईपीएस) अधिकारियों को कार्यक्रम से बाहर रखा गया, जबकि दूसरे धर्म के उनके सहकर्मियों को उस दौरान उपस्थित रहने की इजाजत दी गई।
मोइत्रा ने पत्र में कहा, ‘‘इन तीनों अधिकारियों में एक बात समान है, और यही बात उन्हें उन सहकर्मियों से अलग करती है जिन्हें कार्यक्रम के दौरान मौजूद रहने की इजाजत दी गई थी -- और वह है उनका धर्म।’’ तृणमूल सांसद ने दावा किया कि जिन अधिकारियों को कथित तौर पर बाहर रखा गया, उनकी मौजूदगी केंद्रीय गृह मंत्री के दौरों के दौरान आधिकारिक प्रोटोकॉल और सरकारी कामकाज के संचालन से जुड़ी हुई थी। मोइत्रा ने पूर्व में आरोप लगाया था कि जब शाह मौजूद थे, तो वकार रजा को स्वागत करने वाले समूह में शामिल होने से रोक दिया गया था, जबकि जावेद शमीम को केंद्रीय मंत्री की भागीदारी वाले कार्यक्रमों में नहीं बुलाया गया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि खलील अहमद को एक बैठक से बाहर जाने के लिए मजबूर किया गया था।
‘पीटीआई-भाषा’ मोइत्रा के आरोपों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं कर सकी है। मोइत्रा ने इन कथित घटनाओं को ‘‘जानबूझकर बाहर रखने’’ का एक पैटर्न बताया और कहा कि इस तरह के व्यवहार से पुलिस और सुरक्षा प्रतिष्ठानों में अल्पसंख्यक समुदायों के विश्वास और सुरक्षा पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने अपनी शिकायत में मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा और नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय संधि के प्रावधानों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कथित व्यवहार भेदभावपूर्ण है।
मोइत्रा ने यह भी तर्क दिया कि (मुस्लिम अधिकारियों को) कथित तौर पर (आधिकारिक कार्यक्रमों से) बाहर रखा जाना इसलिए भी मायने रखता है कि शाह केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रमुख हैं, जिसके तहत कई केंद्रीय पुलिस, सीमा और खुफिया एजेंसियां आती हैं। तृणमूल नेता ने संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र विशेषज्ञ से आग्रह किया कि (अल्पसंख्यक अधिकारियों को आधिकारिक कार्यक्रमों से) कथित तौर पर बाहर रखने के कारणों और इसके पीछे के प्राधिकार के बारे में भारत सरकार से स्पष्टीकरण मांगा जाए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र विशेषज्ञ से यह सुनिश्चित करने का भी अनुरोध किया कि किसी भी अधिकारी को धर्म के आधार पर आधिकारिक कार्यक्रमों से बाहर न रखा जाए तथा पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां बिना किसी भेदभाव के अल्पसंख्यक समुदायों के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करें।
उन्होंने शाह के दौरों से संबंधित सीसीटीवी फुटेज, यात्रा डायरी और अन्य रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की भी मांग की। मोइत्रा ने संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र विशेषज्ञ से अनुरोध किया गया कि वह अपने अधिकार-क्षेत्र के तहत उपयुक्त लगने वाली कोई भी अन्य कार्रवाई करें।
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