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अमेरिका पर वेनेजुएला में सोनिक हथियार इस्तेमाल करने का आरोप:चश्मदीद गार्ड बोला- हमले के दौरान सैनिकों को खून की उल्टियां हुईं, नाक से खून बहा

अमेरिका पर वेनेजुएला में सोनिक हथियार इस्तेमाल करने का आरोप लगा है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी सेना ने एक बेहद शक्तिशाली और अब तक न देखे गए हथियार का इस्तेमाल किया, जिससे वेनेजुएला के सैनिक पूरी तरह बेबस हो गए थे। एक वेनेजुएलाई सिक्योरिटी गार्ड ने कहा कि ऑपरेशन शुरू होते ही उनके सभी रडार सिस्टम अचानक बंद हो गए। इसके कुछ ही सेकेंड बाद उन्होंने आसमान में बड़ी संख्या में ड्रोन उड़ते देखे। गार्ड के मुताबिक, उन्हें समझ ही नहीं आया कि इस हालात में क्या किया जाए। गार्ड ने आगे दावा किया कि ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी सेना ने एक सीक्रेट इक्विपमेंट का इस्तेमाल किया। यह किसी बहुत तेज आवाज या तरंग (साउंड वेब) जैसा था। इसके तुरंत बाद उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे उसका सिर अंदर से फट रहा हो। कई सैनिकों की नाक से खून बहने लगा और कुछ को खून की उल्टियां हुईं। सभी सैनिक जमीन पर गिर पड़े और कोई भी खड़ा होने की हालत में नहीं था। गार्ड ने कहा कि वह नहीं जानता कि यह कोई सोनिक हथियार था या कुछ और। इस कार्रवाई के एक चश्मदीद का बयान शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सामने आया, जिसे व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने शेयर किया। अमेरिका ने ऑपरेशन में सिर्फ 8 हेलिकॉप्टर इस्तेमाल किए न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक, इस ऑपरेशन में अमेरिका ने सिर्फ आठ हेलिकॉप्टर इस्तेमाल किए गए थे, जिनसे करीब बीस सैनिक उतरे। संख्या कम होने के बावजूद अमेरिकी सैनिकों ने बहुत जल्दी पूरे इलाके पर कंट्रोल हासिल कर लिया। गार्ड ने कहा कि अमेरिकी सैनिक तकनीक के मामले में बेहद आगे थे और वे ऐसे लग रहे थे जैसे पहले कभी उनका सामना नहीं हुआ हो। गार्ड ने इस मुठभेड़ को लड़ाई नहीं बल्कि एकतरफा हमला बताया। वेनेजुएला की तरफ सैकड़ों जवान मौजूद थे, लेकिन फिर भी वे टिक नहीं पाए। अमेरिकी सैनिक बहुत तेज और सटीक तरीके से फायरिंग कर रहे थे, जिससे मुकाबला नामुमकिन हो गया। अमेरिकी हमले में वेनेजुएला के 100 सैनिकों की मौत हुई थी व्हाइट हाउस की ओर से इस बात पर कोई रिस्पांस नहीं दिया गया कि प्रेस सेक्रेटरी की तरफ से शेयर इस पोस्ट को सरकारी पुष्टि माना जाए या नहीं। वहीं, वेनेजुएला के गृह मंत्रालय ने कहा है कि 3 जनवरी को हुई इस कार्रवाई में करीब 100 सुरक्षा कर्मियों की मौत हुई थी, हालांकि यह साफ नहीं है कि इनमें से कितनी मौतें इस सीक्रेट हथियार से हुईं थीं। अमेरिका के एक पूर्व सीक्रेट अधिकारी ने कहा कि इस तरह के लक्षण डायरेक्टेड एनर्जी हथियारों से मेल खाते हैं। उनके मुताबिक, ऐसे हथियार माइक्रोवेव या लेजर जैसी एनर्जी का इस्तेमाल करते हैं और इससे दर्द, खून बहना और शरीर को शॉर्ट टर्म पैरालिसिस किया जा सकता है। गार्ड ने यह भी कहा कि इस कार्रवाई के बाद पूरे लैटिन अमेरिका में डर का माहौल है, खासकर तब जब हाल ही में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि अब मेक्सिको भी लिस्ट में है। गार्ड ने इसे अमेरिका से लड़ने की सोच रखने वालों के लिए चेतावनी बताया और कहा कि इस घटना का असर सिर्फ वेनेजुएला तक सीमित नहीं रहेगा। वेनेजुएला पर हमले की 3 बड़ी वजह... 1. अमेरिका का कहना है कि वेनेजुएला की सरकार अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन रही थी और वहां से अमेरिका के खिलाफ साजिशें हो रही थीं। 2. ट्रम्प का आरोप है कि वेनेजुएला उनके देश में कोकीन और फेंटेनाइल जैसी खतरनाक ड्रग्स की तस्करी का बड़ा रास्ता बन चुका है। इसे खत्म करने के लिए मादुरो को सत्ता से हटाना जरूरी है। 3. ट्रम्प का आरोप है कि मादुरो की नीतियों से लाखों वेनेजुएलाई लोगों को देश छोड़ अमेरिका भागना पड़ा। उन्होंने जेल और मानसिक अस्पताल से अपराधियों को अमेरिका भेजा। किले की तरह सुरक्षित घर में थे मादुरो मिलिट्री ऑपरेशन के बाद ट्रम्प ने बताया था कि मादुरो राष्ट्रपति भवन में थे, जो किसी किले की तरह सुरक्षित था। वहां एक खास सेफ रूम था, जिसकी दीवारें पूरी तरह स्टील की थीं। मादुरो उस कमरे में घुसने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन अमेरिकी सैनिक इतनी तेजी से अंदर पहुंचे कि वे दरवाजा बंद ही नहीं कर पाए। जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के प्रमुख जनरल डैन केन ने बताया था कि इस ऑपरेशन की महीनों तक रिहर्सल की गई। अमेरिकी सेना को यह तक पता था कि मादुरो क्या खाते हैं, कहां रहते हैं, उनके पालतू जानवर कौन से हैं और वे कैसे कपड़े पहनते हैं। यहां तक कि मादुरो के घर जैसा नकली भवन बनाकर ट्रेनिंग की गई। ऑपरेशन पूरी तरह अंधेरे में किया गया। काराकस शहर की लाइटें बंद कर दी गईं, ताकि अमेरिकी सैनिकों को फायदा मिल सके। हमले के दौरान कम से कम 7 धमाके सुने गए। पूरा ऑपरेशन 30 मिनट से भी कम समय में खत्म हो गया। --------------- यह खबर भी पढ़ें... रिपोर्ट- ग्रीनलैंड पर हमले का प्लान बना रहे ट्रम्प:स्पेशल कमांडो को जिम्मेदारी सौंपी; जनरल बोले- राष्ट्रपति की जिद 5 साल के बच्चे जैसी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए प्लान बनाने का निर्देश दिया है। डेली मेल के मुताबिक ट्रम्प ने जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड (JSOC) को यह जिम्मेदारी सौंपी है। हालांकि सैन्य अधिकारी इस विचार से सहमत नहीं दिख रहे हैं। वे इसे कानूनी रूप से गलत मानते हैं। पढ़ें पूरी खबर...

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विरोध प्रदर्शन के इस दौर में जंजीबार क्रांति का जिक्र जरूरी, सुल्तान को देश छोड़कर भागना पड़ा था

नई दिल्ली, 11 जनवरी (आईएएनएस)। अफ्रीका के जंजीबार द्वीपों पर 12 जनवरी 1964 को एक गंभीर राजनीतिक बदलाव हुआ जब जंजीबार क्रांति के नाम से जाना जाने वाला विद्रोह साकार हुआ। इस विद्रोह में अफ्रीकी मूल के विद्रोही नेताओं ने द्वीप की सुल्तानी सरकार को सत्ता से हटा दिया, जो कि मुख्यतः अरब आबादी के नेतृत्व में थी।

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पहलवान सुशील कुमार ने सागर धनखड़ हत्याकांड में डाली नियमित जमानत याचिका, क्या दलील?

पहलवान सुशील कुमार ने पहलवान सागर धनखड़ हत्याकांड में नियमित जमानत की मांग करते हुए दिल्ली की एक अदालत में याचिका डाली है। उन्होंने बदले हुए हालात को देखते हुए अर्जी डाली है। Tue, 13 Jan 2026 00:47:52 +0530

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