Disha Salian Case: भाई Aaditya Thackeray के बचाव में आए Amit Thackeray, कहा- वो शामिल नहीं हो सकते
महाराष्ट्र नवर्निमाण सेना के नेता अमित ठाकरे ने शुक्रवार को अपने चचेरे भाई और शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे का बचाव करते हुए कहा कि वे दिशा सालियन की मौत के मामले में कभी शामिल नहीं हो सकते। उनके ये बयान आदित्य के उस बयान के कुछ दिनों बाद आए हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि वे सालियन को न तो जानते थे और न ही उनसे कभी मिले थे, और आरोप लगाया था कि राजनीतिक विरोधी उन्हें इस मामले से जोड़कर उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। ये बयान तब आए जब CBI ने सालियन के पिता की याचिका पर बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार इस मामले में बिना किसी आरोपी का नाम लिए FIR दर्ज की। हाई कोर्ट ने पहले CBI जांच का आदेश दिया था और छह साल तक FIR दर्ज न करने के लिए मुंबई पुलिस की आलोचना की थी।
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मनसे प्रमुख राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मुझे नहीं पता कि इसे किस नज़रिए से देखा जाए, लेकिन एक भाई के तौर पर मैं कह सकता हूं कि आदित्य कभी भी ऐसी किसी चीज़ में शामिल नहीं हो सकते। दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की 28 वर्षीय पूर्व मैनेजर दिशा सालियन की 8 जून, 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक रिहायशी इमारत की 12वीं मंज़िल से गिरने के बाद मौत हो गई थी। मुंबई पुलिस ने दुर्घटनावश मौत का मामला दर्ज किया था और बाद में जांच के बाद कहा था कि यह आत्महत्या का मामला था। एक हफ़्ते बाद, 14 जून 2020 को राजपूत अपने बांद्रा वाले अपार्टमेंट में मृत पाए गए, जिससे दोनों मौतों के बीच किसी संभावित संबंध को लेकर अटकलें लगने लगीं। 2 सितंबर को बॉम्बे हाई कोर्ट ने सालियन की मौत की CBI जांच का आदेश दिया और छह साल तक FIR दर्ज न करने के लिए मुंबई पुलिस को फटकार लगाई; कोर्ट ने कहा कि पुलिस की जांच से जवाब के बजाय और ज़्यादा सवाल खड़े हुए हैं।
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सीबीआई की एफआईआर के बाद, आदित्य ने बुधवार को एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि "राजनीतिक मकसद वाले ऐसे बुरे प्रोपेगैंडा" उन्हें सच के लिए लड़ने से नहीं रोक पाएंगे। उन्होंने लिखा, "आइए शोर-शराबे को छोड़कर एक बार फिर तथ्यों पर बात करते हैं: मैं दिशा सालियान से कभी नहीं मिला और न ही उन्हें जानता हूँ। लगभग 6 सालों से कुछ लोग साफ राजनीतिक और निजी मकसद से मेरे नाम को इस दुखद मामले से लगातार जोड़ रहे हैं; यह मेरी छवि खराब करने की एक सोची-समझी और बिना सबूत वाली कोशिश है।" इन घटनाक्रमों ने मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है; अमित ठाकरे आदित्य का समर्थन कर रहे हैं और हाई कोर्ट के आदेश के बाद CBI अब सालियान की मौत की जांच कर रही है।
DUSU Election रिजल्ट के बाद विजय जुलूसों पर Delhi High Court ने लगाई पूरी तरह रोक
दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद विजय जुलूसों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का शुक्रवार को आदेश दिया। अदालत ने सभी छात्र संगठनों और उम्मीदवारों से यह भी बताने को कहा कि चुनाव अभियान के दौरान हुए नुकसान के लिए उन पर जुर्माना क्यों नहीं लगाया जाना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने यह निर्देश देते हुए कहा कि डूसू चुनाव के दौरान लिंगदोह समिति की सिफारिशों का बार-बार और खुले तौर पर उल्लंघन किया गया।
शुक्रवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के परिसरों में मतदान जारी है। मतगणना शनिवार को की जायेगी। अदालत ने कहा, ‘‘छात्रों, उम्मीदवारों और छात्र संगठनों की ओर से बार-बार किये गये उल्लंघनों को देखते हुए, हम न केवल नियमों का उल्लंघन करने वाले छात्रों, बल्कि छात्र संगठनों पर भी जुर्माना लगाने का प्रस्ताव रखते हैं।’’ अदालत ने कहा, ‘‘छात्र संगठन और छात्र यह बताते हुए अपना जवाब दाखिल करेंगे कि आर्थिक दंड का भार उन पर क्यों नहीं डाला जाना चाहिए।’’ इसने कहा, ‘‘पिछले अनुभवों को देखते हुए, हम निर्देश देते हैं कि उम्मीदवारों, छात्रों, समर्थकों या किसी अन्य व्यक्ति की ओर से नतीजे घोषित होने के बाद न केवल दिल्ली की सड़कों पर, बल्कि परिसरों और छात्रावासों के भीतर भी कोई विजय जुलूस नहीं निकाला जायेगा।’’ अदालत ने यह भी कहा कि किसी भी विजय जुलूस को नहीं निकलने देना दिल्ली पुलिस की जिम्मेदारी होगी।
इसने कहा कि अधिकारियों को कोई भी कार्रवाई करने में ‘‘संकोच’’ नहीं करना चाहिए, भले ही वे ‘‘छात्र’’ हों। पीठ ने कहा कि इस आदेश का उल्लंघन करने पर आपराधिक और प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ अदालत की अवमानना की कार्यवाही भी की जायेगी। मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय ने कहा, ‘‘पुलिस अधिकारियों को झिझकना नहीं चाहिए।
उन्हें किसी भी तरह से केवल इसलिए मजबूर महसूस नहीं करना चाहिए क्योंकि वे छात्र हैं। मुझे यह कहते हुए खेद है कि वे छात्र नहीं हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘क्या हथियार लहराने वाले किसी भी व्यक्ति को छात्र कहा जा सकता है? लग्जरी कारों के काफिले में घूमते हैं।
उन्हें यह पैसा कहां से मिलता है?’’ उन्होंने कहा कि ये छात्र वास्तविक छात्रों को दी जाने वाली सुविधाओं को हड़प रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “और ये छात्र संगठन क्या कर रहे हैं, मुझे नहीं पता।’’ अदालत ने दोहराया कि लिंगदोह समिति की रिपोर्ट और डूसू चुनाव कराने को लेकर उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेशों का उल्लंघन न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए सभी संभव कदम और उपाय करना पुलिस तथा दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है। अदालत अधिवक्ता प्रशांत मनचंदा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि बुधवार को कुछ लोगों ने दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस क्षेत्र को बाधित कर दिया और प्रोफेसरों तथा छात्रों के साथ मारपीट की गई।
डूसू चुनाव से संबंधित मनचंदा की याचिका अदालत में लंबित है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें शिक्षकों और छात्रों की ओर से संदेश मिले, जिनमें कहा गया था कि ‘‘बंदूकों का इस्तेमाल किया गया है और पूरे परिसर पर एक तरह से कब्जा कर लिया गया है’’। दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को अदालत को बताया कि उसने कानून के उल्लंघन के मामले में कार्रवाई की है, जिसमें प्राथमिकी दर्ज करना और कुछ छात्रों को गिरफ्तार करना शामिल है।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि 998 चालान जारी किए गए और 30 कार को जब्त किया गया। उन्होंने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने एक छात्र को निष्कासित कर दिया है और कुछ कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए हैं। अदालत ने कहा, ‘‘हमें उनके कारण बताओ नोटिस के बारे में जानकारी नहीं है, क्योंकि पिछले साल कुछ नहीं हुआ था।
हम इस बात पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहे हैं कि दिल्ली विश्वविद्यालय किस तरह नियमित तौर पर कारण बताओ नोटिस जारी कर रहा है, लेकिन उनका पालन नहीं कर रहा है और उन्हें उनके तार्किक निष्कर्ष तक नहीं पहुंचा रहा है।’’ अदालत ने कहा कि साल दर साल कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा है। इसने कहा, ‘‘जरा देखिए, चुनाव जीतने के बाद एक छात्र शिक्षक को थप्पड़ मार रहा है। इसकी कल्पना कौन कर सकता था?
किसी भी जीत से आपको विनम्र बनना चाहिए।’’ पीठ ने निर्देश दिया कि पुलिस द्वारा शुरू की गई आपराधिक कार्रवाई को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाए। सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस से यह स्पष्ट करने को कहा कि सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद दिल्ली विश्वविद्यालय परिसरों के अंदर और आसपास “हुड़दंग” करने तथा बिना नंबर प्लेट वाली कारों और वाहनों के काफिलों को चलने की अनुमति कैसे दी गई। अदालत ने मनचंदा को उल्लंघनों से संबंधित रिकॉर्ड संकलित करने को कहा और मामले को नवंबर में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
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