Rise And Fall 2: प्रियंका चाहर चौधरी से स्वरा भास्कर तक, 'राइज एंड फॉल 2' में नजर आएंगे ये सितारें
Rise And Fall 2: रियलिटी शो 'राइज एंड फॉल' का दूसरा सीजन जल्द ही शुरू होने वाला है. कुछ दिनों पहले ही इसका ऐलान हुआ और इस बार अशनीर ग्रोवर (Ashneer Grover) की जगह पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग (Virendra Sehwag) शो को होस्ट करेंगे. वहीं, अब इसका नया प्रोमो सामने आया है, जिसमें कई कंटेस्टेंट के चेहरे भी रिवील कर दिए गए हैं. चलिए जानते हैं, शो में कौन-कौन से सितारें नजर आने वाले हैं.
‘राइज एंड फॉल 2’ के कंटेस्टेंट
हाल ही में राइज एंड फॉल के मेकर्स ने अपने ऑफिशियल एक्स हैंडल सीजन 2 का नया प्रोमो शेयर किया है. इसमें होस्ट सहवाग के अलावा चार कंटेस्टेंट की झलक भी देखने को मिलती है. जिनमें स्वरा भास्कर (Swara Bhasker), करण पटेल (Karan Patel), प्रियंका चाहर चौधरी (Priyanka Chahar Choudhary) और शहजाद पूनावाला (Shehzad Poonawalla) का नाम शामिल है.
कैसा है प्रोमा?
राइज एंड फॉल 2 के प्रोमो में सुनाई देता है कि गेम में चुनौतियां काफी हैं, लेकिन सभी के तेवर तीखे हैं. वहीं प्रियंका साफ कहती हैं, 'राजा हो जाए रंक, जब पड़े एक नागिन का डंक'. इसके अलावा स्वरा भास्कर भी पूनावाला को शिकस्त देने की तैयारी में जुटी दिखीं. प्रोमो में साफ नजर आया कि स्वरा का बेबाक अंदाज देखने को मिलेगा. वहीं, पूनावाला प्राइमटाइम की लाइमलाइट से हटकर एक अलग तरह के कॉम्पिटिशन में शामिल हो रहे हैं. प्रियंका एक ऐसे फॉर्मेट में वापसी कर रही हैं, जहां रणनीति और टाइमिंग बहुत अहम हैं. वहीं, जाने-माने टीवी एक्टर करण पटेल भी अपने अंदाज में दिखें.
26th Sept se maza toh bahut aayega ????
— prime video IN (@PrimeVideoIN) September 17, 2026
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क्या है शो का कॉन्सेप्ट?
'राइज एंड फॉल' एक सोशल एक्सपेरिमेंट आधारित रियलिटी शो है. इसमें कंटेस्टेंट्स को दो हिस्सों में बांटा जाता है. एक तरफ 'रूलर्स' होते हैं, जो आलीशान जिंदगी जीते हैं और फैसले लेते हैं. दूसरी तरफ 'वर्कर्स' होते हैं, जिन्हें टास्क पूरे करने होते हैं. वहीं, खेल में समय-समय पर पावर बदलती रहती है और कोई भी कंटेस्टेंट ऊपर से नीचे या नीचे से ऊपर पहुंच सकता है. इस शो का ये कॉन्सेप्ट इसे बाकी रियलिटी शोज से अलग बनाता है.
पहले सीजन के विनर थे अर्जुन
बता दें,'राइज एंड फॉल' के पहले सीजन को टीवी एक्टर अर्जुन बिजलानी ने जीता था. शो में उनके अलावा धनश्री वर्मा, आदित्य नारायण, किकू शारदा, कुब्रा सैत, संगीता फोगाट, पवन सिंह, आरुष भोला, अरबाज पटेल, आहाना कुमरा, आकृति नेगी, अनाया बांगर, नयनदीप रक्षित और रैपर बाली जैसे कई चर्चित चेहरे नजर आए थे. वहीं, शो में कुछ दिनों के लिए भोजपुरी स्टार पवन सिंह को भी देखा गया था.
कुल 15 कंटेस्टेंट आएंगे नजर
‘राइज एंड फॉल 2’ में कुल 15 कंटेस्टेंट हिस्सा लेंगे. फिलहाल मेकर्स की ओर से चार नाम रिवील कर दिए गए हैं. अब बाकी 11 नामों को खुलासा जल्द हो जाएगा. रिपोर्ट्स के मुताबकि, फैसल शेख (Mr. Faisu), अर्चना गौतम, शिव ठाकरे, उर्फी जावेद, राजीव अदातिया, सना मकबूल, सौरव जोशी और गौरव तनेजा जैसे नामों की चर्चा हो रही है. बता दें, ये शो 26 सितंबर से रोज दोपहर 12 बजे स्ट्रीम किया जाएगा,. इस शो को आप प्राइम वीडियो और एमएक्स प्लेयर पर देख सकेंगे. शो को वीरेंद्र सहवाग होस्ट करेंगे.
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लुधियाना की 14 विधानसभा सीटों में किस दल का रहा दबदबा? समझें समीकरण
पंजाब का लुधियाना सिर्फ राज्य का बड़ा औद्योगिक और कारोबारी केंद्र नहीं है, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण जिला है. राज्य में कुल 117 विधानसभा सीटें हैं और इनमें से 14 सीटें अकेले लुधियाना जिले में आती हैं. यही वजह है कि पंजाब की सत्ता के समीकरण में लुधियाना का राजनीतिक रुख महत्वपूर्ण माना जाता है. जिले में शहरी और ग्रामीण मतदाताओं का अलग-अलग सामाजिक आधार है और यहां कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल, बीजेपी और आम आदमी पार्टी सभी ने अलग-अलग चुनावों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है.
2017 में कांग्रेस ने जिले की 14 में से 8 विधानसभा सीटें जीती थीं, जबकि 2022 में आम आदमी पार्टी ने 13 सीटों पर जीत दर्ज की और सिर्फ दाखा सीट शिरोमणि अकाली दल के खाते में गई. लुधियाना वेस्ट में 2025 के उपचुनाव में AAP के संजीव अरोड़ा ने कांग्रेस के भारत भूषण आशु को हराया.
ऐसे में लुधियाना की राजनीति को समझने के लिए इसके इतिहास, सामाजिक संरचना और चुनावी इतिहास को एक साथ देखना जरूरी है.
लुधियाना नाम कैसे पड़ा?
लुधियाना शहर का इतिहास लोदी वंश के दौर से जुड़ा है. जिला प्रशासन के अनुसार, दिल्ली में लोदी शासन के दौरान सुल्तान सिकंदर लोदी के समय यूसुफ खान और निहंग खान को इस क्षेत्र में व्यवस्था स्थापित करने के लिए भेजा गया था.
उस समय यहां 'मीर होता' नाम का एक गांव था. निहंग खान ने इसी स्थान पर नई बस्ती बसाई, जिसे शुरुआत में 'लोदी-आना' कहा गया. समय के साथ यही नाम बदलकर लुधियाना हो गया.
लुधियाना सतलुज नदी के पुराने किनारे के पास विकसित हुआ. बाद में व्यापार, सड़क और रेलवे संपर्क ने इसे पंजाब के महत्वपूर्ण व्यापारिक शहरों में बदल दिया.
ब्रिटिश दौर में जिला बना लुधियाना
पहले एंग्लो-सिख युद्ध के बाद 1846-47 के दौर में ब्रिटिश प्रशासन ने इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत की. उपलब्ध ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, विभिन्न क्षेत्रों को मिलाकर 1847 में लुधियाना जिले का गठन किया गया. 1857 के विद्रोह और उसके बाद के दौर में भी यह क्षेत्र प्रशासनिक और सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा.
19वीं और 20वीं सदी में रेलवे और व्यापारिक संपर्क बढ़ने के साथ लुधियाना का औद्योगिक विकास तेज हुआ। 20वीं सदी की शुरुआत में यहां होजरी और टेक्सटाइल उद्योग विकसित होने लगे. बाद में साइकिल पार्ट्स, मशीनरी और दूसरे छोटे-बड़े उद्योगों ने इसे पंजाब के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शामिल कर दिया.
आज का लुधियाना: पंजाब का औद्योगिक केंद्र
लुधियाना को पंजाब की औद्योगिक अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण केंद्रों में गिना जाता है. यहां होजरी, टेक्सटाइल, साइकिल और साइकिल पार्ट्स, मशीनरी तथा इंजीनियरिंग से जुड़े उद्योगों का बड़ा नेटवर्क है.
शहरी आबादी और ग्रामीण क्षेत्र के बीच आर्थिक-सामाजिक अंतर भी जिले की राजनीति को प्रभावित करता है. एक तरफ लुधियाना शहर की घनी और औद्योगिक आबादी है, वहीं दूसरी ओर दाखा, रायकोट, जगरांव, पायल और गिल जैसे क्षेत्रों में ग्रामीण और कृषि आधारित सामाजिक संरचना ज्यादा महत्वपूर्ण है.
लुधियाना की जनसंख्या कितनी है?
2011 की जनगणना के अनुसार लुधियाना जिले की कुल आबादी 34,98,739 थी. इनमें 18,67,816 पुरुष और 16,30,923 महिलाएं थीं. जिले का सेक्स रेशियो 873 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष था.
श्रेणी - आबादी
कुल जनसंख्या - 34,98,739
पुरुष - 18,67,816
महिला - 16,30,923
लिंगानुपात - 873 महिलाएं/1000 पुरुष
2011 में जिले की आबादी का करीब 56 प्रतिशत हिस्सा शहरी क्षेत्रों में और करीब 44 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में था. जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार शहरी आबादी करीब 19.71 लाख और ग्रामीण आबादी करीब 15.28 लाख थी.
नोट: जनसंख्या और धार्मिक आंकड़ों के लिए यहां 2011 Census के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है. नई जनगणना के पूर्ण जिला-स्तरीय आंकड़े उपलब्ध होने तक इन्हें वर्तमान आबादी का सटीक अनुमान नहीं माना जाना चाहिए.
लुधियाना की साक्षरता दर: पुरुष और महिला में कितना अंतर?
2011 की जनगणना के मुताबिक लुधियाना जिले की कुल साक्षरता दर करीब 82.20 प्रतिशत थी. पुरुष साक्षरता 85.98 प्रतिशत, जबकि महिला साक्षरता 77.88 प्रतिशत थी.
साक्षरता - दर
कुल साक्षरता - 82.20%
पुरुष साक्षरता - 85.98%
महिला साक्षरता - 77.88%
पुरुष-महिला अंतर - 8.10 प्रतिशत अंक
यानी जिले में पुरुषों की साक्षरता दर महिलाओं से करीब 8.1 प्रतिशत अंक अधिक थी. यह अंतर शहरी और ग्रामीण इलाकों के सामाजिक-आर्थिक अंतर के साथ भी जुड़ा हुआ है.
लुधियाना में किस धर्म की कितनी आबादी?
लुधियाना शहर और जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में धार्मिक संरचना एक जैसी नहीं है. 2011 के आंकड़ों में शहर के कुछ हिस्सों में हिंदू आबादी का अनुपात अधिक दिखाई देता है, जबकि जिले के कई ग्रामीण और दक्षिणी हिस्सों में सिख आबादी का अनुपात ज्यादा है.
लुधियाना की राजनीति: कांग्रेस से अकाली दल और AAP तक
लुधियाना का चुनावी इतिहास किसी एक पार्टी के स्थायी वर्चस्व की कहानी नहीं है. अलग-अलग दौर में कांग्रेस, SAD-BJP गठबंधन और AAP ने यहां मजबूत प्रदर्शन किया है.
2007: SAD-BJP का प्रभाव
2007 के विधानसभा चुनाव में लुधियाना जिले के पुराने परिसीमन के तहत शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में SAD-BJP गठबंधन का प्रभाव देखने को मिला. लुधियाना नॉर्थ और लुधियाना ईस्ट में बीजेपी ने जीत हासिल की, जबकि लुधियाना वेस्ट, लुधियाना ग्रामीण और समराला जैसे क्षेत्रों में अकाली दल के उम्मीदवार विजयी रहे.
कांग्रेस ने भी पायल और कूम कलां जैसी सीटों पर जीत दर्ज की. इस दौर में अकाली दल और बीजेपी का गठबंधन जिले की राजनीति में महत्वपूर्ण शक्ति था.
2012: कांग्रेस और अकाली दल में बराबरी
2012 के विधानसभा चुनाव में लुधियाना जिले की 14 सीटों में:
-कांग्रेस ने 6 सीटें
-SAD ने 6 सीटें
-अन्य ने 2 सीटें जीती थीं.
यानी 2012 में जिले का राजनीतिक मुकाबला काफी संतुलित था. शहरी क्षेत्रों में कांग्रेस और बीजेपी के बीच मुकाबला रहा, जबकि ग्रामीण इलाकों में अकाली दल की मजबूत उपस्थिति दिखाई दी.
2017: कांग्रेस का बड़ा उभार
2017 का चुनाव लुधियाना के राजनीतिक इतिहास में महत्वपूर्ण मोड़ रहा. कांग्रेस ने जिले की 14 में से 8 सीटें जीत लीं. AAP ने 3 और लोक इंसाफ पार्टी ने 2 सीटें जीतीं, जबकि SAD को सिर्फ 1 सीट मिली। बीजेपी जिले में अपना खाता भी नहीं खोल सकी.
यह परिणाम कांग्रेस की जिले में मजबूत वापसी का संकेत था. साथ ही AAP और लोक इंसाफ पार्टी के प्रदर्शन ने यह भी दिखाया कि पंजाब की पारंपरिक दो-दलीय राजनीति में नई राजनीतिक ताकतें जगह बना रही थीं.
2022: AAP की एकतरफा बढ़त
2022 में तस्वीर पूरी तरह बदल गई. आम आदमी पार्टी ने लुधियाना की 14 में से 13 सीटें जीत लीं. केवल दाखा सीट SAD के मनप्रीत सिंह अयाली के पास गई. यह जिले के चुनावी इतिहास में सबसे बड़े बदलावों में से एक था.
2022 के आधिकारिक चुनाव परिणामों में AAP उम्मीदवारों ने अधिकांश सीटों पर स्पष्ट बढ़त बनाई थी, जबकि दाखा में SAD के मनप्रीत सिंह अयाली विजयी रहे.
2025 में लुधियाना वेस्ट उपचुनाव ने फिर बदली तस्वीर
लुधियाना वेस्ट के AAP विधायक गुरप्रीत सिंह गोगी के निधन के बाद 2025 में इस सीट पर उपचुनाव हुआ. इसमें AAP के संजीव अरोड़ा ने कांग्रेस के भारत भूषण आशु को 10,637 वोटों से हराया. अरोड़ा को 35,179 वोट मिले, जबकि आशु को 24,542 वोट मिले. इस तरह 2022 में गोगी के जीतने के बाद खाली हुई सीट पर AAP ने दोबारा कब्जा बरकरार रखा.
किस दल का रहा लुधियाना में दबदबा?
लुधियाना की राजनीति को एक ही पार्टी के स्थायी गढ़ के रूप में देखना मुश्किल है. चुनावी आंकड़े अलग-अलग समय में अलग तस्वीर दिखाते हैं.
-2007 में SAD-BJP गठबंधन का प्रभाव मजबूत था
-2012 में कांग्रेस और SAD ने 6-6 सीटें जीतीं
-2017 में कांग्रेस 8 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी
-2022 में AAP ने 14 में से 13 सीटें जीतकर लगभग पूरे जिले में बढ़त बना ली
-2025 के लुधियाना वेस्ट उपचुनाव में भी AAP ने अपनी सीट बरकरार रखी
इससे साफ है कि लुधियाना में राजनीतिक आधार समय के साथ बदलता रहा है. कांग्रेस का पुराना शहरी आधार, अकाली दल की ग्रामीण-सिख राजनीति, बीजेपी की शहरी मौजूदगी और 2017 के बाद AAP का विस्तार इन सभी ने जिले की चुनावी तस्वीर को अलग-अलग समय पर प्रभावित किया है.
लुधियाना की राजनीति में शहर बनाम ग्रामीण क्षेत्र
लुधियाना की चुनावी राजनीति की एक बड़ी विशेषता इसका शहरी-ग्रामीण मिश्रण है. शहरी क्षेत्रों में रोजगार, उद्योग, व्यापार, बुनियादी ढांचा, ट्रैफिक, प्रदूषण और स्थानीय निकाय से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण होते हैं. दूसरी तरफ ग्रामीण विधानसभा क्षेत्रों में खेती, ग्रामीण सड़कें, सिंचाई, रोजगार, मंडियां और सामाजिक समीकरण चुनावी चर्चा के केंद्र में रहते हैं. यही कारण है कि किसी एक विधानसभा सीट का चुनावी रुझान पूरे जिले पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता.
2027 के चुनाव से पहले क्यों महत्वपूर्ण है लुधियाना?
पंजाब की राजनीति में लुधियाना का महत्व सिर्फ इसकी आबादी की वजह से नहीं है. जिले की 14 विधानसभा सीटें किसी भी पार्टी के लिए राज्य में बहुमत के समीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं.
2022 में AAP ने यहां लगभग क्लीन स्वीप किया था। 2017 में कांग्रेस ने 8 सीटें जीती थीं. इससे यह संकेत मिलता है कि लुधियाना का मतदाता चुनाव-दर-चुनाव राजनीतिक विकल्प बदल सकता है. 2025 के लुधियाना वेस्ट उपचुनाव में AAP की जीत ने कम से कम उस सीट पर उसके आधार को बनाए रखा.
चुनाव में लुधियाना में मुकाबले को समझने के लिए सिर्फ पार्टी के पुराने प्रदर्शन को देखना पर्याप्त नहीं होगा. शहरी-ग्रामीण विभाजन, औद्योगिक मुद्दे, स्थानीय उम्मीदवार, मौजूदा सरकार का प्रदर्शन और अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के सामाजिक समीकरण भी महत्वपूर्ण रहेंगे.
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