Semicon 2.0 में चिप डिजाइन पर मुख्य फोकस, 200 स्टार्टअप को मदद देगी सरकार
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार देश के सेमीकंडक्टर मिशन के अगले चरण ‘सेमीकॉन 2.0’ के तहत भारत में चिप डिजाइन करने वाले कम से कम 200 स्टार्टअप और कंपनियों को बढ़ावा देगी। ‘सेमीकॉन इंडिया 2026’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए वैष्णव ने कहा कि चिप डिजाइन सेमीकॉन 2.0 के छह स्तंभों में पहला होगा। उन्होंने बताया कि मिशन के पिछले चरण में 105 से अधिक स्टार्टअप ने चिप डिजाइन के क्षेत्र में प्रयास किया था, जिनमें से करीब 20 को लगभग 800 करोड़ रुपये की उद्यम पूंजी मिली थी।
उन्होंने कहा, ‘‘वह महज शुरुआत थी। इस बार हमारा लक्ष्य बहुत बड़ा है। हम सेमीकंडक्टर की जरूरतों के पूरे दायरे में भारत में चिप डिजाइन करने वाले कम से कम 200 स्टार्टअप और कंपनियों को लक्ष्य बनाएंगे।’’ मंत्री ने कहा कि देश ने पिछले कुछ वर्षों में ‘सेमीकॉन 1.0’ के जरिये घरेलू सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए बुनियादी आधार तैयार किया है।
यह एक योजनाबद्ध कार्यक्रम था, जिसका मकसद प्रतिभाओं को बढ़ावा देना और परिवेश तैयार करना था। वैष्णव ने कहा, ‘‘अब हमें इस नींव पर इमारत खड़ी करनी है।’’ उन्होंने मिशन के अगले चरण की रूपरेखा बताते हुए कहा कि इसके छह स्तंभ चिप डिजाइन, मशीन व सामग्री, चिप विनिर्माण संयंत्र, उन्नत पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास तथा प्रतिभा हैं। सम्मेलन में 28 से अधिक देशों की भागीदारी है।
कार्यक्रम की शुरुआत के पांच साल पहले प्रधानमंत्री से मिली सीख को याद करते हुए वैष्णव ने कहा, ‘‘निकट अवधि के बारे में मत सोचो, दीर्घकाल के बारे में सोचो। केवल विनिर्माण संयंत्र (फैब) के बारे में मत सोचो, पूरे परिवेश के बारे में सोचो।’’ उन्होंने कहा कि यही सोच मिशन की रूपरेखा को लगातार दिशा देती रही है। सेमीकॉन 2.0 के तहत सरकार भारत में आने वाले सेमीकंडक्टर कारखानों में सीधे रोजगार के लिए एक लाख कुशल तकनीशियन, ‘क्लीनरूम’ कर्मचारियों और कारखाने के उत्पादन क्षेत्र के कर्मचारियों को तैयार करने का अतिरिक्त लक्ष्य रखेगी।
इससे वैश्विक स्तर पर प्रतिभाओं का एक पूल तैयार होगा। वैष्णव ने ‘सेमीकॉन मिशन’ को लंबी यात्रा बताते हुए कहा कि अब तक तैयार की गई नींव 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र या ‘विकसित भारत’ बनाने के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता तैयार करेगी। ‘सिलिकॉन टू सिस्टम्स: बिल्डिंग द इकोसिस्टम’ विषय पर आयोजित सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन बृहस्पतिवार को नयी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया।
भारत सरकार ने दिसंबर 2021 में 76,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ सेमीकॉन 1.0 को मंजूरी दी थी। इसके तहत 12 सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयों को मंजूरी दी गई, जिनमें कुल 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश होगा। भारत ने 1,27,500 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ सेमीकॉन 2.0 को जुलाई 2026 में मंजूरी दी थी।
Tata Sons के चेयरमैन पद पर 5 साल और रहेंगे N Chandrasekaran, बोर्ड ने दी मंजूरी, नोएल टाटा ने दर्ज कराई आपत्ति
टाटा संस के बोर्ड ने एन चंद्रशेखरन को 5 साल के लिए चेयरमैन के तौर पर फिर से नियुक्त करने को मंज़ूरी दी। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा अकेले ऐसे सदस्य थे जिन्होंने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया। ऊपर बताए गए लोगों ने नाम न बताने की शर्त पर मनीकंट्रोल को बताया कि टाटा संस बोर्ड ने कंपनी को लिस्ट कराने के मुद्दे पर भी विचार किया, लेकिन कोई प्रस्ताव पास नहीं हुआ। टाटा ट्रस्ट्स से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह फैसला गैर-कानूनी है। नोएल ने अपनी असहमति दर्ज कराई है। 12 सितंबर को, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने टाटा संस की कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्ज़ी को खारिज कर दिया, जिससे टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी की स्टॉक-मार्केट में अनिवार्य लिस्टिंग से बचने की कोशिश खत्म हो गई। यह फैसला शनिवार को टाटा संस के कंपनी सेक्रेटरी और चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर को मिले एक पत्र में बताया गया। चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को घोषणा की थी कि 20 फरवरी, 2027 को उनका मौजूदा कार्यकाल खत्म होने पर वे तीसरा कार्यकाल नहीं लेंगे।
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टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन और टाटा संस के डायरेक्टर नोएल टाटा ने फरवरी में हुई बोर्ड मीटिंग में चंद्रशेखरन के प्रस्तावित तीसरे कार्यकाल का विरोध किया था। लोगों ने बताया कि नोएल अभी भी लीडरशिप में बदलाव के पक्ष में हैं। टाटा ट्रस्ट्स के पास कुल मिलाकर टाटा संस की लगभग 66% हिस्सेदारी है। मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि आखिर में चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर समेत टॉप मैनेजमेंट का चुनाव बहुमत वाले शेयरहोल्डर की पसंद के आधार पर तय होगा। इस मामले में, बहुमत वाली हिस्सेदारी (जो टाटा ट्रस्ट्स के पास है) का प्रतिनिधित्व टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा करते हैं।
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दो मुख्य टाटा ट्रस्ट्स में से एक, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) ने भी सार्वजनिक रूप से कहा है कि वह चंद्रशेखरन के दोबारा नियुक्ति के लिए खुद को पेश न करने के फैसले का सम्मान करता है और उसने अगले चेयरमैन की सिफारिश करने के लिए एक सिलेक्शन कमिटी बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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