ऑफिस के काम में इंसानों को पीछे छोड़ देगा AI:ओपनएआई असली कामकाज से ट्रेंड कर रहा नया AI मॉडल, नौकरियां जा सकती है
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव होने जा रहा है। ये सीधे तौर पर ऑफिस में काम करने वाले कर्मचारियों की नौकरियों पर असर डाल कर सकता है। वायर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई एक एडवांस सिस्टम तैयार कर रही है। ये ऑफिस के रोजमर्रा के लगभग हर काम को इंसानों से ज्यादा सटीक और बेहतर तरीके से करने में खुद-ब-खुद सक्षम होगा। इंसानों के असली कामकाज के डेटा से ट्रेनिंग दी जा रही इस मॉडल को तैयार करने के लिए ओपनएआई इंसानों के असली कामकाज के डेटा का इस्तेमाल कर रहा है। कंपनी ने इसके लिए 'हैंडशेक एआई' कंपनी के साथ पार्टनरशिप की है। इसके तहत अलग-अलग प्रोफेशन के कॉन्ट्रैक्टर्स से उनके पुराने और मौजूदा ऑफिस वर्क का डेटा जुटाया जा रहा है। इससे AI सीखेगा कि असल दुनिया में टास्क कैसे पूरे किए जाते हैं। ओपनएआई ने कॉन्ट्रैक्टर्स से दो तरह का डेटा मांगा है… कंपनी ने कॉन्ट्रैक्टर्स से कहा है कि वे उन जटिल कामों का डेटा दें जिन्हें पूरा करने में घंटों या दिनों का समय लगता है। ओपनएआई यह देखना चाहता है कि उसके ट्रेंड किए गए नए AI मॉडल्स इंसानों के मुकाबले कितने बेहतर तरीके से काम कर सकते हैं। कंपनी ने डेटा सिक्योरिटी का भी ध्यान रखा है कॉन्ट्रैक्टर्स को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि डेटा अपलोड करने से पहले वे 'प्रोपराइटरी' (कंपनी की निजी) और 'पर्सनली आइडेंटिफिएबल' (पहचान बताने वाली) जानकारी को हटा दें। इंसानों से बेहतर तरीके से काम कर सकेगा AI टेक इंडस्ट्री के कई एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि एआई के बढ़ते इस्तेमाल से 'वाइट कॉलर जॉब्स' (ऑफिस में काम करने वाले कर्मचारी) के लिए मुश्किल पैदा हो सकती है। ओपनएआई का अंतिम लक्ष्य 'आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस' (AGI) हासिल करना है। इन 5 सेक्टरों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है 1. डेटा एंट्री और एडमिनिस्ट्रेटिव रोल्स: AI अब डेटा को इंसानों से ज्यादा तेजी और सटीकता से प्रोसेस कर सकता है। जो लोग एक्सेल शीट मैनेज करने, शेड्यूलिंग करने या डेटा ऑर्गेनाइज करने का काम करते हैं, उनके काम को एआई एजेंट्स पूरी तरह टेकओवर कर सकते हैं। 2. कंटेंट राइटिंग और बेसिक कोडिंग: जूनियर डेवलपर्स और बेसिक कंटेंट राइटर्स के लिए आने वाला समय कठिन हो सकता है। कंपनियां अभी एक सीनियर डेवलपर/राइटर और AI की मदद से पूरी टीम का काम निकाल रही हैं। आने वाले समय में AI और बेहतर हो जाएगा। 3. कस्टमर सपोर्ट और कॉल सेंटर्स: चैटबॉट्स अब पहले से कहीं ज्यादा 'इंसानी' हो गए हैं। ओपनएआई जिस तरह से 'रियल-वर्ल्ड' डेटा पर ट्रेनिंग दे रहा है, उससे एआई अब कस्टमर की शिकायतों को समझना और उनका समाधान करना सीधे तौर पर सीख जाएगा। 4. लीगल और पैरालीगल वर्क: कानूनी दस्तावेजों को पढ़ना, उनमें से जरूरी पॉइंट्स निकालना और रिसर्च करना एआई के लिए आसान हो गया है। जूनियर वकील या रिसर्चर्स जो केस स्टडीज और ड्राफ्टिंग का काम करते हैं, एआई उनके घंटों का काम मिनटों में कर सकता है। 5. फाइनेंस और अकाउंटिंग: बहीखाता, टैक्स कैलकुलेशन और ऑडिटिंग जैसे कामों में AI का दखल बढ़ रहा है। अकाउंटिंग फर्म्स अब बड़े पैमाने पर एआई टूल्स का इस्तेमाल कर रही हैं। इससे बेसिक अकाउंटेंट्स की जरूरत कम हो रही है। एक्सपर्ट बोले- टिके रहने के लिए स्किल्स बढ़ानी होगी 1. एआई को पार्टनर बनाएं: सबसे जरूरी है कि आप अपने क्षेत्र से जुड़े एआई टूल्स को चलाना सीखें। अगर आप राइटर हैं तो चैटजीपीटी, जेमिनी, ग्रॉक जैसे टूल्स का सही इस्तेमाल आना चाहिए। कोडर हैं तो को-पायलट और डिजाइनर हैं तो मिडजर्नी जैसे टूल्स आने चाहिए। 2. 'सॉफ्ट स्किल्स' पर फोकस: AI डेटा प्रोसेस कर सकता है, लेकिन वह भावनाएं नहीं समझ सकता। टीम मैनेजमेंट, नेगोशिएशन और लीडरशिप ऐसे गुण हैं जिनकी जरूरत हर कंपनी को रहेगी। टीम को मुश्किल समय में संभालना अभी इंसान ही कर सकता है। 3. क्रिटिकल थिंकिंग: एआई कई बार गलत जानकारी देता है। ऐसे में 'क्रिटिकल थिंकिंग' जरूरी है। एआई के आउटपुट को चेक करना और उसे कंपनी की जरूरत के हिसाब से ढालना। समस्या को पहचानना और उसका यूनिक समाधान सोचना भी AI से आगे रखेगा। 4. लगातार सीखना: अब वो दौर गया जब एक बार डिग्री ले ली और पूरी लाइफ नौकरी चल गई। तकनीक हर 6 महीने में बदल रही है। खुद को 'अपस्किल' करते रहें। इंडस्ट्री में हो रहे बदलावों पर नजर रखें। जितना अपडेटेड रहेंगे, उपयोगिता उतनी ही बनी रहेगी।
टॉप-10 कंपनियों में 7 की वैल्यू ₹3.63 लाख करोड़ घटी:रिलायंस टॉप लूजर रही, इसकी वैल्यू ₹1.58 लाख करोड़ कम हुई; HDFC बैंक का मार्केट कैप भी घटा
मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से देश की 10 सबसे बड़ी कंपनियों में से 7 की वैल्यू बीते हफ्ते के कारोबार में 3.63 लाख करोड़ रुपए घट गई। इस दौरान देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक रिलायंस इंडस्ट्रीज की वैल्यू सबसे ज्यादा घटी है। रिलायंस का मार्केट कैप 1.58 लाख करोड़ रुपए घटकर ₹19.96 लाख करोड़ पर आ गया। HDFC बैंक की मार्केट वैल्यू ₹96,153 करोड़ घटकर ₹14.44 लाख करोड़ पर आ गई है। वहीं भारती एयरटेल का मार्केट कैप ₹45,274 करोड़ घटकर ₹11.55 लाख करोड़ पर आ गया है। इसके अलावा बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, TCS और इंफोसिस की वैल्यू भी घटी है। ICICI बैंक का मार्केट कैप बढ़ा वहीं ICICI बैंक का मार्केट कैप 34,901 करोड़ रुपए बढ़कर ₹10.03 लाख करोड़ पर पहुंच गया है। HUL की वैल्यू 6,097 करोड़ रुपए बढ़कर ₹5.57 लाख करोड़ पर आ गई है। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI की मार्केट वैल्यू भी बढ़ी है। SBI की मार्केट वैल्यू भी 600 करोड़ रुपए बढ़ी है, यह 9.23 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गई है। मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है? मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है। इसे एक उदाहरण से समझें... मान लीजिए... कंपनी 'A' के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी। कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं... मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है? कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है। निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं। उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ से बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन अगर मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है।
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