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DU छात्र संघ चुनाव-CJP प्रोटेस्ट के बाद पहला जेन-जी इलेक्शन:सत्य निकेतन हॉस्टल हादसा बड़ा मुद्दा; स्टूडेंट्स बोले- हॉस्टल और छात्राओं की सुरक्षा सबसे जरूरी

“लग्जरी गाड़ियों का काफिला नारेबाजी के साथ आता है। उसमें से उतरते ही नेताजी के गले में मालाओं का ढेर लग जाता है। बैकग्राउंड में पटाखे छूट रहे हैं। गाड़ियों की छत पर खड़े समर्थक नारेबाजी कर रहे हैं। ढोल-नगाड़ों की आवाज के बीच हवा में पर्चे और फूल उछाले जा रहे हैं। एक के जाते ही दूसरी पार्टी का उम्मीदवार आ रहा है।” ये नजारा सुनने में किसी विधायकी या सांसदी के चुनाव का लगता है, लेकिन ये दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्र संघ के लिए हो रहे चुनाव प्रचार का सीन है। दिल्ली यूनिवर्सिटी में 18 सितंबर को छात्र संघ (DUSU) चुनावों के लिए वोटिंग होनी है। 16 सितंबर को शाम 5 बजे इसके लिए चुनाव प्रचार थम गया। नतीजे 19 सितंबर को आएंगे। DUSU का चुनाव इसलिए भी अहम है, क्योंकि जंतर मंतर पर हुए CJP के बड़े प्रोटेस्ट के बाद पहली बार कोई छात्र संघ का चुनाव हो रहा है। दिल्ली यूनिवर्सिटी में 2 कैंपस, इनमें 91 कॉलेज, चुनाव 52 में दिल्ली यूनिवर्सिटी में दो कैंपस हैं। साउथ और नॉर्थ कैंपस लगभग 15 किमी की दूरी पर बने हैं। दोनों कैंपस मिलाकर DU में 91 कॉलेज आते हैं, लेकिन DUSU के चुनावों में DU के सभी कॉलेज वोट नहीं कर सकते हैं। DUSU में सिर्फ 52 कॉलेज और फैकल्टी ही सीधे तौर पर वोटिंग में हिस्सा लेते हैं। सेंट स्टीफंस, लेडी श्री राम और जीसस एंड मैरी जैसे कुछ बड़े कॉलेज भी DUSU का हिस्सा नहीं हैं। मुद्दे जो स्टूडेंट्स के बीच चर्चा में… CJP प्रोटेस्ट के बाद हो रहे GenZ वोटरों के इन छात्र संघ चुनावों में स्टूडेंट्स के क्या मुद्दे हैं? सत्य निकेतन पीजी हादसे का चुनावों पर क्या असर हुआ है? पिछले चुनावों से इस बार DUSU किस तरह अलग है? यही सब जानने के लिए DU के अलग-अलग कॉलेज में दैनिक भास्कर ने छात्रों और कैंडिडेट्स से बात की। साउथ कैंपस: सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा, कहा- बाहरी लोग बंद हों छात्रों के मुद्दे समझने के लिए सबसे पहले हम साउथ कैंपस पहुंचे। प्रचार के शोर-शराबे में आम छात्र साफ असहज दिखाई दे रहे थे। विशेषकर लड़कियां बाहर से आ रहे लोगों से नाखुश नजर आईं। PGDAV कॉलेज में BA इंग्लिश ऑनर्स थर्ड ईयर की अनन्या का मानती हैं कि महिला सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है। अन्नया की क्लासमेट हर्षिता चौधरी कॉलेज में साफ-सफाई को एक बड़ा मुद्दा मानती हैं। वे कहती हैं कि छात्र संघ जीतने के बाद कोई काम नहीं करता और चुनाव प्रचार का तरीका सालों से नहीं बदला है। बड़ी गाड़ियां, भीड़ के चलते दिक्कत होती है। चुनाव में बाहरी लोगों से होने वाली समस्याओं को भी नजरअंदाज कर दिया जाता है। हर्षिता मानती हैं कि प्रचार का तरीका बदला जाना जरूरी है। साउथ कैंपस के PGDAV कॉलेज में BA प्रोग्राम सेकंड ईयर की हिमांशी भी चुनाव प्रचार से पढ़ाई डिस्टर्ब होने का मुद्दा उठाती हैं। साथ ही वे कहती हैं कि सत्य निकेतन में पीजी की इमारत गिरने जैसे मुद्दों पर छात्रों को इन मुद्दों पर एकजुट होना चाहिए। शहीद भगत सिंह कॉलेज में BCom ऑनर्स के छात्र चिन्मय सिंह भी चुनाव प्रचार के तरीकों को सही नहीं मानते। वे कहते हैं कि बहुत प्रदूषण और शोरगुल से क्लास में भारी दिक्कत होती है। वे कैंटीन और दो क्लास के बीच में बड़े गैप से परेशान हैं। चिन्मय की तरह PGDAV कॉलेज में BSc कंप्यूटर साइंस फर्स्ट ईयर के छात्र आलोक भी अचानक क्लास कैंसिल होने की समस्या से जूझ रहे हैं। चिन्मय और आलोक दोनों ने इस बात पर जोर दिया कि डीयू में हॉस्टल न होने के कारण छात्रों को पीजी और ब्रोकरों को 12-14 हजार रुपए हर महीने देने पड़ते हैं। आलोक का कहना है कि पीजी हादसों को देखकर यूनिवर्सिटी को या तो मुआवजा देना चाहिए या अपने मान्यता प्राप्त हॉस्टल बनाने चाहिए। साउथ कैंपस में रह रहे एक और प्रेशर BCom ऑनर्स के संजय को कॉलेज में सब कुछ औसत ही लगता है। वे चाहते हैं कि फैकल्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर में और सुधार किया जाए। चुनाव पर वे मानते हैं कि छात्रों के मुद्दे उठाए जाते हैं, लेकिन इनपर काम नहीं होता। नॉर्थ कैंपस का हाल: महंगे पीजी, बिजली का बिल और हॉस्टल की भारी कमी DU के ज्यादातर नामी-गिरामी कॉलेज नॉर्थ कैंपस में ही हैं। इसमें मिरांडा, सेंट स्टीफंस, हंसराज जैसे कॉलेज का नाम आता है। साउथ की तरह नॉर्थ कैंपस में भी इस बार हॉस्टल की मांग ही सबसे बड़ा मुद्दा है। श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में BA इको ऑनर्स फर्स्ट ईयर के छात्र वैष्णव सेठ हॉस्टल न मिलने की वजह से PG में रह रहे हैं। वे बताते हैं कि विजय नगर जैसे इलाके में एक कमरे (डबल शेयरिंग) का किराया 30 हजार रुपए है, यानी एक छात्र पर 15 हजार रुपए महीने का बोझ आता है। वे आगे कहते हैं, "किराए के ऊपर से 15 रुपए प्रति यूनिट बिजली का बिल देना पड़ता है। कॉलेज की पूरे साल की फीस 30-40 हजार होती है, लेकिन पीजी का खर्च एजुकेशन को बहुत महंगा बना रहा है। क्लास की बेतरतीब टाइमिंग सुबह 8 बजे के बाद सीधे दोपहर 2 बजे क्लास के चलते छात्रों का पूरा दिन बर्बाद होता है।” रामजस कॉलेज में MA पॉलिटिकल साइंस लास्ट ईयर के छात्र चंदन कुमार का भी यही दर्द है। उनका कहना है कि पिछले 20-25 सालों से प्रशासन और छात्र संघ ने हॉस्टल के नाम पर सिर्फ वादे किए हैं। फैकल्टी ऑफ आर्ट्स फिलॉसफी विभाग की शालिनी नॉर्थ कैंपस में महिला सुरक्षा को सबसे बड़ा मुद्दा मानती हैं। उनका कहना है कि इतने बड़े कैंपस में बिना किसी चेकिंग के कोई भी बाहरी व्यक्ति घुस आता है। चुनाव के दौरान तो इन्फ्लुएंसर और बाहरी लोग धड़ल्ले से अंदर आ जाते हैं, जिससे छात्राएं असुरक्षित महसूस करती हैं। अब कैंडिडेट्स की बात ABVP कैंडिडेट बोले- हॉस्टल ही हमारा सबसे बड़ा मुद्दा BJP के छात्र विंग ABVP ने इस बार प्रेसिडेंट पद के लिए यश डबास को टिकट दिया है। छात्र राजनीति में कदम रखने से पहले वह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के टेनिस खिलाड़ी रह चुके हैं। यश ने DU के श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है। फिलहाल वे DU के बुद्धिस्ट स्टडीज विभाग MA कर रहे हैं। यश भी मानते हैं कि हॉस्टल इस बार एक बड़ा मु्द्दा है। वे बताते हैं कि उनका मुद्दा है कि हर एक छात्र को हॉस्टल मिले और हर कॉलेज में लड़कियों के लिए अलग से हॉस्टल हो। सत्यनिकेतन हादसे को प्रशासन की लापरवाही बताते हुए यश कहते हैं, “प्रशासन की लापरवाही के कारण ही छात्रों की जान चली गई, जबकि मैंने एक साल पहले ही अपने पॉडकास्ट में ऐसी इमारतों के गिरने की आशंका जताई थी। हम छात्रों को भरोसा दिलाते हैं कि पावर में आते ही सबसे पहले हर पीजी और हॉस्टल का 'सेफ्टी ऑडिट' करवाएंगे और उसकी रिपोर्ट सबके सामने रखेंगे।" NSUI का कैंपेन हॉस्टल, किराया और महिला सुरक्षा पर फोकस कांग्रेस के छात्र विंग NSUI ने इस बार विजय शंकर मीणा को अध्यक्ष पद के लिए उतारा है। वे DU के बौद्ध अध्ययन विभाग MA कर रहे हैं। वे कहते हैं कि इस चुनाव में होस्टल, किराया और महिला सुरक्षा पर ही उनका फोकस है। वे आरोप लगाते हैं कि ABVP ने छात्रों के साथ धोखा किया है। वे आगे कहते हैं, “हमारे तीन सबसे बड़े मुद्दे हैं, हॉस्टल्स की कमी, प्राइवेट पीजी का मनमाना किराया रोकने के लिए रेंट कंट्रोल एक्ट लागू करवाना, और छात्राओं के लिए मेन्स्ट्रुअल लीव की व्यवस्था कराना। सबसे बड़ी बात है 'मेट्रो कंसेशन पास' होना चाहिए। ABVP पिछले 15 सालों से इसका वादा कर रही है, लेकिन इस बार तो उन्होंने इसे अपने मेनिफेस्टो से ही हटा दिया।" विजय जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन का जिक्र भी करते हैं। वे कहते हैं कि इसका असर इन चुनावों में दिख रहा है। वहां लाठियां खाने वाले और पैलेट गन का सामना करने वाले NSUI के छात्र भी थे। वे कहते हैं कि मैंने खुद लाठियां खाईं, इसीलिए इस बार युवाओं में जो जोश है, उसका नतीजा 19 तारीख को दिखेगा। लेफ्ट (AISA-SFI) कैंडिडेट चुनाव प्रचार के तरीके से नाखुश DUSU चुनाव में इस बार वामपंथी छात्र संगठनों AISA और SFI ने अध्यक्ष पद के लिए संयुक्त उम्मीदवार के तौर पर अनन्‍या को मैदान में उतारा है। अन्नया इस बार अध्यक्ष पद की इकलौती महिला उम्मीदवार हैं। अनन्या मूल रूप से उत्तराखंड की रहने वाली हैं। वह DU के PGDAV कॉलेज की छात्रा हैं। अन्नया चुनाव में धनबल, बाहुबल और महिला सुरक्षा को बड़ा मुद्दा मानती हैं। अनन्या दावा करती हैं कि उनका चुनाव प्रचार बाकी पार्टियों की गुंडागर्दी वाली राजनीति से एकदम अलग है। अनन्या कहती हैं, "इन्हीं की थार और डिफेंडर सुबह 'भैया-भैया' की पॉलिटिक्स करती हैं और शाम को कैट-कॉलिंग और लड़कियों से छेड़खानी करती हैं। ये लोग धड़ल्ले से महिला कॉलेजों के गेट तोड़कर अंदर घुस जाते हैं, जबकि हम क्लास में जाने से पहले टीचर्स से परमिशन मांगते हैं।" वे आरोप लगाती हैं कि DU में सिर्फ पैसे, पावर और गुटबाजी की राजनीति चल रही है। अन्नया कहती हैं कि ABVP और NSUI ने छात्रों के असली मुद्दों को भुला दिया है। 97% छात्रों को आज तक हॉस्टल नहीं मिला है। अपने चुनावी वादों पर वे आगे कहती हैं, “सभी महिला कॉलेजों को DUSU का हिस्सा बनाया जाए और हर कॉलेज में एक 'फंक्शनल ICC' (शिकायत समिति) हो, ताकि लड़कियों को पता हो कि किसी भी तरह की परेशानी या छेड़खानी होने पर उन्हें किसके पास जाना है।"

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सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु से कहा-हिंदी को लेकर सोच बदलें:चेन्नई दिल्ली से अलग-थलग नहीं, वहां हिंदी नहीं पढ़ाई जाएगी ऐसा नहीं हो सकता

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में जवाहर नवोदय विद्यालयों की स्थापना के मामले में गुरुवार को राज्य सरकार के रुख पर सवाल उठाए। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि राज्य को हिंदी पढ़ाने के मुद्दे पर अपना नजरिया बदलना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि तमिलनाडु की धरती पर हिंदी नहीं पढ़ाई जाएगी। कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से केंद्र के साथ बातचीत के जरिए मतभेद सुलझाने को कहा। बेंच ने यह भी कहा कि चेन्नई को दिल्ली से अलग-थलग नहीं करना चाहिए और न ही दिल्ली को चेन्नई से। कोर्ट के मुताबिक, नवोदय स्कूल राज्य की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था को कमजोर नहीं करेंगे, बल्कि छात्रों को अतिरिक्त अवसर देंगे। क्या है पूरा मामला? मामला तमिलनाडु के हर जिले में जवाहर नवोदय विद्यालय स्थापित करने से जुड़ा है। मद्रास हाईकोर्ट ने 2017 में राज्य को हर जिले में नवोदय विद्यालय स्थापित करने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने माना था कि नवोदय विद्यालय तमिलनाडु के तमिल लर्निंग एक्ट का उल्लंघन नहीं करते और ऐसे स्कूलों से छात्रों को अपनी पसंद की शिक्षा हासिल करने का अवसर मिलेगा। इसके खिलाफ तमिलनाडु सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची। राज्य का कहना है कि शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है, लेकिन राज्य को अपनी शिक्षा नीति बनाने का अधिकार है। तमिलनाडु में दो भाषा नीति लागू है, जबकि नवोदय विद्यालयों की व्यवस्था तीन भाषा फॉर्मूले पर आधारित है। इसी वजह से राज्य ने इन स्कूलों की स्थापना का विरोध किया है। तमिलनाडु की आपत्ति क्या है? राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि तमिलनाडु की दो भाषा नीति तमिल और अंग्रेजी पर आधारित है। इसे 2006 के तमिलनाडु तमिल लर्निंग एक्ट के जरिए कानूनी आधार मिला है। राज्य का कहना है कि नवोदय विद्यालयों की तीन भाषा व्यवस्था को लागू करने के लिए मौजूदा राज्य कानून और नीति से अलग जाना पड़ेगा। राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ वकील जयदीप गुप्ता ने कहा कि सरकार हिंदी पढ़ाने के खिलाफ नहीं है, बल्कि नवोदय स्कूलों से जुड़ी भाषा नीति को लेकर आपत्ति है। उन्होंने कहा कि राज्य की नीति के तहत तमिल को महत्व दिया जाना जरूरी है। राज्य ने यह भी तर्क दिया कि नवोदय योजना अनिवार्य नहीं है, इसलिए कोर्ट किसी राज्य को इसे अपनाने का आदेश नहीं दे सकता। तमिलनाडु ने आर्थिक चिंता भी जताई। राज्य की ओर से कहा गया कि केंद्र ने शिक्षा के लिए करीब 5,000 करोड़ रुपए जारी करने का वादा किया था, लेकिन राशि नहीं मिली। ऐसे में राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय जिम्मेदारी डालना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने हिंदी और भाषा नीति पर क्या कहा? जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि राज्य को अपना नजरिया बदलना होगा। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में हिंदी नहीं पढ़ाई जाएगी, ऐसा नहीं हो सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि नवोदय स्कूल आने से राज्य के शिक्षा स्तर में कमी नहीं आएगी। बेंच ने केंद्र और राज्य के बीच बातचीत पर जोर दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर तमिलनाडु तमिल को दूसरी भाषा के तौर पर रखना चाहता है तो इस मुद्दे पर केंद्र के साथ बातचीत की जा सकती है। कोर्ट ने राज्य के शिक्षा सचिव को केंद्र के संबंधित सचिव से बातचीत करने का सुझाव भी दिया। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि नवोदय स्कूल राज्य की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था के अतिरिक्त होंगे। उनके मुताबिक, इससे छात्रों को ज्यादा अवसर मिलेंगे और तमिलनाडु के शिक्षा स्तर पर इसका नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। केंद्र ने क्या कहा? केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि राज्य सरकार को मुख्य रूप से स्कूलों के लिए जमीन उपलब्ध करानी है। स्कूलों के निर्माण और बाकी व्यवस्थाओं का खर्च केंद्र उठाएगा। उन्होंने कहा कि योजना अभी शुरुआती चरण में है और स्कूल बनने में कई साल लग सकते हैं, इसलिए भाषा से जुड़े मतभेदों पर इस दौरान बातचीत की जा सकती है। राज्य ने जवाब दिया कि हर जिले में करीब 30 एकड़ जमीन की जरूरत हो सकती है। राज्य का कहना था कि जब तक यह तय नहीं हो जाता कि वह योजना को स्वीकार करेगा या नहीं, तब तक जमीन की पहचान करना मुश्किल होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने जमीन खरीदने के लिए नहीं कहा है, केवल उपयुक्त सरकारी जमीन की पहचान करने को कहा है। दिसंबर 2025 के आदेश पर क्या हुआ? सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिसंबर 2025 को तमिलनाडु को हर जिले में नवोदय विद्यालय के लिए जरूरी जमीन की पहचान करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार ने इस आदेश को वापस लेने की मांग की थी। गुरुवार को कोर्ट ने आदेश वापस लेने से इनकार कर दिया। हालांकि, राज्य को इसका पालन करने के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया गया। साथ ही कोर्ट ने केंद्र और तमिलनाडु सरकार के अधिकारियों को नवोदय विद्यालयों की स्थापना और भाषा नीति से जुड़े मुद्दों पर आगे बातचीत करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि अगर बातचीत के बाद भी कोई समस्या रहती है तो राज्य उसे कोर्ट के सामने रख सकता है। मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर 2026 को होगी।

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  Sports

BCCI AGM 2026: 95वीं सालाना बैठक में लिए गए बड़े फैसले, IPL की 20वीं सालगिरह से अंपायरों की पेमेंट तक

मुंबई। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की 95वीं सालाना आम बैठक (AGM) शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को मुंबई स्थित BCCI मुख्यालय में हुई। बैठक में IPL गवर्निंग काउंसिल, वित्तीय मामलों, अंपायरों और मैच रेफरी की पेमेंट, BCCI की नीतियों और भारतीय क्रिकेट के शताब्दी समारोह से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए।

BCCI के मानद सचिव देवाजीत सैकिया की ओर से जारी मीडिया एडवाइजरी के मुताबिक, AGM में लिए गए प्रमुख फैसले इस प्रकार हैं।

IPL गवर्निंग काउंसिल में 2 नए प्रतिनिधि चुने गए
AGM में जनरल बॉडी के दो प्रतिनिधियों को IPL गवर्निंग काउंसिल में शामिल किया गया है। इनमें शामिल हैं:

  • अरुण सिंह धूमल
  • एम खैरुल जमाल मजूमदार

दोनों को जनरल बॉडी के प्रतिनिधि के तौर पर IPL गवर्निंग काउंसिल में चुना गया।

2027 में IPL के 20वें संस्करण का होगा भव्य आयोजन
BCCI जनरल बॉडी ने 2027 में होने वाले IPL के 20वें संस्करण को भव्य तरीके से मनाने का फैसला किया है।

IPL का 20वां संस्करण भारतीय क्रिकेट की इस लोकप्रिय टी20 लीग के सफर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। AGM में इसे विशेष रूप से मनाने का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया।

2028 में BCCI की 100वीं वर्षगांठ का जश्न
BCCI ने अपने शताब्दी समारोह की तैयारियों की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। बोर्ड 2028 में अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे करेगा।

फैसले के मुताबिक, शताब्दी समारोह दिसंबर 2027 से शुरू होकर पूरे 2028 तक चलने वाले कार्यक्रमों के जरिए मनाया जाएगा। BCCI के मुताबिक, यह भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक अहम पड़ाव होगा।

अंपायरों और मैच रेफरी की पेमेंट स्ट्रक्चर में बदलाव
AGM में अंपायरों और मैच रेफरी से जुड़ा भी अहम फैसला हुआ। जनरल बॉडी ने बेहतर पेमेंट स्ट्रक्चर और ग्रेड के रीक्लासिफिकेशन को सर्वसम्मति से मंजूरी दी। इसका उद्देश्य अंपायरों और मैच रेफरी के लिए मौजूदा भुगतान व्यवस्था और ग्रेडिंग को बेहतर बनाना है।

वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिटेड अकाउंट्स को मंजूरी
BCCI जनरल बॉडी ने वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिट किए गए अकाउंट्स स्टेटमेंट को मंजूरी दे दी। इसके अलावा वित्त वर्ष 2026-27 के सालाना बजट को भी जनरल बॉडी की मंजूरी मिल गई।

2026-27 के लिए ऑडिटर नियुक्त
AGM में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ऑडिटर की नियुक्ति को भी मंजूरी दी गई। यह BCCI की नियमित वित्तीय और प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

BCCI की नई इंटरनल कमिटी बनाई गई
BCCI की Prevention of Sexual Harassment Policy के तहत नई इंटरनल कमिटी के गठन को भी मंजूरी दी गई। यह कमिटी BCCI की कार्यप्रणाली में यौन उत्पीड़न की रोकथाम से जुड़ी नीति के तहत काम करेगी।

Age Verification Policy को किया गया अपडेट
AGM में BCCI की Age Verification Policy को अपडेट करके अपनाया गया। यह नीति खिलाड़ियों की आयु से जुड़े सत्यापन की प्रक्रिया और नियमों से संबंधित है।

दिव्यांग क्रिकेटरों के लिए सुविधाओं पर चर्चा
BCCI जनरल बॉडी ने दिव्यांग क्रिकेटरों को सपोर्ट करने के उपायों पर राज्य क्रिकेट इकाइयों के साथ चर्चा की। इसमें दिव्यांग क्रिकेटरों के विकास और प्रगति के लिए जरूरी सुविधाओं और संसाधनों पर विचार किया गया।

अजीत अगरकर के भविष्य पर भी चर्चा
AGM के दौरान सीनियर सेलेक्शन कमिटी के चेयरमैन अजीत अगरकर का भविष्य भी चर्चा में रहा। हालांकि, BCCI की आधिकारिक मीडिया एडवाइजरी में अगरकर के कार्यकाल को बढ़ाने या उनके स्थान पर किसी नए व्यक्ति की नियुक्ति का फैसला घोषित नहीं किया गया है।

बैठक के बाद BCCI के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया कि पदाधिकारियों को सेलेक्शन कमिटी से जुड़े मामलों पर फैसला लेने का अधिकार दिया गया है।

अगरकर का मौजूदा कार्यकाल अगले महीने की शुरुआत में खत्म होने की बात रिपोर्टों में कही गई है। ऐसे में सेलेक्शन कमिटी के चेयरमैन के भविष्य को लेकर आगे फैसला BCCI पदाधिकारियों के स्तर पर लिया जा सकता है।

जूनियर सेलेक्शन कमिटी की पांचों सीटों पर भी नजर
सीनियर सेलेक्शन कमिटी के चेयरमैन के भविष्य के अलावा BCCI जूनियर सेलेक्शन कमिटी की सभी पांचों पोस्ट भरने पर भी विचार कर रही है।

हालांकि, AGM की आधिकारिक मीडिया एडवाइजरी में जूनियर सेलेक्शन कमिटी की नियुक्तियों को लेकर कोई अंतिम फैसला घोषित नहीं किया गया है।

मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन ने रखी अहम मांग
AGM के दौरान मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) की ओर से BCCI के सामने एक अनुरोध भी रखा गया। MCA ने बोर्ड से कहा कि भविष्य में अहम मुकाबलों की मेजबानी सौंपते समय मुंबई को भी ध्यान में रखा जाए।

BCCI AGM 2026: एक नजर में बड़े फैसले

मुद्दा     फैसला
IPL गवर्निंग काउंसिल अरुण सिंह धूमल और एम खैरुल जमाल मजूमदार चुने गए
IPL 2027 20वें संस्करण को भव्य तरीके से मनाने का फैसला
BCCI शताब्दी दिसंबर 2027 से 2028 तक सालभर कार्यक्रम
अंपायर/मैच रेफरी बेहतर पेमेंट स्ट्रक्चर और ग्रेड रीक्लासिफिकेशन मंजूर
वित्त वर्ष 2025-26 ऑडिटेड अकाउंट्स को मंजूरी
वित्त वर्ष 2026-27 सालाना बजट मंजूर
ऑडिटर  2026-27 के लिए नियुक्ति
यौन उत्पीड़न नीति नई इंटरनल कमिटी का गठन
Age Verification अपडेटेड नीति को मंजूरी
दिव्यांग क्रिकेट सुविधाओं और संसाधनों पर राज्य इकाइयों के साथ चर्चा
अजीत अगरकर  सेलेक्शन कमिटी से जुड़े फैसले का अधिकार पदाधिकारियों को
जूनियर सेलेक्शन कमिटी पांचों पद भरने पर विचार

निष्कर्ष: BCCI की 95वीं AGM में तत्काल प्रशासनिक फैसलों के साथ भारतीय क्रिकेट के अगले कई वर्षों से जुड़े कार्यक्रमों पर भी निर्णय लिए गए। 2027 के IPL के 20वें संस्करण को विशेष रूप से मनाने और दिसंबर 2027 से 2028 तक BCCI की शताब्दी का सालभर जश्न मनाने का फैसला बैठक के प्रमुख बिंदुओं में रहा। वहीं अंपायरों और मैच रेफरी की पेमेंट व्यवस्था, आयु सत्यापन नीति और दिव्यांग क्रिकेटरों के लिए सुविधाओं को लेकर भी फैसले लिए गए।

Fri, 18 Sep 2026 17:59:56 +0530

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