'चायवाले' पीएम के लिए कटिहार के चाय विक्रेता का अनूठा प्रेम! 76वें जन्मदिन पर बांटी 76 कप मुफ्त चाय, मांगी लंबी उम्र!
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर पूरे भारत में जहाँ भाजपा द्वारा बड़े पैमाने पर 'सेवा संकल्प अभियान' और 'आशीर्वाद का दीया' जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, वहीं बिहार के कटिहार ज़िले से जन-स्नेह का एक बेहद भावुक और अनोखा नज़ारा सामने आया है। कटिहार के मेडिकल कॉलेज मोड़ पर एक छोटी सी चाय की दुकान चलाने वाले जवाहर भगत ने प्रधानमंत्री मोदी के 76वें जन्मदिन को बेहद खास अंदाज़ में मनाते हुए स्थानीय लोगों को 76 कप मुफ्त चाय पिलाई और अपने प्रेरणास्रोत की लंबी उम्र तथा उत्तम स्वास्थ्य के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।
कौन हैं जवाहर भगत?
जवाहर भगत खुद एक चाय विक्रेता हैं और कहते हैं कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशंसक हैं। उन्होंने कहा कि चाय बेचने से लेकर देश के प्रधानमंत्री बनने तक का मोदी का सफ़र चाय बेचने के काम से जुड़े लोगों के लिए प्रेरणा है। इसी जुड़ाव की वजह से भगत ने मोदी के जन्मदिन पर अपनी दुकान पर मुफ्त चाय बांटने का फ़ैसला किया।
भगत ने कहा कि उन्हें राजनीति में ज़्यादा दिलचस्पी नहीं है और वे इस बात की परवाह नहीं करते कि लोग प्रधानमंत्री के बारे में क्या कहते हैं। उनके लिए मायने यह रखता है कि सरकारी योजनाओं से आम लोगों और गरीबों को कितना फ़ायदा होता है। उन्होंने कहा कि गरीबों के लिए बनी कई कल्याणकारी योजनाओं से उन जैसे लोगों को भी फ़ायदा हुआ है।इसे भी पढ़ें: इधर देश Modi का जन्मदिन मना रहा, उधर PM ने Chintan Shivir की तैयारी कर सारे Cabinet Ministers को...
चाय विक्रेता की सरकार से एक खास मांग
भगत की सरकार से एक मांग भी है। वे चाहते हैं कि देश भर के चाय विक्रेताओं के लिए कोई खास योजना शुरू की जाए। हालांकि, उन्होंने कहा कि सरकार चाय विक्रेताओं के लिए ऐसी कोई योजना लाए या न लाए, प्रधानमंत्री मोदी के प्रति उनका सम्मान और समर्थन वैसा ही रहेगा।
आनंद सिंह, जो चाय पीने के लिए भगत की दुकान पर आए थे, ने इस पहल को प्रधानमंत्री का जन्मदिन मनाने का एक अनोखा तरीका बताया। सिंह ने कहा कि वे पिछले 20 सालों से इस दुकान पर चाय पी रहे हैं। उनके मुताबिक, भगत अक्सर प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ़ करते हैं और उनसे प्रभावित रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Disha Salian Death Case | सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर के पिता ने आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख को भेजा 500 करोड़ का लीगल नोटिस
76 कप चाय से मोदी का 76वां जन्मदिन मनाया गया
कटिहार में भगत के इस काम ने प्रधानमंत्री मोदी के 76वें जन्मदिन के जश्न को एक स्थानीय रंग दिया है। उनके द्वारा ठीक 76 कप मुफ़्त चाय पिलाने का फ़ैसला मोदी के 76 साल के होने से जुड़ा था। भगत के लिए, यह सिर्फ़ चाय पिलाने से कहीं ज़्यादा था। यह उस नेता के प्रति सम्मान और स्नेह ज़ाहिर करने का उनका अपना तरीका था जिन्हें वे पसंद करते हैं, साथ ही यह मोदी के शुरुआती दिनों में चाय बेचने और खुद उनकी अपनी आजीविका के बीच के जुड़ाव को भी दिखाता है। यहाँ यह ध्यान देने वाली बात है कि नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर, 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ था। प्रधानमंत्री की आधिकारिक जीवनी में बताया गया है कि उन्होंने अपने शुरुआती दिनों में अपने परिवार की चाय की दुकान पर काम किया था।
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इधर देश Modi का जन्मदिन मना रहा, उधर PM ने Chintan Shivir की तैयारी कर सारे Cabinet Ministers को...
देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 76वां जन्मदिन मना रहा है, देशभर में उनके लंबे सार्वजनिक जीवन, सेवा और राष्ट्रनिर्माण की यात्रा को याद किया जा रहा है। लेकिन इन उत्सवों के बीच कर्मयोगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने अगले पड़ाव की तैयारी भी कर ली है। जन्मदिन के उल्लास के बीच ही उन्होंने केंद्र सरकार के कामकाज को और धार देने, मंत्रियों के प्रदर्शन की समीक्षा करने और आगामी प्राथमिकताओं की दिशा तय करने के लिए 23 और 24 सितंबर को दो दिवसीय चिंतन शिविर की रूपरेखा तैयार कर दी है। यानी जिस दिन देश प्रधानमंत्री के जन्मदिन का उत्सव मना रहा है, उसी समय कर्मयोगी मोदी भविष्य के भारत की नीतियों और शासन की अगली गति पर मंथन की तैयारी में जुटे हैं।
हम आपको बता दें कि 23 और 24 सितंबर को नई दिल्ली स्थित सेवा तीर्थ में होने वाले इस चिंतन शिविर में केंद्रीय मंत्रिपरिषद के सभी कैबिनेट मंत्री शामिल होंगे। इससे पहले प्रधानमंत्री ने राज्य मंत्रियों के साथ बैठक कर विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज, प्रगति और चुनौतियों पर प्रतिक्रिया ली थी। अब कैबिनेट मंत्रियों के साथ होने वाला मंथन सरकार के अगले चरण की दिशा तय करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
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प्रधानमंत्री ने मंत्रियों के छोटे-छोटे समूह गठित करने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक समूह में आठ मंत्री होंगे और उन्हें आत्मसुधार, संवाद तथा शासन जैसे विषयों पर विचार-विमर्श कर अपनी प्रस्तुति तैयार करनी होगी। यानी संदेश साफ है कि सरकार केवल योजनाओं की घोषणा से संतुष्ट नहीं है, बल्कि यह देखना चाहती है कि योजनाओं का प्रभाव जमीन तक कितनी तेजी से और कितनी प्रभावी ढंग से पहुंच रहा है।
यह वही शैली है जिसकी एक झलक वर्ष 2021 में हुए चिंतन शिविर में भी देखने को मिली थी। उस समय शासन और नीति-निर्माण से जुड़े विषयों पर मंत्रियों ने प्रस्तुतियां दी थीं। अब सरकार ने पिछले चिंतन शिविर में दिए गए निर्देशों पर मंत्रालयों से कार्रवाई रिपोर्ट भी मांगी है। मंत्रालयों को अपने कामकाज की प्रगति पर नजर रखने, गतिविधियों की ताजा जानकारी उपलब्ध कराने और कर्मचारियों से सुझाव लेने जैसे निर्देश दिए गए थे। इससे संकेत मिलता है कि इस बार का मंथन केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि पिछले निर्णयों की जमीन पर हुई प्रगति को भी कसौटी पर परखा जाएगा।
प्रधानमंत्री की कार्यशैली में प्रशासनिक जवाबदेही और परिणाम पर जोर पहले भी दिखाई देता रहा है। हाल ही में उन्होंने मंत्रालयों और विभागों की आधिकारिक वेबसाइटों को अधिक सुविधाजनक और जनोन्मुख बनाने पर भी जोर दिया था। यह बदलाव उस व्यापक सोच का हिस्सा माना जा सकता है जिसमें सरकार और नागरिक के बीच संवाद को अधिक सरल और प्रत्यक्ष बनाने की कोशिश की जा रही है।
इसी राजनीतिक और प्रशासनिक पृष्ठभूमि में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर दिया गया संदेश भी महत्वपूर्ण हो जाता है। शाह ने मोदी की 25 वर्षों की सार्वजनिक यात्रा को राष्ट्रसेवा और त्याग से जोड़ा और कहा कि उन्होंने सत्ता को लक्ष्य नहीं, बल्कि गरीबों के कल्याण और राष्ट्रनिर्माण का माध्यम माना। उन्होंने आवास, आयुष्मान योजना, महिला सशक्तीकरण, युवा अवसर, बुनियादी ढांचे और सुरक्षा से जुड़े कदमों को मोदी सरकार की उपलब्धियों के रूप में रेखांकित किया।
शाह ने अनुच्छेद 370, सर्जिकल और हवाई कार्रवाई तथा आतंकवाद के विरुद्ध सरकार की नीति का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर सरकार ने निर्णायक कार्रवाई की है। साथ ही उन्होंने पूर्वोत्तर में शांति समझौतों और नक्सलवाद के विरुद्ध कार्रवाई को भी सरकार की उपलब्धियों में गिनाया।
इस पूरे घटनाक्रम की राजनीतिक तस्वीर देखें तो प्रधानमंत्री के जन्मदिन से शुरू हुआ ‘सेवा संकल्प’ अभियान और उसके तुरंत बाद होने वाला मंत्रिपरिषद का चिंतन शिविर एक ही व्यापक राजनीतिक संदेश को सामने लाते हैं। यह है सेवा की राजनीति के साथ शासन की गति और परिणामों पर जोर। हम आपको यह भी बता दें कि भाजपा ने प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन को केंद्र में रखते हुए महीने भर चलने वाले सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत भी की है।
बहरहाल, तीसरे कार्यकाल के मध्य में होने वाला यह चिंतन शिविर इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि मोदी सरकार अब अपने अगले चरण की प्राथमिकताओं को अधिक स्पष्ट रूप देने की तैयारी में है। जन्मदिन के अवसर पर उपलब्धियों का राजनीतिक संदेश और उसके साथ ही मंत्रियों से आत्ममंथन की अपेक्षा, दोनों को साथ रखकर देखें तो तस्वीर यही बनती है कि मोदी सरकार अपने कार्यकाल के अगले पड़ाव में केवल उपलब्धियों का बखान नहीं, बल्कि प्रशासनिक मशीनरी से और अधिक गति, बेहतर समन्वय और स्पष्ट परिणाम की अपेक्षा कर रही है।
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