इधर देश Modi का जन्मदिन मना रहा, उधर PM ने Chintan Shivir की तैयारी कर सारे Cabinet Ministers को...
देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 76वां जन्मदिन मना रहा है, देशभर में उनके लंबे सार्वजनिक जीवन, सेवा और राष्ट्रनिर्माण की यात्रा को याद किया जा रहा है। लेकिन इन उत्सवों के बीच कर्मयोगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने अगले पड़ाव की तैयारी भी कर ली है। जन्मदिन के उल्लास के बीच ही उन्होंने केंद्र सरकार के कामकाज को और धार देने, मंत्रियों के प्रदर्शन की समीक्षा करने और आगामी प्राथमिकताओं की दिशा तय करने के लिए 23 और 24 सितंबर को दो दिवसीय चिंतन शिविर की रूपरेखा तैयार कर दी है। यानी जिस दिन देश प्रधानमंत्री के जन्मदिन का उत्सव मना रहा है, उसी समय कर्मयोगी मोदी भविष्य के भारत की नीतियों और शासन की अगली गति पर मंथन की तैयारी में जुटे हैं।
हम आपको बता दें कि 23 और 24 सितंबर को नई दिल्ली स्थित सेवा तीर्थ में होने वाले इस चिंतन शिविर में केंद्रीय मंत्रिपरिषद के सभी कैबिनेट मंत्री शामिल होंगे। इससे पहले प्रधानमंत्री ने राज्य मंत्रियों के साथ बैठक कर विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज, प्रगति और चुनौतियों पर प्रतिक्रिया ली थी। अब कैबिनेट मंत्रियों के साथ होने वाला मंथन सरकार के अगले चरण की दिशा तय करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
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प्रधानमंत्री ने मंत्रियों के छोटे-छोटे समूह गठित करने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक समूह में आठ मंत्री होंगे और उन्हें आत्मसुधार, संवाद तथा शासन जैसे विषयों पर विचार-विमर्श कर अपनी प्रस्तुति तैयार करनी होगी। यानी संदेश साफ है कि सरकार केवल योजनाओं की घोषणा से संतुष्ट नहीं है, बल्कि यह देखना चाहती है कि योजनाओं का प्रभाव जमीन तक कितनी तेजी से और कितनी प्रभावी ढंग से पहुंच रहा है।
यह वही शैली है जिसकी एक झलक वर्ष 2021 में हुए चिंतन शिविर में भी देखने को मिली थी। उस समय शासन और नीति-निर्माण से जुड़े विषयों पर मंत्रियों ने प्रस्तुतियां दी थीं। अब सरकार ने पिछले चिंतन शिविर में दिए गए निर्देशों पर मंत्रालयों से कार्रवाई रिपोर्ट भी मांगी है। मंत्रालयों को अपने कामकाज की प्रगति पर नजर रखने, गतिविधियों की ताजा जानकारी उपलब्ध कराने और कर्मचारियों से सुझाव लेने जैसे निर्देश दिए गए थे। इससे संकेत मिलता है कि इस बार का मंथन केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि पिछले निर्णयों की जमीन पर हुई प्रगति को भी कसौटी पर परखा जाएगा।
प्रधानमंत्री की कार्यशैली में प्रशासनिक जवाबदेही और परिणाम पर जोर पहले भी दिखाई देता रहा है। हाल ही में उन्होंने मंत्रालयों और विभागों की आधिकारिक वेबसाइटों को अधिक सुविधाजनक और जनोन्मुख बनाने पर भी जोर दिया था। यह बदलाव उस व्यापक सोच का हिस्सा माना जा सकता है जिसमें सरकार और नागरिक के बीच संवाद को अधिक सरल और प्रत्यक्ष बनाने की कोशिश की जा रही है।
इसी राजनीतिक और प्रशासनिक पृष्ठभूमि में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर दिया गया संदेश भी महत्वपूर्ण हो जाता है। शाह ने मोदी की 25 वर्षों की सार्वजनिक यात्रा को राष्ट्रसेवा और त्याग से जोड़ा और कहा कि उन्होंने सत्ता को लक्ष्य नहीं, बल्कि गरीबों के कल्याण और राष्ट्रनिर्माण का माध्यम माना। उन्होंने आवास, आयुष्मान योजना, महिला सशक्तीकरण, युवा अवसर, बुनियादी ढांचे और सुरक्षा से जुड़े कदमों को मोदी सरकार की उपलब्धियों के रूप में रेखांकित किया।
शाह ने अनुच्छेद 370, सर्जिकल और हवाई कार्रवाई तथा आतंकवाद के विरुद्ध सरकार की नीति का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर सरकार ने निर्णायक कार्रवाई की है। साथ ही उन्होंने पूर्वोत्तर में शांति समझौतों और नक्सलवाद के विरुद्ध कार्रवाई को भी सरकार की उपलब्धियों में गिनाया।
इस पूरे घटनाक्रम की राजनीतिक तस्वीर देखें तो प्रधानमंत्री के जन्मदिन से शुरू हुआ ‘सेवा संकल्प’ अभियान और उसके तुरंत बाद होने वाला मंत्रिपरिषद का चिंतन शिविर एक ही व्यापक राजनीतिक संदेश को सामने लाते हैं। यह है सेवा की राजनीति के साथ शासन की गति और परिणामों पर जोर। हम आपको यह भी बता दें कि भाजपा ने प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन को केंद्र में रखते हुए महीने भर चलने वाले सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत भी की है।
बहरहाल, तीसरे कार्यकाल के मध्य में होने वाला यह चिंतन शिविर इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि मोदी सरकार अब अपने अगले चरण की प्राथमिकताओं को अधिक स्पष्ट रूप देने की तैयारी में है। जन्मदिन के अवसर पर उपलब्धियों का राजनीतिक संदेश और उसके साथ ही मंत्रियों से आत्ममंथन की अपेक्षा, दोनों को साथ रखकर देखें तो तस्वीर यही बनती है कि मोदी सरकार अपने कार्यकाल के अगले पड़ाव में केवल उपलब्धियों का बखान नहीं, बल्कि प्रशासनिक मशीनरी से और अधिक गति, बेहतर समन्वय और स्पष्ट परिणाम की अपेक्षा कर रही है।
Maharashtra में फसल नुकसान का सर्वे 5 अक्टूबर से, NDRF से पहले राज्य देगा मदद
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बृहस्पतिवार को कहा कि राज्य सरकार पांच अक्टूबर के बाद फसल नुकसान का सर्वेक्षण कराएगी और राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (एनडीआरएफ) से सहायता मिलने का इंतजार किए बिना किसानों को अपने संसाधनों से वित्तीय मदद उपलब्ध कराएगी। फडणवीस ने छत्रपति संभाजीनगर के सिद्धार्थ गार्डन में ‘हैदराबाद मुक्ति संग्राम दिन’ (मराठवाड़ा मुक्ति दिवस) के अवसर पर ध्वजारोहण समारोह में शामिल होने के बाद यह बात कही। उन्होंने हैदराबाद रियासत से मुक्ति के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी।
उन्होंने कहा कि मराठवाड़ा क्षेत्र वर्षों से विकास संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहा है और इस साल सूखे जैसी स्थिति पैदा हो गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने फसल नुकसान के आकलन के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं और नियमों के अनुसार पांच अक्टूबर के बाद पंचनामा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों को एनडीआरएफ से सहायता मिलेगी, लेकिन उससे पहले राज्य सरकार अपने कोष से मदद उपलब्ध कराएगी।
उन्होंने कहा कि कम बारिश के कारण फसलों को नुकसान हुआ है और किसान परेशान हैं। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने पहले बताया था कि राज्य के 18 जिलों में कम बारिश के कारण सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है और करीब आधे किसान इससे प्रभावित हैं। फडणवीस ने कहा कि धाराशिव (पूर्व में उस्मानाबाद) जिले में 80 दिनों तक बारिश नहीं हुई, जिससे फसल नुकसान 80 से 85 प्रतिशत तक होने की आशंका है।
उन्होंने कहा कि बारिश की कमी से फूल आने और फलियां बनने के महत्वपूर्ण चरणों में नमी की कमी हुई, जिससे अनाज के विकास और भराव पर असर पड़ा। उन्होंने बताया कि किसान अपने खेतों में सूखे पौधों को मवेशियों के चारे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने किसानों के लंबित 48 हजार करोड़ रुपये के बिजली बिल माफ करने की भी घोषणा की।
उन्होंने कहा कि चारे और पेयजल की कमी की आशंका को देखते हुए सरकार ने आवश्यक इंतजाम किए हैं और किसानों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। मराठवाड़ा मुक्ति दिवस के कार्यक्रम में फडणवीस ने क्षेत्र के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद 13 महीने तक मराठवाड़ा निजाम के शासन में रहा और बाद में यह भारत का हिस्सा बना। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को अब सूखे से मुक्त बनाने के लिए जल परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मराठवाड़ा में पानी पहुंचाने की पहली चरण की परियोजना पूरी हो चुकी है और विश्व बैंक ने बाढ़ नियंत्रण परियोजना को मंजूरी दे दी है। इससे अतिरिक्त 30 टीएमसी पानी उपलब्ध होगा, जिसे बीड, लातूर और धाराशिव क्षेत्रों तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोंकण से गोदावरी घाटी तक पानी लाने वाली नदी जोड़ो परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट अंतिम चरण में है और इससे करीब 70 टीएमसी पानी उपलब्ध होगा।
फडणवीस ने कहा कि छत्रपति संभाजीनगर में औद्योगिक विकास के लिए सरकार 8,000 एकड़ अतिरिक्त जमीन का अधिग्रहण करेगी। उन्होंने कहा कि जेएसडब्ल्यू, टोयोटा और एथर जैसी कंपनियों के निवेश से क्षेत्र को इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने शहर में यातायात समस्या दूर करने के लिए महाराष्ट्र की सबसे बड़ी एलिवेटेड सड़क बनाने और जालना ड्राई पोर्ट के जरिए औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना की भी जानकारी दी।
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