Santan Saptami 2026: आज या कल... कब रखा जाएगा संतान सप्तमी का व्रत? जानें सही डेट-शुभ मुहूर्त
Santan Saptami 2026 Kab Hai: हिंदू धर्म में सप्तमी तिथि का खास महत्व होता है. सप्तमी से जुड़े कई पर्व व व्रत होते हैं. ऐसा ही एक खास दिन संतान सप्तमी का होता है. संतान सप्तमी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के दिन होती है. संतान सप्तमी का व्रत अपने नाम से ही स्पष्ट है कि इस व्रत को संतान के लिए रखा जाता है. जिन महिलाओं को संतान का सुख चाहिए, जो अपनी संतान के सुख और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती है. वे इस दिन व्रत रखेंगी. मगर इस वर्ष संतान सप्तमी की तारीख को लेकर थोड़ा कंफ्यूजन बना हुआ है. लोगों के मन में यह दुविधा है कि सप्तमी तिथि आज शुरू हो रही है तो व्रत किस दिन रखा जाए? आइए आपको बताते हैं संतान सप्तमी व्रत किस दिन रखा जाएगा और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या होगा?
संतान सप्तमी व्रत 2026 की सही डेट (Santan Saptami 2026 Date)
द्रिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर संतान सप्तमी का व्रत रखा जाता है. पंचांग की गणना के अनुसार, यह तिथि 17 सितंबर को सुबह 10 बजकर 48 मिनट पर शुरू होगी और 18 सितंबर को दोपहर 01:01 मिनट पर समाप्त होगी. सनातन धर्म में व्रत उदयातिथि पर रखा जाता है. इसलिए, उदयातिथि 18 सितंबर 2026 की है तो व्रत भी उसी दिन रखा जाएगा.
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संतान सप्तमी 2026 पूजा मुहूर्त (Santan Saptami 2026 Shubh Muhurat)
संतान सप्तमी के दिन पूजा करने के लिए शुभ मुहूर्त मिल रहे हैं आप 18 सितंबर को यानी कल व्रत रखेंगे. इस दिन सुबह पूजा करने का शुभ मुहूर्त 7:45 से लेकर 9:18 तक रहेगा. इसके अलावा, अभिजीत मुहूर्त में पूजा करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है. इसके बाद का मुहूर्त 11:51 मिनट से लेकर 12 बजकर 40 मिनट तक रहेगा. इस समय भी पूजा कर सकते हैं.
संतान सप्तमी पर किसकी पूजा होती है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संतान सप्तमी पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है. इस व्रत को करने से संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और उज्जवल भविष्य की कामना की जाती है.
7 अंक की महत्वता
संतान सप्तमी की पूजा में सात अंक की खास महत्वता होती है. पूजा के दौरान 7 गांठों वाला सूती डोरा भगवान शिव और माता पार्वती के सामने रखना होता है. पूजा के बाद माता इस धागे को अपनी कलाई पर बांधती है.
संतान सप्तमी पूजन विधि
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करना है. इसके बाद साफ-सुथरे कपड़े पहनने चाहिए. भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए. अब अक चौकी पर साफ कपड़ा बिछाएं. गंगाजल छिड़कर उसे पवित्र करें. इसके बाद शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें. इसके बाद सूती धागा लें और उसमें 7 गांठें बाधें. उसे हल्दी या केसर से रंगें. अब इसे भगवान के सामने रखें. शिव-पार्वती की विधिवत पूजा करें. उन्हें रोली, चंदन, फल, फूल और मिठाई अर्पित करें. घी का दीया जलाएं.
संतान सप्तमी पर किन चीजों का भोग लगाएं?
धार्मिक मान्यता है कि संतान सप्तमी पर भगवान शिव और माता पार्वती को कुछ विशेष चीजों का भोग लगाया जाता है. इस दिन सात पुए का भोग लगाते हैं. ये आटे और गुड़ से बनाएं जाते हैं और फिर देसी घी में तले जाते हैं. साथ ही इस दिन पंचमेवे का भी भोग लगाया जाता है. इन चीजों का भोग लगाने के बाद शिव-पार्वती की आरती करें. सात पुए किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को दान कर सकते हैं. व्रत का पारण भी पुए खाकर किया जाता है.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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