Banda में डेढ़ साल के बेटे की हत्या कर शव नदी में फेंकने के आरोप में पिता गिरफ्तार
बांदा जिले में पैलानी थाना क्षेत्र की पुलिस ने डेढ़ साल के बच्चे की हत्या कर उसका शव नदी में फेंकने के आरोप में उसके पिता को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
बांदा सदर क्षेत्र के पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) राजवीर सिंह गौर ने बताया कि पैलानी क्षेत्र के पचकौरी गांव में अपने मायके में रह रही एक महिला ने सात जनवरी को प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि पांच जनवरी की रात उसके डेढ़ साल के बेटे कार्तिक को उसका पति राजेंद्र कहीं लेकर चला गया।
उन्होंने बताया कि इसी प्राथमिकी के आधार पर फतेहपुर जिले के ललौली थाना क्षेत्र के धनुहन डेरा निवासी राजेंद्र (32) को शुक्रवार को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो पता चला कि उसने कार्तिक की गला दबाकर हत्या करने के बाद उसके शव को यमुना नदी में फेंक दिया है।
सीओ ने बताया कि राजेंद्र की निशानदेही पर नदी में शव की तलाश की जा रही है, लेकिन पानी का बहाव ज्यादा होने की वजह से सफलता नहीं मिली। उन्होंने बताया कि आरोपी को शनिवार को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने बताया कि राजेंद्र शराब पीने का आदी है और उससे अनबन होने के चलते उसकी पत्नी शारदा अपने मायके में रह रही है।
अदालत के आदेश पर Barabanki में वित्तीय घोटाले में 10 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज
बाराबंकी जिले के थाना कोतवाली क्षेत्र स्थित मुंशी रघुनंदन प्रसाद सरदार पटेल महिला महाविद्यालय के संचालन से जुड़े एक कथित वित्तीय घोटाले में अदालत के आदेश पर पुलिस ने 10 लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की है।
नगर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि अदालत के आदेश पर उमाशंकर वर्मा, धीरेंद्र कुमार, मानव पटेल, मान सिंह, राजेश कुमार, राजीव, अशोक, सुनील, अजय और भागवत नाम के आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई है।
पुलिस ने बताया कि कोतवाली नगर के दशहरा बाग स्थित मुंशी रघुनंदन प्रसाद सरदार पटेल महिला महाविद्यालय की संस्थापक संरक्षक सदस्य कृष्णा चौधरी ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि प्रबंध समिति के कुछ अधिकारियों ने फर्जी एवं कूट रचित दस्तावेज तैयार कर संस्थान के करीब 2.7 करोड़ रुपये का गबन कर लिया है।
कृष्णा चौधरी ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत में आवेदन प्रस्तुत किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उमाशंकर वर्मा और सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष धीरेंद्र कुमार वर्मा ने बिना किसी वैध प्रक्रिया के चुनाव कराए और रजिस्ट्रार फर्म्स, सोसाइटी एवं चिट्स अयोध्या की अनुमति के बिना स्वयं को संस्थान का अधिकारी घोषित कर लिया।
वादी के अनुसार पांच अप्रैल 2020 को देशव्यापी लाकडाउन के दौरान फर्जी तरीके से प्रबंध समिति की बैठक दिखाकर 17 लोगों के जाली हस्ताक्षर किए गए। इसके आधार पर राष्ट्रीयकृत बैंक के अलावा जिला सहकारी बैंक में संस्थान का खाता संचालित कर लगभग 50 लाख रुपये दयाराम एंड संस ट्रेडिंग फर्म को बिना किसी बिल के आरटीजीएस के माध्यम से भेज दिए गए।
आरोप है कि इसके अतिरिक्त उमाशंकर वर्मा ने अपने पुत्र मानव पटेल के खाते में बिना प्रबंध कार्यकारिणी की स्वीकृति के 20 लाख रुपये स्थानांतरित किए। इस दौरान धीरेंद्र कुमार वर्मा के जिला सहकारी बैंक के नामित चेयरमैन होने का भी लाभ उठाने का आरोप लगाया गया है।
कृष्णा चौधरी ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उन्होंने पहले भी इस मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक से की थी और 25 सितंबर 2025 को पुनः प्रार्थना पत्र दिया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में अदालत ने आवेदन पर सुनवाई कर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। इस बीच उमाशंकर वर्मा ने कहा कि संस्था में कहीं कोई अनियमितता नहीं है।
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