Stock Market Today: मिश्रित वैश्विक संकेतों के बीच शेयर बाजार की सपाट शुरुआत, PSU स्टॉक्स में खरीदारी
Stock Market Today: मिश्रित वैश्विक संकेतों से भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत गुरुवार को सपाट हुई. सुबह 9:16 पर सेंसेक्स 49 अंक या 0.07 प्रतिशत की मामूली कमजोरी के साथ 74,291 और निफ्टी 19 अंक की मामूली बढ़त के साथ 23,235 पर था.
शुरुआती कारोबार में बाजार की तेजी को सहारा पीएसयू शेयर दे रहे थे. सूचकांकों में निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी पीएसई टॉप गेनर्स थे. निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी मेटल, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग और निफ्टी ऑटो हरे निशान में थे.
दूसरी तरफ निफ्टी आईटी, निफ्टी मीडिया और निफ्टी प्राइवेट बैंक लाल निशान में था.
लार्जकैप की अपेक्षा मिडकैप और स्मॉलकैप में तेजी के साथ कारोबार हो रहा था. निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 221 अंक या 0.36 प्रतिशत की तेजी के साथ 61,096 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 88 अंक या 0.46 प्रतिशत की मजबूती के साथ 19,478 पर था.
सेंसेक्स पैक में बीईएल, इटरनल, बजाज फाइनेंस, टाटा स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स, एनटीपीसी, आईटीसी, अदाणी पोर्ट्स, बजाज फिनसर्व, पावर ग्रिड, इंडिगो, मारुति सुजुकी, कोटक महिंद्रा बैंक, ट्रेंट और एसबीआई गेनर्स थे.
वहीं, लूजर्स में टीसीएस, एचसीएल टेक, एचडीएफसी बैंक, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, आईसीआईसीआई बैंक, भारती एयरटेल, टाइटन, सन फार्मा, एचयूएल और एक्सिस बैंक शामिल थे.
वैश्विक बाजारों में मिलाजुला कारोबार हो रहा था. टोक्यो, बैंकॉक, जकार्ता और सोल हरे निशान में थे. वहीं, शंघाई और हांगकांग लाल निशान में थे. वहीं, यूएस फेड की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी के कारण अमेरिकी बाजार लाल निशान में बंद हुए, जिसमें मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स में 1.21 प्रतिशत की गिरावट देखी गई.
जानकारों ने कहा कि फेड का ब्याज दरें 25 आधार अंक या 0.25 प्रतिसत बढ़ाने का फैसला पूरी तरह उम्मीद के मुताबिक था. महंगाई ज्यादा होने और मजबूत अर्थव्यवस्था (जिसमें बेरोजगारी दर सिर्फ 4.1 प्रतिशत है) के माहौल में ब्याज दरों को स्थिर रखने का कोई कारण नहीं था.
उन्होंने आगे कहा कि केविन वॉर्श का यह सख्त रुख वाला संदेश है कि महंगाई बहुत ज्यादा रही है और लंबे समय से ऐसी ही बनी हुई है और कीमतों को स्थिर रखने के लिए यह कदम जरूरी था.
स्रोत- आईएएनएस
असली TMC किसकी? पश्चिम बंगाल में उपचुनाव से पहले पार्टी के नाम और चुनाव निशान पर बड़ा फैसला आज!
TMC Name Symbol Dispute: पश्चिम बंगाल की सियासत में जो पार्टी कभी ममता बनर्जी की पहचान मानी जाती थी, आज उसी पार्टी के असली मालिकाना हक को लेकर दिल्ली में फैसला आ सकता है. तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी का नाम, "जोड़ा फूल घास पर" वाला चुनाव चिह्न और पार्टी पर संगठनात्मक कब्जा इन तीनों को लेकर ममता बनर्जी गुट और पार्टी के ही बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी गुट बीते विधानसभा चुनाव से ही आमने-सामने खड़े हैं. गुरुवार को चुनाव आयोग दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इस विवाद पर बड़ा फैसला सुना सकता है. आइए समझते हैं कि यह पूरा मामला शुरू कहां से हुआ और अब किस मोड़ पर पहुंचा है.
TMC पार्टी के नाम और चुनाव निशान पर विवाद शुरू कैसे हुआ?
टीएमसी में यह संकट कोई अचानक नहीं आया. उलुबेरिया पूर्व सीट से विधायक ऋतब्रत बनर्जी और उनके साथी नेताओं को ममता बनर्जी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासन कर दिया था. जिसके बाद ऋतब्रत और अन्य पार्टी नेताओं ने अपना अलग खेमा खड़ा कर लिया. जून 2026 में इस बागी गुट ने चौंकाने वाला ऐलान करते हुए ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाने और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी को पार्टी से निलंबित करने की घोषणा कर दी.
15 साल के TMC शासन में जो काम अटके रहे, अब 15 हफ्तों में उन पर तेजी से काम हो रहा है!
— Oc updates (@ocjain4) September 16, 2026
जूनपुट, पश्चिम बंगाल में DRDO का नया हथियार और मिसाइल परीक्षण केंद्र—CM सुवेंदु अधिकारी ने परियोजना को मंजूरी दी।
एक सही वोट की ताकत देखिए—बंगाल में विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा, दोनों को नई… pic.twitter.com/tRwZ7sPcwB
वेस्ट बंगाल विधानसभा में असली नेता प्रतिपक्ष कौन बना?
इस लड़ाई ने तब और गंभीर मोड़ लिया जब पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर रवींद्रनाथ बोस ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के तौर पर मान्यता दे दी. ममता बनर्जी खेमे ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को यह पद सौंपा था, लेकिन पार्टी के करीब 80 में से 58 से ज्यादा विधायकों ने बगावत कर ऋतब्रत गुट का साथ दिया.
TMC के नाम और चुनाव निशान विवाद चुनाव आयोग कैसे पहुंचा?
जब पार्टी के भीतर सुलह की हर कोशिश नाकाम हो गई तो दोनों गुट अपने-अपने दावों के साथ भारतीय चुनाव आयोग के पास पहुंचे. जुलाई 2026 में ही आयोग ने ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी दोनों को नोटिस भेजकर संगठनात्मक स्थिति पर जवाब मांगा था. तब से यह मामला आयोग के पास लंबित है और दोनों पक्ष खुद को टीएमसी का असली प्रतिनिधि साबित करने के लिए दस्तावेज और दलीलें पेश करते आ रहे हैं.
आज की सुनवाई इतनी अहम क्यों मानी जा रही है?
दरअसल, पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने वाला है, और इन दोनों ही सीटों पर ममता गुट और ऋतब्रत गुट ने एक ही चुनाव चिह्न पर अपने-अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं. नामांकन की आखिरी तारीख 16 सितंबर बीत चुकी है, जिससे आयोग पर जल्द फैसला लेने का दबाव बढ़ गया है. बुधवार को दोनों खेमों से अपने-अपने दावों के समर्थन में जरूरी कागजात जमा कराए हैं और गुरुवार को दिल्ली में आयोग की पूरी बेंच के सामने दोनों गुटों की अलग-अलग सुनवाई तय की गई है.
आयोग के सामने क्या विकल्प हैं?
चुनाव आयोग के पास इस मामले में कई तरह के रास्ते खुले हैं. वह किसी एक गुट को पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न अस्थायी तौर पर सौंप सकता है, या फिर दोनों गुटों से यह चिह्न पूरी तरह छीनकर उन्हें अलग-अलग नए चुनाव चिह्न आवंटित कर सकता है. एक अन्य संभावना यह भी है कि आयोग उपचुनाव तक के लिए कोई अंतरिम व्यवस्था बना दे ताकि 6 अक्टूबर की वोटिंग में असमंजस की स्थिति न बने जबकि नाम और चिह्न पर अंतिम फैसला बाद में हो.
क्या पहले भी किसी पार्टी में ऐसा विवाद देखा गया है?
इससे पहले शिवसेना और एनसीपी में हुई टूट के बाद भी पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर ठीक इसी तरह का विवाद चुनाव आयोग तक पहुंचा था. जहां आयोग ने बहुमत के आधार पर एक गुट को असली पार्टी के तौर पर मान्यता दी थी. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी के मामले में भी आयोग विधायकों और संगठनात्मक ढांचे में बहुमत को ही मुख्य आधार बना सकता है. हालांकि हर मामले के तथ्य अलग होते हैं और अंतिम फैसला केस-दर-केस आधार पर ही होता है.
कौन हैं बुशरा बानो, जिनके 'अस्सलामु अलैकुम' बोलने वाले वीडियो पर मचा विवाद?
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