असली TMC किसकी? पश्चिम बंगाल में उपचुनाव से पहले पार्टी के नाम और चुनाव निशान पर बड़ा फैसला आज!
TMC Name Symbol Dispute: पश्चिम बंगाल की सियासत में जो पार्टी कभी ममता बनर्जी की पहचान मानी जाती थी, आज उसी पार्टी के असली मालिकाना हक को लेकर दिल्ली में फैसला आ सकता है. तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी का नाम, "जोड़ा फूल घास पर" वाला चुनाव चिह्न और पार्टी पर संगठनात्मक कब्जा इन तीनों को लेकर ममता बनर्जी गुट और पार्टी के ही बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी गुट बीते विधानसभा चुनाव से ही आमने-सामने खड़े हैं. गुरुवार को चुनाव आयोग दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इस विवाद पर बड़ा फैसला सुना सकता है. आइए समझते हैं कि यह पूरा मामला शुरू कहां से हुआ और अब किस मोड़ पर पहुंचा है.
TMC पार्टी के नाम और चुनाव निशान पर विवाद शुरू कैसे हुआ?
टीएमसी में यह संकट कोई अचानक नहीं आया. उलुबेरिया पूर्व सीट से विधायक ऋतब्रत बनर्जी और उनके साथी नेताओं को ममता बनर्जी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासन कर दिया था. जिसके बाद ऋतब्रत और अन्य पार्टी नेताओं ने अपना अलग खेमा खड़ा कर लिया. जून 2026 में इस बागी गुट ने चौंकाने वाला ऐलान करते हुए ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाने और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी को पार्टी से निलंबित करने की घोषणा कर दी.
15 साल के TMC शासन में जो काम अटके रहे, अब 15 हफ्तों में उन पर तेजी से काम हो रहा है!
— Oc updates (@ocjain4) September 16, 2026
जूनपुट, पश्चिम बंगाल में DRDO का नया हथियार और मिसाइल परीक्षण केंद्र—CM सुवेंदु अधिकारी ने परियोजना को मंजूरी दी।
एक सही वोट की ताकत देखिए—बंगाल में विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा, दोनों को नई… pic.twitter.com/tRwZ7sPcwB
वेस्ट बंगाल विधानसभा में असली नेता प्रतिपक्ष कौन बना?
इस लड़ाई ने तब और गंभीर मोड़ लिया जब पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर रवींद्रनाथ बोस ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के तौर पर मान्यता दे दी. ममता बनर्जी खेमे ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को यह पद सौंपा था, लेकिन पार्टी के करीब 80 में से 58 से ज्यादा विधायकों ने बगावत कर ऋतब्रत गुट का साथ दिया.
TMC के नाम और चुनाव निशान विवाद चुनाव आयोग कैसे पहुंचा?
जब पार्टी के भीतर सुलह की हर कोशिश नाकाम हो गई तो दोनों गुट अपने-अपने दावों के साथ भारतीय चुनाव आयोग के पास पहुंचे. जुलाई 2026 में ही आयोग ने ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी दोनों को नोटिस भेजकर संगठनात्मक स्थिति पर जवाब मांगा था. तब से यह मामला आयोग के पास लंबित है और दोनों पक्ष खुद को टीएमसी का असली प्रतिनिधि साबित करने के लिए दस्तावेज और दलीलें पेश करते आ रहे हैं.
आज की सुनवाई इतनी अहम क्यों मानी जा रही है?
दरअसल, पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने वाला है, और इन दोनों ही सीटों पर ममता गुट और ऋतब्रत गुट ने एक ही चुनाव चिह्न पर अपने-अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं. नामांकन की आखिरी तारीख 16 सितंबर बीत चुकी है, जिससे आयोग पर जल्द फैसला लेने का दबाव बढ़ गया है. बुधवार को दोनों खेमों से अपने-अपने दावों के समर्थन में जरूरी कागजात जमा कराए हैं और गुरुवार को दिल्ली में आयोग की पूरी बेंच के सामने दोनों गुटों की अलग-अलग सुनवाई तय की गई है.
आयोग के सामने क्या विकल्प हैं?
चुनाव आयोग के पास इस मामले में कई तरह के रास्ते खुले हैं. वह किसी एक गुट को पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न अस्थायी तौर पर सौंप सकता है, या फिर दोनों गुटों से यह चिह्न पूरी तरह छीनकर उन्हें अलग-अलग नए चुनाव चिह्न आवंटित कर सकता है. एक अन्य संभावना यह भी है कि आयोग उपचुनाव तक के लिए कोई अंतरिम व्यवस्था बना दे ताकि 6 अक्टूबर की वोटिंग में असमंजस की स्थिति न बने जबकि नाम और चिह्न पर अंतिम फैसला बाद में हो.
क्या पहले भी किसी पार्टी में ऐसा विवाद देखा गया है?
इससे पहले शिवसेना और एनसीपी में हुई टूट के बाद भी पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर ठीक इसी तरह का विवाद चुनाव आयोग तक पहुंचा था. जहां आयोग ने बहुमत के आधार पर एक गुट को असली पार्टी के तौर पर मान्यता दी थी. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी के मामले में भी आयोग विधायकों और संगठनात्मक ढांचे में बहुमत को ही मुख्य आधार बना सकता है. हालांकि हर मामले के तथ्य अलग होते हैं और अंतिम फैसला केस-दर-केस आधार पर ही होता है.
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कृति खरबंदा के बॉलीवुड में 10 साल, इन 5 फिल्मों में दिखा उनकी एक्टिंग का अलग अंदाज
Kriti Kharbanda Bollywood 10 Years: बॉलीवुड एक्ट्रेस कृति खरबंदा ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपने 10 साल पूरे कर लिए हैं. इन सालों में एक्ट्रेस ने हॉरर, रोमांस और कॉमेडी जैसे अलग-अलग जॉनर में काम किया है. फिल्मों के साथ-साथ उन्होंने ओटीटी पर भी अपनी एक्टिंग का दम दिखाया. अपने करियर में कृति ने कई तरह के किरदार निभाए और हर बार कुछ नया करने की कोशिश की. ऐसे में जानते हैं, उनकी 5 यादगार परफॉर्मेंस के बारे में-
1. ‘राज रीबूट’ से हुई बॉलीवुड में शुरुआत
कृति खरबंदा ने हिंदी सिनेमा में फिल्म ‘राज रीबूट’ से कदम रखा था. साल 2016 में आई ये एक हॉरर-थ्रिलर फिल्म थी, जिसमें एक्ट्रेस शाइना के किरदार में देखा गया था. फिल्म की कहानी में उनका किरदार काफी अहम था और इसी फिल्म के जरिए कृति ने हिंदी सिनेमा में अपनी शुरुआत की. इस हॉरर जॉनर फिल्म ने उन्हें बॉलीवुड में आगे बढ़ने का मौका दिया.
2. ‘शादी में जरूर आना’ में दिखा अलग अंदाज
कृति की फिल्मों की बात हो और ‘शादी में जरूर आना’ का नाम न आए, ऐसा हो नहीं सकता. 2017 में आई इस फिल्म में उन्होंने आरती शुक्ला का किरदार निभाया था. आरती एक ऐसी लड़की होती, जो अपने करियर, रिश्ते और परिवार के बीच कई फैसलों का सामना करती है.फिल्म की कहानी में कृति का किरदार इमोशनल रूप से कई उतार-चढ़ाव से गुजरता है. इस किरदार में उनकी एक्टिंग को दर्शकों ने काफी पसंद किया था.
3. ‘हाउसफुल 4’ में कॉमेडी का तड़का
कृति खरबंदा ने हॉरर और सीरियस रोल के बाद कॉमेडी में भी अपना हाथ आजमाया. ‘हाउसफुल 4’ में वो अक्षय कुमार, रितेश देशमुख, बॉबी देओल और कृति सैनन जैसे कलाकारों के साथ नजर आईं थी. फिल्म में उन्होंने दो अलग-अलग समय की कहानी से जुड़े किरदार प्ले किए थे. एक रोल राजकुमारी मीना का था और दूसरा पूजा का रोल था. इन दोनों रोल्स में कृति ने अपनी कॉमेडी से दर्शकों को खूब हंसाया था. बड़े स्टार्स वाली इस फिल्म में भी उनकी स्क्रीन प्रेजेंस देखने को मिली थी.
4. ‘14 फेरे’ में प्यार और परिवार के बीच फंसी
साल 2021 में आई फिल्म ‘14 फेरे’ में कृति खरबंदा ने अदिति करवासरा का किरदार निभाया था. फिल्म में उनका रोल अपने प्यार और परिवार की उम्मीदों के बीच रास्ता निकालने की कोशिश करता है. कहानी में कॉमेडी के साथ इमोशनल मोमेंट्स भी देखने को मिले थे. कृति ने दोनों तरह के सीन्स को अपने अंदाज में निभाया और इस फिल्म के जरिए एक बार फिर अलग तरह का रोल करके दर्शकों का दिल जीता था.
5. ‘राणा नायडू 2’ से ओटीटी पर शुरुआत
कृति खरबंदा ने फिल्मों के अलावा ओटीटी की दुनिया में भी कदम बढ़ाया है. वो ‘राणा नायडू सीजन 2’में नजर आई थी. इस सीरीज के जरिए उन्हें लंबे फॉर्मेट की कहानी में काम करने का मौका मिला. इस सीरीज में उनकी एक्टिंग को भी काफी सरहाना मिलवी थी. वहीं, ओटीटी पर काम करना उनके लिए फिल्मों से अलग एक्सपीरियंस रहा और इस प्रोजेक्ट ने उनके करियर में एक नया अध्याय जोड़ा.
10 साल में बदला कृति का अंदाज
बता दें, कृति खरबंदा के 10 साल के सफर को देखें तो उन्होंने एक ही तरह के किरदारों तक खुद को सीमित नहीं रखा है. कभी ‘राज रीबूट’ के हॉरर से लेकर ‘शादी में जरूर आना’ के इमोशनल रोल और ‘हाउसफुल 4’ की कॉमेडी तक उन्होंने अलग-अलग तरह का काम किया और फैंस को एंटरटेन किया है. उनका यही अंदाज लोगों को पसंद आता है और उनके करियर को इंडस्ट्री में खास बनाता है.
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