सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने श्रीलंका के उप रक्षा मंत्री के साथ वार्ता की
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से श्रीलंका की दो दिवसीय यात्रा के दौरान द्वीपीय देश के उप रक्षा मंत्री अरुणा जयशेखरा और श्रीलंकाई सेना के शीर्ष अधिकारियों के साथ वार्ता की। सेना प्रमुख सैन्य सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से 7 से 8 जनवरी तक श्रीलंका की आधिकारिक यात्रा पर थे।
भारतीय उच्चायोग ने बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, ‘‘इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को मजबूत करना, दोनों देशों की सेनाओं के जुड़ाव को बढ़ाना, मानवीय सहायता और आपदा राहत के लिए सहयोग करना और पारस्परिक हित के क्षेत्रों में सहयोग को सुदृढ़ करना था। यह क्षेत्रीय सुरक्षा, स्थिरता और स्थायी रक्षा साझेदारी के प्रति भारत और श्रीलंका की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।’’
श्रीलंका के सेना मुख्यालय में जनरल द्विवेदी को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया। उन्होंने श्रीलंका सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बीकेजीएम लासंथा रोड्रिगो से बातचीत की।
पोस्ट में कहा गया है, ‘‘इस अवसर पर सैन्य वाहन, एम्बुलेंस और प्रशिक्षण सिमुलेटर भी सौंपे गए, जिससे रक्षा सहयोग और दोनों देशों के बीच अटूट मित्रता को और मजबूती मिली।’’
सेना प्रमुख ने 1987 से 1990 तक श्रीलंका में शांति अभियानों के दौरान शहीद हुए भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने भारतीय शांति सेना स्मारक पर पुष्पांजलि भी अर्पित की।
आधी पृथ्वी पर अपना अधिकार जमाने का प्लान, Venezuela के बाद अमेरिका 20 दिन में इस देश पर करेगा कब्जा
दुनिया का सबसे बड़ा आइलैंड और अब सबसे इंपॉर्टेंट आइलैंड। ग्रीनलैंड बिल्कुल ग्रीन नहीं 80% ग्रीनलैंड बर्फ से ढका हुआ है और यहां पर सिर्फ 57,000 की आबादी है और इसीलिए इसे इतना महत्व कभी मिला नहीं। सदियों से गुमनाम रहा है दुनिया का सबसे बड़ा आइलैंड लेकिन अब सुपर पावर की लड़ाई का यह केंद्र बनता जा रहा है। अमेरिका ने डॉनल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की बात कही है। बाय द वे आई हैव आई विल से दिस अबाउट ग्रीनलैंड वी नीड ग्रीनलैंड। वो बार-बार इस बयान को कहते आए हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड बहुत ही जरूरी है और वहां पर रूसी और चीनी जहाजों की मौजूदगी अमेरिका के लिए चिंता की बात है। उन्होंने कहा था कि वो 20 दिन में ग्रीनलैंड पर बात करेंगे। ग्रीनलैंड को लेकर डॉनल्ड ट्रंप की इच्छा को शुरू में लोगों ने मजाक समझा। लेकिन अब यह मजाक रहा नहीं। ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक स्वायत्त इलाका यानी जिसे ऑटोनॉमस ज़ोन कहा जाता है वो है। यहां पर डेनमार्क के करीब 20 से ज्यादा सैनिक तैनात हैं। और अगर पूरे एरिया की बात करें तो तकरीबन 200 ऐसे सैनिक हैं जिनकी तैनाती ग्रीनलैंड के अलग-अलग एरियाज में है।
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ग्रीनलैंड की अपनी कोई सेना नहीं है। कोई आर्मी नहीं है। उनकी रक्षा और उनकी विदेश नीति की जिम्मेदारी डेनमार्क की है। यहां पर अमेरिका का जो पिटूफिक स्पेस बेस है जिसे थूले एयरबेस भी कहा जाता है वो भी मौजूद है। ग्रीनलैंड के जो उत्तर पश्चिम एरिया की बात करें तो यह बेस अमेरिका ही चलाताहै। यह बेस मिसाइल चेतावनी सिस्टम और स्पेस मॉनिटरिंग के लिए काफी ज्यादा इस्तेमाल होता रहा है। इस बीच एक और गौर करने वाली बात यह कि ग्रीनलैंड नाटो का भी हिस्सा है। तो ऐसे में डेनमार्क के प्रधानमंत्री मैटेफ फ्रेडरिकसन ने यह कहा कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की कोशिश की जो कि दोनों ही नाटो कंट्री हैं तो नाटो सैन्य गठबंधन खत्म हो जाएगा। अंत हो जाएगा। अगर अमेरिका किसी नाटो सदस्य देश पर सैन्य कारवाई करता है तो नाटो की पूरी व्यवस्था खत्म हो जाएगी।
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सीधी सी बात है कि जो भी समंदर पर राज करेगा उसका दुनिया पर राज होगा। दुनिया के समुंदरों पर कंट्रोल करने के लिए कई देश चाहे रूस हो, चीन हो, अमेरिका हो, जद्दोजहद कर रहे हैं। लेकिन एक समंदर ऐसा है जिस पर कभी किसी ने कंट्रोल नहीं करना चाहा। आर्कटिक ओशन क्योंकि यहां पर हमेशा बर्फ ही बर्फ थी। किसी ने सोचा ही नहीं था कि वो किसी के काम का भी हो सकता है। लेकिन अब ग्रीनलैंड की जोेंस को बढ़ा रहा है वो यही आर्कटिक ओशन बढ़ा रहा है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण आर्कटिक की बर्फ धीरे-धीरे पिघल रही है।
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ग्रीनलैंड को लेकर होगी बैठक
अमेरिका के विदेश सचिव मार्के रुबिये अगले सप्ताह डेनमार्क के अधिकारियों से ग्रीनलैड को लेकर बैठक करेंगे। यह मेटिंग डेननर्क और ग्रेनलैंड की पहल पर हो रही है, ताकि अमेरिका को रणनीतिक रुचि और आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा मुद्दे पर बातचीत हो सके। रूबियों ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप लंबे समय से ग्रीनलैड पर विचार कर रहे है. हालाकि इसका मतलब सैन्य हस्तक्षेप नहीं है। डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारी बैठक में शामिल होंगे और इसे आवश्यक संवाद बलथ गया है। यह बैठक नाही और यूरोपीय तहयोंगियों की निगह में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि ऑनलैड पर अमेरिकी रुचि अर्कटिक रणनीति ने बड़ा कदम साबित हो सकती है।
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