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गुजरात कांग्रेस नेता का बेटा फर्जी पासपोर्ट केस में गिरफ्तार:ओरिजनल ED के पास, गुम होने की FIR करवाकर, यूपी नकली कागज से दूसरा बनवाया

गुजरात ATS ने अहमदाबाद के शाहिबाग निवासी हरिकेश पटेल को फर्जी दस्तावेजों से दूसरा पासपोर्ट बनवाने के आरोप में गिरफ्तार किया है। हरिकेश को 12 सितंबर को गिरफ्तार किया गया, 13 सितंबर को अदालत से उसे 6 दिन की रिमांड पर भेज दिया है। पटेल ने पावरबैंक ऐप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में अपना भारतीय पासपोर्ट अदालत में जमा किया था। इसके बाद उसने पासपोर्ट खोने की झूठी शिकायत दर्ज कराई और दूसरा पासपोर्ट बनवाया। हरिकेश, पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (PAAS) का पूर्व सदस्य है। अधिकारियों के मुताबिक, उसकी मां कांग्रेस पार्टी की सदस्य हैं। पटेल ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस की सुनवाई के दौरान अपना भारतीय पासपोर्ट अदालत में जमा किया था। इस पासपोर्ट का नंबर S2528999 है। दूसरा पासपोर्ट कैसे बनवाया अधिकारियों के मुताबिक, पटेल ने फर्जी दस्तावेज और गलत जानकारी देकर दूसरा पासपोर्ट हासिल कर लिया। इस पासपोर्ट का नंबर C0538007 है। मनी लॉन्ड्रिंग केस में पटेल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो गई थी। इसके बाद उसने हाईकोर्ट का रुख किया था। इसी दौरान पटेल ने दिल्ली क्राइम ब्रांच में पासपोर्ट खोने की झूठी शिकायत दर्ज कराई। रिलीज के मुताबिक, उसका मकसद गिरफ्तारी से बचना और विदेश जाना था। पटेल ने आधार कार्ड में उत्तर प्रदेश के आगरा का गलत पता दर्ज कराया। इसके आधार पर उसने दूसरे जरूरी दस्तावेज बनवाए। इसके बाद उसने 26 जुलाई 2024 को गाजियाबाद के रीजनल पासपोर्ट ऑफिस से दूसरा पासपोर्ट हासिल किया। फर्जी पासपोर्ट से 4 देशों की यात्रा की ATS के मुताबिक, पटेल ने दूसरे पासपोर्ट का इस्तेमाल कर भूटान के रास्ते बैंकॉक, सिंगापुर और दुबई की यात्रा की। वह नेपाल के रास्ते भारत लौटा। पटेल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और पासपोर्ट एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि मामले की आगे जांच जारी है।

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11.05 रुपये का IV सेट, MRP 325 रुपये, अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले मेडिकल सामान की कीमतों पर तुकाराम मुंढे ने उठाए सवाल

महाराष्ट्र में अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले मेडिकल सामान की खरीद कीमत और उन पर छपी MRP के बीच भारी अंतर का मामला सामने आया है। वरिष्ठ IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे ने इससे जुड़े आंकड़े साझा करते हुए इसे केवल कीमतों का नहीं, बल्कि मरीजों से जुड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य का मुद्दा बताया है।

मुंढे के मुताबिक महाराष्ट्र में अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले सामान के सर्वे में एक IV Infusion Set की ट्रेड कीमत 11.05 रुपये मिली, जबकि उस पर 325 रुपये MRP छपी थी। यानी ट्रेड कीमत के मुकाबले MRP करीब 2,841 प्रतिशत अधिक थी।

6.75 रुपये की सिरिंज पर 57.20 रुपये MRP

मुंढे ने अपने पोस्ट में दूसरे मेडिकल सामान के उदाहरण भी दिए। उनके मुताबिक 6.75 रुपये में खरीदी गई सिरिंज पर 57.20 रुपये की MRP थी। इसी तरह 29.41 रुपये की खरीद कीमत वाले कैथेटर पर 310 रुपये की MRP दर्ज थी।

उन्होंने सवाल उठाया कि अस्पताल में भर्ती मरीज के पास ऐसे सामान की कीमतों की तुलना करने या दूसरा विकल्प तलाशने का मौका नहीं होता। मरीज को यह भी पता नहीं होता कि मेडिकल सामान पर लिखी कीमत उसकी वास्तविक खरीद कीमत के कितने करीब है और उसमें कितना अंतर रखा गया है।

मरीज के पास न तुलना का मौका, न दूसरा विकल्प

मुंढे के मुताबिक यह सामान्य खरीदारी जैसा मामला नहीं है। इलाज करा रहा मरीज मेडिकल सामान लेने से इनकार करके बाजार में उसकी कीमत की तुलना नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि कई मामलों में MRP पहले ही निर्माता और वितरक के स्तर पर तय हो जाती है, जबकि ट्रेड कीमत और MRP के बीच बड़ा अंतर बना रहता है।

उनका कहना है कि इसका नतीजा ऐसी व्यवस्था के रूप में सामने आता है, जिसमें पैसा चुकाने वाले मरीज के पास ही कीमत को समझने और परखने के लिए सबसे कम जानकारी होती है।

दवाओं पर नियंत्रण, कई मेडिकल सामान पर वैसी व्यवस्था नहीं

तुकाराम मुंढे ने मौजूदा व्यवस्था पर भी सवाल उठाया। उनके मुताबिक Drugs (Prices Control) Order, 2013 के तहत सूचीबद्ध दवाओं की कीमतों पर सीमा तय है, लेकिन ज्यादातर मेडिकल डिवाइस और अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले सामान के मामले में कीमत तय करने और उससे जुड़ी जानकारी की निगरानी वैसी नहीं है।

मुंढे ने इन निष्कर्षों की समीक्षा करने और ट्रेड खरीद कीमत तथा घोषित MRP के बीच कितना अंतर रखा जा सकता है, इसे लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने की सिफारिश Department of Pharmaceuticals और NPPA से की है।

उन्होंने इसे मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ के साथ-साथ जानकारी की कमी को दूर करने की दिशा में जरूरी कदम बताया है।

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वनडे में सबसे ज्यादा रन देने वाले 5 तेज गेंदबाज, 23 साल से अटूट है विश्व कीर्तिमान

Most runs conceded 5 fast bowlers in ODI: वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन लुटाने वाले टॉप पांच तेज गेंदबाजों की लिस्ट में वसीम अकरम, चमिंडा वास, वकार यूनिस लसिथ मलिंगा और शॉन पोलॉक शामिल हैं. यह आंकड़े किसी असफलता का नहीं, बल्कि इन गेंदबाजों के लंबे और सफल करियर का प्रमाण हैं. सैकड़ों मुकाबले खेलने और टीम के लिए लगातार ओवर फेंकने की वजह से इनके खाते में इतने रन दर्ज हुए, जबकि सभी ने सैकड़ों विकेट चटकाकर अपनी टीमों को ऐतिहासिक जीत दिलाईं. Fri, 18 Sep 2026 19:15:14 +0530

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