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IVF से पहले Couples रखें इन 6 बातों का ध्यान: Dr. Rita Bakshi ने बताया Fertility Treatment से जुड़े जरूरी सवाल

Pregnancy Treatment: IVF का फैसला किसी भी कपल के लिए बड़ा कदम होता है। इलाज शुरू करने से पहले उम्र, फर्टिलिटी जांच, IVF की सफलता की संभावना, खर्च और आगे के विकल्पों को समझना जरूरी है। Fertility Awareness बढ़ने के साथ अब ज्यादा कपल्स डॉक्टर से सलाह ले रहे हैं, लेकिन कई बार इलाज से जुड़ी जरूरी जानकारी स्पष्ट नहीं होती।

Risaa IVF की चेयरपर्सन और सीनियर IVF स्पेशलिस्ट Dr. Rita Bakshi ने IVF शुरू करने से पहले कपल्स को किन बातों पर ध्यान देना चाहिए, इसे लेकर जरूरी जानकारी साझा की है।


IVF शुरू करने से पहले किन बातों को समझना जरूरी है?
IVF को लेकर हर कपल की स्थिति अलग होती है। इसलिए इलाज शुरू करने से पहले अपनी मेडिकल स्थिति, उपलब्ध विकल्पों और संभावित नतीजों को समझना जरूरी है। Dr. Rita Bakshi के मुताबिक, IVF का फैसला लेने से पहले कपल्स को इन बातों पर खास ध्यान देना चाहिए।

1. उम्र को नजरअंदाज न करें
महिला की उम्र फर्टिलिटी ट्रीटमेंट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उम्र बढ़ने के साथ एग की संख्या और गुणवत्ता में बदलाव हो सकता है। अगर नियमित प्रयास के बावजूद गर्भधारण नहीं हो रहा है, तो समय पर फर्टिलिटी विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।

2. सिर्फ महिला की नहीं, दोनों पार्टनर्स की जांच जरूरी
इनफर्टिलिटी का कारण केवल महिला से जुड़ा हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए जांच में दोनों पार्टनर्स को शामिल करना चाहिए। डॉक्टर जरूरत के अनुसार हार्मोन टेस्ट, ओवेरियन रिजर्व, स्पर्म क्वालिटी और मेडिकल हिस्ट्री की जांच की सलाह दे सकते हैं।

3. हर मामले में सीधे IVF जरूरी नहीं
IVF हर कपल के लिए पहला विकल्प हो, ऐसा जरूरी नहीं है। कुछ मामलों में डॉक्टर नैचुरल कंसीविंग या अन्य फर्टिलिटी ट्रीटमेंट पर विचार कर सकते हैं। इसलिए इलाज शुरू करने से पहले उपलब्ध सभी विकल्पों के बारे में डॉक्टर से चर्चा करनी चाहिए।

4. पहली कोशिश से जुड़ी उम्मीदें वास्तविक रखें
IVF का नतीजा हर व्यक्ति और हर कपल में अलग हो सकता है। इसलिए पहली कोशिश में ही सफलता मिलने की उम्मीद रखना सही नहीं है। डॉक्टर से अपनी स्थिति, संभावित सफलता और जरूरत पड़ने पर आगे के विकल्पों के बारे में स्पष्ट बातचीत करनी चाहिए।

5. डॉक्टर से ये सवाल जरूर पूछें
IVF शुरू करने से पहले कपल्स को इलाज की पूरी प्रक्रिया समझनी चाहिए। मसलन, कौन-सी दवाइयां दी जाएंगी, कितने एम्ब्रियो ट्रांसफर किए जाएंगे, संभावित जोखिम क्या हैं और अगर पहला साइकल सफल नहीं होता तो आगे क्या विकल्प होंगे—इन सवालों पर डॉक्टर से बात करना जरूरी है।

6. IVF Success Rate को सिर्फ एक नंबर की तरह न देखें
किसी क्लिनिक का Success Rate देखते समय यह समझना जरूरी है कि आंकड़े किस उम्र वर्ग और किस तरह के मरीजों पर आधारित हैं। अलग-अलग कपल्स की मेडिकल स्थिति अलग होती है, इसलिए केवल Success Rate देखकर फैसला लेने के बजाय डॉक्टर से अपने मामले की संभावनाओं के बारे में जानकारी लेना बेहतर है।

IVF का खर्च और Emotional Preparation भी जरूरी
फर्टिलिटी ट्रीटमेंट आर्थिक और भावनात्मक दोनों स्तरों पर चुनौतीपूर्ण हो सकता है। IVF शुरू करने से पहले क्लिनिक से इलाज की अनुमानित कुल लागत, दवाइयों और अन्य संभावित खर्चों के बारे में जानकारी लेनी चाहिए। अगर भुगतान के लिए EMI या अन्य विकल्प उपलब्ध हों, तो उनके बारे में भी पहले पूछ सकते हैं।

इस दौरान कपल्स के लिए एक-दूसरे का साथ भी महत्वपूर्ण है। जरूरत महसूस होने पर काउंसलिंग की मदद लेना भी एक विकल्प हो सकता है।

सही IVF Clinic चुनते समय किन बातों का ध्यान रखें?
क्लिनिक चुनते समय केवल Success Rate या विज्ञापन पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर की विशेषज्ञता, इलाज की पारदर्शिता और मरीज की व्यक्तिगत स्थिति पर दिए जाने वाले ध्यान को देखना चाहिए। कपल्स को यह भी समझना चाहिए कि कौन-से टेस्ट और इलाज उनके मामले में वास्तव में जरूरी हैं।

Dr. Rita Bakshi के अनुसार, IVF की प्रक्रिया को समझकर और डॉक्टर से जरूरी सवाल पूछकर कपल्स अपने लिए उपलब्ध विकल्पों को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं। फर्टिलिटी ट्रीटमेंट शुरू करने से पहले सही जानकारी हासिल करना इस सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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Healthy Diet Tips: डाइट में फाइबर की कमी पड़ सकती है भारी, जानें एक्सपर्ट की राय

Fiber Rich Foods: आजकल की भाग-दौड़ भरी लाइफस्टाइल में पिज्जा, बर्गर, चिप्स और पैकेज्ड फूड्स डाइट का हिस्सा बनते जा रहे हैं। लेकिन इससे सबसे बड़ा नुकसान यह हो रहा है कि हमें जरूरी पोषक तत्व फाइबर नहीं मिल पाता है। इससे कब्ज, थकान और मोटापे जैसी परेशानियां बढ़ती हैं।

हेल्दी रहने के लिए फाइबर से भरपूर डाइट लेना क्यों जरूरी है और फाइबर युक्त आहार के लिए डाइट में क्या शामिल करें, इस बारे में जरूरी सजेशंस।

1. फाइबर का रोल
फाइबर रिच फूड्स के सेवन से मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है। फाइबर न केवल डाइजेशन को सही रखता है बल्कि भूख को भी लंबे समय तक कंट्रोल करता है और वेटलॉस में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 

इसके अलावा डाइट में फाइबर लेने से बैड कोलेस्ट्रॉल कम होता है, ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है, एनर्जी लेवल बरकरार रहता है, पाचन क्रिया बेहतर होती है, इम्यून सिस्टम मजबूत बनता है, स्किन ग्लो करती है और हार्ट प्रॉब्लम्स से भी बचाव होता है।

2. फाइबर रिच फूड खाने का सही समय
फाइबर रिच फूड, दिन के किसी भी समय लिया जा सकता है, लेकिन सुबह या दोपहर में लेना सबसे फायदेमंद रहता है क्योंकि इस समय पाचन सबसे एक्टिव होता है। रात में भारी फाइबर फूड खाने से डाइजेशन धीमा हो सकता है।

फाइबर रिच फूड खाने का सही समय

3. फाइबर की कमी के लक्षण
शरीर में फाइबर की कमी होने पर कई लक्षण दिख सकते हैं। आपको इन लक्षणों पर नजर रखनी चाहिए। फाइबर की कमी होने पर गैस, एसिडिटी और कब्ज की समस्या बनी रहती है।खाना खाने के एक-दो घंटे बाद ही अगर भूख महसूस हो तो यह भी भोजन में फाइबर की कमी का संकेत हो सकता है।

4. फाइबर की कमी के नुकसान
डाइट में फाइबर की कमी होने से शरीर में कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। फाइबर शरीर में ब्लड शुगर के लेवल को धीरे-धीरे रिलीज करने में मदद करता है। लेकिन फाइबर की कमी होने से ब्लड शुगर अचानक बढ़ता और घटता है, जिससे दिन भर थकावट, सुस्ती और कमजोरी महसूस होती है।

फाइबर आंतों में जाकर खराब कोलेस्ट्रॉल को सोख लेता है और शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है लेकिन डाइट में फाइबर न होने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ने लगता है।

फाइबर की कमी के नुकसान

5. फाइबर रिच फूड्स

  • सब्जियों के अलावा ओट्स, ब्राउन राइस, साबुत अनाज, दालें, नट्स, सेब, केला और चिया सीड्स से भी फाइबर मिलता है। रोज सुबह ओट्स या फ्रूट सलाद लेने से फाइबर की जरूरत का बड़ा हिस्सा पूरा हो सकता है। 
  • इनके अलावा मैदे और पॉलिश किए हुए चावल की जगह चोकर वाले आटे (मल्टीग्रेन आटा), दलिया, ब्राउन राइस और छिलके वाली दालों (जैसे साबुत मूंग, चना, राजमा) में भरपूर फाइबर होता है। 
  • फाइबर के बेहतरीन स्रोत सेब, अमरूद, नाशपाती, संतरा और पपीता जैसे फल होते हैं। अपने दोपहर और रात के खाने से पहले एक प्लेट कच्चा सलाद (खीरा, गाजर, चुकंदर, पत्तागोभी, टमाटर) खाना फायदेमंद होता है। 
  • रोजाना अपनी डाइट में बादाम, अखरोट, अलसी के बीज और चिया सीड्स भी शामिल करें। इनसे भी हमें फाइबर मिलता है।

फाइबर शरीर में तभी सही से काम करता है, जब पर्याप्त मात्रा में पानी पीया जाता है। इसलिए डाइट में फाइबर की मात्रा बढ़ाने के साथ-साथ दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए। 

(डाइटीशियन शीला सहरावत से बातचीत चर आधारित)
ललिता गोयल

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