दर्द की मजबूरी या जीत की रणनीति? रिटायर्ड हर्ट और रिटायर्ड आउट क्या होता है, जानें क्रिकेट के दो सबसे उलझाने वाले नियम
Retired hurt Vs Retired out rule: क्रिकेट में 'रिटायर्ड' शब्द सुनते ही चोट की तस्वीर उभरती है. लेकिन टी-20 के दौर में अब यह सिर्फ मजबूरी नहीं, बल्कि एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक बन चुका है. जहां चोट या बीमारी के कारण मैदान छोड़ना 'रिटायर्ड हर्ट' कहलाता है, जिसमें खिलाड़ी ठीक होकर दोबारा बल्लेबाजी करने आ सकता है. वहीं 'रिटायर्ड आउट' एक सोची-समझी रणनीतिक चाल है, जहां रन गति बढ़ाने के लिए बल्लेबाज़ अपनी मर्जी से पारी का अंत कर देता है और दोबारा मैदान पर नहीं लौट पाता.
भारत की 7.8% Q1 Growth संयोग नहीं, Nirmala Sitharaman ने MSME और जनता को दिया श्रेय
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की 7.8 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि का श्रेय देश के उद्योगों, MSME और लोगों की कड़ी मेहनत को दिया। साथ ही, उन्होंने वैश्विक चुनौतियों के बीच विकास को बढ़ावा देने में नीतिगत निश्चितता की भूमिका पर भी ज़ोर दिया। बेंगलुरु में 'इंटरनेशनल टैक्स रिसर्च एंड एनालिसिस फाउंडेशन' (ITRAF) के 8वें इंटरनेशनल टैक्स कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में सीतारमण ने कहा कि विकास के ये आंकड़े अचानक या संयोग से नहीं आए हैं। सीतारमण ने कहा पहली तिमाही में 7.8% की वृद्धि दर कोई रैंडम या संयोग से आया आंकड़ा नहीं है। मैं इसका श्रेय खुद को या सरकार को नहीं देती; मैं इसका पूरा श्रेय भारत के लोगों को देती हूँ—मेहनती उद्योगों, छोटे MSME और बाकी सभी को। यह उनकी कड़ी मेहनत का ही नतीजा है।
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उन्होंने कहा कि सरकारी नीतियां वह ढांचा तैयार करती हैं जिसके तहत बिज़नेस और पूरी इकॉनमी काम करती है। उन्होंने कहा, "बेशक, नीतियां वह ढांचा या रेल की पटरी हैं जिस पर ट्रेन चलती है।" वित्त मंत्री ने भारतीय इंडस्ट्री से यह भी कहा कि वे दूसरे देशों में अपनी जैसी कंपनियों के साथ संपर्क बनाए रखें ताकि वे समझ सकें कि बिज़नेस को दुनिया भर में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, "मैं इसलिए कह रही हूं कि इंडस्ट्री को दूसरी जगहों पर अपनी जैसी कंपनियों से बात करनी चाहिए और संपर्क में रहना चाहिए क्योंकि आप जानते हैं कि हर जगह माहौल कितना मुश्किल और चुनौतीपूर्ण है।" सीतारमण ने भारतीय इकॉनमी के बारे में लगातार हो रही नकारात्मक बातों पर भी चिंता जताई, साथ ही यह भी माना कि कुछ क्षेत्रों में सुधार की ज़रूरत है। उन्होंने कहा, "हां, बेशक, भारत में कुछ चीजें ठीक नहीं हैं और शायद कहीं और भी ठीक नहीं होंगी, और इन सबको ठीक करने के लिए मिलकर काम करना हमारा काम है। हालांकि, लगातार हो रही नकारात्मक बातें कि इस देश में कुछ नहीं हो रहा है, यह मेरे लिए चिंता की बात है।
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उन्होंने कहा कि आर्थिक गतिविधियों के नतीजे GST कलेक्शन में भी दिख रहे हैं। सीतारमण ने कहा, "हमारे लोगों की कड़ी मेहनत से बने माहौल के नतीजे दिख रहे हैं - पिछले साल के सुधारों में सभी दरों को कम करने के बावजूद, 7.8% की ग्रोथ हासिल हुई है और GST कलेक्शन भी मज़बूत रहा है। वित्त मंत्री ने आगे कहा कि राजनीतिक और टैक्स पॉलिसी में निश्चितता ने भारत को ग्लोबल चुनौतियों से निपटने के लिए मज़बूत स्थिति में ला खड़ा किया है। उन्होंने कहा तीसरी बार चुनी गई इस सरकार से मिलने वाली निश्चितता और टैक्स पॉलिसी में निश्चितता... भारत को ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद कहीं बेहतर स्थिति में रखती है।
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