यूपीआई एमडीआर में 'विदेशी हस्तक्षेप' के दावे को वित्त मंत्रालय ने किया खारिज
नई दिल्ली, 16 सितंबर (आईएएनएस)। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया कि यूपीआई में एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) को पेश करने की वजह विदेशी हस्तक्षेप है। साथ ही, कहा कि भारत अपने डिजिटल पेमेंट सिस्टम को लेकर निर्णय स्वतंत्रता के साथ लेता है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंत्रालय ने कहा कि 2016 में लॉन्च के बाद से यूपीआई दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम इंटरऑपरेबल पेमेंट सिस्टम बन गया है और यह पूरी तरह से भारत की अपनी शर्तों पर हुआ है।
मंत्रालय ने आगे विदेशी हस्तक्षेप के दावों को गलत बताते हुए कहा कि भारत की यूपीआई पॉलिसी से जुड़े फैसले स्वतंत्र रूप से लिए जाते हैं, और इनका स्पष्ट मकसद एक ऐसा डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम बनाना है जो खुद पर निर्भर हो, सभी को शामिल करने वाला हो और किफायती हो।
सरकार के अनुसार, अकेले अगस्त 2026 में यूपीआई के जरिए 24.5 अरब ट्रांजैक्शन हुए। इस सिस्टम को खुद-ब-खुद चलने लायक, सुरक्षित और इनोवेटिव बनाए रखने के लिए, ज्यादा कीमत वाले मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर एक छोटी सी फीस ली जाएगी। इससे बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर और साइबर सिक्योरिटी के लिए फंड मिलेगा और टियर तीन-चार शहरों और ग्रामीण इलाकों में छोटे व्यापारियों को मदद मिलेगी। साथ ही, यूपीआई के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए जागरूकता और इंसेंटिव देने में भी सहायता मिलेगी।
वित्त मंत्रालय ने कहा, नया यूपीआई फ्रेमवर्क यह पक्का करता है कि ज्यादा कीमत वाले मर्चेंट ट्रांजैक्शन से मिलने वाले संसाधनों का इस्तेमाल छोटे व्यवसायों को सहारा देने और पूरे देश में डिजिटल पेमेंट को मजबूत करने के लिए दोबारा किया जाए।
ग्राहकों के लिए यूपीआई का इस्तेमाल अभी भी मुफ्त है। दोस्तों को पैसे भेजना, दुकानों पर पेमेंट करना या क्यूआर कोड स्कैन करना, इन सभी पर कोई चार्ज नहीं लगेगा।
सिर्फ 2,000 रुपए से ज्यादा के बड़े ट्रांजैक्शन पर दुकानदारों को एक छोटा सा चार्ज (0.4 प्रतिशत) देना होगा, जो क्रेडिट कार्ड या दूसरे नेटवर्क चार्ज के मुकाबले बहुत कम है।
रेलवे, फ्यूल, टेलीकॉम, बिल पेमेंट और इंश्योरेंस के मामले में 2,000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर 5 रुपए का फ्लैट चार्ज लगता है, जबकि म्यूचुअल फंड और सिक्योरिटीज के पेमेंट पर सिर्फ 0.02 प्रतिशत चार्ज लगता है, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपए है।
मंत्रालय ने आगे बताया, दुकानदार एमडीआर का खर्च ग्राहकों पर नहीं डाल सकते। यूपीआई ऐप्स भी कोई प्लेटफॉर्म चार्ज नहीं लगा सकते।
--आईएएनएस
एबीएस
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पंजाब के 80 फीसदी खेतों तक पहुंच रहा है नहर का पानी, लोक मिलनी कार्यक्रम में बोले सीएम भगवंत मान
Punjab News: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने श्री आनंदपुर साहिब के गांव जिंदवड़ी में आयोजित लोक मिलनी कार्यक्रम में शिरकत की. इस दौरान उन्होंने कहा कि आज एक बार फिर साफ हो गया है कि आम आदमी पार्टी सरकार की प्राथमिकता पंजाब और इसके लोग हैं. उन्होंने कहा कि वहीं दूसरी ओर कांग्रेस और अकाली दल जैसे विपक्षी दल कुर्सी की लड़ाई में उलझे हुए हैं.
इस दौरान सीएम मान ने दावा किया कि आप सरकार में पंजाब के 80 फीसदी खेतों में नगर का पानी पहुंच रहा है. जो पहले सिर्फ 22 प्रतिशत था. उन्होंने कहा कि अब हमारी सरकारी का लक्ष्य इसे 100 फीसदी तक ले जाने की है. इस दौरान सीएम मान ने कहा कि पंजाब को अपने पानी, चंडीगढ़ और पंजाब विश्वविद्यालय की रक्षा के लिए विपक्षी दलों से दूर रहने की जरूरत है. इसके साथ ही उन्होंने सरकार के 14,000 किलोमीटर नहरी पानी की पाइपलाइन नेटवर्क, मुफ्त बिजली, मैरिट आधारित नौकरियों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का भी जिक्र किया और कहा कि सरकार एक खुशहाल और रंगला पंजाब बनाने के लिए काम कर रही है.
सीएम मान ने एक्स पर किया पोस्ट, कही ये बात
सीएम भगवंत मान ने लोक मिलनी कार्यक्रम में शामिल होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया. जिसमें उन्होंने लिखा, "श्री आनंदपुर साहिब के गांव जिंदवड़ी में लोगों के साथ दिल की बातें साझा कीं. पारंपरिक पार्टियों ने हमेशा कुर्सी और परिवारवाद की राजनीति की है, लेकिन हमारी सरकार आम लोगों के लिए काम कर रही है. हमने युवाओं को मैरिट पर नौकरियां, बेहतरीन शिक्षा, खेतों तक नहरी पानी पहुंचाने के लिए 14,000 किलोमीटर पाइपलाइन और मुफ्त बिजली दी है. गांवों के विकास को तेज करने के लिए हमने छह पंचायतों को 20-20 लाख रुपये के चेक भी सौंपे. हमारा एकमात्र उद्देश्य खुशहाल और प्रगतिशील ‘रंगला पंजाब’ बनाना है. इंकलाब जिंदाबाद."
आप सरकार ने पंजाब की तरक्की के लिए किया काम- सीएम भगवंत मान
वहीं लोक मिलनी कार्यक्रम के दौरान सीएम भगवंत मान ने कहा, "हमारी सरकार के पिछले साढ़े चार साल से अधिक के कार्यकाल के दौरान राज्य के लोगों की भलाई और पंजाब की तरक्की के लिए पूरी लगन से काम किया है. दूसरी ओर विपक्षी पार्टियों ने हमेशा राज्य को बेरहमी से लूटा है और लोगों के संसाधनों की लूट कर उनका शोषण किया है. ये लोग किसी रहम के हकदार नहीं हैं और उन्हें उनके पापों का सबक सिखाया जाना चाहिए."
'विपक्षी पार्टियों का राज्य-लोगों के खिलाफ काम करने का रिकॉर्ड दागी'
इसके साथ ही सीएम मान ने कहा, "इन पार्टियों का राज्य और इसके लोगों के खिलाफ काम करने का रिकॉर्ड दागी रहा है. इन्हें कभी माफ नहीं किया जा सकता. विपक्ष पंजाब विरोधी मानसिकता का शिकार है और इसने हमेशा पंजाब के साथ अन्याय किया है, चाहे वह पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़, भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बी.बी.एम.बी.), सतलुज यमुना लिंक (एस.वाई.एल.) नहर, हरिके नहर, गणतंत्र दिवस की झांकियां, ग्रामीण विकास फंड (आर.डी.एफ.) या सीमावर्ती क्षेत्र के फंडों का मुद्दा हो."
उन्होंने आगे कहा, "काले कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान शहीद हुए पंजाब के 700 से अधिक किसानों की हत्या से भाजपा के हाथ रंगे हुए हैं."
सीएम मान ने कहा, "आप अपनी जनहितैषी और विकासोन्मुखी नीतियों के चलते देशभर में अपने पंख फैला रही है. राजस्थान में स्थानीय निकायों के चुनावों में पार्टी की जीत इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है. पारंपरिक पार्टियों ने अपने बेबुनियाद और विभाजनकारी हथकंडों से हमेशा आम आदमी को मूर्ख बनाया है. वह दिन गए, जब ये पार्टियां 'उतर काटो मैं चढ़ूं' का खेल खेलती थीं और सत्ता के लिए अपनी बारी का इंतजार करती थीं."
इस दौरान सीएम मान ने कहा, "वास्तव में इन पार्टियों ने अपने सत्ता के दिनों में एक-दूसरे के हितों की रक्षा की, जिसके कारण इनके कुकर्म कभी सामने नहीं आए. आज लोग ‘आप’ को चुन रहे हैं और इस पार्टी का चुनाव चिन्ह ‘झाड़ू’ राज्य और देश की राजनीतिक व्यवस्था की सफाई कर रहा है. इसलिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी."
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "अपने लंबे कुशासन के दौरान अकालियों ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी का पाप किया, इस घिनौने अपराध के दोषियों को संरक्षण दिया और निर्दोष लोगों पर गोलीबारी की अनुमति दी. अकालियों ने पंजाबियों की मानसिकता को भावनात्मक ठेस पहुंचाने और राज्य में कई तरह के माफिया को संरक्षण देने के अलावा राज्य को बेरहमी से लूटा. अकालियों को दिया गया हर वोट बेअदबी के पक्ष में होगा."
इसके साथ ही उन्होंने कहा, "अकाली नेतृत्व को कभी माफ नहीं किया जा सकता क्योंकि वह राज्य की कई पीढ़ियों की नस्लकुशी के लिए जिम्मेदार था, क्योंकि उनके लंबे कुशासन के दौरान नशे के कारोबार को संरक्षण दिया गया और यह फलता-फूलता रहा. लोग इन पार्टियों के गुमराह करने वाले प्रचार में नहीं आएंगे और आने वाले दिनों में इन्हें उचित सबक सिखाएंगे."
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