UPI पेमेंट ट्रांजैक्शन पर कितना देना होगा शुल्क? दो हजार रुपये पार होने पर इतना प्रतिशत होगा MDR
UPI से महीने में एक लाख रुपये ज्यादा का भुगतान लेने वाले छोटे दुकानदारें पर किसी तरह अतिरिक्त शुक्ल नहीं लगेगा. रेलवे, बीमा, संचार और ईंधन जैसे खास सेवाओं को लेकर भुगतान पर 2 हजार रुपये से ऊपर सिर्फ पांच रुपये का फ्लैट शुल्क होगा. वहीं बड़े व्यापारिक लेनदेन पर 2 हजार रुपये पार होने के बाद 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगेगा. मगर 75 हजार रुपये से अधिक की राशि के भुगतान को लेकर शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है. यह जानकारी मंगलवार को राष्ट्रीय भुगतान निगम यानी NPCI ने दी. इसके बाद वित्त मंत्रालय की ओर से इस बारे में विस्तृत दिशानिर्देश जारी किया.
UPI ट्रांजैक्शन को लेकर नियम?
इसमें कहा गया है,'आम ग्राहक बगैर अतिरिक्त बोझ के भुगतान करते रहेंगे. दो हजार रुपये तक से अधिक सौदे भी शुल्क से बाहर रहेंगे. नया ढांचा 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाला है.' वित्त मंत्रालय ने बताया, 'जरूरी सेवाओं पर सरकार ने शुल्क कम रखा है. रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसी श्रेणियों में दो रुपये से ऊपर के यूपीआई भुगतान पर सिर्फ 5 रुपये का फ्लैट एमडीआर लगेगा.'
मंत्रालय ने बताया,'मकसद यह है कि सार्वजनिक सेवाओं और कम मार्जिन वाले कारोबार में लागत न बढ़े. इनका कुल यूपीआइ के तहत व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को होने वाले भुगतान (पर्सन टू मर्चेंट-पी2एम) को कुल लेनेदेन की संख्या का 17 फीसद और इनके व्यापारिक मूल्य का करीब 46 फीसद का भाग होता है. पूंजी बाजार के भुगतान अलग श्रेणी में रखे गए हैं.'
वित्त मंत्रालय ने बताया, 'म्यूचुअल फंड, प्रतिभूति, स्टॉक ब्रोकर और डीलरों को दिए जाने भुगतान पर 0.02 प्रतिशत का मामूली एमडीआर लगेगा. इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये तक होगी.'सरकार या एनपीसीआई ने इस बात का जवाब नहीं दिया कि कंपनियां क्या उपभोक्ताओं पर बढ़े हुए एमडीआर पर भार डालेंगी या नहीं.
सुरक्षा के लिए लगाया जा रहा शुल्क
वित्त मंत्रालय के अनुसार,'ग्राहकों की सुरक्षा इंतजाम मजबूत किया गया है. यूपीआई एप चलाने कंपनियां प्लेटफॉर्म शुल्क या छिपा चार्ज नहीं लगा सकेंगी. बैंकों को सलाह दी गई है. व्यापारी एमडीआर का बोझ ग्राहक पर न डालें. आम उपयोगकर्ता के लिए मुफ्त यूपीआई पर कोई मासिक कोटा, मात्रा सीमा या स्लैब नहीं होगा.'वित्त मंत्रालय ने जानकारी दी, 'बैंक और एनपीसीआई की ओर से लगने वाले रोजाना सीमा श्रेणी के हिसाब एक से पांच लाख रुपये तक, सिर्फ सुरक्षा और जोखिम नियंत्रण को लेकर शुल्क वसूलने का जरिया नहीं.'
यह साफ है कि इस बारे में कारोबारी संस्थानों को सलाह दी गई. कई दुकानदार डेबिट व क्रेडिट कार्ड से भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लेते हैं. इसकी वजह आरबीआई ने उन्हें साफ तौर पर ऐसा करने से मना नहीं किया है. एनपीसीआई ने अपनी इस बात को दोहराते हैं. एमडीआर की नई व्यवस्था से करीब 95 प्रतिशत छोटे यूपीआई लेनदेन पर असर नहीं पड़ेगा. छोटे व्यापारियों और छोटे बाजारों के डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए एक अलग फंड भी बनाने का ऐलान किया है.
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Bihar Flood News: पचास लाख आबादी बेहाल, राहत के दावों और आंकड़ों पर आमने-सामने आए नेता
Bihar Flood News: बिहार में बाढ़ के कारण हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं. राज्य के अलग-अलग जिलों में लगभग पचास लाख की आबादी इस आपदा से बुरी तरह प्रभावित है. गांवों में पानी भरा हुआ है और लोग अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की तलाश कर रहे हैं. इस गंभीर मानवीय संकट के बीच अब राहत और बचाव कार्यों को लेकर तीखी सियासत शुरू हो गई है. टीवी डिबेट में नेताओं के बीच इस बात को लेकर जोरदार घमासान हुआ कि सरकार की तरफ से दी जा रही मदद पर्याप्त है या सिर्फ कागजों पर ही सब कुछ ठीक दिखाया जा रहा है.
आंकड़ों पर विपक्ष की घेराबंदी
चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने सरकार के राहत प्रबंधों पर बड़े सवाल खड़े किए. कांग्रेस के प्रतिनिधि ने दावा किया कि जमीनी हकीकत सरकारी दावों से बिल्कुल अलग है. उनका कहना था कि जब पचास लाख लोग बेहाल हैं, तब सिर्फ एक सौ चौरानवे कम्युनिटी किचन से इतनी बड़ी आबादी का पेट कैसे भरेगा. इसके अलावा उन्होंने कहा कि राहत के लिए केवल तैंतीस रेस्क्यू टीमें और छह सौ तिरानवे सरकारी नावें तैनात हैं. इतने कम संसाधनों से लाखों लोगों को सुरक्षित कैसे निकाला जा सकता है. कांग्रेस प्रवक्ता ने बताया कि राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर उनके कार्यकर्ता सोनपुर, सबलपुर, बेगूसराय, खगड़िया और कटिहार में सूखा राशन और जरूरी सामान लोगों तक पहुंचा रहे हैं.
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