कौन हैं बुशरा बानो, जिनके 'अस्सलामु अलैकुम' बोलने वाले वीडियो पर मचा विवाद?
IPS Bushra Bano: पश्चिम बंगाल कैडर की महिला आईपीएस अधिकारी बुशरा बानो इस समय देश भर की सुर्खियों में बनी हुई हैं. सोशल मीडिया पर जारी किए गए उनके एक वीडियो ने इंटरनेट से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मचा दी है. दरअसल, बुशरा बानो ने इंटरनेट पर अपनी सफलता और जीवन के सफर से जुड़ा एक वीडियो साझा किया था. इस वीडियो में उन्होंने शुरुआत से लेकर अंत तक कुछ ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसको लेकर अब एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. मामला इतना बढ़ चुका है कि पश्चिम बंगाल के गृह सचिव तक उनके खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज करा दी गई है. इसके बाद से ही लोग यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि आखिर बुशरा बानो कौन हैं और उनका अब तक का सफर कैसा रहा है.
वीडियो में बोले गए शब्दों पर क्यों छिड़ा विवाद
आईपीएस अधिकारी बुशरा बानो ने अपनी संघर्ष भरी कहानी और यूपीएससी की तैयारी को लेकर लोगों को प्रेरित करने के मकसद से एक वीडियो बनाया था. विवाद की असली जड़ इस वीडियो की शुरुआत बनी, जहां उन्होंने दर्शकों का स्वागत 'अस्सलामु अलैकुम' कहकर किया. इसके अलावा अपनी बातचीत के दौरान उन्होंने 'इंशाअल्लाह' शब्द बोला और वीडियो समाप्त करते समय 'जजाकल्लाह' कहा.
हिंदू लीगल फंड नामक एक संगठन ने इस वीडियो को लेकर कड़ा ऐतराज जताया और राज्य के गृह सचिव के पास औपचारिक शिकायत भेज दी. संगठन का सीधा आरोप है कि एक जिम्मेदार प्रशासनिक और पुलिस पद पर रहते हुए अधिकारी ने उर्दू और धार्मिक अभिवादन को प्राथमिकता दी. उनका कहना है कि वीडियो में 'जय हिंद' या 'वंदे मातरम्' जैसे राष्ट्रीय अभिवादनों का प्रयोग नहीं किया गया, जो कि एक लोक सेवक के आचरण के लिहाज से उचित नहीं है. इस शिकायत के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है, जहां कुछ लोग इसे उनका निजी मामला बता रहे हैं तो कुछ इसे नियमों का उल्लंघन मान रहे हैं.
कन्नौज से शुरू हुआ था बुशरा का सफर
विवादों के बीच बुशरा बानो की व्यक्तिगत पहचान और उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी चर्चा का विषय बनी हुई है. बुशरा का जन्म उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक इत्र शहर कन्नौज में हुआ था. वह बचपन से ही पढ़ाई में काफी होशियार थीं और उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए लगातार मेहनत की. उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से मैनेजमेंट स्टडीज विषय में पीएचडी की उपाधि हासिल की. इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की कठिन मानी जाने वाली यूजीसी नेट जेआरएफ परीक्षा भी शानदार अंकों के साथ पास की.
बुशरा की शादी बहुत कम उम्र में ही हो गई थी, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियां उनके सपनों के आड़े कभी नहीं आईं. उनके पति सऊदी अरब में कार्यरत थे, इसलिए शादी के बाद वह भी सऊदी अरब चली गईं. वहां उन्होंने एक यूनिवर्सिटी में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर अपनी सेवाएं दीं. विदेशों में आरामदायक जिंदगी और अच्छा वेतन होने के बावजूद बुशरा का मन अपने देश लौटकर समाज के लिए कुछ बड़ा करने का था. इसी जज्बे के साथ उन्होंने भारत लौटने और देश की सबसे कठिन संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी करने का कड़ा फैसला किया.
दो बार पास की यूपीएससी की कठिन परीक्षा
बुशरा बानो की सफलता की कहानी हर उस महिला के लिए प्रेरणा की मिसाल है जो शादी और बच्चों के बाद अपने सपनों को छोड़ देती हैं. बुशरा ने साल 2018 में पहली बार सिविल सेवा परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में 277वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल करके सबको चौंका दिया. इस बेहतरीन प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस के लिए हुआ. हालांकि उस समय वह अपने दूसरे बच्चे के साथ गर्भवती थीं, जिसके चलते शारीरिक और पारिवारिक कारणों से वह इस सेवा में शामिल नहीं हो सकीं.
इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी तैयारी को पूरी लगन के साथ जारी रखा. अगले ही साल यानी 2019 में उन्होंने दोबारा यूपीएससी की परीक्षा दी. इस बार उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर 234वीं रैंक हासिल की. उनकी इस शानदार रैंक ने उन्हें सीधे भारतीय पुलिस सेवा का हिस्सा बना दिया. एक मां और पत्नी होने के साथ-साथ इतनी बड़ी परीक्षा में लगातार दो बार झंडे गाड़ना उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति को साफ दिखाता है.
खड़गपुर में संभाल रही हैं कानून व्यवस्था
साल 2021 बैच की पश्चिम बंगाल कैडर की आईपीएस अधिकारी बुशरा बानो ने अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद राज्य के हुगली ग्रामीण जिले में कदम रखा. वहां उनकी पहली नियुक्ति असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस के रूप में हुई, जहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों पर काम किया. उनके काम और समर्पण को देखते हुए जून 2026 में उन्हें पदोन्नति दी गई और वह एडिशनल सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस बनाई गईं. वर्तमान समय में वह पश्चिम बंगाल के महत्वपूर्ण शहर खड़गपुर में एडिशनल एसपी के पद पर अपनी सेवाएं दे रही हैं और कानून व्यवस्था बनाए रखने का जिम्मा संभाल रही हैं. अब देखना यह होगा कि गृह सचिव के पास पहुंची शिकायत पर प्रशासन क्या रुख अपनाता है.
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विश्व ओजोन परत संरक्षण दिवस : लोगों को जागरूक करना और बचाव के उपाय खोजना भी मकसद
नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। वर्तमान में इस पूरे ब्रह्मांड में पृथ्वी ही एकमात्र ऐसा ज्ञात ग्रह है, जहां जीवन मौजूद है। इसके पीछे कई कारण हैं, जिनमें से प्रमुख है कि पृथ्वी, सूर्य से न तो अत्यधिक नजदीक है और न ही बहुत दूर, जिसकी वजह से यहां तापमान संतुलित रहता है। यह सौर मंडल का एकमात्र ऐसा ग्रह है, जिसकी सतह पर पानी तरल अवस्था में उपलब्ध है। यहां जीवन के लिए जरूरी ऑक्सीजन, कार्बन और अन्य रासायनिक तत्व मौजूद हैं।
इन सभी के अतिरिक्त, पृथ्वी पर जीवन होने के पीछे एक और बड़ी वजह वायुमंडल में मौजूद ओजोन परत है। ओजोन परत पृथ्वी के वायुमंडल के समताप मंडल (स्ट्रैटोस्फियर) में मौजूद एक सुरक्षात्मक ढाल है, जो सूर्य से निकलने वाली अधिकांश हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट (यूवी) किरणों को पृथ्वी की सतह तक आने से पहले सोख लेती है। अगर स्ट्रैटोस्फियर में ओजोन परत नहीं होती, तो संभवतः पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं होता।
हालांकि, 1970 के दशक में कुछ वैज्ञानिकों ने पाया कि मानव जाति द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे उपकरण और मशीनें जैसे गाड़ियां, फ्रिज, एसी, आदि से निकलने वाली हानिकारक गैसों, जैसे क्लोरोफ्लोरोकार्बन (सीएफसी), हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (एचएफसी), कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2), कार्बन मोनोऑक्साइड (सीओ) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (एनओ2), आदि ओजोन लेयर में एक छेद बना रही हैं, जिसकी वजह से त्वचा संबंधित कई प्रकार की बीमारी और मोतियाबिंद के मामलों में वृद्धि हो रही है। इसी के साथ पौधों, फसलों और इकोसिस्टम को नुकसान पहुंचने का खतरा पैदा हो रहा है।
इसके बाद 16 सितंबर 1987 को मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए गए। यह एक ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय संधि थी, जिसका मकसद ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले हानिकारक रसायनों के उत्पादन और इस्तेमाल को धीरे-धीरे खत्म करना था। वहीं, संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) ने दिसंबर 1994 में एक प्रस्ताव पारित करके हर वर्ष 16 सितंबर को विश्व ओजोन परत संरक्षण दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी।
विश्व ओजोन परत संरक्षण दिवस पहली बार 16 सितंबर 1995 को मनाया गया था। इसके बाद से प्रत्येक वर्ष इस दिन को मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य ओजोन परत के नुकसान के बारे में लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना और इसके बचाव के उपाय खोजना है।
ओजोन ऑक्सीजन के 3 परमाणु से मिलकर बना हुआ एक प्रकार की गैस है, जो वायुमंडल में बहुत कम मात्रा में पाई जाती है। यह पृथ्वी की सतह से लगभग 10 से 50 किलोमीटर ऊपर एक सुरक्षात्मक परत बनाती है, जिसे ओजोन परत कहते हैं, जो सूर्य से आने वाली हानिकारक यूवी किरणों को रोकती है और पृथ्वी पर इंसानों, पौधों व जीवों की रक्षा करती है।
--आईएएनएस
डीके/एबीएम
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