PM Modi के 25 साल पूरे होने पर Vadnagar से Varanasi तक निकलेगी बाइक रैली, Amit Shah करेंगे शुरुआत
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में, भाजपा के सेवा संकल्प अभियान के तहत 17 सितंबर को गुजरात के वडनगर से वाराणसी के लिए मोटरसाइकिल रैली को हरी झंडी दिखाई जाएगी और इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल होंगे। वडनगर प्रधानमंत्री मोदी का जन्म स्थान है। भाजपा नेता और लोकसभा सदस्य वीडी शर्मा ने गांधीनगर में संवाददाता सम्मेलन में बताया कि 17 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर वडनगर से वाराणसी और वाराणसी से वडनगर मोटरसाइकिल रैलियों को दोनों शहरों से एक साथ हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा और ये रैलियां सात अक्टूबर को संपन्न होंगी।
मोदी सात अक्टूबर 2001 से 22 मई 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे थे। वर्तमान में वह वाराणसी लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। वडनगर-वाराणसी मोटरसाइिकल रैली के राष्ट्रीय प्रभारी वीडी शर्मा ने कहा, ‘‘वडनगर में हरी झंडी दिखाकर रैली की शुरुआत करने के कार्यक्रम में अमित शाह, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल समेत कई अन्य लोग शामिल होंगे।’’ वाराणसी में होने वाले कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान समेत कई नेता शामिल होंगे।
शर्मा ने कहा, ‘‘वडनगर से शुरू होने वाली रैली वाराणसी पहुंचने से पहले देश के कई हिस्सों से होकर गुजरेगी, जबकि वाराणसी से शुरू होने वाली रैली वडनगर जाएगी।’’ उन्होंने बताया कि भाजपा ने मोदी की 25 साल की जन-सेवा के उपलक्ष्य में इसका आयोजन किया है, जिसमें पार्टी कार्यकर्ता के तौर पर उनके सफर से लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री और बाद में प्रधानमंत्री बनने तक का सफर शामिल है। शर्मा ने संवाददाताओं को बताया, ‘‘यह रैली 10 राज्यों के 193 जिलों और लगभग 1,159 गांवों से गुजरते हुए करीब 40,000 किलोमीटर का सफर तय करेगी। इस दोतरफा यात्रा में लगभग 1,000 युवा हिस्सा लेंगे।’’ आयोजकों ने बताया कि मोटरसाइकिल रैली झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के उन इलाकों से गुजरेगी, जो पहले नक्सलवाद से प्रभावित थे।
कल्याणकारी और सशक्तीकरण योजनाओं से आए बदलावों को समझने के लिए लाभार्थियों, युवाओं और महिलाओं के साथ संवाद की योजना भी बनाई गई है।
Nepal के नक्शे में शामिल Lipulekh और Kalapani पर बोले विदेश मंत्री, यह कोई बोझ नहीं
(शिरीष बी प्रधान) काठमांडू, 15 सितंबर विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने मंगलवार को कहा कि नेपाल सरकार देश की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, राष्ट्रीय सुरक्षा और दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों को केंद्र में रखकर अपनी विदेश नीति का संचालन करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रतिनिधि सभा में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए खनाल ने कहा कि “पुराना बोझ” वाली बात नेपाल के गौरवशाली इतिहास, राष्ट्रीय धरोहर, संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, स्वतंत्रता, राष्ट्रीय हितों की रक्षा या ऐतिहासिक दस्तावेजों के संरक्षण के संदर्भ में नहीं कही गई थी। वह सांसद सीता थापलिया के एक सवाल का जवाब दे रहे थे।
थापलिया ने इस वाक्यांश का मतलब साफ करने को कहा था और पूछा था कि पिछली सरकारों के कौन से फैसले “बोझ” माने जाते हैं; क्या नेपाल के संविधान में लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा वाले नक्शे को शामिल करने का फैसला “पुराना बोझ” माना जाता है; और पिछली सरकारों की विदेश नीति में क्या गलतियां हुई थीं। इन सवालों का जवाब देते हुए, विदेश मंत्री ने नेपाल की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, राष्ट्रीय सुरक्षा और दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर विदेश नीति अपनाने के प्रति सरकार की पूरी प्रतिबद्धता दोहराई। यह देखते हुए कि नेपाल ने हमेशा पड़ोसी और मित्र देशों के साथ संबंधों को उच्च प्राथमिकता दी है, मंत्री ने विश्वास जताया कि इन देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने में उच्च-स्तरीय यात्राएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
खनाल ने कहा कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को शामिल करने वाला नेपाल का राजनीतिक नक्शा और इसे मंजूरी देने के लिए संविधान में संशोधन करने का संसद का सर्वसम्मत फैसला, नेपाल के सभी लोगों के साझा राष्ट्रीय संकल्प को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट किया, “यह हमारा संवैधानिक और संप्रभु दस्तावेज है, जिसे किसी भी संदर्भ में ‘बोझ’ के तौर पर नहीं देखा जा सकता।” नेपाल और भारत के बीच लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को लेकर सीमा विवाद रहा है और दोनों देश इन इलाकों पर अपना दावा करते हैं। भारत का कहना है कि ये इलाके उत्तराखंड का हिस्सा हैं और इस मुद्दे को आपसी बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए।
नेपाल की केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार ने मई 2020 में कालापानी और लिपुलेख समेत उन इलाकों को अपने आधिकारिक नक्शे में देश के अभिन्न अंग के तौर पर शामिल किया। खनाल ने इस बात पर जोर दिया कि देश की आजादी, संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, राष्ट्रीय एकता, स्वायत्तता, सीमा सुरक्षा और सम्मान की रक्षा करना किसी भी सरकार की सबसे अहम और स्थायी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार पड़ोसी और मित्र देशों के साथ आपसी सम्मान, समानता, भरोसे और आर्थिक साझेदारी के आधार पर रिश्तों को एक नयी और बेहतर दिशा में ले जाना चाहती है।
मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा सरकार और विदेश मंत्रालय का साफ नजरिया है कि देश की आर्थिक समृद्धि को ऐसी स्पष्ट, परिपक्व और नतीजों पर केंद्रित कूटनीति के जरिये हासिल किया जाए, जो राष्ट्रीय हितों को सबसे ऊपर रखती हो।
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