NPCI ने UPI MDR फ्रेमवर्क लागू करने का किया ऐलान, दो हजार का तक का भुगतान होगा फ्री
NPCI ने UPI को लेकर नया फ्रेमवर्क को लागू कर दिया है. इस फ्रेमवर्क में किसी भी मर्चेंट को 2000 रुपये से अधिक सभी UPI ट्रांजैक्शन पर टैक्स देना पड़ा सकता है. इसकर अर्थ है कि दो हजार रुपये तक के ट्रांजैक्शन पर किसी तरह का कोई चार्ज नहीं लगेगा. वहीं 2000 रुपये से अधिक के अमाउंट पर 0.04% चार्ज लगाया गया है. वहीं अधिकतम चार्ज 300 रुपये रखा गया है.
किस पर कितना चार्ज होगा?
2,000 रुपये तक के भुगतान पर किसी तरह का चार्ज नहीं लिया जाएगा.
2,000 रुपये से ज्यादा पेमेंट पर व्यापारी को 0.4 प्रतिशत का MDR देना होगा. उदाहरण के लिए 5 हजार रुपये के पेमेंट पर व्यापारी को 0.4 प्रतिशत यानी 20 रुपये का चार्ज देना होगा.
75 हजार रुपये और इससे अधिक के पेमेंट पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन तक होनी है. 1 लाख रुपये के पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत के हिसाब से 400 रुपये नहीं, बल्कि केवल 300 रुपये का चार्ज लगेगा.
नया MDR का नियम क्या होने वाला है?
यह एक चार्ज है जो व्यापारियों को यूपीआई के माध्यम से 2 हजार रुपये से अधिक के पेमेंट देना होगा. यह चार्ज ग्राहकों पर नहीं लगाया गया है. उनके लिए UPI पहले की तरह फ्री रहने वाला है. यह नियम 15 अक्टूबर, 2026 तक रहेगा.
क्या आपस में यूपीआई लेनदेन पर लगेगा चार्ज?
यह चार्ज पर्सन टू मर्चेंट होगा. इसका मतलब है कि अगर आप किसी सामान की खरीद पर पेमेट करते है तो उसमें यह चार्ज लगने वाला है. मगर किसी मित्र को मित्र को रकम ट्रांसफर करते हैं या उसे लेते हैं तो उसमें किसी तरह चार्ज नहीं लगेगा. इसका मतलब है कि पर्सन टू पर्सन पेमेंट पहले की तरह ही पूरी तरह फ्री होगा. वहीं उत्पादों की खरीद पर आप जो पेमेंट करेंगे, उसमें यह चार्ज लगने वाला है. यह चार्ज भी कारोबारी को चुकाना होगा. पेमेंट करने वाले शख्स से यह चार्ज नहीं वसूला जाएगा. इस नए स्लैब के तहत अधिकतम 300 रुपये तक का शुल्क वसूला जाएगा.
2,000 रुपए से अधिक के यूपीआई भुगतान पर लगेगा एमडीआर, छोटे व्यापारियों के लिए जारी रहेगी छूट
नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने मंगलवार को ऐलान किया कि उसने चुनिंदा यूपीआई लेनदेन के लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) फ्रेमवर्क में बदलाव किया है। इसके तहत, 2,000 रुपए से ज्यादा के कुछ मर्चेंट पेमेंट पर चार्ज लगेगा, जबकि छोटे व्यापारियों और कम वैल्यू वाले ट्रांजैक्शन के लिए जीरो एमडीआर जारी रहेगा।
यह एमडीआर फ्रेमवर्क 15 अक्टूबर, 2026 से लागू होगा, जबकि ग्राहकों के लिए यूपीआई लेनदेन मुफ्त बने रहेंगे। इसमें 2,000 रुपए तक के पेमेंट वाले कम-वैल्यू वाले यूपीआई पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) लेनदेन को एमडीआर के दायरे से बाहर रखा गया है।
नए नियम के तहत, 2,000 रुपए से ज्यादा के खास पी2एम यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत का एमडीआर लगेगा। एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपए प्रति लेनदेन होगी। रेलवे, टेलीकॉम सर्विस, इंश्योरेंस और फ्यूल जैसी चुनिंदा मर्चेंट कैटेगरी में 2,000 रुपए से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर 5 रुपए प्रति लेनदेन का फ्लैट एमडीआर लगेगा।
पर्सन-टू-पर्सन (पी2पी) यूपीआई लेनदेन पहले की तरह मुफ्त रहेंगे और 2,000 रुपए तक के पी2एम लेनदेन भी एमडीआर फ्रेमवर्क के दायरे से बाहर रहेंगे। इसका मतलब है कि ग्राहक बिना कोई लेनदेन चार्ज दिए यूपीआई का इस्तेमाल करते रहेंगे।
पर्सन-टू-पर्सन मर्चेंट (पी2पीएम) फ्रेमवर्क के तहत काम करने वाले छोटे व्यापारियों को जीरो एमडीआर का फायदा मिलता रहेगा। इस कैटेगरी में वे छोटे वेंडर शामिल हैं जो यूपीआई क्यूआर पेमेंट के जरिए सीधे अपने बैंक अकाउंट में हर महीने 1 लाख रुपए तक की रकम हासिल करते हैं। इससे असंगठित रिटेल सेक्टर में डिजिटल पेमेंट को ज्यादा से ज्यादा अपनाने में मदद मिलती है।
संशोधित फ्रेमवर्क में छोटे व्यापारियों के बीच यूपीआई के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए एक खास फंड बनाने का भी प्रस्ताव है, खासकर मौजूदा मर्चेंट नेटवर्क और टियर-3 व उससे छोटे बाजारों में। इस पहल का मकसद डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना और ज्यादा छोटे व्यवसायों को यूपीआई अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
फ्रेमवर्क के अनुसार, ज्यादा कीमत वाले लेनदेन पर इकट्ठा किया गया एमडीआर, यूपीआई इकोसिस्टम से जुड़े सभी प्लेयर्स के बीच बांटा जाएगा। इस कदम से पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर, मजबूती, साइबर सुरक्षा और इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही नए यूजर्स और व्यापारियों के बीच यूपीआई के इस्तेमाल को बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
--आईएएनएस
एबीएस
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