PM Modi की अगुवाई में 8 दशक पुरानी किशाऊ परियोजना को मिली गति, ऐतिहासिक कदम
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में वर्षों से लंबित किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए. लगभग आठ दशकों से प्रतीक्षित इस परियोजना के लिए हुआ यह समझौता जल सुरक्षा, ऊर्जा, सिंचाई, पेयजल तथा यमुना के पुनर्जीवीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं निर्णायक कदम है.
एक ऐतिहासिक कदम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज का दिन केवल एक समझौते पर हस्ताक्षर का अवसर नहीं, बल्कि लगभग आठ दशकों से प्रतीक्षित किशाऊ परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में बढ़ाया गया एक ऐतिहासिक कदम है. उन्होंने देवभूमि उत्तराखण्ड की ओर से भारत सरकार सहित सभी सहभागी राज्य सरकारों का आभार व्यक्त किया.
अहम परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया
मुख्यमंत्री ने कहा कि किशाऊ परियोजना की परिकल्पना वर्ष 1940 में की गई थी. इतने लंबे समय में परियोजना को आगे बढ़ाने के अनेक प्रयास हुए, लेकिन विभिन्न कारणों से यह परियोजना आगे नहीं बढ़ पाई. आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में दशकों से लंबित महत्वपूर्ण परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है.
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में 16 जून 2026 की बैठक में किशाऊ परियोजना से जुड़ी कई महत्वपूर्ण अड़चनों के समाधान का मार्ग प्रशस्त हुआ. इसके बाद केंद्र एवं सहभागी राज्य सरकारों के बीच निरंतर समन्वय से परियोजना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति हुई और आज MoU पर हस्ताक्षर के साथ इसे औपचारिक रूप दिया गया है.
राष्ट्रीय महत्व की बहुउद्देशीय परियोजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि किशाऊ कोई सामान्य बांध परियोजना नहीं है, बल्कि यह जल सुरक्षा, ऊर्जा, सिंचाई, पेयजल और यमुना के पुनर्जीवीकरण से जुड़ी राष्ट्रीय महत्व की बहुउद्देशीय परियोजना है. उन्होंने कहा कि परियोजना से लगभग 1562 MCM क्षमता का विशाल जलाशय बनेगा तथा 422 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता विकसित होगी. इसका लाभ उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान सहित पूरे अपर यमुना बेसिन को मिलेगा.
मुख्यमंत्री ने कहा कि किशाऊ परियोजना केवल एक राज्य या क्षेत्र की परियोजना नहीं है, बल्कि यह अंतरराज्यीय सहयोग और सहकारी संघवाद का महत्वपूर्ण उदाहरण है. केंद्र और राज्य सरकारों के सामूहिक प्रयासों तथा सहभागी राज्यों के बीच बेहतर समन्वय से दशकों से लंबित परियोजना को अब निर्णायक गति मिली है.
प्रभावित परिवारों का पुनर्वास सर्वोच्च प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना के निर्माण में कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियां भी सामने आएंगी. परियोजना से प्रभावित परिवारों का उचित, संवेदनशील एवं सम्मानजनक पुनर्वास उत्तराखण्ड सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं के साथ प्रभावित परिवारों के हितों का संरक्षण सुनिश्चित करना आवश्यक है और राज्य सरकार इस दिशा में पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य करेगी.
क्षतिपूरक वनीकरण के लिए भूमि उपलब्ध कराना चुनौती
मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना के लिए लगभग 2500 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण की आवश्यकता होगी. इसके कारण क्षतिपूरक वनीकरण के लिए बड़ी मात्रा में भूमि की आवश्यकता पड़ेगी. उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे वनाच्छादित और पर्वतीय राज्य के लिए इतनी बड़ी मात्रा में भूमि उपलब्ध कराना एक महत्वपूर्ण चुनौती है. इसलिए उन्होंने भारत सरकार तथा सभी सहभागी राज्यों से अनुरोध किया कि क्षतिपूरक वनीकरण के लिए आवश्यक भूमि चिन्हित करने में उत्तराखण्ड को सहयोग प्रदान किया जाए.
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है तथा परियोजना से जुड़े सभी पर्यावरणीय एवं वन संबंधी प्रावधानों का नियमानुसार अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा.
‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ समयबद्ध क्रियान्वयन
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी के मार्गदर्शन में सभी सहभागी राज्य किशाऊ परियोजना को समयबद्ध रूप से धरातल पर उतारने के अपने ‘विकल्प रहित संकल्प’ को पूरा करने में सफल होंगे. उन्होंने कहा कि आज हुआ MoU हस्ताक्षर केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि ऐसी महत्वपूर्ण परियोजना की शुरुआत का ऐतिहासिक पड़ाव है, जिसका लाभ आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचेगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि किशाऊ परियोजना के क्रियान्वित होने से जल उपलब्धता, सिंचाई, पेयजल, ऊर्जा उत्पादन और यमुना के पुनर्जीवीकरण को नई गति मिलेगी तथा अपर यमुना बेसिन के राज्यों के विकास को दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होगा.
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू तथा केंद्रीय मंत्रिगणों, सहभागी राज्य सरकारों एवं उपस्थित वरिष्ठ अधिकारियों का आभार व्यक्त किया.
Kal Ka Mausam: 16 सितंबर को बदलने वाला है मौसम का हाल, दिल्ली से केरल तक 9 राज्यों में आंधी-बारिश का अलर्ट
कल का मौसम, 16 सितंबर: देश के बड़े हिस्से में मानसून की सक्रियता एक बार फिर लोगों की मुश्किलें बढ़ाने जा रही है. मौसम विज्ञान विभाग ने 16 सितंबर को लेकर अपनी ताजा चेतावनी जारी करते हुए साफ कर दिया है कि उत्तर भारत के मैदानी इलाकों से लेकर सुदूर दक्षिण और पूर्वोत्तर के राज्यों में जोरदार मौसमी हलचल देखने को मिलेगी. दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और केरल समेत कुल नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बादलों का कड़ा पहरा रहेगा और कई स्थानों पर मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो सकता है. इस दौरान वायुमंडल में बने नए मौसमी तंत्रों के प्रभाव से आंधी, बिजली की गड़गड़ाहट और तेज झोंकेदार हवाएं चलने की पूरी संभावना है. ऐसे में आम लोगों को घर से निकलते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने और मौसम के ताजा रुख पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है.
उत्तर से दक्षिण तक 9 राज्यों में मूसलाधार बारिश की आशंका
मौसम विभाग के आधिकारिक पूर्वानुमान के अनुसार उत्तर भारत के मैदानी हिस्सों में बारिश का असर सबसे ज्यादा महसूस किया जाएगा. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब के अलग-अलग जिलों में मध्यम से भारी बारिश होने का अनुमान है. इससे निचले इलाकों में पानी भरने और यातायात की रफ्तार धीमी पड़ने का संकट पैदा हो सकता है. वहीं दक्षिण भारत की ओर बढ़ें तो केरल, माहे, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल में बादलों की भारी आवाजाही के बीच तेज बौछारें पड़ने की पूरी संभावना बनी हुई है. पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के हिस्से भी इस मौसमी बदलाव से अछूते नहीं रहेंगे. उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के साथ-साथ अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट दिया गया है. इसके अलावा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिल सकता है.
दक्षिण के तटीय इलाकों में 50 किमी प्रति घंटे की गति से चलेंगी हवाएं
दक्षिण भारत और द्वीपीय क्षेत्रों में भारी बारिश के साथ-साथ हवाओं की तूफानी गति भी लोगों को डरा सकती है. मौसम विज्ञानियों का कहना है कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, केरल, माहे और तमिलनाडु के साथ तटीय इलाकों में गरज-चमक के साथ पचास किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति से झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं. बिजली की तेज चमक और बादलों की भीषण गड़गड़ाहट के बीच चलने वाली यह हवाएं कच्चे मकानों, पेड़ों और बिजली के खंभों को नुकसान पहुंचा सकती हैं. प्रशासन ने लोगों को ऐसे मौसम में खुले मैदानों, बड़े पेड़ों के नीचे और जर्जर ढांचों के करीब खड़े होने से पूरी तरह बचने को कहा है.
मैदानी इलाकों में 40Kmph की रफ्तार से आएगी आंधी
देश के मध्य, पश्चिमी और पूर्वी मैदानी हिस्सों में भी मौसम का रुख काफी उग्र रहने वाला है. राजस्थान, बिहार, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, झारखंड, ओडिशा, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में तीस से चालीस किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान जताया गया है. इन राज्यों के कई जिलों में बादलों की तेज गरज के साथ आकाशीय बिजली चमकने और अचानक तेज आंधी आने की संभावना है. वहीं आंध्र प्रदेश के कई इलाकों में जमीन की सतह पर चलने वाली धूल भरी और तेज सतही हवाएं आम जीवन को प्रभावित कर सकती हैं. किसानों को अपनी कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की सलाह दी गई है ताकि अचानक होने वाली बारिश से कोई आर्थिक नुकसान न पहुंचे.
दिल्ली-एनसीआर समेत इन राज्यों में आकाशीय बिजली को लेकर चेतावनी
मौसम विभाग ने आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं को लेकर खास तौर पर सतर्क रहने की हिदायत दी है. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय और लक्षद्वीप में अलग-अलग स्थानों पर तेज बिजली कड़कने की आशंका जताई गई है. बरसात के इस मौसम में आकाशीय बिजली जान-माल के लिए बड़ा खतरा बन जाती है. विशेषज्ञों का कहना है कि बादलों की तेज गड़गड़ाहट सुनाई देते ही लोगों को पक्के मकानों की शरण ले लेनी चाहिए और बिजली के उपकरणों के इस्तेमाल से दूर रहना चाहिए.
समुद्र में उठेगा भारी तूफान, मछुआरों को पानी में न उतरने की हिदायत
तटीय और समुद्री क्षेत्रों में चक्रवाती हवाओं का दबाव बनने से समुद्र में भारी हलचल की स्थिति पैदा हो गई है. मौसम विभाग ने समुद्र में जाने वाले मछुआरों के लिए विशेष चेतावनी जारी की है. अरब सागर के दक्षिण-पश्चिम और पश्चिम-मध्य इलाकों में हवाओं की गति पैंतालीस से प बचपन किलोमीटर प्रति घंटे से लेकर पैंसठ किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. गुजरात के उत्तरी तट से लगे इलाकों में भी मौसम बेहद खराब रहेगा. उधर बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में भी साठ से पैंसठ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने का अंदेशा है. ऐसे खतरनाक हालात को देखते हुए मछुआरों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी हाल में गहरे पानी में न जाएं और अपनी नावों को सुरक्षित तटों पर बांधकर रखें.
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