मंदसौर में नशे के खिलाफ पुलिस का शिकंजा, 100 ग्राम एमडी ड्रग्स और 4.7 किलो डोडाचूरा जब्त, आरोपी गिरफ्तार
मध्यप्रदेश में नशे के कारोबार के खिलाफ पुलिस लगातार शिकंजा कस रही है। प्रदेशभर में लगातार हो रही कार्रवाई के बीच पुलिस मादक पदार्थों की तस्करी करने वालों पर नजर रखते हुए नशे की खेप जब्त कर आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज रही है। ताजा मामला मंदसौर जिले से सामने आया है। जहां पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एमडी ड्रग्स और डोडाचूरा पकड़ा है।
बता दें कि जिले के नई आबादी थाना पुलिस ने सिंथेटिक ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 100 ग्राम एमडी ड्रग्स और 4.7 किलोग्राम डोडाचूरा जब्त किया है। पुलिस ने मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है साथ ही दो आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।
जानकारी अनुसार, नई आबादी थाना पुलिस को अपने मुखबिर से मादक पदार्थों की तस्करी होने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हो गई और घेराबंदी कर मोईन को दबोचा। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से अवैध मादक पदार्थ 100 ग्राम एमडी ड्रग्स और 4.7 किलो डोडाचूरा बरामद किया। मामले में पुलिस ने NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस ने बाइक और मोबाइल भी किया जब्त
बता दें कि पुलिस ने एमडी ड्रग्स और डोडाचूरा के अलावा तस्करी में इस्तेमाल की जा रही एक हीरो स्प्लेंडर मोटरसाइकिल MP14ZA1036, जिसकी कीमत करीब 70 हजार रुपये और एक ओप्पो कंपनी का मोबाइल फोन, कीमत 20 हजार रुपये, जब्त किया है।
नशे के खिलाफ लगातार रहेगी जारी
बता दें कि इस मामले में मंदसौर पुलिस का कहना है कि जिले में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ लगातार प्रभावी और कठोर कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने कहा कि जिले को नशामुक्त बनाने के उद्देश्य से आगे भी इस तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।
मंदसौर पुलिस, थाना नईआबादी की सिंथेटिक ड्रग्स के विरुद्ध कार्रवाई आरोपीयो के कब्जे से अवैध मादक पदार्थ एमडी ड्रग व डोडाचूरा जप्त @CMMadhyaPradesh @mohdept @DGP_MP @IgpUjjain @DIG_RATLAM_MP @PHQ_Editorial @MPPoliceDeptt pic.twitter.com/f2758XdopM
— SP_Mandsaur (@mandsaur_sp) September 15, 2026
मेलोडी, ठेकुआ, मखाना-सत्तू— भारत की 'फूड डिप्लोमेसी' का नया दौर
रोम वाला वो क्लिप शायद आपकी फीड पर भी घूमा होगा। पीएम मोदी इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी को एक छोटा-सा टॉफी पैकेट थमाते हैं, और मेलोनी मुस्कुराते हुए बोल पड़ती हैं— "He gifted us a very, very good toffee।" संयोग ऐसा कि टॉफी का नाम ही था मेलोडी! बस, इंटरनेट ने दोनों नामों को जोड़कर बना दिया 'Melodi', और वो मीठा पल रातोंरात एक मीम बन गया। एक साधारण-सी पार्ले टॉफी ने पूरे सोशल मीडिया पर राज कर लिया।
लेकिन अगर आप इसे सिर्फ इत्तेफाक समझ रहे हैं, तो थोड़ा रुकिए। भारत की विदेश नीति में डिप्लोमेसी की अपनी अहमियत है ही, मगर पिछले कुछ बरसों में "खाना" भी उसमें एक चुपचाप मगर मजबूत किरदार निभाने लगा है। खाना अब सिर्फ पेट भरने की चीज़ नहीं रहा — यह एक सोची-समझी सॉफ्ट पावर की चाल बन चुका है। जैसे भाषा, संगीत या सिनेमा किसी देश की पहचान गढ़ते हैं, वैसे ही अब थाली भी एक तरह की चुप कूटनीतिक ज़बान बोलने लगी है। एक टॉफी, एक मिठाई, या किसी गाला डिनर का मेन्यू — ये सिर्फ मेहमाननवाज़ी नहीं, बल्कि बहुत सोच-समझकर गढ़ा गया एक संदेश होता है।
दिल्ली में ब्रिक्स, थाली में इशारे
टाइमिंग पर गौर करें तो मई 2026 में पीएम मोदी की पांच देशों की यात्रा का आख़िरी पड़ाव इटली ही था। मेलोनी को मेलोडी टॉफी सौंपना महज एक हल्का-फुल्का पल नहीं था, इसके पीछे की टाइमिंग सोच-समझकर तय की गई लगती है। वीडियो वायरल होते ही वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल का बयान आया कि पिछले 12 वर्षों में भारत का टॉफी निर्यात 166% बढ़ चुका है। यानी एक मामूली-सा गिफ्ट भी सरकार ने आसानी से एक आर्थिक नैरेटिव में बदल दिया — "देखिए, भारत की मिठास अब दुनिया के बाज़ार में बिक रही है।" यही डिप्लोमेसी की असली चाल है — जो चीज़ सोशल मीडिया पर वायरल हो जाए, उसे आंकड़ों के सहारे एक आर्थिक कहानी में ढाल दो।
ठेकुआ जब स्लोवाकिया की संसद तक पहुंचा
यह सिर्फ एक तोहफा नहीं था — यह बिहार की सीधी-सादी सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिली एक तरह की इज़्ज़त थी। जो मिठाई कभी सिर्फ त्योहारों तक सीमित मानी जाती थी, वह अब भारत की कूटनीतिक पहचान का हिस्सा बन चुकी है। बारीकी से देखें तो यह कोई अचानक शुरू हुआ चलन नहीं है। 2023 में जब भारत ने G20 की मेज़बानी की थी, तभी से इस रणनीति की झलक दिखनी शुरू हो गई थी। भारत मंडपम के उस गाला डिनर का पूरा मेन्यू "वसुधैव कुटुंबकम" यानी "एक धरती, एक परिवार, एक भविष्य" की थीम पर सजाया गया था। रागी डोसा, बाजरा खीर, कजू मटर मखाना से लेकर गोलगप्पे और समोसे तक — विदेशी मेहमानों को भारत के मिलेट्स और स्ट्रीट फूड, दोनों का ज़ायका एक साथ चखाया गया। यहीं से भारत ने खाने को महज़ मेहमाननवाज़ी नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक हथियार की तरह बरतना शुरू किया।
अब बारी मखाने और सत्तू की
बिहार के सीएम सम्राट चौधरी ने इसे हर बिहारवासी के लिए गर्व का पल बताया, और बात भी सही है — जो मखाना और सत्तू कभी सिर्फ बिहार के गांव-देहात की रसोई तक सीमित थे, वे अब दुनिया के सबसे बड़े कूटनीतिक मंचों में से एक तक पहुंच चुके हैं। यह बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और परंपरा, दोनों के लिए एक बड़ी वैश्विक पहचान है।
मेलोडी टॉफी से लेकर मखाने तक — भारत की गिफ्ट और मेन्यू डिप्लोमेसी में एक साफ पैटर्न नज़र आता है। हल्के-फुल्के निजी तोहफे (टॉफी, ठेकुआ) रिश्तों में अपनापन घोलने के लिए इस्तेमाल होते हैं, जबकि बड़े मंचों के मेन्यू और वेलकम किट (G20, BRICS) पूरे देश की सांस्कृतिक और कृषि विविधता दिखाने का ज़रिया बनते हैं। और इस पूरी कहानी में बिहार बार-बार लौटकर आता है — कभी ठेकुए के रूप में, तो कभी मखाना-सत्तू के रूप में। एक राज्य जिसे अक्सर सिर्फ राजनीतिक सुर्खियों के लिए जाना जाता रहा है, वह अब अपने स्वाद और परंपरा के दम पर दुनिया की सबसे बड़ी कूटनीतिक मेज़ों तक पहुंच चुका है।
- संजीव कुमार मिश्र
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