Pradhan Mantri Awas Yojana पर रायपुर में भिड़े Bhupesh Baghel और Vijay Sharma, आंकड़ों पर तकरार
छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बीच मंगलवार को रायपुर प्रेस क्लब में प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन को लेकर खुली बहस हुई। दोनों नेताओं ने घरों की संख्या, लक्ष्यों व केंद्र और राज्य सरकार की भूमिका को लेकर एक-दूसरे के दावों पर सवाल उठाए। कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने बताया कि शर्मा द्वारा बघेल को इस मुद्दे पर आमने-सामने चर्चा की चुनौती दिए जाने के बाद यह बहस आयोजित की गई।
दोनों नेताओं ने अपने-अपने कार्यकाल के आंकड़े पेश किए। बहस मुख्य रूप से स्वीकृत, लंबित और पूरे हो चुके घरों तथा केंद्र एवं राज्य सरकार की भूमिका पर केंद्रित रही। बघेल ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना के बारे में ‘‘झूठ’’ बोल रही है और लोगों को गुमराह करने के लिए आंकड़ों का इस्तेमाल कर रही है।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग संभाल रहे शर्मा ने पलटवार करते हुए कांग्रेस की पिछली सरकार पर लाखों गरीब परिवारों को घर उपलब्ध कराने में विफल रहने का आरोप लगाया। शर्मा ने कहा, ‘‘कांग्रेस ने गरीब लोगों के सपनों के साथ खिलवाड़ किया।’’ उन्होंने कहा कि विष्णु देव साय सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 11.51 लाख घर पूरे किए हैं और हाल में 3.65 लाख और घरों को मंजूरी मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की पिछली सरकार ने 2021-22 में केंद्र द्वारा दिए गए 7.81 लाख घरों के लक्ष्य को स्वीकार नहीं किया।
बघेल के 2022-23 में प्रधानमंत्री आवास पोर्टल बंद रहने के दावे पर शर्मा ने उन पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के तत्कालीन मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने 2022 में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से इस्तीफा दिया था क्योंकि तत्कालीन राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री आवास के लिए धन मंजूर नहीं किया था। वहीं, बघेल ने कहा कि गरीब परिवारों के लिए घरों का लक्ष्य 2011 की जनगणना के आधार पर तय किया गया था, जिसमें 18 लाख घर और ‘आवास प्लस’ श्रेणी के तहत आठ लाख अन्य घर शामिल थे।
उन्होंने कहा कि 2015 में योजना शुरू होने से 2023 में उनकी सरकार का कार्यकाल समाप्त होने तक राज्य में करीब 11 लाख घर बनाए गए थे। बघेल ने कहा कि भाजपा सरकार ने सत्ता में आने के बाद 14 दिसंबर, 2023 को अपनी पहली कैबिनेट बैठक में 18 लाख घरों को मंजूरी देने की घोषणा की थी। उन्होंने दावा किया कि इसके बाद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ के तीन दौरों में करीब 10 लाख और घरों की घोषणा की, जिससे कुल 28 लाख घरों का आंकड़ा सामने आया।
शर्मा ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि केंद्रीय योजना के तहत घरों की मंजूरी केंद्र सरकार देती है। उन्होंने कहा कि 18 लाख का आंकड़ा घर बनाने के वादे से जुड़ा है, जिसमें 2016 से 2023 के बीच लंबित 2.46 लाख घर, स्थायी प्रतीक्षा सूची के तहत 6.99 लाख घर, ‘आवास प्लस’ के तहत 8.19 लाख घर और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 47,090 घर शामिल हैं। उन्होंने दोहराया कि पिछले ढाई वर्षों में 11.51 लाख घर बनाकर पूरे किए गए हैं।
बहस के बाद सोशल मीडिया पर भाजपा और कांग्रेस के बीच फिर जुबानी जंग शुरू हो गई। दोनों दलों ने बहस में अपनी जीत का दावा किया। बघेल ने ‘एक्स’ पर शर्मा पर निशाना साधते हुए लिखा, ‘‘अगली बार किसी समझदार को भेजना।
‘छोटा रिचार्ज’ रील के लिए ही ठीक है।’’ भाजपा ने पलटवार करते हुए पोस्टर जारी किए और बघेल पर ‘‘हवा-बाजी’’ करने का आरोप लगाया। पार्टी ने कहा कि सही आंकड़े सामने आने से ‘‘भ्रम का गुब्बारा फूट गया है।’’ शर्मा ने बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए बघेल पर प्रधानमंत्री आवास योजना के आंकड़ों की जानकारी नहीं होने का आरोप लगाया। उन्होंने एक अन्य पोस्ट में दावा किया कि बघेल ने अपने कार्यकाल में ‘‘गलत हुआ’’ स्वीकार कर लिया है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, राज्य में सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेताओं के बीच इस तरह की खुली बहस पहली बार हुई है।
Maharashtra Cabinet ने दी सहकारी चीनी मिलों को 750 करोड़ रुपये के सस्ते Loan की मंजूरी
महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने मंगलवार को सहकारी चीनी मिलों के लिए लगभग 750 करोड़ रुपये के सस्ते ऋण (कम ब्याज दर वाले) को मंजूरी दी। यह ऋण 2025-26 पेराई सत्र के लिए किसानों के बकाया उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) का भुगतान करने और वर्ष 2026-27 के कामकाज में मदद के लिए दिया जाएगा। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने बताया कि यह फ़ैसला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई साप्ताहिक मंत्रिमंडल बैठक में लिया गया।
इसमें कहा गया है कि एफआरपी बकाया चुकाने के लिए आसान ब्याज पर ऋण देने से गन्ना उत्पादकों और मिलों, दोनों को राहत मिलेगी। पत्रकारों से बात करते हुए फडणवीस ने कहा कि लगभग 750 करोड़ रुपये के सस्ते ऋण से सहकारी चीनी मिलों को मुश्किलों से उबरने और मौजूदा पेराई सत्र के दौरान काम करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के तहत चीनी मिलों के लिए ऋण लेना आसान हो जाएगा और राज्य सरकार उस पर लगने वाला ब्याज उठाएगी।
फडणवीस ने कहा, ‘‘इससे सहकारी चीनी मिलें इस सत्र में काम शुरू कर पाएंगी और गन्ने की खरीद कर पाएंगी। इससे किसानों को भी फायदा होगा।’’ उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र ने गन्ना किसानों को उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) का लगभग 99.5 प्रतिशत भुगतान कर दिया है और अब एफआरपी भुगतान के मामले में देश में पहले स्थान पर है। फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार ने अपनी शीर्ष 25 योजनाओं और नीतियों का मूल्यांकन करने का फ़ैसला किया है ताकि यह देखा जा सके कि क्या उनके लक्ष्य पूरे हो रहे हैं और फायदे सही लोगों तक पहुंच रहे हैं या नहीं।
एक और बड़े नीतिगत फैसले में, मंत्रिमंडल ने राज्य सरकार की 25 प्रमुख नीतियों और 25 अहम कल्याणकारी योजनाओं का मूल्यांकन करने के लिए महाराष्ट्र तकनीकी सहायता सेल (महा-टीएसी) बनाने को मंजूरी दी। बेहतर प्रशासन और फैसला लेने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए, भारतीय प्रबंध संस्थान मुंबई (आईआईएम मुंबई) और सेंटर फॉर रिसर्च इन स्कीम्स एंड पॉलिसीज (क्रिस्प) की सिफारिशों के आधार पर एक साल की मूल्यांकन परियोजना चलाई जाएगी। मंत्रिमंडल ने महाराष्ट्र साहित्य परिषद की नासिक शाखा को लीज पर दिए गए नासिक नगर निगम के ‘स्टडी सेंटर’ और पुस्तकालय भवन के पट्टा समझौते पर ‘स्टाम्प शुल्क’ से छूट को भी मंजूरी दी।
इसके अलावा, मंत्रिमंडल ने वाणिज्यिक परिसर बनाने के लिए वर्धा जिले के आर्वी तालुका में 6,240.30 वर्ग मीटर सरकारी जमीन स्थानीय नगर परिषद को मुफ्त में देने को मंजूरी दी। मंत्रिमंडल ने महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक टाउनशिप अधिनियम, 1965 में संशोधन को मंजूरी दी और महाराष्ट्र कृषि भूमि (जोत की अधिकतम सीमा) अधिनियम, 1961 में संशोधन पारित किया, जिससे अहिल्यानगर जिले के हरेगांव गांव में राज्य कृषि निगम की जमीन उसके मूल मालिकों को वापस की जा सकेगी। सीएमओ ने बताया कि अन्य फैसलों के अलावा, मंत्रिमंडल ने चार प्रशासनिक पद बनाने और मुंबई पुलिस आवास टाउनशिप परियोजना के अध्यक्ष के कार्यालय के लिए वित्तपोषण को मंजूरी दी।
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