चेक बाउंस केस में SC ने राजपाल को लगाई फटवार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- 'ड्रामा करने में माहिर, एक्टिंग कर रहे',
सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में दो सप्ताह के भीतर 2 करोड़ रुपये जमा करने का अंतिम अवसर दिया है और इसके साथ ही फटकार भी लगाई है.
कुछ ही घंटों में बाजार का मार्केट कैप 9 लाख करोड़ रुपये तक घटा, शेयर बाजार में मचा हड़कंप
कारोबारी सत्र के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट से निवेशकों में हड़कंप देखने को मिला. कुछ ही घंटों में बाजार का मार्केट कैप करीब 9 लाख करोड़ रुपये तक घट गया. आखिर ऐसी क्या वजह रही कि शेयर बाजार में अचानक बिकवाली हावी हो गई? भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को कारोबार के दौरान अचानक भारी गिरावट देखने को मिल रही है. बाजार खुलने के बाद कुछ वक्त तक हालात सामान्य रहे, मगर बाद में बिकवाली का दबाव बढ़ गया. इसका असर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में दिखाई दिया. गिरावट के कारण निवेशकों की संपत्ति में कुछ ही घंटों के अंदर करीब 9 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई. बाजार में यह गिरावट लगभग 330 मिनट के कारोबारी सत्र में देखने को मिली.
अचानक क्यों मची भगदड़?
शेयर बाजार में तेज गिरावट के पीछे आमतौर पर किसी एक वजह को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है. वैश्विक संकेत, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, रुपये की चाल, कच्चे तेल के दाम और अमेरिका से जुड़े आर्थिक संकेतक बाजार के सेंटीमेंट पर असर डालते हैं. मंगलवार की गिरावट में निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों पर रही. विदेशी बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के बीच भारतीय बाजार में ऊंचे स्तरों पर मुनाफा वसूली शुरू हुई. जैसे-जैसे बिकवाली बढ़ी, बाजार में गिरावट और तेज होती गई.
विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बनाया दबाव
भारतीय इक्विटी बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की गतिविधियां बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं. जब विदेशी निवेशक बड़े पैमाने पर शेयर बाजार बेचते हैं तो बाजार पर दबाव बढ़ता है. हाल के कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों के रुख को लेकर बाजार में पहले से ही चिंता बनी थी. ऐसे में बिकवाली बढ़ने पर घरेलू निवेशकों में घबराहट देखी गई.
बैंकिंग और बड़े शेयरों पर असर
गिरावट के दौरान बाजार के प्रमुख और बड़े मार्केट कैप वाले शेयरों में बिकवाली देखने को मिली. बैंकिंग, वित्तीय और अन्य प्रमुख सेक्टरों के शेयरों में कमजोरी का सीधा असर इंडेक्स पर पड़ा. बाजार में जब सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांकों में गिरावट आती है तो इसका असर निवेशकों के पोर्टफोलियो पर भी दिखाई देता है. खासकर उन निवेशकों को अधिक नुकसान महसूस होता है जिनका निवेश बड़ी कंपनियों के शेयरों में होता है.
नौ लाख करोड़ का नुकसान कैसे हुआ?
इस 'नुकसान' का अर्थ यह नहीं है कि निवेशकों के बैंक खातों से सीधे 9 लाख करोड़ रुपये निकल गए. बाजार पूंजीकरण में गिरावट का अर्थ है कि शेयरों की बाजार में दाम घटने से कंपनियों का कुल मार्केट वैल्यू कम हो गया. उदाहरण के लिए, किसी कंपनी के शेयर की कीमत अगर गिरती है तो उसके सभी बकाया शेयरों की कुल बाजार कीमत भी घटती है. इस तरह से जब बाजार की बड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट आती है तो पूरे बाजार के मार्केट कैप में हजारों करोड़ रुपये की कमी हो जाती है.
आगे बाजार की नजर किन चीजों पर?
अब निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों की दिशा, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री, रुपये की चाल, कच्चे तेल की कीमत और आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर रहने वाली है. इसके साथ कंपनियों के तिमाही नतीजे और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा पर असर डालती हैं. शेयर बाजार में अचानक आई गिरावट यह तय करती है कि तेज उतार-चढ़ाव के दौर में निवेशकों के लिए सिर्फ इंडेक्स की चाल देखना पर्याप्त नहीं है. किसी भी निवेश निर्णय से पहले कंपनी के फंडामेंटल, जोखिम और अपने निवेश लक्ष्य को ध्यान में रखना जरूरी है.
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