DUSU चुनाव में राजनीतिक दखल का आरोप, दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा मामला, उम्मीदवारों की नई सूची जारी करने की मांग
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ यानी DUSU के चुनाव को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि छात्र संघ चुनाव में राजनीतिक दलों और उनसे जुड़े छात्र संगठनों का सीधा या अप्रत्यक्ष दखल हो रहा है. याचिकाकर्ता का कहना है कि इस तरह की राजनीतिक भागीदारी छात्र चुनावों के लिए तय नियमों के खिलाफ है. मामले को दिल्ली हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने बुधवार को सुनवाई के लिए स्वीकार किया है.
सिफारिशों का हवाला दिया गया
याचिका दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रा विजेता की ओर से दाखिल की गई है. इसमें मुख्य तौर पर सुप्रीम कोर्ट के उन निर्देशों और लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों का हवाला दिया गया है, जिनका मकसद छात्र संघ चुनावों को राजनीतिक दलों के सीधे प्रभाव से अलग रखना है. याचिका में कहा गया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय में इस नियम का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा है और राजनीतिक संगठनों से जुड़े छात्र संगठन चुनाव में अपने-अपने उम्मीदवारों के समर्थन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.
क्लॉज 6.3 का भी उल्लेख किया
याचिकाकर्ता ने लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के क्लॉज 6.3 का भी उल्लेख किया है. इस प्रावधान का संबंध छात्र चुनाव और छात्र प्रतिनिधित्व को राजनीतिक दलों से अलग रखने से है. याचिका के मुताबिक, दिल्ली विश्वविद्यालय में चुनाव लड़ने वाले कुछ उम्मीदवारों को राजनीतिक छात्र संगठनों का समर्थन मिल रहा है. इतना ही नहीं, आरोप है कि कुछ संगठनों ने बाकायदा अपने पैनल और उम्मीदवारों के नाम भी सामने रखे हैं.
संविधान की भावना के विपरीत होगा
याचिका में NSUI, ABVP, AAP से जुड़े छात्र संगठन Association of Students for Alternative Politics यानी ASAP, और SFI तथा AISA के गठजोड़ का भी जिक्र किया गया है. आरोप है कि इन संगठनों की ओर से उम्मीदवारों या पैनल का समर्थन किया गया है. याचिकाकर्ता का कहना है कि अगर छात्र चुनाव में राजनीतिक दलों या उनके छात्र संगठनों का सीधा प्रभाव रहता है तो यह लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों और DUSU के संविधान की भावना के विपरीत होगा.
मामला सिर्फ राजनीतिक समर्थन तक सीमित नहीं है. याचिका में चुनाव के दौरान पोस्टर, बैनर, होर्डिंग और रैलियों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि चुनाव प्रचार के दौरान विश्वविद्यालय और कॉलेज परिसरों में दीवारों और दूसरी जगहों पर पोस्टर लगाए गए और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियां भी हुईं.
उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया
याचिका में खास तौर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के मुख्य चुनाव अधिकारी की ओर से 11 सितंबर को जारी उस नोटिस को चुनौती दी गई है, जिसमें DUSU के अलग-अलग पदों के लिए उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया था. इनमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पद शामिल हैं. याचिकाकर्ता का दावा है कि इस सूची में ऐसे उम्मीदवार भी शामिल हैं जिनका संबंध राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठनों से है. इसी आधार पर इन उम्मीदवारों की उम्मीदवारी रद्द करने और नए सिरे से उम्मीदवारों की सूची तैयार करने की मांग की गई है.
याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट से मांग की गई है कि DUSU चुनाव को लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों और सुप्रीम कोर्ट के 22 सितंबर 2006 के आदेश के मुताबिक कराया जाए. याचिकाकर्ता का कहना है कि छात्र संघ चुनाव का उद्देश्य छात्रों को अपने प्रतिनिधि चुनने का लोकतांत्रिक अधिकार देना है, लेकिन अगर चुनाव में बाहरी राजनीतिक ताकतों का प्रभाव बढ़ जाता है तो इसका असर चुनाव की निष्पक्षता पर पड़ सकता है.
पारदर्शिता के लिए अहम माना जाता
दरअसल, लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों को छात्र चुनावों में सुधार और पारदर्शिता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. इनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्र संघ चुनाव पढ़ाई के माहौल के भीतर हों और उन पर बाहरी राजनीतिक दबाव हावी न हो. इसी वजह से दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे बड़े संस्थान में इन नियमों का पालन हमेशा महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है.
अब इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई पर सबकी नजर रहेगी. अदालत के सामने यह सवाल है कि क्या मौजूदा DUSU चुनाव प्रक्रिया में राजनीतिक संगठनों की भूमिका तय नियमों की सीमा के अंदर है या नहीं. साथ ही, अदालत यह भी देख सकती है कि उम्मीदवारों की सूची और चुनाव प्रचार को लेकर लगाए गए आरोपों में कितना दम है.
राजनीतिक प्रभाव से जुड़े आरोप
फिलहाल याचिकाकर्ता ने अदालत से चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर नियमों को लागू कराने और राजनीतिक प्रभाव से जुड़े आरोपों की स्थिति साफ करने की मांग की है. इस मामले का असर सिर्फ मौजूदा DUSU चुनाव पर ही नहीं, बल्कि आने वाले समय में दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र चुनावों में राजनीतिक संगठनों की भूमिका को लेकर भी महत्वपूर्ण हो सकता है.
Gaurav Khanna ही नहीं ये कंटेस्टेंट्स भी बीच में छोड़ चुके हैं Khatron Ke Khiladi, कोई स्टंट से डरा तो किसी ने की होस्ट से बदतमीजी
These Contestants Quitted Khatron Ke Khiladi: इंडिया में खतरों के खिलाड़ी (Khatro Ke Khiladi) और बिग बॉस ऐसे दो रियलिटी शो हैं, जिन्हें देखने को वाली ऑडियंस की संख्या बहुत बड़ी है. हर साल फैंस अपने फेवरेट्स को इन शो में देखने की चाह रखते हैं. अभी हाल ही में खतरों के खिलाड़ी से खबर आई थी कि टीवी के जाने-माने एक्टर गौरव खन्ना ने खतरों के खिलाड़ी 15 को बीच में ही छोड़ दिया. दरअसल उन्होंने बीते रविवार को अपनी कोहनी में चोट की वजह से शो छोड़ने का फैसला किया था. जिससे उनके फैंस काफी निराश हुए थे. हालांकि, ऐसा पहली बार नहीं कि जब किसी ने शो को बीच में छोड़ा है, इस लिस्ट में ऐसे कई नाम हैं, जिनमें से किसी ने मर्जी से वॉक आउट किया था तो किसी ने होस्ट रोहित शेट्टी के साथ बदतमीजी की थी. आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं.
गौरव खन्ना ने खुद किया था शो छोड़ने का फैसला
गौरव खन्ना शुरू से ही खतरों के खिलाड़ी में अपनी कंथे की चोट का जिक्र करते नजर आए थे. जिसकी वजह से वह कई स्टंट को बड़ी मुश्किल से पूरा कर पाए. लेकिन शुरुआत में वह शो के एक स्टंट को कंधे में आए अचानक झटके की वजह से पूरा नहीं कर पाए. जिसके बाद उन्हें शो से बाहर होना पड़ा. लेकिन बाद में उनकी वाइल्ड कार्ड एंट्री हुई. फिर भी वह अपने कंधे और हेल्थ को लेकर परेशान नजर आए. इसी के चलते उन्होंने बीते रविवार के स्टंट को पूरा करने के बाद भी शो से बाहर होने का फैसला किया.
विशाल आदित्य को चोट की वजह से होना बाहर
इसी शो में बिहार के रहने वाले जाने-माने एक्टर विशाल आदित्य सिंह ने भी हिस्सा लिया था. हालांकि, वह शो में ठीक आए थे, जब उन्होंने स्टंट किया तो उनका कंधा उतर गया था. इसके बाद मेकर्स ने उन्हें रिकवरी के लिए खुद टाइम दिया था. बाद उन्होंने भी गौरव की तरह वाइल्ड कार्ड एंट्री की थी. इतना ही नहीं जब वह दोबारा आए तो उन्हे कंधे की परेशानी से जूझना पड़ा. जानकारी के मुताबिक, स्टंट को परफॉर्म करते वक्त विशाल को लिगामेंट टीयर (Ligament Tear) की चोट लग गई. बता दें कि इससे पहले विशाल आदित्य सिंह केकेके सीजन 11 का भी हिस्सा रह चुके हैं. उन्होंने शो में काफी प्यार मिला था.
जैस्मिन भसीन ने भी छोड़ा था बीच में शो
जैस्मिन भसीन टीवी की जानी-मानी एक्ट्रेस हैं, उन्होंने कई रियलिटी शो में हिस्सा ले रखा है. जैस्मिन ने इस बार खतरों के खिलाड़ी 15 में तीसरी बाहर हिस्सा लिया है. इस सीजन में उन्होंने स्टंट अबोर्ट किया था लेकिन रोहित शेट्टी और उनके बॉयफ्रेंड अली गॉनी के समझाने के बाद उन्होंने शो में दोबारा आने का फैसला किया था. सीजन 15 से पहले वह सीजन 9 में भी शो को बीच में ही छोड़कर चली गई थीं. जानकारी के मुताबिक, उस दौरान उन्हें कुछ मेडिकल प्रॉबलम्स की वजह से शो बीच में छोड़ना पड़ा था.
आसिम रियाज ने की थी रोहित शेट्टी संग बदतमीजी
कश्मीर के रहने वाले आसिम रियाज अक्सर किसी न किसी वजह से विवाद में रहते हैं. उनके बारे में बात की जाए तो उन्होंने सीजन 14 में शो के होस्ट रोहित शेट्टी के साथ बदतमीजी की थी. इस दौरान दोनों के बीच तगड़ी बहस हुई और उन्हें शो से बाहर कर दिया गया था. ऐसा कहा जाता है कि आसिम अक्सर हर शो में विवाद करते नजर आते हैं. उनका हर बार किसी न किसी से विवाद या झगड़ा हो ही जाता है. ये बात टीवी एक्ट्रेस रुबीना दिलैक ने भी की थी. आपको ये भी बताते चलें कि आसिम खतरों के खिलाड़ी के ऐसे पहले कंटेस्टेंट रहे हैं, जिन्हें खुद रोहित शेट्टी ने बाहर किया था.
सिद्धार्थ शुक्ला और विकास गुप्ता इसलिए हुए बाहर
बिग बॉस 13 विनर और दिवंगत टीवी एक्टर सिद्धार्थ शुक्ला ने खतरों के खिलाड़ी सीजन 7 में हिस्सा लिया था. शो में वह काफी अच्छा करते हुए नजर आए लेकिन उनकी टांग में आई इंजरी और इन्फेक्शन की वजह से सिद्धार्थ को डॉक्टर्स ने आराम करने की सलाह दी थी. जिसके बाद उन्होंने वाइल्ड एंट्री कर ट्रॉफी अपने नाम की थी. सिद्धार्थ के अलावा खतरों के खिलाड़ी सीजन 9 में विकास गुप्ता ने भी शो को बीच में छोड़ा था. बताया जाता है कि उन्होंने कंधे की पुरानी चोट की वजह बिना बताए ही पेनकिलर्स ले ली थी. जिसे नियमों का उल्लंघन माना गया था. इस कारण उन्हें शो से बाहर होना पड़ा था.
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