राहुल गांधी के इंदौर दौरे से पहले उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा, बोले “युवाओं के हक की हुंकार गूंजेगी”
राहुल गांधी के इंदौर दौरे से पहले कांग्रेस विभिन्न मुद्दों को लेकर भाजपा सरकार पर हमलावर है। भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता, पेपर लीक और युवाओं से जुड़े रोजगार के सवालों को लेकर वो लगातार सरकार को घेर रही है। एक बार फिर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इन मुद्दों को लेकर भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी नौकरी की तैयारी में वर्षों मेहनत करने वाले युवाओं को अपने अधिकार और रोजगार की मांग के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है, लेकिन सरकार उनकी आवाज सुनने के बजाय उन्हें नजरअंदाज कर रही है। कांग्रेस नेता ने कहा कि अब छात्रों की आवाज दबेगी नहीं। इंदौर से युवाओं के हक की हुंकार गूंजेगी और भाजपा सरकार से जवाब मांगा जाएगा।
उमंग सिंघार ने सरकार से किए सवाल
उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि व्यापमं, पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती, शिक्षक भर्ती और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामलों में युवा लगातार संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने PESA मोबिलाइजर के रोजगार से जुड़े मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा कि अलग-अलग स्तर पर युवाओं के सामने रोजगार से जुड़ी समस्याएं खड़ी हैं। उन्होंने सरकार पर युवाओं की समस्याओं को लेकर केवल दावे करने का आरोप लगाया।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि नौकरी की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी परीक्षा की प्रक्रिया पर भरोसा करके वर्षों मेहनत करते हैं। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी या पेपर लीक जैसी घटनाएं उनके लिए आर्थिक और मानसिक परेशानी का कारण बनती हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं के इन सवालों का समाधान करना सरकार की जिम्मेदारी है।
“इंदौर से युवाओं के हक की हुंकार गूंजेगी”
उमंग सिंघार ने कहा कि इन्हीं छात्रों और युवाओं की आवाज को मजबूती देने के लिए राहुल गांधी 19 सितंबर को इंदौर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस दौरान युवाओं के रोजगार और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए जाएंगे। कांग्रेस नेता ने कहा है कि इंदौर से छात्रों और युवाओं के हक की आवाज बुलंद होगी और भाजपा सरकार से इन मुद्दों पर जवाब मांगा जाएगा।
मध्यप्रदेश में भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता, पेपर लीक और भ्रष्टाचार ने लाखों युवाओं के भविष्य पर सवाल खड़ा कर दिया है। नौकरी की तैयारी में सालों मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को हमने अपने हक और रोजगार की मांग को लेकर सड़कों पर आंदोलन करते देखा है, लेकिन भाजपा सरकार उनकी आवाज सुनने…
— Umang Singhar (@UmangSinghar) September 15, 2026
बांग्लादेश में अवामी लीग के 7 नेताओं को मौत की सज़ा, 2024 हिंसा मामले में दोषी करार
बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए आंदोलन से जुड़े मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए अवामी लीग के सात वरिष्ठ नेताओं को मौत की सज़ा सुनाई है, जिनमें पार्टी के महासचिव ओबैदुल कादर भी शामिल हैं। जस्टिस नज़रुल इस्लाम चौधरी की अध्यक्षता वाली ट्रिब्यूनल-2 कोर्ट ने मंगलवार को यह फ़ैसला सुनाया। मौत की सज़ा पाने वाले अन्य नेताओं में अवामी लीग के संयुक्त महासचिव बहाउद्दीन नसीम; सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री मोहम्मद अली अराफात; जुबो लीग के अध्यक्ष शेख फज़ले शम्स पराश और महासचिव मैनुल हुसैन खान निखिल; तथा छात्र लीग के अध्यक्ष सद्दाम हुसैन और महासचिव शेख वली आसिफ़ एनन शामिल हैं।
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ट्रिब्यूनल के अनुसार, इन सातों पर जुलाई-अगस्त 2024 में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के खिलाफ छात्रों के नेतृत्व वाले आंदोलन के दौरान हत्या, हिंसा भड़काने और हत्या के लिए उकसाने के आरोप थे। कोर्ट ने कहा कि आरोप साबित हो गए हैं और मौत की सज़ा सुनाई। यह फ़ैसला तब आया है जब बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल-1 ने हसीना को विद्रोह के दौरान मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों का दोषी पाए जाने के बाद 2025 में मौत की सज़ा सुनाई थी। ट्रिब्यूनल ने हसीना को उन पर लगाए गए सभी पांच आरोपों में दोषी पाया। इन आरोपों में लोगों को भड़काना, अत्याचारों को रोकने या दोषियों को सज़ा देने में नाकाम रहना और प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ ड्रोन, हेलिकॉप्टर और जानलेवा हथियारों के इस्तेमाल का आदेश देना शामिल है।
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हसीना के साथ-साथ पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-ममुन और पूर्व गृह मंत्री असदुज़्ज़मान खान कमाल पर भी आरोप लगाए गए थे। छात्रों के बड़े पैमाने पर हुए विद्रोह के बीच अपनी सरकार गिरने के बाद, 78 वर्षीय हसीना 5 अगस्त, 2024 को भारत भाग गई थीं। ट्रिब्यूनल ने इससे पहले हसीना, कमाल और ममुन पर पांच आरोप तय किए थे, जिनमें लोगों को भड़काना, प्रदर्शनकारियों की हत्या का आदेश देना, सीनियर कमांड की ज़िम्मेदारी और संयुक्त आपराधिक साज़िश शामिल थी। इस मामले की कार्यवाही ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है और ट्रिब्यूनल के फ़ैसले 2024 के विद्रोह के दौरान हुई हिंसा के लिए एक बड़ी कानूनी जवाबदेही तय करते हैं।
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