BJP अपने दरवाजे बंद करती है, तो...सपा संग गठबंधन की अटकलों पर संजय निषाद ने खुद सारी स्थिति साफ कर दी
उत्तर प्रदेश के मंत्री और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद ने सोमवार को लखनऊ में राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता (LoP) माता प्रसाद पांडे से मुलाकात की। इस मुलाकात ने अटकलों को हवा दे दी है कि इसके बड़े राजनीतिक मायने हो सकते हैं। हालांकि निषाद ने इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया और कहा कि वह समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता पांडे का हाल-चाल जानने गए थे, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे महज एक सामान्य मुलाकात से कहीं बढ़कर देखा जा रहा है, खासकर इसके समय को देखते हुए। यह मुलाकात गोंडा में निषाद समुदाय के व्यापारी विनोद साहनी की हत्या में शामिल लोगों के "एनकाउंटर" की मांग को लेकर निषाद के विरोध प्रदर्शन के दो दिन बाद हुई। सपा के साथ गठबंधन की संभावना को लेकर उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी अपने दरवाजे बंद करती है, तो वो इस बारे में सोच सकते हैं। निषाद, जिनकी पार्टी एनडीए की सहयोगी है। उसने सोशल मीडिया पर बैठक की एक तस्वीर भी पोस्ट की और कहा कि उन्होंने SP नेता से उनके आवास पर मुलाकात की और कई समसामयिक मुद्दों पर चर्चा की।
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हाल के दिनों में निषाद ने अपने समुदाय से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बात की है, जिसमें निषादों के लिए 9 प्रतिशत आरक्षण की मांग और गोंडा मर्डर केस को संभालने के तरीके की आलोचना शामिल है। गोंडा में विरोध प्रदर्शन के दौरान निषाद पार्टी के प्रमुख ने विनोद साहनी की हत्या के आरोपियों के "एनकाउंटर" और उनकी संपत्तियों पर बुलडोज़र चलाने की मांग की थी। उनके इस विरोध ने बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार को मुश्किल स्थिति में डाल दिया था, क्योंकि निषाद ने चेतावनी दी थी कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी। यह समय भी अहम है क्योंकि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही महीने बचे हैं। संजय निषाद ने कहा कि माता प्रसाद पांडे मेरे पुराने साथी और मार्गदर्शक रहे हैं। उनकी तबीयत खराब थी, इसलिए मैं शिष्टाचार के नाते उनसे मिलने गया था। जब दो बड़े नेता मिलते हैं तो स्वाभाविक रूप से बातचीत होती है। इस दौरान विनोद साहनी की हत्या के मुद्दे पर भी चर्चा हुई।
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विधानसभा चुनाव के मद्देनजर निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद और बीजेपी के प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह के बीच अहम चर्चा हुई। बातचीत के दौरान संजय निषाद ने आगामी चुनावों में 16 से अधिक सीटों की मांग रखी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पार्टी उन सीटों पर विशेष ध्यान देगी जहां भाजपा को पिछले चुनाव में हार झेलनी पड़ी थी, ताकि वहां जीत दर्ज की जा सके। इसके अलावा, उन्होंने यह तर्क भी रखा कि उनके एनडीए का हिस्सा बनने के बाद से विभिन्न राज्यों के चुनावों में भाजपा के प्रदर्शन और नतीजों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
NSE की पूर्व MD चित्रा रामकृष्ण को SC से झटका, याचिका पर सुनवाई से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO चित्रा रामकृष्ण की उस याचिका को खारिज करने के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट' (PC एक्ट) के तहत अपने खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई को इस आधार पर चुनौती दी थी कि वह सरकारी कर्मचारी नहीं थीं। जस्टिस जेबी पारदीवाला और के विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा कि रामकृष्ण का यह तर्क कि उन्हें सरकारी कर्मचारी नहीं माना जा सकता, ट्रायल कोर्ट के सामने उठाया जा सकता है। कोर्ट ने आदेश दिया हमारा मानना है कि हाई कोर्ट ने विवादित फैसला सुनाने में कोई गलती नहीं की है। याचिकाकर्ता NSE की MD और CEO थीं। तर्क यह है कि NSE एक प्राइवेट/गैर-सरकारी कंपनी है, इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि याचिकाकर्ता कोई सरकारी काम कर रही थीं। हमारा मानना है कि यह मुद्दा ट्रायल के दौरान उठाया जा सकता है। इस मुद्दे पर ट्रायल कोर्ट को अपने हिसाब से फैसला करने दें।
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रामकृष्ण के खिलाफ़ मामला सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (SEBI) के 11 फरवरी के उस आदेश से शुरू हुआ, जिसमें पाया गया कि वह NSE के एक और पूर्व कर्मचारी, आनंद सुब्रमण्यम के मुआवज़े को तय करने और उसमें बार-बार बदलाव करने से जुड़ी वित्तीय गड़बड़ियों में शामिल थीं। आरोप है कि उन्होंने यह काम किसी ऐसे व्यक्ति की मिलीभगत से किया जिसे वह सिद्ध पुरुष बताती थीं। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने कहा कि सुब्रमण्यम ने आम निवेशकों के हितों की रक्षा करने की अपनी सार्वजनिक ज़िम्मेदारी निभाते हुए, दूसरे सह-आरोपियों के साथ मिलकर आपराधिक साज़िश रची और कई ट्रेडिंग सदस्यों/ब्रोकरों को भारी फ़ायदा पहुँचाया। रामकृष्ण पर एक और आरोप यह था कि वह ईमेल के ज़रिए हिमालय के एक योगी के संपर्क में थीं, जिनके बारे में CBI ने बाद में दावा किया कि वह कोई और नहीं, बल्कि सुब्रमण्यम ही थे।
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दिल्ली हाई कोर्ट ने जुलाई में PC एक्ट की धारा 2(b) और 2(c)(viii) को चुनौती देने वाली रामकृष्ण की याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं। धारा 2(b) में "सार्वजनिक कर्तव्य" (public duty) को ऐसे कर्तव्य के तौर पर परिभाषित किया गया है, जिसके पालन में राज्य, जनता या व्यापक समुदाय की रुचि होती है। धारा 2(c)(viii) के तहत "लोक सेवक" (public servant) की परिभाषा में ऐसा व्यक्ति शामिल है जो किसी ऐसे पद पर है जिसके कारण उसे सार्वजनिक कर्तव्य निभाने का अधिकार या दायित्व प्राप्त है। हाई कोर्ट ने माना था कि NSE एक सार्वजनिक कर्तव्य का पालन करता है और रामकृष्ण, इसके MD और CEO के तौर पर, स्टॉक एक्सचेंज के उन कार्यों से पूरी तरह अलग नहीं हो सकतीं जिनमें आम जनता की रुचि होती है। कोर्ट ने PC एक्ट के तहत उन पर मुकदमा चलाने के लिए दी गई मंज़ूरी को चुनौती देने वाली उनकी याचिका भी खारिज कर दी थी।
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