What Is Kishau Project: 6 राज्यों के बीच ऐतिहासिक समझौता; होगा उत्तर भारत के जल और ऊर्जा संकट का स्थायी समाधान
उत्तरी राज्यों में बढ़ती पानी और बिजली की मांग को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार की पहल पर किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को धरातल पर उतारने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। लगभग 15,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली यह राष्ट्रीय परियोजना यमुना की सबसे बड़ी सहायक नदी 'टोंस' पर निर्मित की जाएगी।
यह प्रोजेक्ट पीने के पानी की किल्लत दूर करने, सिंचाई का दायरा बढ़ाने, पर्यावरण-अनुकूल बिजली पैदा करने और यमुना नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए अंतर-राज्यीय समन्वय का एक अनूठा मॉडल बनकर उभरा है।
प्रोजेक्ट का स्थान और निर्माण संबंधी विशेषताएं
यह विशालकाय परियोजना उत्तराखंड के देहरादून जिले और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की सीमा पर बहने वाली टोंस नदी पर आकार लेगी। परियोजना के मुख्य ढांचे के रूप में टोंस नदी पर 236 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी बांध बनाया जाएगा, जो जल संरक्षण की दृष्टि से बेहद मजबूत होगा।
इस विशाल बांध के पीछे एक विशाल जलाशय तैयार होगा, जिसमें 1,324 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) पानी का जीवंत भंडारण किया जा सकेगा। यह जल संचय मानसूनी बारिश के पानी को सहेजकर साल भर इस्तेमाल में लाने की सुविधा देगा।
बिजली उत्पादन और ऊर्जा सुरक्षा
किशाऊ बांध केवल पानी के संचय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के लिए स्वच्छ ऊर्जा का एक बड़ा केंद्र भी बनेगा। बांध स्थल पर 660 मेगावॉट की कुल क्षमता वाला एक भूमिगत जलविद्युत गृह स्थापित किया जाएगा, जिसमें 165 मेगावॉट की 4 बिजली उत्पादन इकाइयां शामिल होंगी।
इस जलविद्युत संयंत्र से हर साल लगभग 1,379 मिलियन यूनिट पर्यावरण-अनुकूल बिजली का उत्पादन होगा। उत्पादित बिजली से उत्तरी ग्रिड को मजबूती मिलेगी और गर्मियों में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने में काफी मदद मिलेगी।
फंडिंग शेयरिंग और राज्यों के बीच समझौता
किशाऊ परियोजना को केंद्र सरकार द्वारा 'राष्ट्रीय परियोजना' घोषित किया गया है, जिसके चलते इसके वित्तीय ढांचे को काफी व्यावहारिक बनाया गया है। प्रोजेक्ट के 'जल घटक' की कुल लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार द्वारा अनुदान के रूप में वहन किया जाएगा, जबकि शेष 10 प्रतिशत लागत सभी 6 लाभार्थी राज्यों (हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान) के बीच बांटी जाएगी।
वहीं, 'पावर कॉम्पोनेंट' का खर्च मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड वहन करेंगे, जिसमें अतिरिक्त पानी प्राप्त करने वाले दिल्ली और राजस्थान जैसे राज्य भी वित्तीय योगदान देंगे।
यमुना का पुनरुद्धार और पेयजल आपूर्ति
गर्मी और गैर-मानसून के महीनों में यमुना नदी में पानी का प्रवाह बेहद कम हो जाता है, जिससे उसमें प्रदूषण का स्तर खतरनाक सीमा तक पहुंच जाता है। किशाऊ बांध में जमा पानी को शुष्क मौसम के दौरान नियंत्रित तरीके से यमुना नदी में छोड़ा जाएगा, जिससे नदी में न्यूनतम जल प्रवाह बना रहेगा और उसमें ऑक्सीजन का स्तर सुधरेगा।
इसके अतिरिक्त, इस परियोजना से दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और राजस्थान के कई शहरी क्षेत्रों को कुल 617 MCM अतिरिक्त शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे राजधानी और आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में जल संकट का स्थायी समाधान हो सकेगा।
कृषि क्षेत्र और सिंचाई क्षमता का विस्तार
उत्तरी भारत की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था के लिए यह परियोजना अत्यधिक लाभदायक साबित होगी। किशाऊ प्रोजेक्ट के पूर्ण चालू होने पर उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के मैदानी इलाकों में 97,076 हेक्टेयर अतिरिक्त कृषि भूमि को सुनिश्चित और निर्बाध सिंचाई की सुविधा प्राप्त होगी।
नहरी नेटवर्क के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचने से फसलों की पैदावार में वृद्धि होगी, किसानों की आय बढ़ेगी और अत्यधिक ट्यूबवेल पंपिंग के कारण पाताल में जा रहे भूजल स्तर पर निर्भरता में काफी कमी आएगी।
UP Cabinet Meeting: योगी कैबिनेट बैठक आज, 18 प्रस्ताव रखे जाएंगे, PRD जवानों के भत्ते में वृद्धि संभव, किसानों को भी मिल सकती है राहत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आज, मंगलवार को कैबिनेट बैठक होना है। इसमें लगभग 18 प्रस्ताव चर्चा और मंजूरी के लिए रखे जाएंगे। इनमें प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के जवानों का ड्यूटी भत्ता व कैशलेस इलाज, वाहनों की फिटनेस के लिए नई नीति, उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति और किसानों को सस्ते लोन की सुविधा देने संबंधी प्रस्ताव शामिल हैं।
योगी कैबिनेट बैठक में इन प्रस्तावों को मिल सकती है मंजूरी
- प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के जवानों का ड्यूटी भत्ता रोजाना 500 से बढ़ाकर 600 रुपए करने और 5 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा का प्रस्ताव। आखिरी बार 2019 में बढ़ाया गया था भत्ता। इससे प्रदेश के करीब 40 हजार जवानों को लाभ मिलेगा
- किसानों को 6% ब्याज दर पर 6 लाख तक का दीर्घकालिक कर्ज उपलब्ध कराने की योजना का प्रस्ताव।
- सरकारी राशन वितरण व्यवस्था से जुड़े कोटेदारों के मार्जिन में 25 रुपए प्रति क्विंटल अतिरिक्त बढ़ोतरी का प्रस्ताव।
- राज्य में खिलौना विनिर्माण और कारोबार को बढ़ावा देने के लिए ‘उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति’ का प्रस्ताव।
- भूतपूर्व सैनिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर प्रस्ताव ।
- अंशदायी स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत पालीक्लीनिकों के निर्माण के लिए ग्राम पंचायत या स्थानीय प्राधिकरणों की भूमि स्थानीय सैन्य प्राधिकरण सेंट्रल कमांड भारत सरकार को मुफ्त दिए जाने का प्रस्ताव
- अयोध्या (मिल्कीपुर) में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) के रीजनल हब/सेंटर के लिए गृह विभाग को 65 एकड़ ग्रामसभा भूमि हस्तांतरित करने का प्रस्ताव।
- बेसिक शिक्षा विभाग के 14 हजार स्कूलों में स्मार्ट क्लास के लिए आईसीटी लैब बनाने के लिए 300 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल सकती है। प्रत्येक स्कूल को दो-दो लाख रुपये दिए जाएंगे।
- मथुरा में सरकारी चीनी मिल कंसेशन कम लीज पर एथेनॉल के उत्पादन संयंत्र की स्थापना
- उत्तर प्रदेश चीनी निगम की तीन मिलों को पेराई सत्र के लिए 500 करोड़ की गारंटी दिए जाने के प्रस्ताव भी पास हो सकते है।
- वाहनों की फिटनेस नीति, चित्रकूट एक्सप्रेसवे का संशोधित प्रस्ताव, मत्स्य व वित्त विभाग से संबंधित अन्य प्रशासनिक प्रस्ताव भी बैठक में रखे जा सकते हैं।
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