Kidney Stone: किडनी स्टोन बार-बार क्यों बनते हैं? पानी से लेकर खाने तक ये आदतें बढ़ा सकती हैं पथरी का खतरा
Kidney Stone: किडनी स्टोन यानी गुर्दे की पथरी एक बार निकल जाने के बाद भी समस्या खत्म हो जाए, यह जरूरी नहीं है। अगर पथरी बनने की वजहों पर ध्यान नहीं दिया जाए तो दोबारा स्टोन बनने का खतरा बना रहता है। कम पानी पीना, ज्यादा नमक खाना और कुछ खान-पान की आदतें इसके पीछे बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।
कई लोग पथरी निकलने के बाद फिर अपनी पुरानी दिनचर्या पर लौट जाते हैं। नतीजा यह होता है कि कुछ समय बाद दोबारा कमर या पेट में तेज दर्द जैसी परेशानी शुरू हो सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति में स्टोन बनने का कारण एक जैसा नहीं होता। पथरी का प्रकार और शरीर में मौजूद अन्य जोखिमों के आधार पर बचाव का तरीका तय किया जाता है।
कम पानी पीने की आदत
बार-बार किडनी स्टोन बनने की सबसे अहम वजहों में पर्याप्त पानी न पीना शामिल है। शरीर में तरल कम होने पर पेशाब ज्यादा गाढ़ा हो सकता है और उसमें मौजूद कुछ खनिजों की सांद्रता बढ़ जाती है। इससे क्रिस्टल बनने और उनके स्टोन में बदलने की संभावना बढ़ सकती है।
इसलिए पथरी का इतिहास रखने वाले लोगों के लिए पर्याप्त तरल लेना बेहद जरूरी है। हालांकि, कितनी मात्रा आपके लिए सही है, यह किडनी की स्थिति और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है।
खाने में जरूरत से ज्यादा नमक
खाने में ज्यादा नमक लेना भी किडनी स्टोन के जोखिम को बढ़ा सकता है। ज्यादा सोडियम लेने से पेशाब में कैल्शियम की मात्रा बढ़ सकती है, जिससे कुछ प्रकार की पथरी बनने की संभावना बढ़ती है। पैकेज्ड फूड, इंस्टेंट नूडल्स, चिप्स, अचार और ज्यादा नमक वाले स्नैक्स में सोडियम काफी हो सकता है।
बहुत ज्यादा पशु प्रोटीन
जरूरत से ज्यादा मांस, मछली, अंडे और अन्य पशु-आधारित प्रोटीन का सेवन भी कुछ लोगों में स्टोन के खतरे को प्रभावित कर सकता है। खासकर यूरिक एसिड स्टोन वाले लोगों को डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह के अनुसार डाइट में बदलाव करना पड़ सकता है।
ऑक्सालेट वाली चीजों का ज्यादा सेवन
कुछ लोगों में कैल्शियम ऑक्सालेट स्टोन बनते हैं। ऐसे मामलों में पालक, मूंगफली, नट्स और कुछ अन्य ऑक्सालेट युक्त खाद्य पदार्थों की मात्रा पर ध्यान देने की सलाह दी जा सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति इन चीजों को पूरी तरह बंद कर दे। डाइट में बदलाव स्टोन के प्रकार के आधार पर होना चाहिए।
कैल्शियम पूरी तरह छोड़ देना
कैल्शियम वाली चीजों को पूरी तरह छोड़ देना भी सही रणनीति नहीं है। पर्याप्त मात्रा में डाइटरी कैल्शियम कुछ मामलों में ऑक्सालेट के अवशोषण को कम करने में मदद कर सकता है। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के दूध या अन्य कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थ बंद करना ठीक नहीं है।
वजन और लाइफस्टाइल पर भी दें ध्यान
अधिक वजन किडनी स्टोन के जोखिम से जुड़ा पाया गया है। संतुलित डाइट, नियमित शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त तरल का सेवन समग्र रूप से मददगार हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति को बार-बार पथरी हो रही है तो सिर्फ पानी बढ़ाने के बजाय स्टोन का प्रकार और संभावित कारण जानना जरूरी है।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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लेखक: (कीर्ति)
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Back Neck Pain: कमर-गर्दन दर्द में कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये 5 गलतियां? बढ़ सकती है परेशानी
Back Neck Pain: कमर या गर्दन में दर्द हो तो सबसे पहले राहत पाने का मन करता है, लेकिन हर बार स्ट्रेचिंग करना सही तरीका नहीं होता। कई बार हमारी रोज की छोटी-छोटी आदतें ही दर्द को कम करने के बजाय और बढ़ा देती हैं।
लंबे समय तक कुर्सी पर बैठना, घंटों स्क्रीन देखना या गलत तरीके से बैठने जैसी आदतों पर ध्यान देना जरूरी है। अगर आपको भी अक्सर कमर या गर्दन में दर्द रहता है, तो जानिए वो 5 गलतियां जो अनजाने में आपकी परेशानी बढ़ा सकती हैं।
1. दर्द होते ही जोर लगाकर स्ट्रेच करना
गर्दन या कमर में दर्द होने पर शरीर को जबरदस्ती खींचना या ज्यादा स्ट्रेच करना हमेशा सही नहीं होता। अगर किसी मूवमेंट से दर्द बढ़ रहा है, तो उसे जारी रखने के बजाय रुकना बेहतर है। हल्की और आरामदायक मूवमेंट ही करें।
2. घंटों एक ही जगह बैठे रहना
लंबे समय तक लगातार बैठने से मांसपेशियों पर दबाव बढ़ सकता है। खासकर लैपटॉप या डेस्क पर काम करते समय गर्दन आगे झुकाने और पीठ को गोल करके बैठने से परेशानी बढ़ सकती है। बीच-बीच में उठकर थोड़ा चलना और पॉश्चर बदलना मददगार हो सकता है।
3. मोबाइल या लैपटॉप को नीचे रखकर देखना
फोन को लगातार नीचे की ओर देखकर चलाने या इस्तेमाल करने से गर्दन पर खिंचाव बढ़ सकता है। इसी तरह लैपटॉप की स्क्रीन बहुत नीचे होने पर भी व्यक्ति आगे झुककर बैठ सकता है। कोशिश करें कि स्क्रीन आंखों के करीब सही ऊंचाई पर हो और गर्दन को लंबे समय तक झुकाकर न रखें।
4. दर्द को नजरअंदाज करते रहना
हल्का दर्द कई बार आराम और रोजमर्रा की आदतों में सुधार से ठीक हो सकता है, लेकिन अगर दर्द लगातार बना हुआ है, बार-बार लौटता है या रोज के काम प्रभावित करने लगे हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। चोट के बाद शुरू हुआ दर्द, हाथ-पैर में सुन्नपन या कमजोरी जैसे लक्षण हों तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
5. हर दर्द का इलाज खुद करने की कोशिश
कमर और गर्दन के दर्द की वजह हर व्यक्ति में अलग हो सकती है। इसलिए इंटरनेट देखकर कोई भी एक्सरसाइज, स्ट्रेच या सपोर्ट बेल्ट लंबे समय तक खुद से इस्तेमाल करना सही तरीका नहीं है। अगर दर्द समझ नहीं आ रहा या लगातार बढ़ रहा है, तो डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सही सलाह लें।
कमर और गर्दन को आराम देने के आसान तरीके
- लंबे समय तक एक ही पॉजिशन में न बैठें।
- काम के दौरान छोटे-छोटे ब्रेक लें।
- लैपटॉप की स्क्रीन आंखों के करीब सही ऊंचाई पर रखें।
- फोन इस्तेमाल करते समय गर्दन को ज्यादा नीचे न झुकाएं।
- दर्द बढ़ाने वाली एक्सरसाइज या स्ट्रेच तुरंत रोक दें।
- रोजमर्रा में हल्की शारीरिक गतिविधि बनाए रखें।
(Disclaimer): यह खबर सामान्य जानकारी के लिए है। अगर दर्द के साथ हाथ या पैर में सुन्नपन, झनझनाहट, कमजोरी हो, चोट के बाद तेज दर्द शुरू हुआ हो या दर्द लगातार बढ़ रहा हो, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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