EV Comparison: एथर 450 X और ओला एस1 प्रो में कौन बेस्ट; जानें बैटरी, रेंज, फीचर्स और कीमत?
EV Comparison: भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक स्कूटरों की मांग लगातार बढ़ रही है। खासकर प्रीमियम इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने वाले ग्राहकों के बीच एथर 450एक्स और ओला एस1 प्रो काफी लोकप्रिय विकल्प हैं। दोनों स्कूटर स्पोर्टी डिजाइन, बेहतर प्रदर्शन और कई आधुनिक सुविधाओं के साथ आते हैं। हालांकि, बैटरी क्षमता, रेंज, फीचर्स और कीमत के मामले में दोनों में अंतर है।
बैटरी और रेंज
रेंज की बात करें तो ओला एस1 प्रो यहां बढ़त बनाता है। इसमें 3 किलोवॉट, 4 किलोवॉट और 5.2 किलोवॉट बैटरी विकल्प मिलते हैं। 3 किलोवॉट मॉडल 176 किलोमीटर, 4 किलोवॉट मॉडल 242 किलोमीटर और एस1 प्रो प्लस 5.2 किलोवॉट मॉडल 320 किलोमीटर तक की दावा की गई आईडीसी रेंज देता है।
दूसरी ओर, एथर 450एक्स में 2.9 किलोवॉट और 3.7 किलोवॉट बैटरी विकल्प हैं। इनकी दावा की गई आईडीसी रेंज क्रमशः 126 किलोमीटर और 161 किलोमीटर है। इसलिए ज्यादा रेंज चाहने वाले ग्राहकों के लिए ओला एस1 प्रो बेहतर विकल्प नजर आता है।
फीचर्स में कौन आगे?
ओला एस1 प्रो में ईको, नॉर्मल, स्पोर्ट और हाइपर जैसे राइडिंग मोड दिए गए हैं। इसमें 7 इंच की डिजिटल टचस्क्रीन, 34 लीटर का अंडर-सीट स्टोरेज, ब्लूटूथ कनेक्टिविटी, नेविगेशन सहायता, रिवर्स असिस्ट और बिना चाबी के इग्निशन जैसे फीचर्स मिलते हैं। तीसरी पीढ़ी के मॉडल में एबीएस, ट्रैक्शन कंट्रोल और ब्रेक-बाय-वायर जैसी तकनीक भी दी गई है।
एथर 450एक्स में 7 इंच की टीएफटी टचस्क्रीन के साथ गूगल मैप्स नेविगेशन, ओटीए अपडेट, एंटी-थेफ्ट, टो-ट्रैकिंग और लाइव राइड स्टेटस जैसे फीचर्स मिलते हैं। इसके अलावा स्मार्टईको, ईको, राइड, स्पोर्ट और वार्प मोड भी उपलब्ध हैं।
कीमत
कीमत के मामले में भी ओला एस1 प्रो आगे है। इसकी शुरुआती कीमत करीब 1.28 लाख रुपये है। 4 किलोवॉट मॉडल की कीमत करीब 1.44 लाख रुपये और 5.2 किलोवॉट एस1 प्रो प्लस की कीमत करीब 1.58 लाख रुपये से शुरू होती है।
वहीं, एथर 450एक्स की शुरुआती कीमत करीब 1.49 लाख रुपये है।
कौन सा स्कूटर बेहतर?
अगर आपकी प्राथमिकता ज्यादा रेंज, बड़ी बैटरी और कम शुरुआती कीमत है, तो ओला एस1 प्रो बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं, स्पोर्टी राइडिंग, प्रीमियम अनुभव और एथर के कनेक्टेड फीचर्स पसंद करने वाले ग्राहकों के लिए एथर 450एक्स पर विचार किया जा सकता है।
(मंजू कुमारी)
ओरेकल ने हजारों कर्मचारियों को नौकरी से निकाला:सुबह 4 बजे सिस्टम एक्सेस बंद, 6 बजे मेल आया- आज आपका आखिरी दिन
टेक कंपनी ओरेकल में फिर से छंटनी शुरू हो गई है। कंपनी ने अमेरिका में हजारों कर्मचारियों को निकाल दिया है। इस फैसले के बाद भारत में स्थित ओरेकल डेवलपमेंट सेंटर के कर्मचारियों के बीच भी अनिश्चितता का माहौल है। कंपनी AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश बढ़ा रही है, जिसके लिए पारंपरिक विभागों से बजट कम किया जा रहा है। हालांकि, भारत में कितने कर्मचारियों की नौकरी जाएगी, इस पर ओरेकल ने अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। ईमेल से पहले VPN और स्लैक एक्सेस बंद हो रहा बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारियों को ले-ऑफ की आधिकारिक जानकारी मिलने से पहले ही सिस्टम का एक्सेस बंद कर दिया जाता है। छंटनी की प्रक्रिया के तहत कर्मचारियों का VPN एक्सेस बंद हो जाता है और उनके स्लैक अकाउंट डिसकनेक्ट कर दिए जाते हैं। इसके बाद सुबह करीब 6 बजे तक कर्मचारियों को ईमेल के जरिए नौकरी से निकाले जाने की सूचना मिलती है। कर्मचारी बोले- छंटनी का तरीका काफी सख्त… 21,000 कर्मचारियों को पहले ही निकाला जा चुका है ओरेकल ने इस साल अपने कुल वर्कफोर्स में करीब 13% यानी 21,000 कर्मचारियों को निकाला है। 31 मई 2026 तक कंपनी में कुल 1.41 लाख कर्मचारी काम कर रहे थे। 14 सितंबर को अमेरिका में हुई छंटनी से साफ है कि कंपनी की रीस्ट्रक्चरिंग जारी है। इन विभागों पर पड़ रहा है सबसे ज्यादा असर इस बार कर्मचारियों को उनकी खराब परफॉर्मेंस की वजह से नहीं निकाला जा रहा है, बल्कि कंपनी अपनी प्राथमिकताओं को बदल रही है। इसी वजह से सालों से काम कर रहे और बेहतरीन काम करने वाले कर्मचारियों को भी हटाया जा रहा है। इन विभागों पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है: अगर यह छंटनी भारत में भी शुरू होती है, तो इसका असर केवल कस्टमर केयर या सपोर्ट स्टाफ पर ही नहीं, बल्कि टेक्निकल और इंजीनियरिंग टीमों पर भी पड़ेगा। भारत में इस साल पहले भी हुई थी छंटनी इससे पहले इसी साल मार्च-अप्रैल में ओरेकल इंडिया से बड़े पैमाने पर लोगों को निकाला गया था। खबरों के मुताबिक, तब करीब 12,000 कर्मचारियों की नौकरी गई थी। हालांकि कंपनी ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी। पुराने काम बंद, AI और डेटा सेंटर में नई नौकरियां ओरेकल एक तरफ पुराने विभागों से लोगों को हटा रही है, तो दूसरी तरफ AI और डेटा सेंटर जैसे नए क्षेत्रों में भर्तियां भी कर रही है। कंपनी अब इंफ्रास्ट्रक्चर, नेटवर्क की मजबूती, डेटा सेंटर बनाने और AI जैसी नई तकनीकों पर सबसे ज्यादा ध्यान दे रही है। भारत पर इसका क्या असर हो सकता है? अमेरिका में 14 सितंबर को हुई छंटनी के बाद भारत में काम कर रहे कर्मचारियों की चिंता भी बढ़ गई है। जिस तेजी से कंपनी पुराने सॉफ्टवेयर का काम समेटकर AI की तरफ बढ़ रही है, उससे भारत में भी कर्मचारियों के रोल बदले जा सकते हैं।
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