शरीर में बहती हैं 5 प्राण ऊर्जाएं, जानिए इनके रंग और काम
नई दिल्ली, 13 सितंबर (आईएएनएस)। योग और आयुर्वेद की परंपरा में शरीर को सिर्फ हड्डियों, मांसपेशियों और अंगों का ढांचा नहीं माना गया, बल्कि इसे एक ऐसी सूक्ष्म ऊर्जा प्रणाली के रूप में भी देखा गया है, जिसमें प्राण यानी जीवन ऊर्जा का लगातार प्रवाह होता रहता है। इसी प्राण ऊर्जा को पांच मुख्य भागों में बांटा गया है, जिन्हें पंच प्राण या पंच वायु भी कहा जाता है। माना जाता है कि शरीर की अलग-अलग गतिविधियों को संचालित करने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
प्राण वायु रक्तवर्ण और मणि के समान चमकीला होता है। इसका संबंध मुख्य रूप से छाती और हृदय क्षेत्र से माना जाता है। इसकी गति भीतर की ओर होती है। सांस लेना, ऊर्जा ग्रहण करना और इंद्रियों व मन को सक्रिय बनाए रखना इसके प्रमुख कार्य बताए गए हैं।
अपान वायु इंद्रगोप कीट के समान प्रभायुक्त होती है। अपान वायु की गति नीचे की ओर मानी जाती है। इसका स्थान निचले पेट और श्रोणि क्षेत्र में बताया गया है। शरीर से मल-मूत्र और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालना, प्रजनन जैसी शारीरिक प्रक्रियाओं से इसका संबंध माना जाता है।
समान वायु – गौ-दुग्ध के समान श्वेत होती है। यह शरीर के मध्य भाग, खासकर नाभि और पेट के आसपास सक्रिय मानी जाती है। इसका मुख्य संबंध पाचन और भोजन से मिलने वाले पोषक तत्वों के अवशोषण से है। इसे शरीर में संतुलन बनाए रखने वाली ऊर्जा भी माना जाता है। भोजन को पचाने और उससे ऊर्जा प्राप्त करने की प्रक्रिया को इससे जोड़ा जाता है।
उदान वायु पाण्डुर यानी फीका श्वेताभ होती है। इसकी गति ऊपर की ओर मानी जाती है। इसका संबंध मुख्य रूप से कंठ और सिर के क्षेत्र से बताया गया है। बोलने, अपनी बात व्यक्त करने, उत्साह, विकास और विचारों को ऊंचे स्तर तक ले जाने जैसी गतिविधियों से इसे जोड़ा जाता है। इसलिए इसे ऊपर उठाने वाली ऊर्जा के रूप में समझा जा सकता है।
व्यान वायु अग्नि की ज्वाला के समान होती है। इसको पूरे शरीर में फैली हुई ऊर्जा माना जाता है। यह किसी एक हिस्से तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरे शरीर में इसके संचार की बात कही गई है। रक्त, पोषक तत्वों और तंत्रिका संकेतों के संचार तथा शरीर के विभिन्न हिस्सों के बीच समन्वय से इसे जोड़ा जाता है।
--आईएएनएस
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MP Weather Update: मानसूनी तंत्र कमजोर, भारी बारिश से राहत, अबतक 32.8 इंच बारिश हुई, सामान्य से अब भी 6% कम
आज से मानसूनी तंत्र कमजोर होने लगेगा और बारिश की गतिविधियों में भी कमी देखने को मिलेगी। हालांकि बादलों की आवाजाही के साथ 17 सितंबर तक पश्चिमी हिस्से में बूंदाबांदी का दौर बना रह सकता है। मौसम विभाग ने 19 सितंबर से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की संभावना जताई है।
मंगलवार को पन्ना, दमोह, सागर, सतना / चित्रकूट, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला, डिंडोरी, नरसिंहपुर, जबलपुर , कटनी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर जिलों में बादल छाए रह सकते हैं और कहीं-कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है।
क्या कहता है एमपी मौसम विभाग का पूर्वानुमान
मौसम विज्ञान केंद्र, भोपाल के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो रही हैं और 19 सितंबर 2026 के आसपास पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से मानसून की वापसी शुरू होने की संभावना है।वर्तमान में दक्षिण-पूर्वी राजस्थान और उससे लगे गुजरात क्षेत्र तथा दक्षिण-पश्चिम एमपी के ऊपर बना निम्न दबाव का क्षेत्र अब दक्षिण-पूर्वी राजस्थान व उससे लगे उत्तरी गुजरात के ऊपर स्थित है। इसके अलावा दो चक्रवातीय परिसंचरण और दो मानसून ट्रफ सक्रिय है। पश्चिमी विक्षोभ, मध्य क्षोभमंडलीय पछुआ हवाओं में एक ट्रफ के रूप में समुद्र तल से औसत 5.8 किमी की ऊँचाई पर भी स्थित है। मानसूनी तंत्र और इन मौसम प्रणालियों के कमजोर होने से अगले चार-पांच दिन प्रदेश में कहीं भी अति भारी या भारी बारिश की संभावना नहीं है। हालांकि पश्चिमी हिस्से में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।
मध्य प्रदेश में अब भी कोटे से 6 % कम बारिश
- 1 जून से 14 सितंबर 2026 तक मध्य प्रदेश में सामान्य से 6% बारिश कम हुई है। प्रदेश में अबतक 834.4 मिमी यानी 32.8 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 886.6 मिमी यानी 34.9 इंच होनी चाहिए थी।
- पूर्वी मध्य प्रदेश की बात करें तो यहां 1% और पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत से 11% कम पानी गिरा है। अबतक प्रदेश के 37 जिलों में बारिश का आंकड़ा कमजोर बना हुआ है और 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी गिर चुका है। इस सीजन में सबसे अधिक मऊगंज में 53 इंच और सबसे कम आलीराजपुर में सिर्फ 13.6 इंच बारिश हुई है
- अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। अन्य जिलों में औसत से भी कम पानी गिरा है।
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