मुस्लिम संग पकड़ी युवती की शराब पीते फोटो सामने आई:सास बोली- खुद को अमृतधारी बताया था; अमृतसर से इंग्लैंड गए बेटे को नंगा किया
अमृतसर से इंग्लैंड जाकर मुस्लिम व्यक्ति के साथ शादी करने वाली कोमलप्रीत को लेकर ससुराल ने कई खुलासे किए। सास ने बताया कि कोमलप्रीत के साथ बेटे नवप्रीत सिंह की शादी 2023 में की थी। कोमलप्रीत के परिवार ने कहा था कि बेटी अमृतधारी है और कीर्तन करती है। अब उन्हें पता चला वो विदेश में हुक्का भी पीती है और शराब भी। उन्होंने कहा कि बेटे को शादी के बाद उसने अंडा तक खाने से हटा दिया। बेटे ने शादी से पहले केश नहीं रखे थे। इसने उसके केश भी रखवा दिए लेकिन बाद में धोखा कर दिया। सास ने बताया कि बेटा उसके पास इंग्लैंड गया तो उसे उसका व्यवहार ठीक नहीं लगा। बेटे ने कोमलप्रीत का फोन देखना चाहा तो उसने उसकी कॉलर पकड़ ली। इसके बाद बेटे को अपने साथ नहीं रखा। इसने बेटे को अगवा करने की भी कोशिश की। उसने नंगा कर घर भेजा। उन्होंने बताया कि उन्हें भी कोमलप्रीत ने फोन पर अम्मीजान कहना शुरू कर दिया था। 2 बार तो कोमलप्रीत को वीजा रिफ्यूज होने के बाद 40 लाख रुपए लगाकर इंग्लैंड भेजा था। कोमलप्रीत ने ग्रूमिंग की भी स्क्रिप्ट घड़ी है। बहू का परिवार चाहता है कि जत्थेबंदियां बेटी को मुस्लिम के पास से ले आएंगी, लेकिन कोमलप्रीत ने सोच समझकर शादी की है। ससुराल वालों ने कोमलप्रीत के ड्रिंक करते के फोटो शेयर किए हैं। सास-ससुर ने सुनाई बहू की पूरी कहानी… कार में घुमाया, फिर गलत व्यवहार करने लगी वहीं, नवदीप के भाई ने बताया कि इंग्लैंड जाने के बाद छोटे भाई ने उसे फोन पर बताया कि कोमलप्रीत का व्यवहार ठीक नहीं लग रहा है। उसने एक दिन उसे कार में घुमाया और उसके बाद अजीब व्यवहार कर रही है। उसके चाय के कप रखने, बाथरूम में नहाने तक पर गलतियां निकाल रही है। कोमलप्रीत की हरकतों के बारे में जब नवदीप ने अपने ससुर घुग्गी को बताया तो उसने उसे गालियां निकालीं, जिससे कोमलप्रीत पर शक बढ़ता गया। परिवार की प्रशासन से पैसा वापस दिलाने की मांग परिवार ने प्रशासन से विदेश भेजने में खर्च हुए 40 लाख रुपए वापस दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि उन्होंने बेटे की शादी और विदेश भेजने के लिए अपनी इनकम से ज्यादा खर्च किया। उन्हें न तो युवती की ओर से कोई आर्थिक मदद मिली और न ही अब तक उनका खर्च वापस हुआ। परिवार ने पुलिस और प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उनकी शिकायत पर कार्रवाई करने की मांग की है। कोमलप्रीत कैसे बनी आइरा, 4 पॉइंट… ----------- ये खबर भी पढ़ें… सिख से मुस्लिम बनी पंजाबी युवती पहले से शादीशुदा निकली:पति ने इंग्लैंड में 7 दिन झाड़ियों में छिपकर रखी नजर, युवक संग घूमते पकड़ा अमृतसर की रहने वाली कोमलप्रीत कौर के धर्म परिवर्तन के मामले में नया खुलासा हुआ है। वह पहले से शादीशुदा थी। अब ससुराल वालों ने अपनी बहू पर बेटे को धोखा देने के आरोप लगाए हैं। परिवार के मुताबिक, उन्होंने करीब 2 साल पहले कोमलप्रीत को पढ़ाई के लिए इंग्लैंड भेजने में करीब 35 लाख रुपए खर्च किए थे। (पढ़ें पूरी खबर)
इजराइल ने लेबनान में हिजबुल्लाह की 2km लंबी सुरंग उड़ाई:विस्फोट के बाद 4.1 तीव्रता का भूकंप आया; नेतन्याहू बोले- मिशन पूरा, हैप्पी न्यू ईयर
इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह की 2 किलोमीटर से ज्यादा लंबी सुरंग को ब्लास्ट कर तबाह कर दिया। ब्लास्ट के लिए करीब 1100 टन विस्फोटक इस्तेमाल किया गया था। यह विस्फोट इतना तेज था कि इलाके में 4.1 तीव्रता वाले भूकंप जैसे झटके महसूस किए गए। लेबनान की सरकारी न्यूज एजेंसी के मुताबिक, धमाके से आसपास के इलाकों में जमीन हिलने लगी। इस हमले के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा, ‘मिशन पूरा हुआ। हैप्पी न्यू ईयर।’ इजराइली सेना के मुताबिक, सुरंग में ईरान में बने कई रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन रखे थे। यहां मशीनगन, एंटी-टैंक मिसाइल और सैकड़ों बारूदी सुरंगें व विस्फोटक भी मिले। सेना ने बताया कि इस परिसर में हिजबुल्लाह की ‘बद्र’ यूनिट का कमांड सेंटर भी था। टनल में घुसे थे IDF सैनिक, तलाशी का फुटेज जारी किया इजराइली सेना (IDF) ने अली अल-ताहेर पहाड़ी के नीचे बने हिजबुल्लाह के टनल नेटवर्क का फुटेज जारी किया है। वीडियो में सैनिक सुरंगों के अंदर तलाशी लेते नजर आ रहे हैं। IDF के मुताबिक, जून में सीजफायर के बाद से यहां करीब 50 हिजबुल्लाह लड़ाके छिपे हुए थे। इस साइट पर कब्जे की कार्रवाई के दौरान कई लड़ाके मारे गए। सेना के मुताबिक, इनमें कुछ ऐसे थे जो सुरंगों से भागने की कोशिश कर रहे थे। तलाशी के दौरान सैनिकों को करीब 12 शव भी मिले। हालांकि, IDF का कहना है कि कुछ हिजबुल्लाह लड़ाके इलाके से भागने में कामयाब हो सकते हैं। इस टनल नेटवर्क को बनाने में 20 साल लगे थे नेतन्याहू के मुताबिक इस टनल नेटवर्क को बनाने में लगभग 20 साल लगे थे। इसके लिए ईरान ने फंडिग की थी। इजराइली रक्षामंत्री इजराइल काट्ज ने इसे आतंकी नेटवर्क बताया। इजराइल का कहना है कि इस इलाके जमीन के ऊपर और नीचे दोनों जगह उसका कंट्रोल हो गया है। पिछले हफ्ते इजराइल ने दावा किया था कि उसने इलाके पर कब्जा कर लिया है। सेना के एक अधिकारी के मुताबिक हिजबुल्लाह के कई लड़ाकों को हवाई हमलों में मार गिराया गया था, जबकि कुछ भाग निकले थे। हिजबुल्लाह की ‘बद्र’ यूनिट क्या है? हिजबुल्लाह की ‘बद्र’ यूनिट दक्षिणी लेबनान में संगठन की सबसे अहम सैन्य इकाइयों में से एक है। यह लिटानी नदी के उत्तर के इलाके में सक्रिय है। यूनिट का नाम 624 ईस्वी की बद्र की लड़ाई से लिया गया है। यह पैगंबर मुहम्मद के नेतृत्व वाली सेना और मक्का के कुरैश के बीच हुई थी। इजराइल ने लेबनान में फिर से हमले शुरू किए इजराइल ने पिछले कुछ दिनों में दक्षिणी लेबनान में फिर से हमले तेज किए हैं। जून में ईरान और अमेरिका की बातचीत के बाद इजराइल-लेबनान में समझौता हुआ था। इस समझौते के बाद कुछ समय के लिए हमले रुक गए थे। AFP के मुताबिक, बातचीत के दौरान अमेरिका ने प्रस्ताव दिया था कि अली अल-ताहेर पहाड़ी का कंट्रोल लेबनान की सेना को दिया जाए। हालांकि हिजबुल्लाह ने इसे नकार दिया था। लेबनान के अधिकारियों के मुताबिक, मार्च से अब तक इजराइली हमलों में 4300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इजराइली सेना दक्षिणी लेबनान के एक हिस्से में बनाए गए सिक्योरिटी जोन में अभी भी मौजूद है। 2006 के बाद हिजबुल्लाह ने क्यों बनाया अंडरग्राउंड नेटवर्क? सवाल: 2006 के युद्ध के बाद हिजबुल्लाह ने अपनी रणनीति क्यों बदली? जवाब: 2006 के इजराइल-हिजबुल्लाह युद्ध में इजराइली हवाई हमलों ने संगठन के कई ठिकानों को निशाना बनाया। इससे हिजबुल्लाह को समझ आया कि खुले में मौजूद कमांड सेंटर, हथियार डिपो और सैन्य ठिकाने आसानी से निशाने पर आ सकते हैं। इसके बाद संगठन ने सैन्य ढांचे को ज्यादा से ज्यादा जमीन के नीचे ले जाने पर जोर दिया। सवाल: अंडरग्राउंड नेटवर्क से हिजबुल्लाह को क्या फायदा मिला? जवाब: सुरंग और बंकर ऊपर से होने वाली निगरानी और हवाई हमलों से सैन्य ढांचे को छिपाने में मदद करते हैं। इनमें हथियार, गोला-बारूद और लड़ाकों को रखा जा सकता है, जबकि कमांडर वहीं से सैन्य गतिविधियां चला सकते हैं। सवाल: क्या ये सुरंगें सिर्फ इजराइल पर हमला करने के लिए थीं? जवाब: नहीं। अंडरग्राउंड नेटवर्क का इस्तेमाल कई उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है—हथियार छिपाने, लड़ाकों की आवाजाही, कमांड सिस्टम चलाने और हमले के बाद सैन्य क्षमता बचाए रखने के लिए। यानी इसका मकसद सिर्फ हमला नहीं, बल्कि लंबे समय तक लड़ने की क्षमता बनाए रखना भी है। सवाल: सुरंगें इजराइली सेना के लिए इतनी बड़ी चुनौती क्यों हैं? जवाब: जमीन के ऊपर मौजूद सैन्य ठिकानों को ड्रोन और हवाई तस्वीरों से पहचानना अपेक्षाकृत आसान है। लेकिन सुरंगें जमीन के नीचे होती हैं और उनका पूरा नेटवर्क दिखाई नहीं देता। एक प्रवेश द्वार से कई अलग-अलग रास्ते और कमरे जुड़े हो सकते हैं। इसलिए किसी सुरंग को ढूंढना और उसका पूरा नेटवर्क नष्ट करना मुश्किल होता है। सवाल: इजराइल इन्हें खोजता कैसे है? जवाब: इसके लिए इजराइल कई तरह की खुफिया जानकारी का इस्तेमाल करता है। इसमें मानव स्रोत, सिग्नल इंटेलिजेंस, ड्रोन और दूसरी निगरानी तकनीकें शामिल हैं। किसी संभावित जगह की पहचान होने के बाद जमीन पर मौजूद सुरागों और तकनीकी जानकारी से सुरंग के प्रवेश और उसके नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जाती है। ------------------ ये खबर भी पढ़ें… रूसी राष्ट्रपति पुतिन BRICS समिट के लिए भारत पहुंचे:मोदी से मुलाकात करेंगे; Su-57 फाइटर जेट और अपडेटेड ब्रह्मोस की डील हो सकती है रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन BRICS समिट में शामिल होने के लिए भारत पहुंच गए हैं। पुतिन का प्लेन रात करीब 3 बजे नई दिल्ली पहुंचा। एयरपोर्ट पर विदेश राज्य मंत्री केवी सिंह ने उनका स्वागत किया। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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