कप्तान ईशान किशन के नेतृत्व में टीम ने ट्रॉफी अपने नाम की, लेकिन 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने भी अपने खेल और मैदान पर लिए गए फैसलों से खूब चर्चा बटोरी। फाइनल के दौरान समीक्षा लेने को लेकर ईशान और वैभव के बीच हुई मजेदार बातचीत ने भी लोगों का ध्यान खींचा।
पूर्वी जोन ने ईशान किशन की कप्तानी में दलीप ट्रॉफी 2026-27 का खिताब अपने नाम कर लिया। फाइनल में ईशान किशन को शानदार प्रदर्शन के लिए सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया। उन्होंने दोनों पारियों में मिलाकर 350 से ज्यादा रन बनाए। हालांकि, इस पूरे टूर्नामेंट में 15 साल के वैभव सूर्यवंशी भी लगातार चर्चा में रहे। उनकी बल्लेबाजी के साथ मैदान पर दिखाई दी नेतृत्व क्षमता ने भी लोगों का ध्यान खींचा।
वैभव को पूर्वी क्षेत्र की टीम में उपकप्तान की जिम्मेदारी दी गई थी। सेमीफाइनल के दौरान जब ईशान किशन चोट के कारण कुछ समय के लिए मैदान से बाहर गए, तब वैभव ने टीम की कमान संभाली। इसी दौरान उन्हें मैदान पर समीक्षा के फैसले लेने का मौका मिला और उन्होंने कुछ अहम मौकों पर सही निर्णय लेकर अपनी समझदारी भी दिखायी।
गौरतलब है कि फाइनल में भी वैभव की भूमिका केवल एक बल्लेबाज तक सीमित नहीं रही। जब भी विरोधी टीम के खिलाफ समीक्षा लेने की स्थिति बनी, वह ईशान किशन से चर्चा करते दिखाई दिए। एक वीडियो सामने आने के बाद यह मामला खास तौर पर चर्चा में आया, जिसमें वैभव ईशान को समीक्षा लेने के लिए मनाते नजर आए और बाद में फैसला पूर्वी जोन के पक्ष में गया।
हालांकि, भारतीय क्रिकेट बोर्ड की ओर से साझा किए गए एक वीडियो में ईशान किशन ने इस बात को मजाकिया अंदाज में अलग तरीके से पेश किया। उन्होंने कहा कि समीक्षा लेने का श्रेय वैभव हर जगह ले रहे हैं, जबकि कई मौकों पर वह खुद समीक्षा लेने वाले थे। ईशान ने मजाक में कहा कि वैभव उनके पास आकर पूरे आत्मविश्वास से कह देते थे कि वह समीक्षा के लिए उनके पास आ रहे हैं और फिर लोगों को लगता था कि फैसला उन्हीं का था।
ईशान ने इसके बावजूद वैभव की तारीफ करते हुए कहा कि युवा खिलाड़ी ने अपनी जिम्मेदारी बहुत अच्छी तरह निभाई है। इस पर वैभव भी पीछे नहीं हटे। उन्होंने कप्तान को याद दिलाया कि जब वह चोट के कारण मैदान से बाहर जा रहे थे, तब समीक्षा के फैसले कौन ले रहा था। वैभव का यह जवाब सुनकर बातचीत और भी मजेदार हो गई।
इसके बाद ईशान ने वैभव के कप्तानी कौशल की तारीफ करते हुए उन्हें भविष्य का कप्तान तक बता दिया। उन्होंने कहा कि आगे चलकर वैभव कप्तानी की भूमिका निभा सकते हैं और यह देखना दिलचस्प होगा कि उनका सफर किस दिशा में जाता है।
ईशान ने यह भी कहा कि वैभव सिर्फ एक अच्छे खिलाड़ी नहीं हैं, बल्कि टीम के बाकी सदस्यों का भी ध्यान रखते हैं। उन्होंने बताया कि युवा खिलाड़ी वरिष्ठ और कनिष्ठ सभी साथियों के साथ अच्छा तालमेल बनाकर रखते हैं। मजाक में ईशान ने यह भी कहा कि टीम में सबसे छोटा खिलाड़ी तो वैभव ही है।
मौजूद जानकारी के अनुसार वैभव अभी सिर्फ 15 साल के हैं, लेकिन इतनी कम उम्र में घरेलू क्रिकेट के बड़े मंच पर उनकी जिम्मेदारियां बढ़ रही हैं। दलीप ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट में उपकप्तान की भूमिका और महत्वपूर्ण फैसलों में उनकी भागीदारी बताती है कि टीम प्रबंधन उनमें केवल बल्लेबाजी की प्रतिभा ही नहीं, बल्कि नेतृत्व की क्षमता भी देख रहा है।
पूर्वी जोन के लिए खिताब जीतना निश्चित रूप से बड़ी उपलब्धि है, लेकिन वैभव सूर्यवंशी के लिए यह अभियान अनुभव हासिल करने का भी अहम मौका रहा है। ईशान किशन का उन्हें भविष्य का कप्तान बताना इस बात का संकेत है कि इस युवा खिलाड़ी से आने वाले वर्षों में बड़ी उम्मीदें की जा रही हैं।
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हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अजा एकादशी का व्रत किया जाता है। इस बार आज यानी की 07 सितंबर 2026 को यह व्रत किया जा रहा है। अन्य एकादशी तिथियों की तरह अजा एकादशी का व्रत जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत करने और श्रद्धा व भक्तिभाव के साथ भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से समस्त पापों का नाश होता है। साथ ही जीवन से दुख-दरिद्रता दूर होती है। अजा एकादशी का व्रत करने से जातक को अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य की प्राप्ति होती है। तो आइए जानते हैं अजा एकादशी की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व आदि के बारे में...
तिथि व शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के मुताबिक 06 सितंबर 2026 की शात 07:29 मिनट से अजा एकादशी तिथि की शुरूआत हो रही हैं। वहीं आज यानी की 07 सितंबर 2026 की शाम 05:03 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। ऐसे में उदयातिथि के हिसाब से 07 सितंबर 2026 को अजा एकादशी का व्रत किया जा रहा है। वहीं द्वादशी तिथि के भीतर एकादशी व्रत का पारण सही समय पर करना शुभ माना जाता है। इसलिए 08 सितंबर को सुबह 06:02 बजे से सुबह 08:33 बजे तक पारण कर सकते हैं।
पूजन विधि
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। अगर संभव हो तो इस दिन पीले कपड़े पहनें। फिर भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें और सूर्य देव को अर्घ्य दें। अब पूजा स्थल की सफाई करें और एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर उस पर श्रीहरि विष्णु की मूर्ति स्थापित करें। अब भगवा विष्णु के सामने घी का दीपक जलाएं और धूप जलाएं। फिर श्रीहरि को पीले फूल, रोली, मौली, अक्षत और फल आदि अर्पित करें।
भगवान विष्णु को फल और मिठाई आदि का भोग अर्पित करें। वहीं भोग में तुलसी दल को शामिल करना न भूलें। इसके बाद अजा एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। वहीं पूजा के दौरान भगवान विष्णु के मंत्र 'ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नम:' मंत्र का 108 बार जाप करें। अंत में पूजा में हुई भूलचूक के लिए क्षमायाचना करें।
धार्मिक मान्यताएं
धार्मिक मान्यता के मुताबिक अजा एकादशी का व्रत करने से जातक को पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन जो भी भक्त भगवान विष्णु की सच्चे मन से पूजा-अर्चना करता है और व्रत करता है, उसको श्रीहरि की विशेष कृपा प्राप्त होती है। भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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