समस्या का हो समाधान, सिर्फ शिकायत बंद करने से नहीं चलेगा काम! CM हेल्पलाइन में लापरवाही पर पुष्कर सिंह धामी की अधिकारियों को दो टूक
देहरादून: सीएम हेल्पलाइन 1905 पर शिकायत दर्ज की, अफसरों ने उसे बंद कर दिया, लेकिन जिस परेशानी के लिए शिकायत की गई थी वह जस की तस रही तो इसे समाधान नहीं माना जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को सचिवालय में सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को साफ कहा कि लोगों की शिकायतें सिर्फ पोर्टल पर बंद करने की औपचारिकता न हो। समस्या वास्तव में हल हो और शिकायत करने वाला भी समाधान से संतुष्ट हो।
धामी ने साफ किया कि शिकायतों को बेवजह ‘स्पेशल क्लोज’ या ‘फोर्स क्लोज’ करने से बचें। तय समय में समस्या हल नहीं हुई और लापरवाही सामने आई तो जिम्मेदार अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी। बेहतर काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रोत्साहित भी किया जाएगा।
CM ने खुद फोन लगाकर पूछा- आपकी शिकायत हल हुई या नहीं?
बैठक में मुख्यमंत्री ने केवल अधिकारियों की रिपोर्ट नहीं देखी, बल्कि शिकायत करने वाले कुछ लोगों को सीधे फोन लगाया। उनसे पूछा कि सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करने के बाद उनकी समस्या वास्तव में हल हुई या नहीं। इसी बातचीत में ऐसे मामले भी सामने आए, जहां लोगों को लंबे समय से समाधान का इंतजार था।
संजय कुमार रावत ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनके दिवंगत पिता के इलाज के बिलों का पैसा अब तक नहीं मिला है, जबकि उनकी शिकायत बंद कर दी गई। इस पर धामी ने अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई कर भुगतान कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में लोगों को बेवजह परेशान न किया जाए।
30 दिन से ज्यादा पुरानी शिकायतों पर रहेगा फोकस
मुख्यमंत्री ने 30 दिन से ज्यादा समय से अटकी शिकायतों को प्राथमिकता से हल करने को कहा। बैठक में उन शिकायतों का भी हिसाब रखा गया, जो 180 दिनों से ज्यादा समय से लंबित हैं। विभागों को अब यह भी देखना होगा कि इतनी पुरानी शिकायतें आखिर किस वजह से अटकी हुई हैं।
धामी ने जिलाधिकारियों से कहा कि अपने जिले में यह पता करें कि किस तरह की शिकायतें सबसे ज्यादा आ रही हैं। अगर एक ही समस्या को लेकर लोग बार-बार सीएम हेल्पलाइन पहुंच रहे हैं तो सिर्फ हर शिकायत को अलग-अलग हल करने के बजाय उसकी मूल वजह तलाशकर स्थायी समाधान किया जाए।
तहसीलों में अचानक पहुंचकर व्यवस्था देखेंगे जिलाधिकारी
राजस्व से जुड़ी शिकायतों पर मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को तहसीलों का औचक निरीक्षण करने को कहा। खासतौर पर यह देखा जाएगा कि दाखिल-खारिज के मामले तय समय में निपट रहे हैं या नहीं।
जमीन की धोखाधड़ी से जुड़ी शिकायतों को भी प्राथमिकता से हल करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जमीन और राजस्व से जुड़े कामों के लिए लोगों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
पाइपलाइन और सीवर लाइनों का 15 दिन में ऑडिट
पेयजल की शिकायतों पर भी मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को समयसीमा दी है। प्रदेश में पाइपलाइन और सीवर लाइनों का 15 दिन के भीतर ऑडिट कर रिपोर्ट देनी होगी। पानी की सप्लाई रुकने, लीकेज और इससे जुड़ी दूसरी समस्याओं पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया है।
हरिद्वार की गीता ने मुख्यमंत्री को फोन पर बताया कि उनके घर के पास करीब तीन महीने पहले पानी की टंकी बन चुकी है, लेकिन उससे अब तक पानी की सप्लाई शुरू नहीं हुई। धामी ने मुख्य विकास अधिकारी हरिद्वार को मौके पर जाकर स्थिति देखने और पानी की सप्लाई शुरू कराने को कहा।
लंबे समय से नहीं मिली पेंशन, CM ने कलेक्टर को दिए निर्देश
पौड़ी गढ़वाल की बेबी कोटनाला ने मुख्यमंत्री को बताया कि परित्यक्ता पेंशन से जुड़ी उनकी शिकायत लंबे समय से दर्ज है, लेकिन समस्या हल नहीं हुई। इस पर धामी ने पौड़ी गढ़वाल के जिलाधिकारी को तुरंत मामले को देखने और समाधान कराने के निर्देश दिए।
वहीं, देहरादून की शिल्पी सक्सेना ने बताया कि स्ट्रीट लाइट की शिकायत करने के बाद उनके क्षेत्र में समय पर लाइट लगा दी गई। अल्मोड़ा के आयुष बिष्ट ने भी बताया कि छात्रवृत्ति से जुड़ी उनकी शिकायत हल हो चुकी है। हालांकि छात्रवृत्ति मिलने में देरी क्यों हुई, मुख्यमंत्री ने इसकी जांच करने को कहा।
सीएम धामी ने अधिकारियों से शिकायत करने वाले लोगों से मिलने वाले फीडबैक को गंभीरता से लेने को कहा है। इसके जरिए यह देखा जाएगा कि कागजों और पोर्टल पर ‘समाधान’ दिख रही शिकायत वास्तव में जमीन पर भी हल हुई है या नहीं।
नंबर प्लेट का अनोखा फर्जीवाड़ा, गाड़ी खड़ी थी दूसरी जगह और इंदौर में कट रहे थे चालान, ITMS की मदद से खुलासा
इंदौर: मध्यप्रदेश के इंदौर में यातायात विभाग की आईटीएमएस प्रणाली ने नंबर प्लेट से जुड़े एक अनोखे फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। मामला ऐसा है कि गाड़ी किसी और की थी, लेकिन ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के चालान किसी दूसरे वाहन मालिक के नाम पहुंच रहे थे। लगातार चालान पहुंचने के बाद पुलिस से शिकायत की गई।
बता दें कि जैसे ही यह मामला पुलिस के पास पहुंचा तो जांच में सामने आया कि कोई दूसरा व्यक्ति उनकी गाड़ी का नंबर अपनी कार पर लगाकर शहर में घूम रहा था। इसके बाद पुलिस ने ट्रैफिक पॉइंट्स को अलर्ट किया और देवगुराड़िया से तीन इमली के बीच सघन चेकिंग की और आखिरकार पुलिस ने फर्जी नंबर प्लेट वाली गाड़ी पकड़ ली।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, इंदौर में ITMS यानी इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम की मदद से पुलिस ने नंबर प्लेट के एक ऐसे फर्जीवाड़े का खुलासा किया है जिसमें सोनू परमार की एर्टिगा गाड़ी के नंबर पर बार-बार ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के चालान पहुंच रहे थे। जिससे परेशान होकर सोनू ने पुलिस को बताया कि उनकी गाड़ी तो किसी और स्थान पर है फिर उनके नंबर पर चालान कैसे कट रहे हैं?
अलग-अलग नंबर प्लेट लगाकर चला रहा था गाड़ी
उन्होंने आशंका जताई कि कोई व्यक्ति उनकी गाड़ी का नंबर फर्जी तरीके से इस्तेमाल कर रहा है। इस शिकायत के बाद पुलिस ने सभी ट्रैफिक पॉइंट्स को अलर्ट कर दिया। इसी दौरान देवगुराड़िया से तीन इमली के बीच चेकिंग में इसी नंबर की एक दूसरी गाड़ी पुलिस के हाथ लगी। गाड़ी चला रहे व्यक्ति की पहचान दिनेश कुशवाह के रूप में हुई, जो सोनकच्छ, देवास का रहने वाला और पेशे से ड्राइवर है। जिससें पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। दिनेश अपनी गाड़ी पर अलग-अलग नंबर प्लेटों का इस्तेमाल कर रहा था।
पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार, एक उसकी गाड़ी की असली नंबर प्लेट थी, दूसरी में असली नंबर के साथ छेड़छाड़ की गई थी। पुलिस द्वारा गाड़ी रोकने के बाद वही पूछताछ में प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने बताया कि बैंक की किस्त नहीं चुका पाने के कारण अपनी गाड़ी बचाने और असली नंबर प्लेट छिपाने के लिए उसने यह तरीका अपनाया था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है और पूरे मामले में आगे की पूछताछ जारी है। प्रारंभिक पूछताछ के बाद पुलिस अन्य जानकारी भी जुटाने में लगी है।
इंदौर से शकील अंसारी की रिपोर्ट
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