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Explainer: 1 पारी, 5 स्टंपिंग...., भारतीय विकेटकीपर किरण मोरे का वो 'अमर रिकॉर्ड', जिसे 150 साल के टेस्ट क्रिकेट में कोई नहीं छू सका

Test Records: क्रिकेट के खेल में समय के साथ कई बड़े रिकॉर्ड टूट जाते हैं. लेकिन कुछ रिकॉर्ड ऐसे होते हैं, जिन्हें तोड़ना आज के दौर के महान खिलाड़ियों के लिए भी नामुमकिन लगता है. ऐसा ही एक जादुई रिकॉर्ड भारत के पूर्व विकेटकीपर किरण मोरे के नाम है. साल 1988 में वेस्टइंडीज के खिलाफ चेन्नई टेस्ट की एक ही पारी में किरण मोरे द्वारा की गई 5 स्टंपिंग क्रिकेट इतिहास का एक ऐसा जादुई रिकॉर्ड है, जिसे तोड़ना तो दूर, आज के आधुनिक विकेटकीपरों के लिए इसके आस-पास पहुंचना भी एक अधूरे सपने जैसा लगता है. लगभग 150 सालों के टेस्ट क्रिकेट इतिहास में यह अनोखा कारनामा करने वाले वे दुनिया के इकलौते विकेटकीपर हैं, क्योंकि आज के T20 युग में स्पिनरों का घटता दबदबा, बल्लेबाजों की रक्षात्मक तकनीक और DRS जैसी आधुनिक तकनीकों के कारण बल्लेबाजों का क्रीज से बाहर निकलना बेहद कम हो गया है, जिसने इस ऐतिहासिक कीर्तिमान को हमेशा के लिए अमर और अटूट बना दिया है, तो चलिए इस ऑर्टिकल में जानते हैं कि यह रिकॉर्ड कभी क्यों नहीं टूट पाएगा.

चेन्नई टेस्ट 1988 और वो ऐतिहासिक स्पेल

टेस्ट क्रिकेट का यह ऐतिहासिक कारनामा 11 जनवरी 1988 को भारत और वेस्टइंडीज के बीच चेन्नई में खेले गए चौथे टेस्ट मैच में हुआ था. इस मैच की दूसरी पारी में अपना डेब्यू कर रहे भारतीय लेग स्पिनर नरेंद्र हिरवानी अपनी फिरकी से वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों को संकट में डाल रहे थे. विकेटों के पीछे से उनकी इस जादुई गेंदबाजी को पूरा सहयोग दिया विकेटकीपर किरण मोरे ने, जिन्होंने चीते जैसी फुर्ती दिखाते हुए अविश्वसनीय रूप से 5 बल्लेबाजों को स्टंप आउट कर पवेलियन का रास्ता दिखाया. इनमें से 4 स्टंपिंग हिरवानी की गेंदों पर और 1 डब्ल्यू.वी. रमन की गेंद पर हुई थी. हालांकि हिरवानी ने उस मैच में कुल 16 विकेट लेकर इतिहास रचा था, लेकिन मोरे ने स्टंपिंग का जो वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया, वह आज 38 साल बाद भी अटूट खड़ा है. 

किरण मोरे का एक टेस्ट पारी में 5 स्टंप करना बन गया अटूट रिकॉर्ड

टेस्ट क्रिकेट को शुरू हुए करीब 150 साल हो चुके हैं और इस दौरान हजारों मैच खेले गए, लेकिन भारत के किरण मोरे दुनिया के इकलौते ऐसे विकेटकीपर हैं जिन्होंने एक ही पारी में 5 बल्लेबाजों को स्टंप आउट किया. हालांकि, कुछ पुराने रिकॉर्ड्स में 1951-52 में भारत के ही खोखन सेन द्वारा इंग्लैंड के खिलाफ भी 5 स्टंपिंग का जिक्र मिलता है (जिन्होंने वास्तव में एक मैच में 5 और एक पारी में 4 स्टंपिंग की थीं), लेकिन आधुनिक क्रिकेट रिकॉर्ड बुक्स में मोरे की इस जादुई कामयाबी को सबसे खास और सर्वोच्च स्थान दिया गया है. एक पारी में 5 स्टंपिंग करना तो छोड़िए, टेस्ट क्रिकेट के पूरे इतिहास में किरण मोरे के अलावा सिर्फ दो ही विकेटकीपर ऐसे हुए हैं जो एक पारी में 4 स्टंपिंग के आंकड़े तक पहुंच पाए हैं.

अगर हम पिछले 20 सालों के आधुनिक क्रिकेट इतिहास को देखें, तो दुनिया के तमाम महान विकेटकीपरों में से सिर्फ दो ही ऐसे कीपर हुए हैं जो एक टेस्ट पारी में ज्यादा से ज्यादा 3 स्टंपिंग कर पाए हैं. साफ है कि जैसे-जैसे समय बीत रहा है, क्रिकेट की एक पारी में स्टंपिंग की संख्या लगातार कम होती जा रही है, जिससे किरण मोरे का यह वर्ल्ड रिकॉर्ड और भी ज्यादा बड़ा और अजेय होता जा रहा है.

आधुनिक क्रिकेट में क्यों दुर्लभ हो गईं स्टंपिंग?

आज के दौर में जब महेंद्र सिंह धोनी जैसे बिजली की रफ्तार से स्टंप करने वाले और ऋषभ पंत जैसे चतुर विकेटकीपर आए, तब भी किरण मोरे का यह रिकॉर्ड कोई नहीं छू सका. इसके पीछे क्रिकेट के बदलते नियम और पिचों का मिजाज है:

स्पिनर्स का कम होता दबदबा और तेज गेंदबाजों का राज 

स्टंपिंग के लगभग सभी मौके सिर्फ स्पिन गेंदबाजों की बॉल पर ही बनते हैं. लेकिन आज के आधुनिक टेस्ट क्रिकेट में (खासकर भारत और उपमहाद्वीप के बाहर) तेज गेंदबाजों का बोलबाला काफी बढ़ गया है. दुनिया भर में अब ऐसी पिचें बनाई जा रही हैं जो फास्ट बॉलर्स को ज्यादा मदद करती हैं. जब स्पिनर्स को गेंदबाजी करने के लिए कम ओवर मिलते हैं, या वे सिर्फ रन रोकने के लिए रक्षात्मक बॉलिंग करते हैं, तो बल्लेबाजों के क्रीज से बाहर निकलने के चांस खत्म हो जाते हैं. जब बल्लेबाज क्रीज से बाहर निकलेगा ही नहीं, तो स्टंपिंग के मौके अपने आप बेहद कम हो जाते हैं. 

बल्लेबाजों की बदली तकनीक और फुटवर्क

T20 क्रिकेट आने से अब बल्लेबाजों का फुटवर्क पूरी तरह बदल चुका है. आज के दौर के बल्लेबाज स्पिनर्स के खिलाफ क्रीज से बाहर निकलकर खेलने के बजाय, क्रीज के अंदर गहराई में रहकर खेलना ज्यादा पसंद करते हैं. या फिर वे एक ही जगह सीधे खड़े-खड़े लंबे शॉट लगाते हैं. हवा में गेंद की फ्लाइट को भांपकर आगे बढ़कर खेलने की कला अब आधुनिक टेस्ट क्रिकेट में धीरे-धीरे खत्म हो रही है. जब बल्लेबाज अपनी क्रीज छोड़ेंगे ही नहीं, तो विकेटकीपर के लिए स्टंपिंग का मौका ही नहीं बनेगा. 

DRS और थर्ड अंपायर का खौफ

आजकल हर एक मैच में अत्याधुनिक कैमरे और डिसिजन रिव्यू सिस्टम (DRS) मौजूद हैं. बल्लेबाजों को अच्छी तरह पता है कि अगर उनका पैर क्रीज की लाइन से एक मिलीमीटर भी बाहर या हवा में रहा, तो वे तुरंत पकड़े जाएंगे. टीवी अंपायर की इस तकनीकी चौकसी और कड़ी नजर के कारण बल्लेबाज स्पिनर्स के खिलाफ बिना वजह क्रीज से बाहर निकलने का जोखिम ही नहीं उठाते. 

मोरे के रिकॉर्ड को तोड़ने की संभावना सिर्फ मात्र 0.05%?

अगर कोई क्रिकेट एक्सपर्ट आज यह कहे कि किरण मोरे के 5 स्टंपिंग के रिकॉर्ड को तोड़ने की उम्मीद सिर्फ 0.05% है, तो यह बात बिल्कुल सच होगी. आज के दौर में किसी टेस्ट पारी में 4 स्टंपिंग करना ही किसी विकेटकीपर के लिए आसमान छूने जैसा है. ऐसे में 5 स्टंपिंग की बराबरी करना या 6 स्टंपिंग करके नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना लगभग नामुमकिन लगता है. आजकल टेस्ट मैचों में पूरी टीम अक्सर 200 से 300 रनों के अंदर सिमट जाती है, जहां ज्यादातर विकेट कैच, LBW या बोल्ड के जरिए गिरते हैं. विकेटकीपर का हर बार बिजली की रफ्तार से सटीक स्टंप करना, किस्मत और हुनर के एक ऐसे दुर्लभ संयोग की मांग करता है जो सदियों में सिर्फ एक बार होता है.

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